Connect with us

Featured

अपनी धरती से इस्लाम का नामो-निशान मिटा देना चाहता है चीन…

Published

on

थम नहीं रहा चीन का मुस्लिमों पर कहर, ढहा दीं दर्जनों मस्जिदें

नई दिल्ली। ऐसा लगता है कि चीन अपने देश से इस्लाम का नामो-निशान मिटा देना चाहता है। विश्व विरादरी की नाराजगी को दरकिनार करते हुए चीन लगातार मुस्लिम समुदाय के खिलाफ दमनपूर्ण अभियान छेड़े हुए है। पिछले काफी दिनों से खबरें आ रही थीं कि चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिमों को विचारधारा बदलने के लिए हजारों शिविर बनाए गए हैं। जिनमें उइगर मुस्लिमों को जबरन कैद कर जुल्म किए जाते हैं। हालांकि चीन ने कभी भी इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया। अब खबर आई है कि रमजान की शुरुआत होते ही मुस्लिम बहुल शिनजियांग प्रांत में सरकारी अधिकारियों, छात्रों और बच्चों के रोजे रखने पर प्रतिबंध लगा दिया है। चीन की सरकारी वेबसाइट पर इस बारे में निर्देश जारी किया गया। यहां मुसलमानों की पहचान खत्म की की जा रही है। वहां रहने वालों मुसलमानों के खिलाफ कड़े से कड़े प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। यहां न केवल रोजे रखने पर पाबंदी है, बल्कि किसी भी तरह के धार्मिक अनुष्ठान करने पर भी प्रतिबंध है।

यह भी पढ़ें-रमजान का पाक माह शुरू होते ही पाकिस्तान तालिबान ने लाहौर में खेला खूनी खेल…

इतना नहीं, मुस्लिम समाज के लोगों के दाढ़ी रखने, नमाज करने, महिलाओं के बुर्का या हिजाब पहनने पर भी पाबंदी है। चीन में इस तरह का प्रतिबंध खास तौर पर पश्चिमी शिनजियांग प्रांत में है, जहां प्रशासन इस पर कड़ी नजर रख रहा है कि उनके निर्देशों का पालन किया जा रहा है या नहीं। यहां मुस्लिम घरों की निगरानी के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बलों की तैनाती की गई है, जो आए दिन लोगों के घरों में तलाशी लेते हैं। साथ ही सड़कों और गलियों में लगाए गए सर्विलांस कैमरों की मदद से भी उन पर नजर रखी जा रही है। इतना ही नहीं चीन की सरकार ने ध्वनि प्रदूषण का तर्क देते हुए सभी 355 मस्जिदों से लाउड स्पीकरों को हटाने के लिए पहले से ही आदेश दे चुकी है। मस्जिदों के ऊपर चीन का राष्ट्रीय झंडा लगाने का भी आदेश दिया गया है।

यही नहीं हाल के दिनों में निंक्सिआ प्रांत के कई मुस्लिम इलाकों से अरबी में लिखे संदेश भी हटा दिए गए हैं। शिनजियांग प्रांत में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के कैडर इस प्रतिबंध को लागू करने में जुटे हैं। वहीं दूसरी ओर हाल की कई रिपोर्ट्स में इस बात का खुलासा हुआ है कि चीन ने शिनजियांग में इस्लामिक धार्मिक स्थलों को किस तरह बड़े पैमाने पर नष्ट कर दिया है।

यह भी पढ़ें-चुनाव आयोग ने 45 हजार मछुआरों का लिस्ट से हटाया नाम, अब मद्रास कोर्ट ने मांगा जवाब…

द गार्जियन और बेलिंगकैट वेबसाइट ने सेटेलाइट तस्वीरों से 91 धार्मिक स्थलों की निगरानी की तो पाया कि करीब 31 मस्जिदों और दो महत्वपूर्ण इस्लामिक स्थलों को 2016 से लेकर 2018 के बीच गंभीर क्षति पहुंचाई गई है। गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, इन धार्मिक स्थलों में से 15 इमारतों का लगभग या पूरी तरह से नामोनिशान मिटा दिया गया है। कई मस्जिदों में गुंबद को पूरी तरह से हटा दिया गया था। मस्जिद की तरह इस्तेमाल की जा रही 9 अन्य इमारतों को भी पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया। उइगर मुसलमानों के लिए इमाम आसिम श्राइन बहुत ही महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है। इलाके की सबसे बड़ी मस्जिद कारगिलिक मस्जिद को भी चीनी सरकार ने बर्बाद कर दिया। होतन के नजदीक सैकड़ों साल पुरानी युतियन एतिका मस्जिद जहां पर स्थानीय नमाज अदा करने के लिए जुटते थे, उसे भी ढहा दिया गया है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने किया खुलासा

हयूमन राइट्स वाच (एचआरडब्लू) की इसी हफ्ते जारी की गई रिपोर्ट में इस बारे में दावा किया गया है। संयुक्त राष्ट्र की नस्ली भेदभाव उन्मूलन समिति ने उइगर मुस्लिमों के साथ किए जा रहे इस व्यवहार पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रि-एजुकेशनल कैंपों में दौरों के बीच अधिकारी मुसलमानों से उनकी जिंदगी और राजनीतिक विचारों के बारे में पूछताछ करते हैं। एक तरह से वे उनका राजनीतिक शुद्धीकरण करना चाहते हैं। संयुक्त राष्ट्र की निगरानी समूहों का कहना है कि उइगरों मुस्लिमों को चैकसी और सुरक्षा अभियानों के बहाने निशाना बनाया गया है। हजारों उइगर मुस्लिमों को हिरासत में रखा गया है और उन्हें विचारधारा बदलने वाले केंद्रों में भेज दिया गया है। विदेशों से शिनजियांग प्रांत में लौटने वाले सैकड़ों उइगर छात्र गायब हो गए हैं। उनमें से कई हिरासत में हैं और कई हिरासत में मर भी चुके हैं।#UN

संयुक्त राष्ट्र की निगरानी समिति के एक अनुमान के मुताबिक है कि 10 लाख से ज्यादा लोगों को तथाकथित कट्टरता विरोधी शिविरों में कैद करके रखा गया है और अन्य 20 लाख को राजनीतिक और सांस्कृतिक विचारधारा बदलने वाले तथाकथित पुनर्शिक्षण शिविरों में जबरन भेजा गया है। बता दें कि चीन मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों के उत्पीड़न और उनके दमन की कोशिश के लिए पूरी दुनिया में आलोचना झेल रहा है। राज्य विभाग के अनुमान के मुताबिक, करीब 20 लाख उइगर, काजाकास, किर्गिज समेत तुर्की मुस्लिमों को बीजिंग के प्रशिक्षण कैंप के नाम पर कैद में रखा जा रहा है। लोग इन प्रशिक्षण कैंपों को डिटेंशन कैंप कहते हैं।

भुक्तभोगी महिला ने बयां की हकीकत

हाल में चीन की सताई उइगर महिला ने वहां वहां होने अत्याचारों की पोल खोली थी। गुलनाज नाम की यह महिला फिलहाल सुरक्षित है और अपने माता-पिता के साथ लंदन में रह रही हैं। महिला बताती है कि वहां रहनेवाले उइगर मुसलमान हमेशा इस डर में जीते हैं कि ना जाने कब उन्हें सरकार का कोई शख्स उठाकर ले जाए और परिवार और बच्चों से दूर कहीं नजरबंद कर दे। उन्हें यह तक नहीं पता होता कि वे कहां हैं, कब छूटेंगे और अपने परिवार से फिर कभी मिल भी पाएंगे या नहीं। महिला ने इंडिपेंडेंट के लिए लिखे अपने लेख में कहा, हमारे पास हमारी अपनी भाषा, अपना कल्चर और अपना संगीत है, लेकिन हम इस्लाम को मानते हैं और इसी वजह से चीन हम पर अत्याचार करता है। वह जब 11 साल की थी तब चीन में रहती थीं। गुलनाज बताती हैं कि उस वक्त उन्हें यही डर रहता था कि अगर कुछ गलत हुआ तो उनके माता-पिता भी उन्हें नहीं बचा पाएंगे। गुलनाज लिखती हैं कि वन चाइल्ड की पॉलिसी चीन में खत्म होने के बावजूद उइगरों पर विशेष नजर रखी जाती थी और जबरन गर्भपात करवाया जाता था। ऐसे में उनकी एक पड़ोसन की मौत हो गई थी। जिसके बाद उन्होंने चीन छोड़ने का फैसला कर लिया था।

यह भी पढ़ें-अखिलेश से कम नही प्रियंका, 9 और 10 को सिद्धार्थनगर में अपने-अपने प्रत्याशी के लिए करेंगे चुनाव प्रचार

लेखिका के मुताबिक, वह यूएई भी गई थीं, लेकिन वहां भी चीनी दूतावास उनपर विशेष नजर रखता था। गुलनाज के मुताबिक, किसी भी देश जाने से पहले चीन से उसके संबंधों के बारे में देखना पड़ता है क्योंकि वह कई देशों पर उइगरों को डिपोर्ट करने का दवाब बना चुका है।
लेखिका के मुताबिक, यह सब 1949 से (पूर्वी तुर्कस्तान पर चीन के कब्जे के बाद) शुरू हो गया था। तब सबसे पहले बच्चों को कुरान पढ़ने से रोका गया था, फिर मस्जिद पर जाने में पाबंदी लगाई गई। इसके बाद रमजान, दाढ़ी बढ़ाना, बच्चों के इस्लामिक नाम रखने तक पर आपत्ति जताई गई। इतना ही नहीं वहां चीनी भाषा न आने पर नौकरी तक नहीं दी जाती। गुलनाज यहां तक कहती हैं कि जिन उइगरों को चीन कैद करके रखता हैं, उनके मारकर अंगों की तस्करी तक की जाती है।

कई विश्लेषकों का मानना है कि चीनी सरकार धार्मिक स्थलों का इसलिए सफाया कर रही है ताकि चीन में इस्लाम धर्म की पहचान को पूरी तरह से मिटाया जा सके। होतान के एक पूर्व निवासी ने गार्जियन से बातचीत में कहा, अगर आप वर्तमान पीढ़ी से उनके माता-पिता छीन लेते हो और दूसरी तरफ उनकी जड़ों की याद दिलाने वाली उनकी सांस्कृतिक विरासत को बर्बाद कर देते हो तो जब ये बड़े होंगे उनके लिए यह एक विदेशी धरती बन जाएगी। उनका इशारा मुस्लिमों को कैंप में रखे जाने की तरफ था। # China’s Uighur
हालांकि, बीजिंग इस्लाम और ईसाई धर्म के सिनिकरण के लक्ष्य को लेकर खुलकर सामने आता है। चीन का मानना है कि हर धर्म को चीन के राष्ट्रीय हितों के अनुरूप चलना होगा। जनवरी महीने में चीन ने पंचवर्षीय योजना पेश की थी ताकि इस्लाम को समाजवाद के सांचे में ढाले जा सके। विश्लेषकों का कहना है कि इस्लामिक इमारतों को ढहाना इसी अभियान का एक हिस्सा है।
शिनजियांग के एक इतिहासकार डेविड ब्रोफी ने कहा, शिनजियांग का इस्लामिक ढांचा भारतीय और पश्चिमी एशियाई शैली से मिलता-जुलता है।

इससे क्षेत्र का विस्तृत इस्लामिक दुनिया से संबंध उजागर होता है। चीन इन संरचनाओं को नष्ट कर एक नए सिनीकरण उइगर इस्लाम को उभारने के लिए रास्ता साफ करना चाहता है।# China’s Uighur कुछ समाजसेविओं का कहना है कि इस तरह की धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों को नष्ट करना उइगर मुसलमानों की अगली पीढ़ी को चीनी आबादी में मिलाने के लिए किया जा रहा है। एक पूर्व निवासी का कहना है कि शिनजियांग में अधिकतर उइगरों ने मस्जिद जाना बंद कर दिया है क्योंकि चीनी प्रशासन उनकी कड़ी निगरानी कर रहा है। मस्जिद जाने के लिए अपनी आईडी रजिस्टर करनी होती है। मस्जिदों में वार्षिक उत्सवों का आयोजन तो कई सालों पहले ही बंद हो चुका है।#Beijing

आरोपों को नकार रहा चीन

अमेरिकी अधिकारियों ने कई मौकों पर चीन के इस बर्ताव की निंदा की है। लेकिन चीन इसे आतंकवाद से लड़ने का जरिया बताकर अपना बचाव करता है और इन कैंपों को बोर्डिंग स्कूल जैसे प्रशिक्षण कैंप की तरह पेश करता है। चीन मुस्लिम अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किए जाने के आरोप को हमेशा से खारिज करता रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग से जब मस्जिदों को ढहाए जाने पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी किसी स्थिति की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, चीन धर्म की स्वतंत्रता के पक्ष में है और किसी भी तरह के धार्मिक अतिवाद से लड़ने में विश्वास करता है. चीन में करीब 2 करोड़ मुस्लिम हैं और 35,000 मस्जिदें हैं। कानून के दायरे में रहकर ज्यादातर लोगों को अपनी धार्मिक गतिविधियों को स्वतंत्रतापूर्वक करने का अधिकार है।#Terrorism

जेहाद के नाम पर इस्लाम को कर रहे बदनाम

पाकिस्तान सहित कुछ इस्लामिक देशों में पल रहे आतंकवादी संगठनों और उनके आकाओं ने मुस्लिम कौम को इतना बदनाम कर दिया है कि अब दुनिया के कई गैरमुस्लिम देशों में नेक और अमनपसंद मुसलमानों को भी मुश्किलों का सामना करना पड. रहा है। अपने स्वार्थ और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए नौजवान मुस्लिम युवाओं को जेहाद के नाम पर आतंकवाद की राह पर ढकेलने वाले मौलानाओं और आतंक के आकाओं ने इस्लाम को बदनाम कर दिया है। इसी का परिणाम है कि हाल ही में ईस्टर पर हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद श्रीलंका ने सैकड़ों विदेशी मुस्लिम धर्मगुरुओं को देश से बाहर का रास्ता दिखा दिया तो वहीं बुर्के पर बैन लगा दिया। यूरोपीय देशों में मुस्लिमों को संदेह की नजर से देखा जाने लगा है। लेकिन इन सब से आगे निकलते हुए चीन ने मुस्लिमों के खिलाफ सख्त अभियान छेड़ते हुए है। ऐसा लगता है कि चीन सरकार अपने देश से इस्लाम का नामो-निशान मिटा देना चाहती है। # Islam

इस मामले में चीन का सदाबहार मित्र पाकिस्तान भी आंखें बंद किए है। उसने कभी भी उइगर मुस्लिमों पर किए जा रहे जुल्म के खिलाफ चीन के सामने अपना विरोध नहीं दर्ज कराया।http://www.satyodaya.com

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Featured

डीएम ने दिए निराश्रित पशुओं को पकड़ने के लिए वाहन उपलब्ध कराने के निर्देश…

Published

on

नगर निगम की दर पर हो मृत्यु पशुओं के निस्तारण की व्यवस्था, कांजीहाउस निर्माण के लिए जिला पंचायत को भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश

लखनऊ। लखनऊ जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने कहा है कि निराश्रित पशुओं को पकड़ने के लिए कोई वाहन की व्यवस्था है यदि नहीं है तो वाहन खरीदने के लिए विभिन्न संस्थाओं सामाजिक संस्थाओं से मिलकर स्वयं सहायता के रूप में धनराशि की व्यवस्था की जाये। जिलाधिकारी ने ये बातें गुरूवार को कलेक्ट्रेट स्थिति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सभागार में एसपीसीए की समीक्षा बैठक में कही। बैठक की अध्यक्षता के दौरान डीएम ने बताया कि निराश्रित बेसहारा सड़क व गलियों के कुत्तों को जो कि दुर्घटना में घायल हो जाते हैं तथा उन्हें किसी प्रकार की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती है। उन्हें चिकित्सा उपलब्ध कराने एवं भरण पोषण के एसपीसीए आश्रम स्थल पर रखा जाता है।

यह भी पढ़ें :- कम लागत में लगेंगी नवीनतम् तकनीक की डायग्नोस्टिक मशीनें

उन्होंने बताया कि उनकी अध्यक्षता में सोसाइटी का संचालन किया जाता है। उपरोक्त संस्था को किसी भी प्रकार की आर्थिक अनुदान राज्य सरकार, केन्द्र सरकार से नहीं मिलती। एसपीसीए सोसाइटी फार प्रिवेन्शन क्रूयल्टी टू ऐनीमल्स के पशु चिकित्सालय न्यू हैदराबाद लखनऊ पर बने चिकित्सालय पर चिकित्सा एवं देखभाल की जाती है। नगरीय क्षेत्र में कुत्तों में बधियाकरण के सम्बन्ध में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि यदि उन्हे स्थान एवं सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाये तो डाॅक्टरों के रोस्टर के अनुसार एक दिन में 10 का बधिायाकरण किया जा सकता है। वहीं डीएम ने मुख्य अधिकारी जिला पंचायत को निर्देश दिया कि नगर निगम की दर पर मृत्यु पशुओं के निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करें। कांजी हाउस की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत की भूमि जिला पंचायत को उपलब्धा करा दी जाये जहां पर कांजी हाउस का निर्माण कराया जा सके और निराश्रित पशुओं को रखा जाये।http://www.satyodaya.com

Continue Reading

Featured

राजधानी में लगातार बढ़ रही टीबी मरीजों की संख्या, सरोजनी नगर ब्लॉक में मिले सबसे ज्यादा 26 मरीज

Published

on

लखनऊ। राजधानी में टीबी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 6 लाख 33 हजार 712 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। जिसमें से 2006 व्यक्तियों में संदिग्ध टीबी रोग के लक्षण पाए गए। जांच कराए जाने के बाद 164 व्यक्तियों में इसकी पुष्टि की गई। जबकि सीएमओ ने 5 लाख 40 हजार व्यक्तियों को सक्रिय क्षयरोग खोज अभियान के लिए स्क्रीनिंग किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। सीएमओ कार्यालय में गुरूवार को जनपद स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि 10 से 22 जून तक चिन्हित क्षेत्रों में सक्रिय क्षयरोग खोज अभियान संचालित किया गया। इसके लिए 750 सदस्यों द्वारा 5 लाख 40 हजार व्यक्तियों को अभियान के लिए स्क्रीनिंग किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।

यह भी पढ़ें :- उत्तर प्रदेश में 22 करोड़ होंगे पौधारोपड़, लक्ष्य प्राप्ति के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश…

उन्होंने बताया कि उक्त दिवस के दौरान पर्यवेक्षकों व टीम सदस्यों द्वारा 6 लाख 33 हजार 712 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। जिसमें से 2006 व्यक्तियों में संदिग्ध क्षय रोग के लक्षण पाए गए। जांच कराए जाने के उपरांत 164 व्यक्तियों में क्षय रोग की पुष्टि संबंधित क्षेत्र के चिकित्सकों द्वारा किया गया जिनको कार्यक्रम अंतर्गत निकटतम केंद्र पर उपचार की व्यवस्था प्रारंभ करा दी गई है। डीटीओ लखनऊ डॉक्टर बी.के. सिंह ने अवगत कराया कि 10 दिवसीय अभियान के दौरान सरोजनी नगर ब्लॉक में सबसे ज्यादा 26 रोगी चिन्हित किए गए। सभी 16403 चयनित रोगियों को डीबीटी के माध्यम से निक्षय पोषण योजना का लाभ सीधे उनके खाते में स्थानांतरित किए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। 500 प्रति माह की दर से मरीजों के खाते में उपचार अवधि तक निरंतर स्थानांतरित की जाती रहेगी।

सीएमओ ने बताया कि डीबीटी के माध्यम से अब तक लखनऊ में 2 करोड़ 38 लाख 42 हजार का भुगतान मरीजों के खाते में किया जा चुका है। सक्रिय रोगी खोज अभियान में जनपद लखनऊ निरंतर उपलब्धियां हासिल कर रहा है। प्रथम चरण में फरवरी 2018 में 38 क्षयरोगी। द्वितीय चरण जून में 72 क्षयरोगी, तृतीय चरण सितंबर में 96 क्षयरोगी, चतुर्थ चरण जनवरी 2019 में 119 क्षयरोगी तथा जून के चरण में कुल 164 क्षय रोगी की खोजे गए हैं।http://www.satyodaya.com

Continue Reading

Featured

सैम मानेकशां : एक ऐसा भारतीय योद्धा जिसने पाकिस्तान को चीर डाला, इंदिरा भी मानती थीं बहादुरी का लोहा

Published

on

लखनऊ। पाकिस्तान को चीर कर उसे दो भागों में बांटने वाले भारतीय सेना के जांबाज हीरो पफील्ड मार्शल सैम मानेकशां की आज (गुरुवार) को पुण्यतिथि है। 27 जून 2008 का ही वो दिन था जब सैम मानेकशॉ ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। मानेकशां बहादुरी और सैन्य कारनामों के साथ अपने स्टाइल, हाजिर जवाबी के लिए भी जाने जाते थे। उन्हीं के नेतृत्व में भारत ने साल 1971 की जंग में पाकिस्तान को घुटनों पर छुका दिया था। जिसके बाद बांग्लादेश का जन्म हुआ था। सैम मानेकशॉ का पूरा नाम होरमुसजी फ्रामजी जमशेदजी मानेकशॉ था। उनका जन्म 3 अप्रैल 1914 को अमृतसर में एक पारसी परिवार में हुआ था। बचपन से ही निडर और बहादुरी की वजह से उनके चाहने वाले इन्हें सैम बहादुर कहते थे। सैम भारतीय सेना के पहले ऐसे जनरल बने जिन्हें उनकी बहादुरी के लिए प्रमोट कर फील्ड मार्शल की रैंक दे दी गई थी। पिता के विरोध के बावजूद वह सेना में आए। इंडियन मिलिट्री एकेडमी, देहरादून में एडमिशन के लिए प्रवेश परीक्षा दी। वह 1932 में पहले 40 कैडेट्स वाले बैच में शामिल हुए।#SamManekshaw

यह भी पढ़ें-जापान में अपने अजीज मित्र से मिले मोदी, आबे बोले-अब भारत आने की बारी मेरी…

मानेकशां जब सेन्य अधिकारी बने तो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अपने सख्त मिजाज के लिए जानी थीं। अधिकारी और नेता उनसे डरते थे। लेकिन फील्ड मार्शल मानेकशां अपने मिजाज के अनुरूप ही इंदिरा के साथ भी पेश आते थे। जिसका एक किस्सा काफी मशहूर है। भारत-पाकिस्तान के बीच जब 1971 की लड़ाई शुरू होने वाली थी। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सैम मानेकशॉ से पूछा था, क्या लड़ाई की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं? इस पर मानेकशॉ ने तपाक से कहा- ‘I Am Always Ready Sweety’ । माना जाता है कि वह पारसी कनेक्शन होने की वजह से भी ऐसे बोलते थे, क्योंकि इंदिरा के पति फिरोज गांधी पारसी थे। मेजर जनरल वीके सिंह कहते हैं, एक बार इंदिरा गांधी जब विदेश यात्रा से लौटीं तो मानेकशॉ उन्हें रिसीव करने पालम हवाई अड्डे गए। इंदिरा गांधी को देखते ही उन्होंने कहा कि आपका हेयर स्टाइल जबरदस्त लग रहा है। इस पर इंदिरा गांधी मुस्कराईं और बोलीं, और किसी ने तो इसे नोटिस ही नहीं किया।

सैम को सबसे पहले शोहरत मिली साल 1942 में। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान बर्मा के मोर्चे पर एक जापानी सैनिक ने अपनी मशीनगन की सात गोलियां उनकी आंतों, जिगर और गुर्दों में उतार दीं। उनका बचना लगभग नामुमकिन हो गया था। उन्हें गंभीर स्थिति में अस्पताल लाया गया। इस दौरान एक सर्जन ने उनका ऑपरेशन करने से पहले उनसे पूछा- आपके साथ क्या हुआ था? तो उन्होंने हंसते हुए जवाब दिया, मुझे एक खच्चर ने लात मार दी है।
ऐसा ही एक और दिलचस्प किस्सा है। 1962 में जब मिजोरम की एक बटालियन ने भारत-चीन युद्ध से दूरी बनाने की कोशिश की तो मानेकशॉ ने उस बटालियन को पार्सल में चूड़ी के डिब्बे के साथ एक नोट भेजा। जिस पर लिखा था कि अगर लड़ाई से पीछे हट रहे हो तो अपने आदमियों को ये पहनने को बोल दो। फिर उस बटालियन ने लड़ाई में हिस्सा लिया और भरपूर वीरता दिखाई।
अपनी शरारतों और मजाक के लिए प्रसिद्ध सैम अनुशासन या सैनिक नेतृत्व और नौकरशाही के बीच संबंधों के मामले में कोई समझौता नहीं करते थे।

उनके मिलिट्री असिस्टेंट रहे लेफ्टिनेंट जनरल दीपेंदर सिंह ने बताया था कि एक बार सेना मुख्यालय में एक बैठक हो रही थी। रक्षा सचिव हरीश सरीन भी वहां मौजूद थे। उन्होंने वहां बैठे एक कर्नल से कहा, यू देयर, ओपन द विंडो। वह कर्नल उठने लगा। तभी सैम ने कमरे में प्रवेश किया। रक्षा सचिव की तरफ मुड़े और बोले, सचिव महोदय, आइंदा से आप मेरे किसी अफसर से इस टोन में बात नहीं करेंगे। यह अफसर कर्नल है, यू देयर नहीं। उस जमाने के बहुत शक्तिशाली आईसीएस अफसर हरीश सरीन को उनसे माफी मांगनी पड़ी।
सैम की बेटी माया दारूवाला कहती हैं कि सैम अक्सर कहा करते थे कि लोग सोचते हैं कि जब हम देश को जिताते हैं तो यह बहुत गर्व की बात है लेकिन इसमें कहीं न कहीं उदासी का पुट भी छिपा रहता है क्योंकि लोगों की मौतें भी हुई होती हैं।
उनकी बेटी माया दारूवाला ने एक मीडिया हाउस को बताया था कि लोग सोचते हैं कि सैम बहुत बड़े जनरल हैं, उन्होंने कई लड़ाइयां लड़ी हैं, उनकी बड़ी-बड़ी मूंछें हैं तो घर में भी उतना ही रौब जमाते होंगे। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था। वह बहुत खिलंदड़ थे, बच्चे की तरह। हमारे साथ शरारत करते थे। हमें बहुत परेशान करते थे। कई बार तो हमें कहना पड़ता था कि डैड स्टॉप इट। जब वो कमरे में घुसते थे तो हमें यह सोचना पड़ता था कि अब यह क्या करने जा रहे हैं।http://www.satyodaya.com

Continue Reading

Category

Weather Forecast

June 30, 2019, 2:51 pm
Mostly cloudy
Mostly cloudy
35°C
real feel: 41°C
current pressure: 1000 mb
humidity: 55%
wind speed: 1 m/s ESE
wind gusts: 1 m/s
UV-Index: 3
sunrise: 4:46 am
sunset: 6:34 pm
 

Recent Posts

Trending