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इस बच्चे की खुशी देखिए और समझिए कि जो आपके पास है उसकी कितनी अहमियत है, देखें वीडियो

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दुनिया की तमाम महंगी चीजों को सुख सुविधा मानने वाले लोग पैसे के पीछे आंख बंद कर के भाग रहे हैं। हर किसी की सबसे बड़ी जरुरत बन गया है ये पैसा। इस पैसे के पीछे भागते लोग अपने जीवन में खुशियां ढूंढ ही नहीं पाते। हर किसी के पास कोई न कोई रोना है, हर किसी को किसी न किसी बात की कमी है। खास कर ऐसे ही लोगों के लिए है काबुल के इस बच्चे का ये वीडियो।

काबुल का ये बच्चा अहमद सैय्यद हमें सिखाता है कि खुशियां जन्म से हमारे पास होती हैं लेकिन हम कभी ईश्वर का शुक्र नहीं अदा करते। वहीं जब कोई ऐसी चीज जो सबके पास है और हमारे पास से अलग हो जाती है तब उसकी अहमियत पता चलती है। अहमद बहुत खुश है, इतना खुश कि वो खुशी झूम रहा है। जानते हैं उसकी ख़ुशी की वजह क्या है? वजह है उसे उसका पैर वापस मिल जाना।     

उस समय अहमद सैय्यद रहमान की उम्र यही कोई 8 महीने रही होगी जब अनजाने में एक गोली उसके पैर में लगी थी। पैर में गोली लगने के बाद उसका पैर काटना पड़ा। बिना पैरों के बच्चे का बढ़ना उसे हर रोज तडपता है, उसे ललचाता है जब उसके हमउम्र बच्चे उछालते कूदते भागते खेलते हैं। इन्हीं हालातों से अहमद भी गुज़र रहा था। ऐसा नहीं कि उसका इलाज नहीं हुआ। डॉक्टर्स ने उसके कटे हुए पैर की जगह कृत्रिम पैर लगाने की काफी कोशिशें कीं लेकिन कभी पैरों की फिटिंग सही नहीं होती थी तो कभी कोई और वजह निकल आती थी पैर न लगा पाने की।

मगर इस बार ऐसा नहीं हुआ। इस बार ऑपरेशन सफल रहा, अहमद को पैर मिल गए। कृत्रिम पैर लगते ही मनो जैसे अहमद को पंख मिल गए हों। डॉक्टरों ने अहमद से चलने को कहा और जब अहमद को यकीन हो गया कि पैर ठीक है तो वह खुशी से झूमने लगा। अस्पताल की एक चिकित्सक मुलकारा रहीमी ने इस सुंदर दृश्य का वीडियो बना लिया और अब ये सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। वीडियो को 3 दिन के अंदर ही 1 मिलियन से ज्यादा लोग देख चुके हैं।

अस्पताल में हर कोई अपनी बिमारियों या फिर मरीज के साथ आया होता है। ऐसे में यहां का माहौल हमेशा बोझिल ही होता है। लेकिन अहमद की खुशी ने वहां दाखिल सभी लोगों के पीड़ा से भरे चेहरे पर भी मुस्कराहट बिखेर दी। मुलकारा रहीमी ने सोमवार को अहमद का वीडियो बनाकर ट्विटर पर डाल दिया। आलम यह है कि यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। अब तक 1 मिलियन लोगों ने वीडियो देखा है। इसके 11,928 से री-ट्वीट भी हो चुके हैं और 39,980 लोग इसे पसंद कर चुके हैं।

अहमद की मां रईसा ने कहा कि उसे बेहद खुशी है कि बेटा अपने पैरों पर चल फिर पा रहा है। उनका कहना है कि अब वह अपनी जिंदगी जी सकेगा। मां का कहना है कि तालिबान और सरकार के बीच हुई लड़ाई में अहमद और उसकी बहन को गंभीर चोटें लगी थीं। पिछले चार साल से अहमद का उपचार काबुल के रेडक्रॉस सेंटर में किया जा रहा था।

काबुल में स्थित रेड क्रॉस सेंटर की चिकित्सक सेमीन सरवारी का कहना है कि अहमद को हर साल नए पैर की जरूरत पड़ेगी, क्योंकि साल दर साल वह लंबा होगा। दूसरे पैर की लंबाई के मुताबिक उसे कृत्रिम पैर बनाकर देना होगा। अफगानिस्तान में चल रही लड़ाई की वजह से 2018 में ही 3804 नागरिकों की जान जा चुकी है। इनमें 900 से ज्यादा बच्चे शामिल हैं। जबकि 7000 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।http://www.satyodaya.com

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अब सिनेमा हाल में भी बेडरूम, लेटकर एंजॉय करें मूवी…

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स्विट्जरलैंड। बेडरूम सिनेमा में मूवीज़ देखने की बात ही अलग है। आराम से लेटकर पॉपकॉर्न खाते हुए फिल्म देखना और कोल्ड ड्रिंक्स पीना। दूसरों को रास्ता देने के लिए ना कोई सीट एडजस्ट करने की जरुरत और ना ही पैरों को मोड़ कर बैठने का झंझट।

इस बेडरूम सिनेमा में आप आराम से लेटकर मूवी को एंजॉय कर पाएंगे। ये वीआईपी बेडरूम सिनेमा खुला है स्विट्जरलैंड में। यहां आने वाले टूरिस्ट्स के सफर को और भी मज़ेदार एक्सपीरिएंस देने के लिए इस सिनेमा की शुरुआत की गई।

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इस सिनेमा को बनाने वाले पाथ कंपनी के सीईओ वेनानज़ियो दी बैको का कहना है कि इस वीआईपी सिनेमा में साफ-सफाई का भी खास ध्यान रखा गया है।

यहां कि बेडशीट्स और कवर्स हर शो के बाद बदल दिए जाते हैं।  आगे बताया कि इस सिनेमा हॉल में 11 डबल बेड लगाए गए हैं, जिनके सिर को आराम देने वाले हेडरेस्ट खुद एडजस्ट हो जाते हैं। इस सिनेमा में फिल्म देखने के लिए आपको 48 डॉलर यानी लगभग 3 हज़ार 360 रुपये की टिकट लेनी होगी। इसके अलावा पाथ सिनेमा ने 350 लोगों की कपैसिटी वाला एक सिंगल सोफा वाला आईमैक्स सिनेमा भी बनाया है।http://www.satyodaya.com

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व्यापार युद्ध पर शी चिनफिंग ने डॉनल्ड ट्रंप को घेरा, एशियाई देशों से की ग्लोबलाइजेशन को बचाने की अपील

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पेइचिंग। चीन और अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर छिड़ गया है। पिछले सप्ताह ही अमेरिका ने चीनी उत्पादों पर सीमा शुल्क बढ़ा दिया था। अब चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने परोक्ष रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप पर हमला बोला है। चिनफिंग ने कहा अगर कोई भी सभ्यता आज के समय में खुद को सर्वश्रेष्ठ मानती है तो ये मूर्खतापूर्ण है। मौजूदा समय में किसी भी देश के लिए दुनिया से कट कर रहना संभव नहीं है।

बता दें, यह बातें चीनी राष्ट्रपति ने ‘डायलॉग ऑफ एशियन सिविलाइजेशन’ विषय पर आयोजित सम्मेलन के शुरुआती सत्र में कही हैं। कार्यक्रम में भारतीय दूतावास प्रभारी एक्विनो विमल, , आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशनियान और यूनान के राष्ट्रपति प्रोकोपीस पावलोपोलस, श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना मौजूद थे। शी चिनफिंग ने एशियाई देशों से ग्लोबलाइजेशन को बचाने की अपील की और कहा कि आज यह किसी भी देश के लिए संभव नही है कि वह अपने दरवाजे अन्य देशों के लिए बंद कर दे। यदि कोई देश ऐसा करता है तो वह अपनी जीवंतता खो बैठेगा। एक सभ्यता दूसरी सभ्यता से श्रेष्ठ है यह सोचना मूर्खतापूर्ण होगा।

गौरतलब है, कि अमेरिका ने चीनी उत्पादों पर पिछले ही सप्ताह सीमा शुल्क बढ़ा दिया था। चीन से आने वाले करीब 200 अरब डॉलर के उत्पादों पर आयात शुल्क को 10 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया था। जिसके बाद चीन ने भी अमेरिका पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का फैसला लिया है।http://www.satyodaya.com

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अपनी धरती से इस्लाम का नामो-निशान मिटा देना चाहता है चीन…

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थम नहीं रहा चीन का मुस्लिमों पर कहर, ढहा दीं दर्जनों मस्जिदें

नई दिल्ली। ऐसा लगता है कि चीन अपने देश से इस्लाम का नामो-निशान मिटा देना चाहता है। विश्व विरादरी की नाराजगी को दरकिनार करते हुए चीन लगातार मुस्लिम समुदाय के खिलाफ दमनपूर्ण अभियान छेड़े हुए है। पिछले काफी दिनों से खबरें आ रही थीं कि चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिमों को विचारधारा बदलने के लिए हजारों शिविर बनाए गए हैं। जिनमें उइगर मुस्लिमों को जबरन कैद कर जुल्म किए जाते हैं। हालांकि चीन ने कभी भी इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया। अब खबर आई है कि रमजान की शुरुआत होते ही मुस्लिम बहुल शिनजियांग प्रांत में सरकारी अधिकारियों, छात्रों और बच्चों के रोजे रखने पर प्रतिबंध लगा दिया है। चीन की सरकारी वेबसाइट पर इस बारे में निर्देश जारी किया गया। यहां मुसलमानों की पहचान खत्म की की जा रही है। वहां रहने वालों मुसलमानों के खिलाफ कड़े से कड़े प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। यहां न केवल रोजे रखने पर पाबंदी है, बल्कि किसी भी तरह के धार्मिक अनुष्ठान करने पर भी प्रतिबंध है।

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इतना नहीं, मुस्लिम समाज के लोगों के दाढ़ी रखने, नमाज करने, महिलाओं के बुर्का या हिजाब पहनने पर भी पाबंदी है। चीन में इस तरह का प्रतिबंध खास तौर पर पश्चिमी शिनजियांग प्रांत में है, जहां प्रशासन इस पर कड़ी नजर रख रहा है कि उनके निर्देशों का पालन किया जा रहा है या नहीं। यहां मुस्लिम घरों की निगरानी के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बलों की तैनाती की गई है, जो आए दिन लोगों के घरों में तलाशी लेते हैं। साथ ही सड़कों और गलियों में लगाए गए सर्विलांस कैमरों की मदद से भी उन पर नजर रखी जा रही है। इतना ही नहीं चीन की सरकार ने ध्वनि प्रदूषण का तर्क देते हुए सभी 355 मस्जिदों से लाउड स्पीकरों को हटाने के लिए पहले से ही आदेश दे चुकी है। मस्जिदों के ऊपर चीन का राष्ट्रीय झंडा लगाने का भी आदेश दिया गया है।

यही नहीं हाल के दिनों में निंक्सिआ प्रांत के कई मुस्लिम इलाकों से अरबी में लिखे संदेश भी हटा दिए गए हैं। शिनजियांग प्रांत में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के कैडर इस प्रतिबंध को लागू करने में जुटे हैं। वहीं दूसरी ओर हाल की कई रिपोर्ट्स में इस बात का खुलासा हुआ है कि चीन ने शिनजियांग में इस्लामिक धार्मिक स्थलों को किस तरह बड़े पैमाने पर नष्ट कर दिया है।

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द गार्जियन और बेलिंगकैट वेबसाइट ने सेटेलाइट तस्वीरों से 91 धार्मिक स्थलों की निगरानी की तो पाया कि करीब 31 मस्जिदों और दो महत्वपूर्ण इस्लामिक स्थलों को 2016 से लेकर 2018 के बीच गंभीर क्षति पहुंचाई गई है। गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, इन धार्मिक स्थलों में से 15 इमारतों का लगभग या पूरी तरह से नामोनिशान मिटा दिया गया है। कई मस्जिदों में गुंबद को पूरी तरह से हटा दिया गया था। मस्जिद की तरह इस्तेमाल की जा रही 9 अन्य इमारतों को भी पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया। उइगर मुसलमानों के लिए इमाम आसिम श्राइन बहुत ही महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है। इलाके की सबसे बड़ी मस्जिद कारगिलिक मस्जिद को भी चीनी सरकार ने बर्बाद कर दिया। होतन के नजदीक सैकड़ों साल पुरानी युतियन एतिका मस्जिद जहां पर स्थानीय नमाज अदा करने के लिए जुटते थे, उसे भी ढहा दिया गया है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने किया खुलासा

हयूमन राइट्स वाच (एचआरडब्लू) की इसी हफ्ते जारी की गई रिपोर्ट में इस बारे में दावा किया गया है। संयुक्त राष्ट्र की नस्ली भेदभाव उन्मूलन समिति ने उइगर मुस्लिमों के साथ किए जा रहे इस व्यवहार पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रि-एजुकेशनल कैंपों में दौरों के बीच अधिकारी मुसलमानों से उनकी जिंदगी और राजनीतिक विचारों के बारे में पूछताछ करते हैं। एक तरह से वे उनका राजनीतिक शुद्धीकरण करना चाहते हैं। संयुक्त राष्ट्र की निगरानी समूहों का कहना है कि उइगरों मुस्लिमों को चैकसी और सुरक्षा अभियानों के बहाने निशाना बनाया गया है। हजारों उइगर मुस्लिमों को हिरासत में रखा गया है और उन्हें विचारधारा बदलने वाले केंद्रों में भेज दिया गया है। विदेशों से शिनजियांग प्रांत में लौटने वाले सैकड़ों उइगर छात्र गायब हो गए हैं। उनमें से कई हिरासत में हैं और कई हिरासत में मर भी चुके हैं।#UN

संयुक्त राष्ट्र की निगरानी समिति के एक अनुमान के मुताबिक है कि 10 लाख से ज्यादा लोगों को तथाकथित कट्टरता विरोधी शिविरों में कैद करके रखा गया है और अन्य 20 लाख को राजनीतिक और सांस्कृतिक विचारधारा बदलने वाले तथाकथित पुनर्शिक्षण शिविरों में जबरन भेजा गया है। बता दें कि चीन मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों के उत्पीड़न और उनके दमन की कोशिश के लिए पूरी दुनिया में आलोचना झेल रहा है। राज्य विभाग के अनुमान के मुताबिक, करीब 20 लाख उइगर, काजाकास, किर्गिज समेत तुर्की मुस्लिमों को बीजिंग के प्रशिक्षण कैंप के नाम पर कैद में रखा जा रहा है। लोग इन प्रशिक्षण कैंपों को डिटेंशन कैंप कहते हैं।

भुक्तभोगी महिला ने बयां की हकीकत

हाल में चीन की सताई उइगर महिला ने वहां वहां होने अत्याचारों की पोल खोली थी। गुलनाज नाम की यह महिला फिलहाल सुरक्षित है और अपने माता-पिता के साथ लंदन में रह रही हैं। महिला बताती है कि वहां रहनेवाले उइगर मुसलमान हमेशा इस डर में जीते हैं कि ना जाने कब उन्हें सरकार का कोई शख्स उठाकर ले जाए और परिवार और बच्चों से दूर कहीं नजरबंद कर दे। उन्हें यह तक नहीं पता होता कि वे कहां हैं, कब छूटेंगे और अपने परिवार से फिर कभी मिल भी पाएंगे या नहीं। महिला ने इंडिपेंडेंट के लिए लिखे अपने लेख में कहा, हमारे पास हमारी अपनी भाषा, अपना कल्चर और अपना संगीत है, लेकिन हम इस्लाम को मानते हैं और इसी वजह से चीन हम पर अत्याचार करता है। वह जब 11 साल की थी तब चीन में रहती थीं। गुलनाज बताती हैं कि उस वक्त उन्हें यही डर रहता था कि अगर कुछ गलत हुआ तो उनके माता-पिता भी उन्हें नहीं बचा पाएंगे। गुलनाज लिखती हैं कि वन चाइल्ड की पॉलिसी चीन में खत्म होने के बावजूद उइगरों पर विशेष नजर रखी जाती थी और जबरन गर्भपात करवाया जाता था। ऐसे में उनकी एक पड़ोसन की मौत हो गई थी। जिसके बाद उन्होंने चीन छोड़ने का फैसला कर लिया था।

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लेखिका के मुताबिक, वह यूएई भी गई थीं, लेकिन वहां भी चीनी दूतावास उनपर विशेष नजर रखता था। गुलनाज के मुताबिक, किसी भी देश जाने से पहले चीन से उसके संबंधों के बारे में देखना पड़ता है क्योंकि वह कई देशों पर उइगरों को डिपोर्ट करने का दवाब बना चुका है।
लेखिका के मुताबिक, यह सब 1949 से (पूर्वी तुर्कस्तान पर चीन के कब्जे के बाद) शुरू हो गया था। तब सबसे पहले बच्चों को कुरान पढ़ने से रोका गया था, फिर मस्जिद पर जाने में पाबंदी लगाई गई। इसके बाद रमजान, दाढ़ी बढ़ाना, बच्चों के इस्लामिक नाम रखने तक पर आपत्ति जताई गई। इतना ही नहीं वहां चीनी भाषा न आने पर नौकरी तक नहीं दी जाती। गुलनाज यहां तक कहती हैं कि जिन उइगरों को चीन कैद करके रखता हैं, उनके मारकर अंगों की तस्करी तक की जाती है।

कई विश्लेषकों का मानना है कि चीनी सरकार धार्मिक स्थलों का इसलिए सफाया कर रही है ताकि चीन में इस्लाम धर्म की पहचान को पूरी तरह से मिटाया जा सके। होतान के एक पूर्व निवासी ने गार्जियन से बातचीत में कहा, अगर आप वर्तमान पीढ़ी से उनके माता-पिता छीन लेते हो और दूसरी तरफ उनकी जड़ों की याद दिलाने वाली उनकी सांस्कृतिक विरासत को बर्बाद कर देते हो तो जब ये बड़े होंगे उनके लिए यह एक विदेशी धरती बन जाएगी। उनका इशारा मुस्लिमों को कैंप में रखे जाने की तरफ था। # China’s Uighur
हालांकि, बीजिंग इस्लाम और ईसाई धर्म के सिनिकरण के लक्ष्य को लेकर खुलकर सामने आता है। चीन का मानना है कि हर धर्म को चीन के राष्ट्रीय हितों के अनुरूप चलना होगा। जनवरी महीने में चीन ने पंचवर्षीय योजना पेश की थी ताकि इस्लाम को समाजवाद के सांचे में ढाले जा सके। विश्लेषकों का कहना है कि इस्लामिक इमारतों को ढहाना इसी अभियान का एक हिस्सा है।
शिनजियांग के एक इतिहासकार डेविड ब्रोफी ने कहा, शिनजियांग का इस्लामिक ढांचा भारतीय और पश्चिमी एशियाई शैली से मिलता-जुलता है।

इससे क्षेत्र का विस्तृत इस्लामिक दुनिया से संबंध उजागर होता है। चीन इन संरचनाओं को नष्ट कर एक नए सिनीकरण उइगर इस्लाम को उभारने के लिए रास्ता साफ करना चाहता है।# China’s Uighur कुछ समाजसेविओं का कहना है कि इस तरह की धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों को नष्ट करना उइगर मुसलमानों की अगली पीढ़ी को चीनी आबादी में मिलाने के लिए किया जा रहा है। एक पूर्व निवासी का कहना है कि शिनजियांग में अधिकतर उइगरों ने मस्जिद जाना बंद कर दिया है क्योंकि चीनी प्रशासन उनकी कड़ी निगरानी कर रहा है। मस्जिद जाने के लिए अपनी आईडी रजिस्टर करनी होती है। मस्जिदों में वार्षिक उत्सवों का आयोजन तो कई सालों पहले ही बंद हो चुका है।#Beijing

आरोपों को नकार रहा चीन

अमेरिकी अधिकारियों ने कई मौकों पर चीन के इस बर्ताव की निंदा की है। लेकिन चीन इसे आतंकवाद से लड़ने का जरिया बताकर अपना बचाव करता है और इन कैंपों को बोर्डिंग स्कूल जैसे प्रशिक्षण कैंप की तरह पेश करता है। चीन मुस्लिम अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किए जाने के आरोप को हमेशा से खारिज करता रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग से जब मस्जिदों को ढहाए जाने पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी किसी स्थिति की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, चीन धर्म की स्वतंत्रता के पक्ष में है और किसी भी तरह के धार्मिक अतिवाद से लड़ने में विश्वास करता है. चीन में करीब 2 करोड़ मुस्लिम हैं और 35,000 मस्जिदें हैं। कानून के दायरे में रहकर ज्यादातर लोगों को अपनी धार्मिक गतिविधियों को स्वतंत्रतापूर्वक करने का अधिकार है।#Terrorism

जेहाद के नाम पर इस्लाम को कर रहे बदनाम

पाकिस्तान सहित कुछ इस्लामिक देशों में पल रहे आतंकवादी संगठनों और उनके आकाओं ने मुस्लिम कौम को इतना बदनाम कर दिया है कि अब दुनिया के कई गैरमुस्लिम देशों में नेक और अमनपसंद मुसलमानों को भी मुश्किलों का सामना करना पड. रहा है। अपने स्वार्थ और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए नौजवान मुस्लिम युवाओं को जेहाद के नाम पर आतंकवाद की राह पर ढकेलने वाले मौलानाओं और आतंक के आकाओं ने इस्लाम को बदनाम कर दिया है। इसी का परिणाम है कि हाल ही में ईस्टर पर हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद श्रीलंका ने सैकड़ों विदेशी मुस्लिम धर्मगुरुओं को देश से बाहर का रास्ता दिखा दिया तो वहीं बुर्के पर बैन लगा दिया। यूरोपीय देशों में मुस्लिमों को संदेह की नजर से देखा जाने लगा है। लेकिन इन सब से आगे निकलते हुए चीन ने मुस्लिमों के खिलाफ सख्त अभियान छेड़ते हुए है। ऐसा लगता है कि चीन सरकार अपने देश से इस्लाम का नामो-निशान मिटा देना चाहती है। # Islam

इस मामले में चीन का सदाबहार मित्र पाकिस्तान भी आंखें बंद किए है। उसने कभी भी उइगर मुस्लिमों पर किए जा रहे जुल्म के खिलाफ चीन के सामने अपना विरोध नहीं दर्ज कराया।http://www.satyodaya.com

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