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आर्टिकल 370 हटने से बौखलाए इमरान, कहा- भारत-पाक में जंग छिड़ी तो विश्व समुदाय होगा जिम्मेदार

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फाइल फोटो

जम्मू-कश्मीर पर केन्द्र सरकार के फैसले के बाद पाकिस्तान भारत के इस आंतरिक मामले को लेकर दुनिया भर में रोना रो रहा है। ऐसे में पाकिस्तान अपनी पैंतरेबाजियों को नाकाम होते देख उसने युद्ध का हौवा खड़ा करना शुरू कर दिया है। जहां पाकिस्तान के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सभी गीदड़भभकी पर उतर आए हैं। बुधवार को पाक पीएम इमरान खान ने कहा कि भारत अगर पीओके (POK) में कुछ करता है तो हम उसका जवाब देंगे। भारत को युद्ध की धमकी देते हुए इमरान ने कहा कि पाकिस्तान की सेना पूर्ण रूप से तैयार है।

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन न मिलने से बौखलाए पाकिस्तान के पीएम इमरान ने कहा कि  हम भारत को सबक सिखाएंगे। हम ईंट का जवाब पत्थर से देंगे। हमारी फौज पूरी तरह तैयार है। भारत ने पीओके में कुछ किया तो हम जवाब देंगे। ये जंग हुई तो दुनिया जिम्मेदार होगी। वहीं आज पाक के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने लोगों को जेहाद के लिए उकसाया और कहा कि कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाएंगे।http://www.satyodaya.com

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ट्रम्प ने तुर्की को दी चेतावनी, हदें पार की तो कर देंगे बर्बाद…

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तुर्की की उत्तर पूर्वी सीमा से अमेरिकी फौजें हटाने का किया ऐलान

नई दिल्ली। ईरान से टकराव के बीच अमेरिकी राष्टपति डोनाल्ड ट्रम्प ने तुर्की को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी है। अमेरिकी राष्टपति ने कहा, अगर तुर्की ने कोई हिमाकत करने की कोशिश की तो उसे बर्बाद कर दिया जाएगा। टंप की यह धमकी उन खबरों के बाद आई है जिनमें कहा आशंका जतायी गई है कि उत्तरी सीरिया से अमेरिकी फौज के हटने के बाद तुर्की यहां सीमा पर मौजूद कुर्द लड़ाकों पर हमला कर सकता है। कुर्द लड़ाके अमेरिकी फौज के लिए काफी अहम हैं, क्योंकि सीरिया में वह आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई प्रमुख सहयोगी रहे हैं। जबकि तुर्की ने कहा है कि वह सीमा के करीब मौजूद कुर्द लड़ाकों पर हमले के तैयार है। ऐसे में अमेरिका और तुर्की के बीच तनाव बढ़ने के आसार गहरा गए हैं। बता दें कि सोमवाार से अमेरिकी ने सीरिया की उत्तर पूर्वी सीमा से अपनी फौज को हटाने का काम शुरू कर दिया है। हालांकि टंप के रिपब्लिकन सहयोगी उनके इस फैसले से सहमत नहीं हैं। डेमोक्रेटिक सदस्य नैंसी पेलोसी और रिपब्लिकन मिच मैकोनल ने इसे खतरनाक और उतावला कदम बताया है। ट्रम्प ने सोमवार को अपने निर्णय का बचाव करते हुए कहा, तुर्की ने अगर हदें पार की तो यह उसके लिए अच्छा नहीं होगा। हम उसकी अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देंगे।

उत्तर पूर्वी सीरियाई सीमा से हट रही अमेरिकी सेना

उत्तर पूर्वी सीरिया से अमेरिकी सेना को हटाने संबंधी घोषणा व्हाइट हाउस की ओर से रविवार को की गई है। व्हाइट हाउस की ओर से की गई इस घोषणा का कानून बनाने वाले द्विदलीय समूह ने भी आलोचना की है। आशंका है कि इस फैसले के बाद तुर्की की ओर से कुर्द के नेतृत्व वाली सेनाओं पर हमले किए जा सकते हैं। कुर्द नेतृत्व वाली सेना अमेरिका की लंबे समय तक सहयोगी रही है।http://www.satyodaya.com

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J&k: पैसे के लिए ट्रक ड्राइवर बना जैश का खूंखार आतंकवादी

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फाइल फोटो

नई दिल्ली। पैसे के लिए आदमी क्या नहीं कर सकता है। समय-समय पर ऐसी खबरें आती रहती हैं कि पैसे के लालच में इंसान अपनी जिंदगी बर्बाद कर बैठकता है। सोमवार को सेना ने ऐसे आतंकी को पकड़ा है जो पहले कभी सेना का खबरी हुआ करता था। उस दौरान वह ट्रक ड्राइवर था। लेकिन ज्यादा पैसों के लालच में वह ट्रक ड्राइवर से आतंकवाद की राह पर चल निकला। जम्मू एवं कश्मीर के पुलवामा का रहने वाला खूंखार आतंकवादी आशिक अहमद नेंगरू पहले ट्रक ड्राइवर था। वह सेना का खबरी भी था। लेकिन इसी बीच वह आतंकियों के संपर्क में आ गया। अधिक पैंसों के लालच में वह आतंकियों का मददगार बन गया।

अपने आकाओं से अच्छा-खासा पैसा पाकर उसने कुछ ट्रक खरीद लिए और हथियारों की तस्करी शुरू कर दी। साथ ही उसने आतंकवादियों को लाने ले जाने में आतंकी संगठनों की भी मदद की। आखिर में वह जैश-ए-मोहम्मद जॉइन कर लिया और पीओके चला गया। इंटेलिजेंस डोजियर बताता है कि नेंगरू का भाई मोहम्मद अब्बास भी जैश का ही आतंकवादी था जो कुछ साल पहले एक पुलिस एनकाउंटर में मारा गया।

हालांकि पैसे की लालच ने नेंगरू को अलगाववादियों का शुभचिंतक बना दिया है। डोजियर के अनुसार, नेंगरू बाद में हिजबुल मुजाहिदीन के एक नेता के संपर्क में आया, जिसने बाद उसे घाटी में पत्थरबाजों के गढ़ पुलवामा में पत्थरबाजी की घटना को अंजाम देने की जिम्मेदारी सौंपी। नेंगरू प्रत्येक भारत-विरोधी गतिविधि के लिए दो हजार रुपये लेता था। ऐसे कामों में आकर्षित होते हुए नेंगरू ने हिजबुल मुजाहिदीन को छोड़ दिया और घाटी में आईएसआई का प्रमुख नुमाइंदा बन गया।

हाल ही में पंजाब में एक ड्रोन के गिरने के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के नए पोस्टर बॉय नेंगरू द्वारा घाटी में भेजे गए 40 से ज्यादा आतंकवादियों को पकड़ने के लिए व्यापक अभियान चला रखा है। जेईएम भारत विरोधी अभियानों को गति देने के लिए परेशान है। वह भारत में हमले करने के लिए नये-नये तरीके अपना रहा है। पर उसे सफलता हाथ नही लग रही है और हमारी भारतीय सेना इसका मुंहतोड़ जवाब दें रही है।

आशिक अहमद नेंगरू प्रशिक्षित आतंकवादियों को जम्मू एवं कश्मीर के रास्ते भारत में घुसपैठ कराता है। जिसमें आतंकवादियों में कुछ फिदायीन हमलावर भी हैं। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) की देख-रेख में नेंगरू ने पिछले महीने हथियार गिराने के सनसनीखेज मामले की साजिश रची, जिसके तहत सीमा पार से घातक हथियारों की तस्करी कर भारत लाने के लिए ड्रोन्स इस्तेमाल किए गए।

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खुफिया एजेंसियों द्वारा नेंगरू पर बनाए गए डोजियर के अनुसार, कभी भारतीय सेना का मुखबिर रहे नेंगरू ने मुठभेड़ों में मारे गए कई खूंखार आतंकवादियों के बारे में महत्वपूर्ण सूचनाएं दी थी। एक चालक के तौर पर पुलवामा के काकापोरा क्षेत्र (श्रीनगर से 12 किलोमीटर दूर) में रहने वाले नेंगरू ने अलगाववादी नेताओं और भारत-विरोधी लोगों के बीच मजबूत नेटवर्क स्थापित किया था। इस नेटवर्क के कारण नेंगरू को श्रीनगर में और उसके आस-पास आतंकवाद से संबंधित गतिविधियों की अंदरूनी जानकारी रहती थी।

डोजियर में खुलासा हुआ है कि आशिक अहमद नेंगरू का भाई मोहम्मद अब्बास जैश का आतंकवादी था और कुछ सालों पहले पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। उसका एक अन्य भाई रियाज भी जैश में शामिल हो गया और पिछले साल सितंबर में तीन आतंकवादियों को जम्मू से श्रीनगर ले जाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया।http://www.satyodaya.com

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अमेरिका और ब्रिटेन के 3 वैज्ञानिकों को मिला मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार

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नई दिल्ली। दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कारों की घोषणा शुरू हो चुकी है। स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में सोमवार को नोबेल पुरस्कारों की घोषणा की गई। मेडिसिन के क्षेत्र में इस बार अमेरिका और ब्रिटेन के तीन वैज्ञानिकों को संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार दिया जाएगा। इन वैज्ञानिकों के नाम हैं विलियम कायलिन, ग्रेग सेमेन्जा और पीटर रैटक्लिफ। विलियम और ग्रेग अमेरिका से संबंध रखते हैं जबकि पीटर ब्रिटेन से ताल्लुक रखते हैं। इन वैज्ञानिकों को कोशिकाओं के काम करने के तरीके और आक्सीजन ग्रहण करने को लेकर किए गए महत्वपूर्ण खोज के लिए मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार मिला है। #nobel prize
इन वैज्ञानिकों की खोज से पता चला कि किस तरह आक्सीजन की उपलब्धता हमारे सेलुलर मेटाबोलिज्म और अन्य शारीरिक क्रियाकलापों को प्रभावित करता है। वैज्ञानिकों की इस खोज से एनीमिया, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज व दवाएं तैयार करने में सफलता मिलेगी।

मंगलवार (8 अक्टूबर) को भौतिकी के नोबेल पुरस्कार की घोषणा होगी। इसी तरह 14 अक्टूबर तक कुल छह क्षेत्रों में नोबेल पुरस्कार के विजेताओं के नामों का ऐलान होगा। स्वीडिश अकादमी इस बार साहित्य के नोबेल पुरस्कारों के लिए वर्ष 2018 और 2019 के विजेताओं के नामों की घोषणा करेगी। बता दें कि वर्ष 2018 में एक विवाद के बाद साहित्य का नोबेल पुरस्कार स्थगित कर दिया गया था।

खोजकर्ता वैज्ञानिकों का संक्षिप्त परिचय

नोबेल पुरस्कार पाने वाले अमेरिकी वैज्ञानिक विलियम जी केलिन जूनियर का जन्म 1957 में न्यूयार्क में हुआ था। उन्होंने दरहम के ड्यूक यूनिवर्सिटी से एमडी की डिग्री हासिल की। उन्होंने बाल्टीमोर के जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी और बॉस्टन के दाना-फार्बर कैंसर इंस्टीट्यूट, से इंटरनल मेडिसिन और ऑन्कोलॉजी में विशेषज्ञ प्रशिक्षण हासिल की।

सर पीटर जे रैटक्लिफ का जन्म इंग्लैंड के लंकाशायर में 1954 में हुआ था। उन्होंने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के गोन्विले और साइअस कॉलेज से मेडिसिन की पढ़ाई की। उन्होंने ऑक्सफोर्ड से नेफ्रोलॉजी में ट्रेनिंग भी हासिल की है।

ग्रेग एल सेमेंजा भी न्यूयॉर्क के रहने वाले हैं और उनका जन्म 1956 में हुआ। उन्होंने बॉस्टन में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से बॉयोलॉजी में बीए की डिग्री हासिल की। सेमेंजा ने पेन्सिवेनिया यूनिवर्सिटी से एमडी पीएचडी की डिग्री हासिल की है।

बता दें नोबेल पुरस्कारों की शुरूआत 1901 में हुई थी। हर साल स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में यह पुरस्कार दिया जाता है। ये पुरस्कार चिकित्सा, भौतिकी, रसायन, साहित्य, शांति और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में दिया जाता है।http://www.satyodaya.com

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October 9, 2019, 2:46 pm
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