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चीन में कोरोना वायरस का कहर जारी, अब तक 1400 से अधिक लोगों की हुई मौत

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हुबेई: चीन के हुबेई प्रांत में पिछले 24 घंटों के दौरान कोराेना वायरस से संक्रमित 116 लोगाें की माैत हो जाने से मृतकों की संख्या बढ़कर 1400 हो गई है। प्रांतीय स्वास्थ्य आयोग के एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि जानलेवा कोरोना वायरस के संक्रमित लोगों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हुयी है और यह सख्या बढ़कर 51,986 हो गया है।
इससे पहले गुरुवार को कोराेना वायरस संक्रमण के 15 हजार से अधिक नये मामले सामने आये थे और 254 लोगाें की मौत हो गयी थी।

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एक अधिकारी ने गुरुवार को बताया,“ राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग को पिछले 24 घंटों में 31 प्रांतों से 15,152 काेरोना वायरस के नये पुष्ट मामलों की सूचना मिली है जिनमें 174 मामले काफी गंभीर हैं। इसके अलावा 254 लोगों की मौत हो गई है और 1171 लोगों की हालत मेंं सुधार होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

उन्हाेंने बताया कि कोरोना वायरस के पाजिटिव मामलों की संख्या बढ़कर 59,804 हो गई है और मृतकों की संख्या बढ़कर 1,367 हो गई है। इस समय 52,526 लोग बीमार हैं और 8,030 लोगों की हालत गंभीर है। अब तक अस्पताल से 5,911 लोगो को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है।
गौरतलब है कि चीन में तेजी से फ़ैल रहे कोरोना वायरस से अब तक करीब 1500 लोगों की जान चली गयी है और 51,986 लोग इससे प्रभावित है। यह घातक वायरस भारत समेत दुनिया के 25 से अधिक देशों में भी फ़ैल चुका है।http://www.satyodaya.com

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रूस की कोरोना वैक्सीन पर उठे कई सवाल, डॉ एलेक्जेंडर ने दिया इस्तीफ़ा

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मॉस्को: रूस का कोरोना वैक्सीन बना लेने का दावा लगातार विवादों में घिरता जा रहा है। भले ही दुनिया को पहली कोरोना वैक्सीन  रूस ने दे दी है। आपको बता दें कई देशों ने इसे खरीदने का ऑर्डर भी दे दिया है। लेकिन इसके कारगर और सुरक्षित होने पर सवाल अभी बने हुए हैं। इस वैक्सीन के रजिस्ट्रेशन के दौरान सरकार ने जो चीजें पेश की हैं, उसके अनुसार इस वैक्सीन के सुरक्षित होने पर कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। ये वैक्सीन कितनी सुरक्षित है, इसे जानने के लिए अभी तक इसकी क्लीनिकल स्टडी पूरी ही नहीं हुई है।

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आपको बता दें WHO समेत दुनियाभर के कई वैज्ञानिकों ने रूस की वैक्सीन स्पूतनिक-वी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रायल के नाम पर 42 दिन में मात्र 38 वॉलंटियर्स को ही इस वैक्सीन की डोज  दी गई है। इसके अलावा ट्रायल के तीसरे चरण पर रूस कोई भी जानकारी देने के लिए तैयार नहीं है। रूस की सरकार का कहना है कि हल्के बुखार के अलावा कोई भी साइड इफेक्ट  नहीं दिखे हैं, जबकि रिपोर्ट्स बताते हैं कि 38 वॉलंटियर्स में 144 तरह के साइड इफेक्ट देखने को मिले हैं।

डॉक्टर एलेक्जेंडर ने नियमों के उल्लंघन के विरोध में दिया इस्तीफ़ा

डॉक्टर एलेक्जेंडर रूस के टॉप डॉक्टर्स में से एक माने जाते हैं और रूसी हेल्थ मिनिस्ट्री की एथिक्स काउंसिल के भी सदस्य थे। उन्होंने वैक्सीन बनाने में की गयी इस जल्दबाजी के खिलाफ इस काउंसिल से भी इस्तीफ़ा दे दिया है। उन्होंने कहा कि रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-वी के लिए ज़रूरी मंजूरी नहीं ली गयीं थीं और इसकी घोषणा जल्दबाजी में कर दी गयी। एलेक्जेंडर ने स्पष्ट कहा है कि इस वैक्सीन के सुरक्षित होने की फ़िलहाल कोई गारंटी नहीं है।

बता दें कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि वैक्सीन से जुड़ी जानकारी अभी तक WHO के साथ साझा तक नहीं की गई हैं। इसलिए शक जाहिर किया गया है कि रूस ने वैक्सीन बनाने के लिए तय निर्देशों का पालन नहीं किया है। इस वजह से ही वह जानकारी नहीं देना चाहता है। वहीं, रूस का दावा है कि वैक्सीन ट्रायल के जो नतीजे आए हैं, उनमें बेहतर इम्युनिटी विकसित होने के परिणाम देखने को मिले हैं। किसी के भी अंदर निगेटिव साइड इफेक्ट  नहीं देखने को मिला है, लेकिन सच यह है कि जिन लोगों पर इस वैक्सीन का ट्रायल हुआ उनमें बुखार, शरीर में दर्द, शरीर का तापमान बढ़ना, सूजन जैसे साइड इफेक्ट स्पष्ट नजर आए। इसके अलावा शरीर में ऊर्जा महसूस न होना, भूख न लगना, सिरदर्द जैसे साइड इफेक्ट कॉमन थे। http://www.satyodaya.com

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रूस का कोरोना वैक्सीन बनाने का दावा, राष्ट्रपति की बेटी के शरीर में बनी एंटीबॉडीज

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दुनिया समेत विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी मांगा सबूत

लखनऊ। विश्व में कोरोना का कहर लगाता जारीहै। वैश्विक महामारी से बचने के लिए भारत, अमेरिका समेत तमाम देश मिलकर कोरोना वायरस से मुकाबला करने की रणनीति बना रहे हैं। वैश्विक संकट से निबटने के लिए कई तरीके अपनाए गए, लेकिन अभी तक कोई कामयाबी हासिल नहीं हो पाई है। कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के करीब 9 महीने बाद दुनियाभर के लिए एक राहतभरी खबर सामने आई है। रूस ने दावा किया है कि उसने कोरोना की वैक्सीन बना ली है।

वैक्सीन नाम स्पूतनिक-V रखा गया

रूस ने कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने की रेस में बाजी मारते हुए मंगलवार को कोविड-19 की वैक्सीन बना लेने का ऐलान कर दिया। जिसका नाम स्पूतनिक-V रखा है और इसके इस्तेमाल को लेकर मंजूरी भी मिल गई है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने की घोषणा की, ‘हमने कोरोना की सुरक्षित वैक्सीन बना ली है और देश में रजिस्टर्ड भी करा लिया है। मगर रूस के इस दावे को दुनिया संदेह भरी निगाहों से देख रही है।

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WHO ने जताया आशंका

क्योंकि इस वैक्सीन को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आशंका जताया है, कि इस वैक्सीन के तीसरे फेज का ट्रायल अभी पूरा नहीं हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि रूस ने अभी तक विकसित किए जा रहे कोरोना वैक्सीन के बारे में जानकारी नहीं है। WHO ने रूस को वैक्सीन के मामले में जल्दबाजी न दिखाने के लिए कहा है और उसके इस रवैये को खतरनाक भी बताया है।

बेटी के शरीर में बनी एंटीबॉडीज

उधर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा उनके वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस की ऐसी वैक्सीन तैयार कर ली है जो कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ कारगर है। देश ने कोरोना वायरस के खिलाफ पहला टीका विकसित कर लिया है जो कोविड-19 से निपटने में ‘बहुत प्रभावी’ ढंग से काम करता है और ‘एक स्थायी रोग प्रतिरोधक क्षमता’ का निर्माण करता है। इसके साथ ही उन्होंने खुलासा किया मैंने इस वैक्सीन का प्रयोग अपनी दो बेटियों में एक बेटी को पहली वैक्सीन लगवाई है और वह अच्छा महसूस कर रही है।

इस टीके का इंसानों पर दो महीने तक परीक्षण किया गया और ये सभी सुरक्षा मानकों पर खरा उतरा है। वैक्सीन को तय योजना के मुताबिक रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय और रेग्युलेटरी बॉडी का अप्रूवल मिल गया है। इस वैक्सीन को सबसे पहले फ्रंटलाइन मेडिकल वर्कर्स, टीचर्स और जोखिम वाले लोगों को दिया जाएगा।http://www.satyodaya.com

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ट्रंप का आदेश: भारत के बाद अमेरिका में भी ‘Chinese App TikTok’ बैन

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दिनेश चावला

नई दिल्ली: अमेरिका ने टिकटॉक ऐप को खतरा बताते हुए बैन लगाने का आदेश दिय़ा है। बताया जा रहा है कि इस आदेश में कहा गया है कि 45 दिन के दौरान अमेरिकी क्षेत्राधिकार के अधीन बाइटडांस के साथ कोई भी लेन-देन नहीं किया जाएगा।

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अमेरिका ने भारतीय कार्रवाई का हवाला देते हुए आदेश में कहा, ‘भारत सरकार ने हाल ही में पूरे देश में TikTok और अन्य चीनी मोबाइल ऐप के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि वे डाटा चोरी कर रहे थे और उपयोगकर्ताओं के डेटा को अनधिकृत तरीके से उन सर्वरों में प्रसारित कर रहे थे जिनके भारत के बाहर के सर्वर हैं।’

पिछले महीने भारत टिकटॉक और वीचैट पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश बना था। भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए यह प्रतिबंध लगाया था। भारत ने 106 चीनी ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया है। भारत के इस कदम का ट्रंप प्रशासन और अमेरिकी सांसदों ने स्वागत किया था।http://www.satyodaya.com

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August 15, 2020, 3:15 am
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