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नशीले उत्पादों की तस्करी के आरोप में भारतीय व्यापारी पर प्रतिबन्ध

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वॉशिंगटन। अमेरिका ने मादक दवाओं के विक्रेता एक भारतीय व्यापारी को कथित तस्करी के आरोप में दोषी ठहराया है। अमेरिकी वित्त विभाग ने जसमीत हकीमजादा नामक इस व्यापारी पर प्रतिबंध लगा दिए हैं।

 

इस विभाग के एक उच्चाधिकारी सील मंडलेकर ने बताया है कि जसमीत ने एक व्यापारी के रूप में लाखों अमेरिकी डॉलर की तस्करी की है। वह अपने पिता के साथ संयुक्त अरब अमीरात में रहता है। उसकी मां भारत में रह कर दो कंपनियां चलाती हैं।

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उल्लेखनीय है कि वह हेरोइन, कोकीन और सिन्थेटिक नशीले उत्पादों की तस्करी अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड आदि देशों में करता रहा है।http://www.satyodaya.com

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फ्रांस: कुछ ही देर में भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे पीएम मोदी

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस में कुछ ही देर में भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे। पीएम मोदी ने इससे पहले फ्रांस के प्रधानमंत्री एडवर्ड फिलिप से मुलाकात की। दोनों देशों के नेताओं के बीच कई मसलों पर बात हुई। पीएम मोदी को पेरिस में सुनने के लिए बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय इकट्ठा हुआ है। माना जा रहा है कि मोदी अपने संबोधन में आर्टिकल 370 पर भी बात कर सकते हैं।

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बता दें, पीएम मोदी 22 अगस्त से तीन दिवसीय फ्रांस, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन के दौरे पर हैं। फ्रांस में वो जी-7 में हिस्सा लेंगे। शुक्रवार को ही वो फ्रांस से यूएई और बहरीन के लिए निकल जाएंगे। आपको बता दें, यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली बहरीन यात्रा होगी। http://www.satyodaya.com

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अंतरराष्ट्रीय

पेरिस में पीएम मोदी के जोरदार स्वागत पर पाक को लगा झटका, इमरान मंत्री ने ट्वीट कर कहा…

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मोदी सरकार

फाइल फोटो

नई दिल्ली। मोदी सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 पर लिए गए ऐतिहासिक फैसले के बाद पकिस्तान काफी भड़का हुआ है। ऐसे में पाक अपनी नापाक हरकतों की वजह से लगातार देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोल रहा है, लेकिन हर बार उसके हाथ नकामयाबी ही लग रही है।

पाक ने हद तो तब कर दी जब इमरान खान सरकार के मंत्री फवाद चौधरी पीएम मोदी के फ्रांस में हुए स्‍वागत से इतना ज्‍यादा चिढ़ गए कि उन्‍होंने ट्वीट कर अपनी हताशा को जाहिर कर दी। इस ट्वीट के बदले यूजर्स ने उनकी जमकर खिल्ली उड़ाई।

बता दें जब पीएम मोदी फ्रांस पहुंचे तो उनका ग्रैंड वेलकम हुआ। पेरिस में एयरपोर्ट पर भारतीय समुदाय के लोगों ने उनका ज़ोरदार स्वागत किया। खास बात ये है कि पीएम मोदी का स्वागत करने वालों में हर धर्म के लोग शामिल थे। स्वागत और सत्कार के इस सिलसिले में मज़हब और धर्म सिर्फ शब्द मात्र की रह गए थे। इतना ही नहीं भारत माता की जय के नारों के बीच उनके सम्मान को देख कर पाकिस्तान सरकार को काफी मिर्ची लग गई।

वहीं जब पीएमओ ने ज़ोरदार स्वागत वाला वीडियो शेयर किया तो फवाद चौधरी ने इस वीडियो ट्वीट पर रिप्‍लाई करते हुए लिखा, ‘कितने पैसे लग गए इस ड्रामे पर?’ पाकिस्‍तानी मंत्री के ट्वीट के बाद लोगों ने उन्‍हें जमकर खरी-खोटी सुनाई। एक यूजर प्रकाश तिवारी ने लिखा, ‘फवाद चौधरी…हरकतें भी नाम जैसी ही हैं….टमाटर और रोटी में बिकने वाले पैसे पूछ रहे हैं।”

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ललिया नाम के एक यूजर ने लिखा, तेरी बेईज्जती तो पाकिस्तानी लोग फ्री में ही कर रहे थे। मोहम्मद साजिद डार ने लिखा, ‘पैसों की बात मत करो साहब। जो चीज आपके पास नहीं है उसके बारे में बात नहीं करनी चाहिए।” वहीं, आदित्य राज कौल ने लिखा, ‘फवाद तुम प्यार और इज्जत ठीक उसी तरह नहीं खरीद सकते जैसे तुम कश्मीर नहीं ले सकते जो भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और हमेशा रहेगा।”

वहीं मनीष जोशी ने गर्मजोशी के साथ ट्वीट का जवाव देते हुए लिखा, ‘आपको हर मुसलमान बिकाऊ क्यों लगता है? आपके देश के मुसलमान बिकते होंगे 2- 2 रुपये में। हमारे देश की नहीं बिकते हैं।http://www.satyodaya.com

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हांगकांग प्रदर्शन: 23 साल का लड़का बना चीन की आफत, ट्विटर-फेसबुक ने भी चलाया चाबुक

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नई दिल्ली। पिछले काफी दिनों से हांगकांग में चीन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहा है। यह विरोध प्रदर्शन एक प्रत्यर्पण विधेयक के खिलाफ शुरू हुआ था। हालांकि हांगकांग की सरकार ने विधेयक तो वापस ले लिया लेकिन युवाओं का आंदोलन खत्म नहीं हुआ। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि हांगकांग में लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक मजबूत हो। रविवार को यहां एक लाख से भी अधिक लोग अपनी मांगो को लेकर सड़कों पर उतरे थे। लगातार बढ़ रहे विरोध प्रदर्शन को देख अब चीन अफवाहों का सहारा लेकर इस अहिंसक प्रदर्शन को बदनाम करने की कोशिश में लगा है।

चीन सोशल मीडिया के जरिए भ्रामक प्रचार कर रहा है। फेसबुक और ट्विटर ने भी इसकी पुष्टि करते हुए मंगलवार को बयान जारी किया है। साथ ही ऐसे अफवाहों को फैलाने वाले अकाउंट्स भी बंद कर दिए हैं।

क्या है प्रत्यर्पण विधेयक?

हांगकांग में लगातार युवा बढ़ी संख्या में चीन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। रविवार को पेइचिंग की गंभीर चेतावनियों को दरकिनार करते हुए एक लाख से अधिक की संख्या में लोगों ने यहां लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। ये विरोध प्रत्यर्पण विधेयक के खिलाफ शुरू हुआ था, जिसके मुताबिक अगर कोई हांगकांग का व्यक्ति चीन में कोई अपराध करता है या प्रदर्शन करता है तो उसके खिलाफ हांगकांग में नहीं बल्कि चीन में मुकदमा चलाया जाएगा। बस फिर क्या जैसे ही ये विधेयक आया लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उनके गुस्से को नेतृत्व मिला एक 23 साल के लड़के जोशुआ वांग का। इस जबरदस्त विरोध प्रदर्शन को देखते हुए हांगकांग प्रशासन ने विधेयक तो वापस ले लिया लेकिन इसके बावजूद युवाओं ने प्रदर्शन जारी रखा। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि हांगकांग में लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक मजबूत हो।

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फेसबुक और ट्विटर का चला चाबुक

चीन बढ़ते विरोध प्रदर्शन को देखते हुए भ्रामक प्रचार के जरिए अब इस आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। सोशल मीडिया के जरिए वो इस प्रदर्शन की तस्वीर हिंसक और युद्ध जैसी पेश करने का प्रयास कर रहा है। इस बात की पुष्टि मंगलवार को फेसबुक और ट्विटर ने भी कर दी है। फेसबुक और ट्विटर ने कहा कि ऐसे भ्रामक और गलत जानकारी देनेवाले सोशल मीडिया अकाउंट्स को बंद कर दिया गया है। फेसबुक ने कहा, ‘3 फेसबुक ग्रुप, 7 फेसबुक पेज और 5 अकाउंट्स को हॉन्ग कॉन्ग प्रदर्शन के खिलाफ भ्रामक जानकारी देने के कारण बंद कर दिया गया।’  वहीं, ट्विटर ने भी जानकारी दी है कि 936 अकाउंट्स को बंद कर दिया गया है इसके साथ ही राज्य प्रायोजित अकाउंट्स को भी बंद किया जाएगा।

विधेयक के पीछे चीन की चालाकी?

अब सवाल ये है कि आखिर क्यों चीन इस तरह का विधेयक लाना चाह रहा था हांगकांग के लिए? दरअसल, हांगकांग चीन का एक हिस्सा जरूर है लेकिन वो उसका विशेष प्रशासनिक क्षेत्र है। इसका मतलब ये है कि चीन के पास हांगकांग में सीमित अधिकार हैं जैसे रक्षा और विदेशी मामले चीन के नियंत्रण में हैं अन्य मामलों में हांगकांग को ‘उच्च स्तर की स्वायत्तता’ प्राप्त है। लेकिन प्रत्यर्पण विधेयक के बाद हांगकांग की युवा आबादी को लगा कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी इस विधेयक के जरिए हांगकांग पर अपना दबदबा कायम करना चाहती है। जिसकी वजह से वहां युवा सड़कों पर उतर आए हैं। इस आंदोलन की सबसे दिलचस्प बात ये है कि प्रदर्शन करने वाले भी युवा हैं और उनको नेतृत्व देने वाला भी एक 23 साल का युवा लड़का है। इस लड़के का नाम जोशुआ वांग है।

क्यों खास है ये लड़का?

ये पहली बार नहीं है जब जोशुआ वांग चर्चा में रहे हों। इसके पहले 2014 में वे तब दुनिया की नजरों में आए थे जब उन्होंने ‘अम्ब्रेला मूवमेंट’ चलाया था। उस वक्त उनकी उम्र महज 19 साल थी। इसी आंदोलन के कारण प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका टाइम ने जोशुआ का नाम साल 2014 के सबसे प्रभावी किशोरों में शामिल किया था।

इतना ही नहीं,  साल 2015 में फॉर्च्युन मैगजीन ने उन्हें ‘दुनिया के महानतम नेताओं’ की लिस्ट में जगह दी थी। वहीं, साल 2018 में वांग को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भी नामित किया गया। जोशुआ फिलहाल हांगकांग की राजनीतिक पार्टी डेमोसिस्टो के महासचिव हैं। उन्होंने महज 19 साल की उम्र में ये पार्टी बनाई थी।http://www.satyodaya.com

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