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अपनी धरती से इस्लाम का नामो-निशान मिटा देना चाहता है चीन…

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थम नहीं रहा चीन का मुस्लिमों पर कहर, ढहा दीं दर्जनों मस्जिदें

नई दिल्ली। ऐसा लगता है कि चीन अपने देश से इस्लाम का नामो-निशान मिटा देना चाहता है। विश्व विरादरी की नाराजगी को दरकिनार करते हुए चीन लगातार मुस्लिम समुदाय के खिलाफ दमनपूर्ण अभियान छेड़े हुए है। पिछले काफी दिनों से खबरें आ रही थीं कि चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिमों को विचारधारा बदलने के लिए हजारों शिविर बनाए गए हैं। जिनमें उइगर मुस्लिमों को जबरन कैद कर जुल्म किए जाते हैं। हालांकि चीन ने कभी भी इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया। अब खबर आई है कि रमजान की शुरुआत होते ही मुस्लिम बहुल शिनजियांग प्रांत में सरकारी अधिकारियों, छात्रों और बच्चों के रोजे रखने पर प्रतिबंध लगा दिया है। चीन की सरकारी वेबसाइट पर इस बारे में निर्देश जारी किया गया। यहां मुसलमानों की पहचान खत्म की की जा रही है। वहां रहने वालों मुसलमानों के खिलाफ कड़े से कड़े प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। यहां न केवल रोजे रखने पर पाबंदी है, बल्कि किसी भी तरह के धार्मिक अनुष्ठान करने पर भी प्रतिबंध है।

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इतना नहीं, मुस्लिम समाज के लोगों के दाढ़ी रखने, नमाज करने, महिलाओं के बुर्का या हिजाब पहनने पर भी पाबंदी है। चीन में इस तरह का प्रतिबंध खास तौर पर पश्चिमी शिनजियांग प्रांत में है, जहां प्रशासन इस पर कड़ी नजर रख रहा है कि उनके निर्देशों का पालन किया जा रहा है या नहीं। यहां मुस्लिम घरों की निगरानी के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बलों की तैनाती की गई है, जो आए दिन लोगों के घरों में तलाशी लेते हैं। साथ ही सड़कों और गलियों में लगाए गए सर्विलांस कैमरों की मदद से भी उन पर नजर रखी जा रही है। इतना ही नहीं चीन की सरकार ने ध्वनि प्रदूषण का तर्क देते हुए सभी 355 मस्जिदों से लाउड स्पीकरों को हटाने के लिए पहले से ही आदेश दे चुकी है। मस्जिदों के ऊपर चीन का राष्ट्रीय झंडा लगाने का भी आदेश दिया गया है।

यही नहीं हाल के दिनों में निंक्सिआ प्रांत के कई मुस्लिम इलाकों से अरबी में लिखे संदेश भी हटा दिए गए हैं। शिनजियांग प्रांत में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के कैडर इस प्रतिबंध को लागू करने में जुटे हैं। वहीं दूसरी ओर हाल की कई रिपोर्ट्स में इस बात का खुलासा हुआ है कि चीन ने शिनजियांग में इस्लामिक धार्मिक स्थलों को किस तरह बड़े पैमाने पर नष्ट कर दिया है।

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द गार्जियन और बेलिंगकैट वेबसाइट ने सेटेलाइट तस्वीरों से 91 धार्मिक स्थलों की निगरानी की तो पाया कि करीब 31 मस्जिदों और दो महत्वपूर्ण इस्लामिक स्थलों को 2016 से लेकर 2018 के बीच गंभीर क्षति पहुंचाई गई है। गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, इन धार्मिक स्थलों में से 15 इमारतों का लगभग या पूरी तरह से नामोनिशान मिटा दिया गया है। कई मस्जिदों में गुंबद को पूरी तरह से हटा दिया गया था। मस्जिद की तरह इस्तेमाल की जा रही 9 अन्य इमारतों को भी पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया। उइगर मुसलमानों के लिए इमाम आसिम श्राइन बहुत ही महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है। इलाके की सबसे बड़ी मस्जिद कारगिलिक मस्जिद को भी चीनी सरकार ने बर्बाद कर दिया। होतन के नजदीक सैकड़ों साल पुरानी युतियन एतिका मस्जिद जहां पर स्थानीय नमाज अदा करने के लिए जुटते थे, उसे भी ढहा दिया गया है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने किया खुलासा

हयूमन राइट्स वाच (एचआरडब्लू) की इसी हफ्ते जारी की गई रिपोर्ट में इस बारे में दावा किया गया है। संयुक्त राष्ट्र की नस्ली भेदभाव उन्मूलन समिति ने उइगर मुस्लिमों के साथ किए जा रहे इस व्यवहार पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रि-एजुकेशनल कैंपों में दौरों के बीच अधिकारी मुसलमानों से उनकी जिंदगी और राजनीतिक विचारों के बारे में पूछताछ करते हैं। एक तरह से वे उनका राजनीतिक शुद्धीकरण करना चाहते हैं। संयुक्त राष्ट्र की निगरानी समूहों का कहना है कि उइगरों मुस्लिमों को चैकसी और सुरक्षा अभियानों के बहाने निशाना बनाया गया है। हजारों उइगर मुस्लिमों को हिरासत में रखा गया है और उन्हें विचारधारा बदलने वाले केंद्रों में भेज दिया गया है। विदेशों से शिनजियांग प्रांत में लौटने वाले सैकड़ों उइगर छात्र गायब हो गए हैं। उनमें से कई हिरासत में हैं और कई हिरासत में मर भी चुके हैं।#UN

संयुक्त राष्ट्र की निगरानी समिति के एक अनुमान के मुताबिक है कि 10 लाख से ज्यादा लोगों को तथाकथित कट्टरता विरोधी शिविरों में कैद करके रखा गया है और अन्य 20 लाख को राजनीतिक और सांस्कृतिक विचारधारा बदलने वाले तथाकथित पुनर्शिक्षण शिविरों में जबरन भेजा गया है। बता दें कि चीन मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों के उत्पीड़न और उनके दमन की कोशिश के लिए पूरी दुनिया में आलोचना झेल रहा है। राज्य विभाग के अनुमान के मुताबिक, करीब 20 लाख उइगर, काजाकास, किर्गिज समेत तुर्की मुस्लिमों को बीजिंग के प्रशिक्षण कैंप के नाम पर कैद में रखा जा रहा है। लोग इन प्रशिक्षण कैंपों को डिटेंशन कैंप कहते हैं।

भुक्तभोगी महिला ने बयां की हकीकत

हाल में चीन की सताई उइगर महिला ने वहां वहां होने अत्याचारों की पोल खोली थी। गुलनाज नाम की यह महिला फिलहाल सुरक्षित है और अपने माता-पिता के साथ लंदन में रह रही हैं। महिला बताती है कि वहां रहनेवाले उइगर मुसलमान हमेशा इस डर में जीते हैं कि ना जाने कब उन्हें सरकार का कोई शख्स उठाकर ले जाए और परिवार और बच्चों से दूर कहीं नजरबंद कर दे। उन्हें यह तक नहीं पता होता कि वे कहां हैं, कब छूटेंगे और अपने परिवार से फिर कभी मिल भी पाएंगे या नहीं। महिला ने इंडिपेंडेंट के लिए लिखे अपने लेख में कहा, हमारे पास हमारी अपनी भाषा, अपना कल्चर और अपना संगीत है, लेकिन हम इस्लाम को मानते हैं और इसी वजह से चीन हम पर अत्याचार करता है। वह जब 11 साल की थी तब चीन में रहती थीं। गुलनाज बताती हैं कि उस वक्त उन्हें यही डर रहता था कि अगर कुछ गलत हुआ तो उनके माता-पिता भी उन्हें नहीं बचा पाएंगे। गुलनाज लिखती हैं कि वन चाइल्ड की पॉलिसी चीन में खत्म होने के बावजूद उइगरों पर विशेष नजर रखी जाती थी और जबरन गर्भपात करवाया जाता था। ऐसे में उनकी एक पड़ोसन की मौत हो गई थी। जिसके बाद उन्होंने चीन छोड़ने का फैसला कर लिया था।

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लेखिका के मुताबिक, वह यूएई भी गई थीं, लेकिन वहां भी चीनी दूतावास उनपर विशेष नजर रखता था। गुलनाज के मुताबिक, किसी भी देश जाने से पहले चीन से उसके संबंधों के बारे में देखना पड़ता है क्योंकि वह कई देशों पर उइगरों को डिपोर्ट करने का दवाब बना चुका है।
लेखिका के मुताबिक, यह सब 1949 से (पूर्वी तुर्कस्तान पर चीन के कब्जे के बाद) शुरू हो गया था। तब सबसे पहले बच्चों को कुरान पढ़ने से रोका गया था, फिर मस्जिद पर जाने में पाबंदी लगाई गई। इसके बाद रमजान, दाढ़ी बढ़ाना, बच्चों के इस्लामिक नाम रखने तक पर आपत्ति जताई गई। इतना ही नहीं वहां चीनी भाषा न आने पर नौकरी तक नहीं दी जाती। गुलनाज यहां तक कहती हैं कि जिन उइगरों को चीन कैद करके रखता हैं, उनके मारकर अंगों की तस्करी तक की जाती है।

कई विश्लेषकों का मानना है कि चीनी सरकार धार्मिक स्थलों का इसलिए सफाया कर रही है ताकि चीन में इस्लाम धर्म की पहचान को पूरी तरह से मिटाया जा सके। होतान के एक पूर्व निवासी ने गार्जियन से बातचीत में कहा, अगर आप वर्तमान पीढ़ी से उनके माता-पिता छीन लेते हो और दूसरी तरफ उनकी जड़ों की याद दिलाने वाली उनकी सांस्कृतिक विरासत को बर्बाद कर देते हो तो जब ये बड़े होंगे उनके लिए यह एक विदेशी धरती बन जाएगी। उनका इशारा मुस्लिमों को कैंप में रखे जाने की तरफ था। # China’s Uighur
हालांकि, बीजिंग इस्लाम और ईसाई धर्म के सिनिकरण के लक्ष्य को लेकर खुलकर सामने आता है। चीन का मानना है कि हर धर्म को चीन के राष्ट्रीय हितों के अनुरूप चलना होगा। जनवरी महीने में चीन ने पंचवर्षीय योजना पेश की थी ताकि इस्लाम को समाजवाद के सांचे में ढाले जा सके। विश्लेषकों का कहना है कि इस्लामिक इमारतों को ढहाना इसी अभियान का एक हिस्सा है।
शिनजियांग के एक इतिहासकार डेविड ब्रोफी ने कहा, शिनजियांग का इस्लामिक ढांचा भारतीय और पश्चिमी एशियाई शैली से मिलता-जुलता है।

इससे क्षेत्र का विस्तृत इस्लामिक दुनिया से संबंध उजागर होता है। चीन इन संरचनाओं को नष्ट कर एक नए सिनीकरण उइगर इस्लाम को उभारने के लिए रास्ता साफ करना चाहता है।# China’s Uighur कुछ समाजसेविओं का कहना है कि इस तरह की धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों को नष्ट करना उइगर मुसलमानों की अगली पीढ़ी को चीनी आबादी में मिलाने के लिए किया जा रहा है। एक पूर्व निवासी का कहना है कि शिनजियांग में अधिकतर उइगरों ने मस्जिद जाना बंद कर दिया है क्योंकि चीनी प्रशासन उनकी कड़ी निगरानी कर रहा है। मस्जिद जाने के लिए अपनी आईडी रजिस्टर करनी होती है। मस्जिदों में वार्षिक उत्सवों का आयोजन तो कई सालों पहले ही बंद हो चुका है।#Beijing

आरोपों को नकार रहा चीन

अमेरिकी अधिकारियों ने कई मौकों पर चीन के इस बर्ताव की निंदा की है। लेकिन चीन इसे आतंकवाद से लड़ने का जरिया बताकर अपना बचाव करता है और इन कैंपों को बोर्डिंग स्कूल जैसे प्रशिक्षण कैंप की तरह पेश करता है। चीन मुस्लिम अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किए जाने के आरोप को हमेशा से खारिज करता रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग से जब मस्जिदों को ढहाए जाने पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी किसी स्थिति की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, चीन धर्म की स्वतंत्रता के पक्ष में है और किसी भी तरह के धार्मिक अतिवाद से लड़ने में विश्वास करता है. चीन में करीब 2 करोड़ मुस्लिम हैं और 35,000 मस्जिदें हैं। कानून के दायरे में रहकर ज्यादातर लोगों को अपनी धार्मिक गतिविधियों को स्वतंत्रतापूर्वक करने का अधिकार है।#Terrorism

जेहाद के नाम पर इस्लाम को कर रहे बदनाम

पाकिस्तान सहित कुछ इस्लामिक देशों में पल रहे आतंकवादी संगठनों और उनके आकाओं ने मुस्लिम कौम को इतना बदनाम कर दिया है कि अब दुनिया के कई गैरमुस्लिम देशों में नेक और अमनपसंद मुसलमानों को भी मुश्किलों का सामना करना पड. रहा है। अपने स्वार्थ और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए नौजवान मुस्लिम युवाओं को जेहाद के नाम पर आतंकवाद की राह पर ढकेलने वाले मौलानाओं और आतंक के आकाओं ने इस्लाम को बदनाम कर दिया है। इसी का परिणाम है कि हाल ही में ईस्टर पर हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद श्रीलंका ने सैकड़ों विदेशी मुस्लिम धर्मगुरुओं को देश से बाहर का रास्ता दिखा दिया तो वहीं बुर्के पर बैन लगा दिया। यूरोपीय देशों में मुस्लिमों को संदेह की नजर से देखा जाने लगा है। लेकिन इन सब से आगे निकलते हुए चीन ने मुस्लिमों के खिलाफ सख्त अभियान छेड़ते हुए है। ऐसा लगता है कि चीन सरकार अपने देश से इस्लाम का नामो-निशान मिटा देना चाहती है। # Islam

इस मामले में चीन का सदाबहार मित्र पाकिस्तान भी आंखें बंद किए है। उसने कभी भी उइगर मुस्लिमों पर किए जा रहे जुल्म के खिलाफ चीन के सामने अपना विरोध नहीं दर्ज कराया।http://www.satyodaya.com

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पत्नी ने पति को लीवर डोनेट कर बचाई जान, दोनों की हालत में काफी सुधार

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लिवर प्रत्यारोपण डोनर आईसीयू से बाहर वार्ड में शिफ्ट

लखनऊ। केजीएमयू में लिवर प्रत्यारोपण वाले मरीज के डोनर को आईसीयू से बाहर कर वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। जबकि मरीज अभी आईसीयू में ही है। दोनों की हालत में पहले से काफी सुधार हुआ है। दोनों मरीज की अच्छी रिकवरी हो रही है।

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अमेठी निवासी ज्ञानेंद्र सिंह का केजीएमयू में डॉक्टरों ने छह अक्तूबर को लिवर प्रत्यारोपण किया था। पत्नी वंदना ने उसे लिवर देकर जीवन दिया है। दोनों ही मरीज अब तक आईसीयू में थे। पांचवे दिन रविवार को डॉक्टरों ने दोनों की हालत में बेहतर सुधार होते देख डोनर वंदना को आईसीयू से बाहर कर वार्ड में भेज दिया है। जबकि अभी ज्ञानेंद्र को आईसीयू में ही रखकर इलाज दिया जा रहा है।

केजीएमयू के मीडिया प्रभारी डॉक्टर सुधीर सिंह ने बताया कि, दोनों मरीज की हालत में पहले से बहुत सुधार है। एहतियात के तौर पर मरीज ज्ञानेंद्र को आईसीयू में रखा है। मरीज की संक्रमण संबंधी जांच रिपोर्ट सामान्य आई है। खाने के लिए दोनों को अभी तरल पदार्थ ही दिया जा रहा है।http://www.satyodaya.com

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आपात स्थिति से निपटने का एलर्ट राजधानी के संस्थानों व अस्पतालों पर बेअसर

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ऑक्सीजन के अभाव में घंटो तड़पती रही महिला मरीज

लखनऊ। आपात स्थिति से निपटने के लिए शासन का एलर्ट राजधानी के संस्थानों व अस्पतालों पर बेअसर रहा। एक महिला मरीज को मेडिसिन विभाग के चिकित्सक व कर्मचारी ऑक्सीजन उपलब्ध न होने की बात कहकर टरकाते रहे। कई घंटो तक आॅक्सीजन के अभाव में महिला मरीज तड़पती रही। परिजनों के शोर शराबा करने पर उसे आॅक्सीजन उपलब्ध कराया गया। मरीज के साथ आए परिजन महिला को भर्ती करने के लिए हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते रहे। मरीज की हालत पहले से और खराब होने लगी। जिसके बाद ही आनन-फानन में परिजनों उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

ट्रॉमा सेंटर में करीब 400 बेड हैं जो शनिवार को पूरी तरह से भर गए थे। गंभीर मरीजों को बेड न खाली होने की बात कहकर भर्ती नहीं किया गया। लखनऊ के अमौसी निवासी महिला मरीज उमा (26) को आॅक्सीजन स्पोर्ट की आवश्यकता बताकर उसे डॉक्टरों ने उसे मेडिसिन वार्ड भेज दिया। परिजन जब यहां आए तो उन्हें आॅक्सीजन न उपलब्ध होने की बात कहकर टरकाते रहे। कई घंटो तक वह आॅक्सीजन के अभाव में तड़पती रही। मरीज की हालत पहले से और खराब हो गई तो परिजनों ने शोर शराबा शुरू कर दिया। जिसके बाद आनन-फानन में उसे आॅक्सीजन उपलब्ध कराया गया।

मरीज के साथ आयी उसकी बह प्राची ने बताया कि, मरीज की हालत बहुत खराब है। भर्ती के लिए हम लोगों ने यहां के पीआरओ से भी संपर्क किया लेकिन उन्होंने यहां बेड खाली न होने की बात कहकर दरकिनार कर दिया। परिजनों के मुताबिक उन्होंने चिकित्सक, कर्मचारी से लेकर पीआरओ तक के सामने हाथ जोड़ा लेकिन उसका कोई असर नहीं रहा। थक हारकर वह गंभीर मरीज को लेकर निजी अस्पताल पहुंच गए।

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दर्द से कराहता रहा मरीज

मेडिसिन वार्ड के बाहर ही महाराजगंज निवासी मरीज पंकज (15) दर्द से कराहता रहा। उसके पिता देवेन्द्र ने बताया कि यहां के डॉक्टर केवल एक वार्ड से दूसरे वार्ड में टहला रहे हैं। डॉक्टरों ने मेडिसिन वार्ड में भेजा है। बेड के लिए सुबह से यहां खड़े हैं लेकिन अभी तक नहीं मिला। बेटे की हालत पहले से और खराब होती जा रही है। ऐसे में हम इसे कहां लेकर जाएं। खबर लिखे जाने तक भी उसे बेड नहीं मिला था।

सिटी स्कैन के लिए नहीं आया नंबर

ट्रॉमा में कई गंभीर मरीजों को सुबह से शाम तक लंबी लाइन के बावजूद उनका नंबर नहीं आया। सीतापुर से आए संजीव ने बताया कि मां का सिटी स्कैन कराने के लिए सुबह से लाइन में लगे हैं लेकिन अभी तक नंबर नहीं आया। वहीं फैजाबाद के वैभव का अपनी बहन प्रिया और अनीस को अपने पिता अकरम के सिटी स्कैन के लिए शाम तक नंबर नहीं आया।

ट्रॉमा पीआरओ का कहना था कि यहां के ऑर्थोपेडिक, मेडिसिन, न्यूरोसर्जरी समेत कई विभागों के बेड फुल हो गए हैं। मरीज उमा के बारे में उनका कहना था कि उसे आॅक्सीजन स्पोर्ट की जरूरत है जो बेड मिलने पर ही उपलब्ध हो सकता है। ऐसे में अंदेशा यही लगाया गया कि आपात स्थिति में भी निपटने के लिए यहां पहले से कोई तैयारी नहीं की गई है।

लोहिया संस्थान में भी नहीं दिखी तैयारी

लोहिया संस्थान में भी आपात स्थिति से निपटने की कोई तैयारी नहीं दिखी। सुल्तानपुर से आए मरीज शमीम व हरदोई के चन्दन इमरजेंसी के बाहर सुबह से इलाज के अभाव में तड़पते रहे। उनका प्राथमिक उपचार तो किया गया लेकिन उन्हें बेड फुल होने की बात कहकर बाहर कर दिया गया।

सरकारी अस्पताल भी रहे बेखबर

वहीं राजधानी के प्रमुख सरकारी अस्पतालों बलरामपुर, सिविल, रानी लक्ष्मीबाई, लोकबंधु अस्पताल में भी कोई खास तैयारी नहीं दिखी। सीएमओ के कड़े आदेश के बावजूद अस्पतालों की व्यवस्थाओं को दुरुरस्त नहीं किया गया। यहां किसी मरीज को दवा नहीं मिली तो कोई भर्ती न होने की वजह से इमरजेंसी के सामने चक्कर काटता रहा। बलरामपुर अस्पताल प्रवक्ता एसएम त्रिपाठी ने बताया कि ऐसा कोई मामला आएगा तो उससे निपटा जाएगा। इमरजेंसी के डॉक्टरों को एलर्ट किया गया है। http://www.satyodaya.com

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त्योहारों को लेकर तैयारी पूरी, सुरक्षा व्यवस्था सख्त

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लखनऊ। अयोध्या भूमि विवाद पर शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर प्रदेश में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। पूरे प्रदेश में धारा-144 लागू है। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए। एडीजी लखनऊ जोन एस.एन. साबत ने कहा कि सभी लोग यह चाहते हैं कि शांति बनी रहे और हम भी यही संदेश देंगे। सभी अधिकारी लगातार निरीक्षण कर रहे हैं। अमन चैन बना हुआ है सब की ड्यूटी अलग-अलग महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लगाई गई है। सभी धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की जा रही है।

यह भी पढ़ें :- फैसले को लेकर एयरपोर्ट पर रही सुरक्षा व्यवस्था सख्त

उन्होने कहा कि 12 वफात एक महत्वपूर्ण त्योहार है। विशेष करके लखनऊ में जिसकी पूरी तैयारी कर ली गई है। उन्होने कहा कि बीते दिनों त्योहार के मद्देनजर पूरा भ्रमण कर सभी अधिकारियों की ड्यूटियां लगा दी गई हैं और जवानों को तैनात कर दिया गया है। इस बार गुरु नानक जी की 550वीं जयंती के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है उसको भी बेहतर तरीके से संपन्न कराया जाएगा। साथ ही कार्तिक पूर्णिमा हवाई स्नान भी है और अलग-अलग त्योहार हैं सभी पर नजर रखी जाएगी और उनका भी निरीक्षण कर लिया गया है।

हाई अलर्ट के बीच हुसैनाबाद चैराहे पर नशे में झूमती कानून-व्यवस्था

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या भूमि विवाद पर फैसला दे दिया है। कोर्ट ने विवादित जमीन को हिंदुओं को देने का फैसला दिया है। ऐसे माहौल में किसी भी प्रकार की अनहोनी न होने पाए इसलिए सरकार ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम किया है। फैसले पर किसी भी प्रकार की हुल्लड़बाजी न हो पाए इसके लिए जगह-जगह पुलिस फार्स तैनात है। लेकिन जिन पर कानून-व्यवस्था को संभालने की जिम्मेदारी है वो ही नशे में झूम रहे हैं।

पुराने लखनऊ में पुलिस व आरएएफ ने किया पैदल मार्च

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में पुलिस-प्रशासन हाई अलर्ट पर है। किसी तरह के विवाद से निपटने के लिए लखनऊ में भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। जगह-जगह पुलिस व अर्द्धसैनिक बलों के जवान मुस्तैद हैं। इस बीच 12 नवंबर को रबी-उल-अव्वल का त्योहार भी पड़ रहा है। आम नागरिकों को भयमुक्त रखने के लिए पुराने लखनऊ में पुलिस ने पैदल मार्च निकाला। पुलिस ने लोगों से शांति व्यवस्था बनाए रखने और प्रशासन को सहयोग करने की अपील की। http://www.satyodaya.com

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