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जापान में मूसलाधार बारिश, 10 लाख से ज्यादा लोग हो सकते हैं बेघर

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तोक्यो। जापान में 10 लाख से ज्यादा लोगों को प्रशासन ने अपना घर छोड़कर किसी सुरक्षित जगह जाने का निर्देश दिया है। दरअसल, दक्षिणी जापान में मूसलाधार बारिश के चलते कई इलाके डूब गये हैं। स्थिति संभालने के लिये 14 हजार सैनिकों को अलर्ट कर दिया गया है।

जापान में कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही है। ऐसे में बाढ़ या भूस्खलन से कोई बड़ी दुर्घटना न हो जाए इसलिये अधिकारियों ने दक्षिण-पश्चिमी शहर कागोशिमा में 10 लाख से ज्यादा लोगों को अपने घरों से पलायन करने को कहा है।

कागोशिमा, क्यूशू के दक्षिणी द्वीप की खाड़ी में स्थित है। इसके कुछ हिस्सों में पिछले हफ्ते से प्रति वर्ग मीटर 900 मिलीमीटर बारिश हुई है। वहीं, कागोशिमा में मंगलवार सुबह 7 बजे से 8 बजे के बीच 40 मिलीमीटर/वर्ग मीटर बारिश हुई। इतना ही नहीं, मौसम विज्ञान एजेंसी ने गुरुवार सुबह तक दक्षिणी क्यूशू में लगभग 350 मिमी/ वर्ग मीटर बारिश होने की संभावना जताई है, जबकि कुछ इलाकों में प्रति घंटे 80 मिमी तक बारिश हो सकती है।

प्रशासन वहां लगातार हालात पर नजर बनाये हुए है लेकिन निर्देशों के बावजूद भी अगर लोग अपना घर छोड़कर नहीं गये तो उन्हें इसके लिये बाध्य नहीं किया जा सकता है। ऐसे में अधिकारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है। मौसम पूवार्नुमान इकाई के प्रमुख ने बताया कि पिछले वर्ष के मुकाबले  इस बार बारिश की अवधि कम होगी। साथ ही यह भी कहा कि भारी बारिश से निकासी में बाधा आ सकती है।http://www.satyodaya.com

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अमेरिका से नजदीकी बढ़ने पर ताइवान को चीन की चेतावनी, दूर रहो नहीं तो कर लेंगे कब्जा

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नई दिल्ली। चीन के पड़ोसी देशों की अमेरिका से बढ़ती नजदीकी अब उसे रास नहीं आ रही है। यही वजह है कि चीन ने खुले तौर पर ताइवान को धमकी दी है कि वह अमेरिका से दूर रहे। यही नहीं चीन ने यह भी कहा है कि अगर वह उसकी बात नहीं मानता, तो उस पर कब्जा कर लिया जाएगा। दरअसल अमेरिका के विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी कीथ क्रैच के दौरे के बाद चीन का यह बयान सामने आया है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के दौरे के बाद चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि शुक्रवार को लड़ाकू विमानों का ड्रिल चेतावनी देने के लिए नहीं था, बल्कि ताइवान पर कब्जे का रिहर्सल था। दरअसल चीन ने बीते शुक्रवार को शक्ति प्रदर्शन करते हुए ताइवान के क्षेत्र में लड़ाकू जेट समेत 18 विमान उड़ाए थे और अब चेतावनी भी जारी की है।

इसके अलावा कम्युनिस्ट सरकार के मुखपत्र में यह भी कहा गया है कि ताइवान की स्वतंत्रता खत्म होने वाली है। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि वह युद्ध से पीछे नहीं हटता और इसके लिए उसने भारत सीमा का भी जिक्र किया है। चीनी अखबर ने आए दिन होने वाले अमेरिकी दौरों को लेकर कहा है कि हर बार जब कोई अमेरिकी अधिकारी ताइवान आए, तो पीएलए के लड़ाकू विमानों को आइलैंड की ओर आगे बढ़ाना चाहिए।

इसके अलावा चीन की ओर से यह भी कहा गया है कि अगर अमेरिका के रक्षा या विदेश मंत्री ताइवान आते हैं, तो इसके लड़ाकू विमान आइलैंड के ऊपर उड़ें और मिसाइलें राष्ट्रपति ऑफिस के ऊपर से। अगर ताइवान प्रशासन आक्रामकता दिखाता है, तो यह सच होगा।

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पीएलए की प्रतिक्रिया काफी तेज

ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस सैन्य अभ्यास ने दो अहम सिग्नल दिए हैं, जिसमें से पहला तो ये है कि यह विरोध अमेरिका और ताइवान के बीच मिलीभगत को लेकर है, जबकि दूसरा यह कि पीएलए की प्रतिक्रिया काफी तेज है। जबकि ताइवान की ओर से भी अमेरिकी अधिकारी के दौरे को गोपनीय रखा था लेकिन जब चीन को यह बात पता चली, तो उसने कब्जे की चेतावनी जारी कर दी।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के मुखपत्र ने कहा है कि इस और पुराने युद्धाभ्यासों से पीएलए ने ताइवान पर हमले का अनुभव हासिल कर लिया है। यह ताइवान पर कब्जे को लेकर रिहर्सल है। केवल एक राजनीतिक वजह की आवश्यकता है, जिससे ये अभ्यास वास्तविक युद्ध में बदल जाएंगे। ताइवान स्ट्रेट में अशांति की सबसे बड़ी मजह ये है कि अमेरिका से उसकी दोस्ती काफी गहरी हो रही है। अमेरिका को यहां से दूर रखने पर कोई भी कदम उठाया जा सकता है।http://www.satyodaya.com

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भारत के बाद अमेरिका ने भी TikTok और WeChat पर प्रतिबंध लगाने का किया ऐलान

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लखनऊ। भारत के बाद अब अमेरिका ने भी चाइना को बड़ा झटका दिया है।भारत में चाइनीज वीडियो शेयरिंग ऐप  टिकटॉक, मैसेंजर वीचैट पर बैन के बाद अब अमेरिका ने भी रविवार से इन दोनों एप्लीकेशन के इस्तेमाल पर रोक लगाने का ऐलान किया है। इन ऐप पर रोक लगाने के लिए अमेरिका में पिछले कई हफ्ते से चर्चा चल रही थी। जिसके बाद अब रविवार से दोनों ऐप पूरी तरह से बैन हो जाएंगे।

अमेरिका ने कहा कि वे देश की संप्रभुता, अखंडता और सुरक्षा के लिये पूर्वाग्रही थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले ही कहा कि वह चीनी स्वामित्व वाले वीडियो – शेयरिंग ऐप टिकटॉक के लिए अमेरिकी कंपनी ओरेकल की कथित बोली पर गौर कर रहे हैं। लेकिन वह सौदे को मंजूरी देने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहते हैं, कि राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

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पिछले महीने ट्रंप ने टिकटॉक और वीचैट पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक कार्यकारी आदेश पर दस्तखत किए थे, जिसके तहत दोनों चीनी कंपनियां अपना स्वामित्व किसी अमेरिकी कंपनी को दे कर ही प्रतिबंध से बच सकती हैं। अमेरिका राष्ट्रपति की ओर से जारी निर्देश में कहा गया था कि इन एप्स से उपयोगकर्ताओं से बड़ी संख्या में जानकारी ली जा रही है और ये जोखिम वास्तविक हैं। इस डेटा को संभवतः चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा एक्सेस किया जा सकता है। ये डेटा संभावित रूप से चीन को संघीय कर्मचारियों और ठेकेदारों के स्थानों को ट्रैक करने, ब्लैकमेल के लिए व्यक्तिगत जानकारी के डोजियर बनाने और कॉर्पोरेट जासूसी करने की अनुमति दे सकता है।

दरअसल, अमेरिका की तरफ से टिकटॉक को 45 दिनों के अंदर बेचने या फिर प्रतिबंध के लिए तैयार रहने की की चेतावनी दी गई थी। अमेरिका के इस चेतावनी को चीन ने गैंगस्टर तर्क और दिन दहाड़े लूट करार दिया था। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने इस पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा था कि बिना किसी ठोस साक्ष्य के अमेरिकी प्रशासन अनुमान के आधार पर उसे दोषी मानकर टिकटॉक को 45 दिनों के भीतर बेचने को मजबूर करने नहीं तो उस पर बैन लगाने की कार्रवाई कर रहा है।http://www.satyodaya.com

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भारत-चीन सीमा विवाद पर अमेरिकी सांसद राजा कृष्णामूर्ति ने जताई चिंता

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नई दिल्ली। भारत-चीन सीमा विवाद पर भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णामूर्ति ने चिंता जताई है। उन्होंने चीन से अपील की है कि वह भारत के प्रति अपने सैन्य उकसावों को बंद करें और लद्दाख में सीमा पर गतिरोध को लेकर बने तनाव का कूटनीतिक समाधान निकाले।

अमेरिकी सांसद ने कहा कि मैं इस विवाद पर करीबी नजर बनाए रखूंगा जब तक कि इसका पूर्ण समाधान नहीं निकल आता। इससे पहले बृहस्पतिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति की उप सहायक लीजा कर्टिस ने शीर्ष अमेरिकी थिंक टैंक से कहा था कि चीन की आक्रामकता के प्रति भारत का रवैया सख्त लेकिन जिम्मेदारी से भरा है।

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उन्होंने यह बात हाउस परमानेंट सेलेक्ट कमिटी ऑन इंटेलीजेंस की बैठक के दौरान कही। वह इस कमेटी में भारतीय मूल के एकमात्र अमेरिकी सदस्य हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय-प्रशांत क्षेत्र में चीनी आक्रामकता के खिलाफ अमेरिका-भारत के संबंधों को मजबूत बनाने का हमारा संकल्प है। कर्टिस ने कहा कि संकट के इस दौर में अमेरिका ने भारत को मजबूत और स्पष्ट समर्थन प्रदान किया है। बता दें कि पिछले कुछ महीनों में शीर्ष अमेरिकी सांसदों ने भारत में चीनी घुसपैठ पर अपनी चिंता व्यक्त की है।http://www.satyodaya.com

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September 21, 2020, 4:12 am
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