Connect with us

अंतरराष्ट्रीय

2008 में मुंबई हमलों के बाद भारत ने पाकिस्तान पर हमले की कर ली थी तैयारी!

Published

on

लंदन। तो क्या 2008 में भारत-पाकिस्तान के बीच एक और युद्ध होने वाला था! इंग्लैंड के पूर्व प्रधानमंत्री ने ऐसा ही कुछ दावा किया है। गुरुवार को अपने संस्मरण के विमोचन के मौके पर ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने तत्कालीन भारत सरकार के बारे में अपने विचार साझा किए। कैमरून ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ‘संत पुरुष’ बताया है। डेविड कैमरून ने बताया कि 2008 में मुंबई हमले के बाद तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मुझसे कहा था कि अगर मुंबई जैसा दूसरा आतंकी हमला हुआ तो पाकिस्तान के खिलाफ भारत सैन्य कार्रवाई का इस्तेमाल करेगा। कैमरन ने ‘फॉर द रिकॉर्ड में अपने 52 वर्ष के निजी एवं व्यावसायिक जीवन के घटनाक्रम को लिपिबद्ध किया है और इसमें 2010 से 2016 के बीच का विशेष तौर पर जिक्र है जब वह ब्रिटेन के प्रधानमंत्री थे।

इस दौरान उनके सिंह के साथ ही मोदी के साथ भी अच्छे रिश्ते रहे। कैमरन ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ मेरे रिश्ते अच्छे रहे। वह संत पुरुष हैं लेकिन भारत के खतरों के प्रति वह कड़ा रुख भी रखते थे। कैमरून ने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान मैंने भारत सरकार से कहा था, हमें आधुनिक सहभागिता की जरूरत है न कि औपनिवेशिक अपराध की भावना को पाले रखना है। यह सहभागिता दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ हो।

यह भी पढ़ें-मारूति सुजुकी ने भी माना, ओला-ऊबर ने भारत के कार बाजार को नुकसान पहुंचाया

अपने संस्मरण में कंजरवेटिव पार्टी के पूर्व नेता ने भारत के दो नेताओं की प्रशंसा की। उन्होंने
नवम्बर में वेम्बले स्टेडियम में संबोधन के दौरान स्टेज पर मोदी से गले मिलने की घटना को याद किया। कैमरून ने कहा, कई क्षण रहे जिसमें वेम्बले स्टेडियम में भारतीय मूल के लोगों की सबसे बड़ी भीड़ का इकट्ठा होना भी शामिल है। मोदी के संबोधन से पहले मैंने 60 हजार की भीड़ से कहा कि मुझे लगता है कि किसी दिन भारतीय मूल का ब्रिटिश व्यक्ति दस डाउनिंग स्ट्रीट में प्रधानमंत्री के तौर पर आएगा। लोगों की भीड़ ने चिल्लाकर इसे मंजूरी दी जो अद्भुत था और जैसे ही स्टेज पर मोदी और मैंने एक- दूसरे को गले लगाया मुझे उम्मीद जगी कि यह ब्रिटेन द्वारा दुनिया को खुले हृदय से स्वागत करने का संकेत देगा।
ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ने अपने संस्मरण में लिखा है, मेरे दौरे से पहले इस बात को लेकर विवाद था कि मुझे ‘खेद जताना चाहिए अथवा नहीं। लेकिन मुझे महसूस हुआ कि शहीद स्मारक की संवेदना पुस्तिका में जिसे मैंने ‘ब्रिटेन के इतिहास में काफी शर्मनाक घटना बताया, वह उपयुक्त था। मुझे पता है कि ब्रिटेन के सिखों के लिए यह काफी मायने रखता है कि उनके प्रधानमंत्री ने यह सौहार्द दिखाया और ऐसा कर मैं खुश हूं। http://www.satyodaya.com

अंतरराष्ट्रीय

कोरोना संकट के बीच अमेरिका में भड़की हिंसा, 40 शहरों में लगा कर्फ्यू

Published

on

वाशिंगटन डीसी सहित 15 राज्यों में 5 हजार नेशनल गार्ड तैनात

लखनऊ। कोरोना संकट के बीच अमेरिका में हिंसा की आग भड़क उठी है। एक अश्वेत व्यक्ति जार्ज फ्लॉयड की मौत के बाद हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गया है। वाशिंगटन डीसी सहित अमेरिका के 40 शहरों में सैकड़ों अश्वेत नागरिकों की भीड़ सड़कों पर उतर आई और हिंसक प्रदर्शन करने लगी। खबरों के मुताबिक सरकार ने हिंसा से निपटने के लिए प्रभावित सभी 40 शहरों में कर्फ्यू लगा दिया है। दंगाइयों को काबू में करने के लिए 15 राज्यों व वाशिंगटन डीसी 5 हजार नेशनल गार्डों को तैनात किया गया है।

अमेरिका में इस हिंसा की आग 25 मई को जार्ज फ्लॉयड नाम के एक अश्वेत व्यक्ति की पुलिस कस्टडी में हुई मौत के बाद भड़की। घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ था। जिसमें एक श्वेत पुलिसकर्मी जार्ज फ्लॉयड को नीचे गिराकर काफी देर तक उसकी गर्दन पर पैर रखकर पिटाई की। फ्लॉयड इस दौरान मदद के लिए चिल्लाता रहा और आखिर में उसकी मौत हो गई। अश्वेत फ्लॉयड को एक दुकान में नकली बिल का इस्तेमाल करने के संदेह में गिरफ्तार किया गया था। फ्लॉयड की मौत के बाद एक बार फिर अमेरिका में नस्लभेद की आग भड़क उठी।

यह भी पढ़ें-मुंबई: संगीतकार वाजिद खान का निधन, किडनी की बीमारी से थे पीड़ित

बता दें कि अमेरिका पिछले दो महीने से कोरोना महामारी से जूझ रहा है। अब तक 1 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि संक्रमित लोगों की संख्या लाखों में है। कोरोना ने दुनिया भर में सबसे ज्यादा अमेरिका में ही कहर बरपाया है।http://www.satyodaya.com

Continue Reading

अंतरराष्ट्रीय

नेपाल ने संसद में पेश किया देश का नया नक्शा, भारतीय सीमा पर तैनात करेगा सेना

Published

on

नई दिल्ली। भारत-चीन सीमा विवाद का मामला अभी सुलझा भी नहीं था कि नेपाल और भारत के बीच सीमा विवाद शुरू हो गया है। नेपाल संसद में नए नक्शे के लिए बिल पेश हो गया है। जिसमें भारत के हिस्से में रहे कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को अपना बताते हुए उस हिस्से को समेट कर नया नक्शा जारी किया है। वहीं नेपाल सरकार ने देश में प्रवेश करने के लिए खुली सीमाओं को बंद करने और सरकार द्वारा निर्धारित सीमा क्षेत्र से ही एंट्री देने का फैसला किया है। भारत के साथ तनाव को देखते हुए नेपाल ने अपने सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की तैनाती को भी मंजूरी दी है। जो यह पहली बार होने जा रहा है।

बता दें कि नेपाल-भारत के बीच करीब 1700 किलोमीटर की खुली सीमाएं हैं। अभी तक नेपाल आने वाले भारतीय नागरिकों को बिना रोक-टोक आने जाने की अनुमति थी। जिस दिन नेपाल सरकार ने भारतीय क्षेत्रों को मिलाकर अपना नया नक्शा जारी किया था। यह निर्णय उसी समय ले लिया गया था। लेकिन सरकार ने एक हफ्ते तक इस निर्णय को छिपा कर रखा। राजपत्र में प्रकाशित करने के बाद इसे सार्वजनिक किया गया है।

नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली की कैबिनेट ने सीमा विवाद को लेकर भारत से टकराव के मूड में सीमा व्यवस्थापन और सुरक्षा के नाम पर सख्ती दिखाते हुए भारत से लगी 20 सीमाओं को छोड़कर बाकी सभी को बन्द करने का निर्णय किया है। वहीं भारत के तरफ सीमा की निगरानी एसएसबी करती थी जब कि नेपाल की तरफ से सशस्त्र प्रहरी बल (एपीएफ) के हवाले सुरक्षा की जिम्मेदारी थी। नेपाल के हर सीमावर्ती जिलों में सैन्य बैरक होने के बावजूद सीमा की निगरानी या सुरक्षा के नाम पर सेना को बॉर्डर पर कभी नहीं भेजा गया था।

यह भी पढ़ें:- यूपीः गाइडलाइन जारी, कल से 100 प्रतिशत उपस्थिति के साथ खुलेंगे सरकारी कार्यालय

प्रधानमंत्री कार्यालय के सचिव नारायण बिडारी ने कहा कि कैबिनेट ने यह फैसला लिया है कि भारत से आने वाले लोगों को अब सिर्फ 20 सीमा गेट से ही आने की इजाजत मिलेगी। नेपाल के 22 जिलों की सीमा भारत से जुड़ी है। सरकार ने सिर्फ 20 जिलों के लिए एक-एक एंट्री प्वाइंट तय किए हैं। वहीं नेपाल सरकार के निर्णय से सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। जो व्यापार और रोजगार के लिए लाखों की संख्या में हर रोज सीमा आर-पार करते हैं। अब नेपाल में वैध आईडी कार्ड के साथ ही एंट्री मिलेगी।http://www.satyodaya.com

Continue Reading

अंतरराष्ट्रीय

ट्रम्प ने टाली जी-7 की बैठक, कहा- भारत को भी देंगे न्यौता

Published

on

चीन विरोधी देशों को जी-7 में जुटाएंगे अमेरिकी राष्टपति

लखनऊ। अमेरिकी राष्टपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दुनिया के 7 सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्तियों के संगठन जी-7 की बैठक सितंबर तक के लिए टाल दी है। ट्रम्प ने भारत समेत चीन के धुर विरोधी देशों को भी इसमें शामिल करने का संकेत दिया है। गु्रप-7 का सम्मेलन जून महीने में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से होने वाला था। लेकिन आखिरी वक्त में ट्रम्प ने इसे स्थगित कर दिया। राष्ट्रपति ट्रम्प ने ऐलान किया है कि सितंबर में होने वाली जी-7 बैठक में भारत, रूस, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया को भी शामिल होने का न्यौता दिया जाएगा।

संवाददताओं के साथ एक संक्षिप्त वार्ता में ट्रम्प ने जी-7 को जी-10 या जी-11 कहकर संबोधित किया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, आज दुनिया में जो कुछ भी हो रहा है, मुझे नहीं लगता कि जी-7 उसका सही तरीके से प्रतिनिधित्व करता है। ये समूह अब पुराना पड़ गया है।

यह भी पढ़ें-‘मन की बात’ में बोले पीएम मोदीः कोरोना के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई

बता दें कि कोरोना संकट के बाद से ही राष्ट्रपति ट्रम्प चीन के खिलाफ आक्रामक हैं। ट्रम्प का आरोप है कि चीन ने इस महामारी की सही जानकारी समय रहते दुनिया के साथ साझा नहीं की। जिससे अमेरिका सहित पूरी दुनिया को भयंकर संकट का सामना करना पड़ रहा है। चीन को सबक सिखाने के लिए अमेरिका को भारत के सहयोग भी जरूरत है। इसीलिए राष्ट्रपति ट्रम्प भारत के समर्थन में कई बयान दे चुके हैं।

जी-7 में शामिल देश

बता दें कि जी-7 दुनिया के ऐसे 7 देशों का एक समूह है, जिन्हें सबसे ज्यादा विकसित और उन्नत अर्थव्यवस्थाएं माना जाता है। इसमें अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली और जापान शामिल हैं। http://www.satyodaya.cpm

Continue Reading

Category

Weather Forecast

June 2, 2020, 5:43 pm
Mostly cloudy
Mostly cloudy
31°C
real feel: 35°C
current pressure: 1000 mb
humidity: 62%
wind speed: 1 m/s SSW
wind gusts: 1 m/s
UV-Index: 0
sunrise: 4:43 am
sunset: 6:27 pm
 

Recent Posts

Trending