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दक्षिण कोरिया में फ्लू का टीका लगने से 5 की मौत, वैक्सीनेशन प्रोग्राम सस्पेंड

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सियोल। महामारी के इस दौर में वैक्सीन का बेसब्री से इंतजार है। आखिरी हथियार के तौर पर सबकी उम्मीदें वैक्सीन पर ही टिकी हैं। इसी बीच कई बार वैक्सीन के असर आदि को लेकर भी खबरें आती रहती हैं। जिससे असमंजस की स्थिति बन जाती है। साउथ कोरिया से आई ऐसी ही एक खबर ने एक बार फिर डरा दिया है। दरअसल यहां एक फ्लू की वैक्सीन लगने के बाद पांच लोगों की मौत की बात सामने आई है।

वैक्सीन को लेकर उठे सवाल
जानकारी के मुताबिक, साउथ कोरिया में फ्लू की वैक्सीन लगाने के बाद पांच लोगों की मौत हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि ये मौतें पिछले कुछ हफ्ते में हुई हैं। इसके बाद वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। दक्षिण कोरिया के अधिकारियों ने कहा कि ये मौतें पिछले एक हफ्ते के अंदर हुई हैं। ऐसे में वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ रही है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि इस देश में मौसमी वैक्सीनेशन प्रोग्राम को कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाने के लिए भी विस्तार किया गया था।

सरकार ने स्थगित किया वैक्सीन प्रोग्राम
अधिकारियों ने कहा कि उनके पास यह मानने के लिए कोई सबूत नहीं है कि ये मौतें वैक्सीन लगने के कारण हुई हैं। फिर भी मृत लोगों का पोस्टमार्टम और अन्य जरूरी जांच की जा रही है। जिससे उनकी मौत के कारणों का खुलासा हो सके। वैक्सीन लगाने के बाद पांच लोगों की मौत हो गई है। जिसके बाद आनन-फानन में सरकार ने वैक्सीन प्रोग्राम को ही स्थगित कर दिया है।

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स्वास्थ्य मंत्री ने कहा-पर्याप्त तर्क नहीं
अधिकारियों का यह भी कहना है कि वैक्सीन की वजह से ही मौतें हुई हैं। ये मानने के लिए पर्याप्त तर्क नहीं है। लेकिन मामलों की अभी जांच जारी है। फिलहाल वैक्सीनेशन प्रोग्राम को सस्पेंड कर दिया गया है।

साउथ कोरिया के स्वास्थ्य मंत्री किम गैंग लिप ने बताया है कि मृतकों में 17 साल का एक युवा और 70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग शामिल हैं। साउथ कोरिया की मीडिया में वैक्सीन से मौत का मामला सुर्खियां बना हुआ है। शुक्रवार को 17 साल के लड़के की मौत हो गई थी। उसे दो दिन पहले फ्लू की वैक्सीन दी गई थी।

350 लोगों पर बुरा असर
कोरोना की वजह से कई देशों में फ्लू को लेकर चलाया जाने वाला वैक्सीनेशन प्रोग्राम प्रभावित हुआ है। ब्रिटेन के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना के अलावा फ्लू भी देश के लिए बड़ा खतरा है। वहीं, साउथ कोरिया के अधिकारियों ने कहा था कि बीते साल के मुकाबले, इस साल 20 फीसदी अधिक फ्लू वैक्सीन की मांग की गई है ताकि ज्यादा लोगों को टीके दिए जा सके। साउथ कोरिया का कहना है कि अक्टूबर में फ्लू वैक्सीनेशन प्रोग्राम शुरू करने के बाद से अब तक 83 लाख लोगों को वैक्सीन दी जा चुकी है और इनमें से करीब 350 लोगों में बुरा रिएक्शन देखने को मिला।http://satyodaya.com

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पाकिस्तान: कराची में एक बिल्डिंग में बड़ा धमाका, 3 की मौत 15 घायल

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कराची। पाकिस्तान के कराची शहर की एक बिल्डिंग में बुधवार सुबह हुए एक भीषण धमाका हो गया है इस धमाके में कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई है और 15 अन्‍य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं कराची के गुलशन-ए-इकबाल इलाके की इमारत में हुए इस धमाके की वजह अभी स्पष्ट नहीं है लेकिन विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि बिल्डिंग का एक हिस्सा पूरी तरह ढह गया है घायलों को पास ही स्थित पटेल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है जहां उनका इलाज चल रहा है

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डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, यह विस्‍फोट इमारत की दूसरी मंजिल पर हुआ प्रत्‍यक्षदर्शियों का कहना है कि इस भीषण विस्‍फोट से आसपास की इमारतों के भी शीशे टूट गए हैं अभी तक विस्‍फोट के कारणों का पता नहीं चल सका है स्‍थानीय पुलिस का कहना है कि ऐसा लगता है कि यह सिलेंडर विस्‍फोट हुआ है हालांकि बम निरोधक दस्‍ता भी मौके पर पहुंच गया है और जांच भी जारी है

पूरे इलाके को घेर ल‍िया गया है और सिंध के मुख्‍यमंत्री मुराद अली ने कराची के कमिश्‍नर से रिपोर्ट मांगी है उन्‍होंने सभी घायलों के समुचित इलाज का निर्देश दिया अभी एक दिन पहले ही जिन्‍ना कॉलोनी में हुए विस्‍फोट में 5 लोग घायल हो गए थे पुलिस ने बताया कि यह आईईडी ब्‍लास्‍ट थाhttp://satyodaya.com

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पेरिसः पैगंबर मोहम्मद का कार्टून बनाने पर शिक्षक का सिर कलम कर दिया

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नई दिल्ली। फ्रांस की राजधानी पेरिस में इस्लामिक कट्रपंथ सुर्खियों में है। बीते शुक्रवार को यहां एक शख्स ने अपने बच्चे के इतिहास के शिक्षक सिर कलम कर दिया। क्योंकि अध्यापक ने बच्चों को पैगंबर मोहम्मद का कार्टून बनाकर दिखाया था और उस पर चर्चा की थी। इस घटना के कुछ देर बाद हमलावर को पुलिस ने मार गिराया। पेरिस पुलिस और अभियोजन पक्ष के अनुसार, अपनी क्लास में पैगंबर मोहम्मद का कैरिकेचर बना कर उस पर चर्चा करने वाले इतिहास के एक शिक्षक शुक्रवार को सिर काट कर हत्या कर दी गई।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सूचना मिलने पर जब पुलिस मौके पर पहुंची तो हमलावर भाग निकला। कुछ दूर भागने के बाद हमलावर ने पुलिस को अपनी गन दिखाते हुए धमकाया और सरेंडर करने से इनकार कर दिया। हमलावर ने हमले के लिए पुलिस पर भी बंदूक तानी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया। करते हुए उसे मार गिराया। अभियोजकों ने कहा कि वे इस घटना को आतंकवादी संगठन से जुड़ी एक हत्या और आतंकवादियों के साथ आपराधिक संबंध के रूप में मान रहे हैं। बता दें कि पिछले एक सप्ताह के अंदर फांस में यह दूसरी आतंकी घटना है।

राष्ट्रपति मैक्रों ने बताया आतंकवादी हमला

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शिक्षिका की हत्या को आतंकी घटना करार दिया है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कोनफ्लांस-सेंट-होनोरीन कस्बे के उस विद्यालय का दौरा किया जहां मृतक इतिहास के अध्यापक के रूप में काम करता था। इस दौरान उन्होंने विद्यालय के स्टाफ से भी मुलाकात की।

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मैक्रों ने इसे इस्लामिक आतंकवादी हमला करार दिया है और देश से चरमपंथ के खिलाफ एकजुट होने का आग्रह किया। मैक्रों ने कहा, हमारे एक हमवतन की आज इसलिए हत्या कर दी गई क्योंकि उसने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विश्वास करने या न मानने की स्वतंत्रता सिखाई थी। उन्होंने कहा, इस हमले से फ्रांस बंटना नहीं चाहिए, क्योंकि चरमपंथी के मंसूबे यही है। हमें नागरिकों की तरह एक साथ खड़े रहना होगा।

स्वरा भास्कर ने जाहिर किया गुस्सा

पेरिस की घटना पर बाॅलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा, अभिनेत्री ने ट्वीट करते हुए लिखा, भयानक, लोग किस तरह राक्षस बनकर यह सारे बर्बर काम कर रहे हैं। इस शॉक से अवाक हूं। याद रखें, अगर आप सोचते हैं कि आपके भगवान आपको अपने नाम पर मारना चाहे तो आप खुद से शुरुआत करें।http://www.satyodaya.com

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अंधविश्वास में फंसकर 900 से ज्यादा लोगों ने किया था सुसाइड, यकीन करना मुश्किल

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नई दिल्ली। जब कोई अंधविश्वास में फंसता है तो लोग क्या-क्या नहीं कर जाते या यूं कह सकते है अंधविश्वास क्या नहीं करा लेता, ऐसा ही एक मामला कई साल पहले अमेरिका में गुयाना के जोंसटाउन में देखने को मिला था। जब 900 से ज्यादा लोगों ने एक साथ खुदकुशी कर ली थी। इस घटना को दुनिया की अबतक की सबसे बड़ी आत्महत्या माना जाता है। जब 900 से ज्यादा लोगों ने एक साथ जहर पी लिया और मौत के घाट उतर गए। यही नहीं जिन लोगों ने जहर पीने से इनकार किया। उन लोगों को जबरन जहर पिलाया गया।

ये घटना 18 नवंबर, 1978 की है. बताया जाता है कि इस घटना के पीछे जिम जोंस नाम के एक धर्मगुरु का हाथ था। वो खुद को भगवान का अवतार बताता था। जिम जोंस ने खुद को लोगों के बीच प्रसिद्ध करने के लिए जरूरतमंद लोगों की मदद के नाम पर साल 1956 में पीपल्स टेंपल यानि लोगों का मंदिर नाम का एक चर्च बनाया। उसने अपनी धार्मिक और अंधविश्वास के दम पर हजारों लोगों को अपना अनुयायी बना लिया। जिम जोंस कम्युनिष्ट विचारधारा का था और उसके विचार अमेरिकी सरकार से अलग थे। इसलिए वो अपने अनुयायियों के साथ शहर से दूर गुयाना के जंगलों में चला गया। यहीं पर उसने एक छोटा सा गांव भी बसा दिया, लेकिन कुछ दिनों के बाद ही उसकी असलियत लोगों के बीच आने लगी।

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जिम जोंस अपने अनुयायियों से दिनभर काम कराता और रात में जब वो थक-हारकर सोने के लिए जाते तो वो उन्हें सोने भी नहीं देता था और अपना भाषण शुरू कर देता था। इस दौरान उसके सिपाही घर-घर जाकर देखते थे कि कहीं कोई सो तो नहीं रहा। अगर कोई भी सोता मिलता तो उसे कड़ी सजा दी जाती। यहां तक कि वो लोगों को गांव से बाहर भी नहीं जाने देता। पुरुष और महिलाएं जब काम करती थीं, तो उनके बच्चों को एक कम्युनिटी हॉल में रखा जाता था। उसके सिपाही गांव के चारों ओर दिन-रात पहरा देते रहते थे, ताकि कोई वहां से भाग कर ना जा सके। उन्हीं दिनों अमेरिकी सरकार को वहां हो रही गतिविधियों के बारे में पता चला तो सरकार ने कार्रवाई करने के बारे में सोचा। लेकिन इसका पता जिम जोंस को भी चल गया और उसने अपने सभी अनुयायियों को एक जगह इकट्ठा होने को कहा।

कहा जाता है कि इस दौरान जोंस ने लोगों से कहा, अमेरिकी सरकार हम सबको मारने आ रही है। इससे पहले कि वो हमें गोलियों से छलनी करें, हम सबको पवित्र जल पी लेना चाहिए। ऐसा करने से हम गोलियों के दर्द से बच जाएंगे। जोंस ने पहले ही एक बड़े से टब में खतरनाक जहर मिलाकर एक सॉफ्ट ड्रिंक बनवा लिया था और लोगों को पीने के लिए दे दिया। इस दौरान जिसने भी जहरीला ड्रिंक पीने से मना किया, उन्हें जबरन पिलाया गया। इस जहर को पीने से 900 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। इनमें 300 से ज्यादा बच्चे भी शामिल थे। उसके बाद जिम जोंस ने भी खुद को गोली मारकर खत्म कर लिया।http://satyodaya.com

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