Connect with us

अंतरराष्ट्रीय

एफएटीएफ ने पाकिस्तान को नहीं दी राहत, ग्रे लिस्ट में बरकरार

Published

on

लखनऊ। दुनिया की आंखों में धूल झोंक कर आतंकवाद को अपना राष्ट्रीय नीति बनाने वाले पाकिस्तान को तगड़ा झटका लगने वाला है। पेरिस में चल रही फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की बैठक में पाकिस्तान को कोई राहत नहीं मिली है। एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे सूची में बरकरार रखा है। अब उस पर काली सूची में जाने का खतरा मंडरा रहा है। 16 फरवरी से 21 फरवरी तक चलने वाली इस पूर्ण बैठक में पाकिस्तान की किस्मत पर फैसला होगा। जहां एफएटीएफ की ग्रे सूची से बाहर निकलने के लिए पाकिस्तान को 39 में से 12 मतों की जरूरत है तो वहीं काली सूची में जाने से बचने के लिए 3 देशों के समर्थन की जरूरत होगी। अभी तक पाकिस्तान के समर्थन में तुर्की और मलेशिया ने ही समर्थन दिया है। अब पाकिस्तान को बचाने का सारा दारोमदार चीन पर है। चीन के समर्थन पर ही पाकिस्तान ब्लैक लिस्ट होने से बच सकता है।

बैठक में एफएटीएफ ने पाकिस्तान से धन शोधन और आतंकवाद को आर्थिक मदद देने वाले दोषियों को कठघरे में लाने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की गयी है। खबरों के मुताबिक अंतरराष्टीय संस्था ने काली सूची में जाने से बचने के लिए पाकिस्तान को 27 सूत्रीय एक्शन प्लान सौंपा था। लेकिन पाकिस्तान ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया। पाकिस्तान लगातार अपनी काली करतूतों पर पर्दा डालने के लिए दुनिया को भरमा रहा है। दिखावे के लिए पाकिस्तान आतंकी संगठनों के आकाओं पर कार्रवाई करता है, जबकि हकीमत में पाकिस्तान आतंकियों की सुरक्षित पनाहगाह बन चुका है।

यह भी पढ़ें-खुलासा: मुंबई हमले को #HinduTerror साबित करना चाहता था लश्कर-ए-तैयबा

बता दें कि एफएटीएफ एक अंतर राष्ट्रीय संस्था है। जो दुनिया भर में आतंकियों को वित्त पोषण और मदद पर नजर रखती है। संस्था ने आतंकी फंडिंग रोकने के लिए सख्त कानून बनाए हैं। एफएटीएफ की ओर से पाकिस्तान को कई बार चेतावनी दी जा चुकी है। जून 2018 में संस्था ने पाकिस्तान को ग्रे सूची में डाल दिया था। साथ ही काली सूची में जाने से बचने के लिए आतंकियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने को कहा था। लेकिन पाकिस्तान ने हाफिज सईद, मसूद अजहर और अल जवाहिरी जैसे आतंकियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। पाकिस्तान के एफएटीएफ की ब्लैक लिस्ट में जाने का मतलब है कि उस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लग जाएंगे। साथ ही संयुक्त राष्ट व अमेरिका आदि देशों से मिलने वाली आर्थिक मदद भी प्रभावित होगी। http://www.satyodaya.com

Featured

कोरोना वायरस: अमेरिका ने इस महिला पर किया वैक्सीन का पहला परीक्षण

Published

on

लखनऊ। कोरोना वायरस के लिए तैयार की जा रही वैक्सीन का पहला परीक्षण वॉशिंगटन के सिएटल शहर में रहने वाली एक स्थानीय महिला 43 साल की जेनिफर हॉलर पर किया है।
आपको बता दें कि किसी भी वैक्सीन को टेस्ट करने के लिए जानवरों का इस्तेमाल किया जाता है। क्योंकि इसके साइड इफेक्ट से जान भी चली जाती है। लेकिन अमेरिका की जेनिफर हॉलर ने बिना इसकी परवाह किए खुद पर परिक्षण करवाया है।

जेनिफ़र और उनके साथ 44 लोग वालंटियर्ली यानि स्वेच्छा से सामने आए ताकि मानव जाति पर आए इस संकट से उन्हें बचाया जा सके। जेनिफर के दो बच्चे हैं, इस पूरी प्रक्रिया में वैक्सीन के असफल होने की स्थिति में उनकी जान को ख़तरा हो सकता है।

दुनिया में बहुत कुछ बहुत बुरा हो रहा है तो बहुत कुछ बहुत अच्छा भी हो रहा है। यही अच्छे लोग और उनके अच्छे प्रयासों के चलते ये दुनिया आज भी ख़ूबसूरत है। तभी हम सभी लाख दिक्कतों के बाद भी इस दुनिया में रहना चाहते हैं।

अमेरिका में के. के. पी वॉशिंगटन रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बेहद सावधानी के साथ चार ऐसे मजबूत इच्छाशक्ति वाले सेहतमंद लोगों को इस परीक्षण के लिए चुना है। इस अध्ययन और प्रयोग की टीम लीडर डॉ. लीजा जैक्सन हैं। लीजा मानती हैं कि वैक्सीन के पहले चरण में परीक्षण के लिए तैयार इन चार लोगों के साथ अब हम टीम कोरोना वायरस हो गए हैं। ऐसे मौके पर हर कोई यही चाहता है कि इस आपात स्थिति से निपटने के लिए वह क्या और कैसे करें। जेनिफर सीटेल में ही एक टेक कंपनी में ऑपरेशन मैनेजर हैं।

इनके अलावा तीन और लोगों को इस परीक्षण का इंजेक्शन लगाया जाना है। इसके अलावा 45 अन्य लोगों को भी इसका हिस्सा बनाया जाएगा और इन्हें एक महीने के बाद दो और डोज दिए जाएंगे।

ब्रॉथल के रहने वाले 46 साल के ही नील ब्राउनिंग भी एक माइक्रोसॉफ्ट नेटवर्क इंजीनियर हैं जो इस परीक्षण टीम के सदस्य हैं। उनका कहना है कि उनकी बेटियां इस तरह के सामाजिक काम के लिए उन्हें बेहद प्रोत्साहित करती हैं और गर्व महसूस करती हैं। उनकी बेटियां मानती हैं कि ये दुनिया के उन तमाम लोगों को बचाने के लिए बेहद जरूरी है कि कोई न कोई तो यह जोखिम उठाए।

यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के डॉ एंथनी फॉसी का कहना है कि अगर यह परीक्षण कामयाब रहा तो अगले 12 से 18 महीनों के बाद ही यह वैक्सीन दुनिया भर में इस्तेमाल की जा सकेगी। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस परीक्षण से उम्मीद जताते हुए दावा किया है कि जुलाई तक अमेरिका कोरोना से मुक्त हो जाएगा। उन्होंने यह श्रेय लेने की भी कोशिश की अमेरिका में ही इस खतरनाक वायरस का पहला वैक्सीन इतने कम वक्त में बन कर तैयार होने की उम्मीद है। चीनी वैज्ञानिकों ने 65 दिन पहले इसके बारे में जानकारियां दी थीं और यह वैक्सीन परीक्षण के लिए इतनी जल्दी तैयार कर लिया गया। इसे मॉडर्ना इंक नाम की कंपनी विकसित कर रही है।

यह भी पढ़ें: लखनऊ: कोरोना के मरीजों का इलाज करने वाले रेजिडेंट डॉक्टर भी वायरस की चपेट में

इस समय दुनिया के तमाम देशों में कोरोना की वैक्सीन पर काम हो रहा है। दर्जनों रिसर्च संस्थान इसपर काम कर रहे हैं। अमेरिका, चीन और दक्षिण कोरिया में भी अगले महीने तक ऐसे ही वैक्सीन पर काम होने की संभावना है जिसे इनोवियो फार्मास्युटिकल्स बना रही है। सिएटल में हुए इस परीक्षण की तैयारी उस दिन के बाद से ही तेजी के साथ शुरू हो गई थी जिस दिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना को एक महामारी घोषित किया था।

यह भी पढ़ें: कोरोना संकट से निपटने में सरकार को मिला धर्म गुरुओं का साथ

इस परीक्षण के लिए 18 से 55 साल के बीच के ऐसे लोगों को चुना जा रहा है जो भीतर से मजबूत हों और जो वैक्सीन के कड़े डोज को भी बर्दाश्त कर सकें। इस परीक्षण के लिए चुने गए लोगों को प्रयोग के लिए जितनी बार क्लीनिक बुलाया जाएगा, इसके लिए उन्हें 100 डॉलर भी दिए जाएंगे।http://www.satyodaya.com

Continue Reading

अंतरराष्ट्रीय

कोरोना की दहशत के बीच फिलीपींस में बर्ड फ्लू ने दी दस्तक

Published

on

भारत सरकार ने फिलीपींस व मलेशिया के लोगों पर लगाया बैन, केरल में दो मामले आए सामने

नई दिल्ली। चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ कोरोना वायरस पूरी दुनिया को तबाह कर दिया है। लोग इस वायरस से अभी उबरे भी नही थे कि फिलीपींस में बर्ड फ्लू और स्वाइन फ्लू ने दस्तक दे दी है। जो तेजी से अपने पैर पसार रहा हैं। जिसने वहां की सरकार को चिंता ने डाल दिया है। वहीं वहां की सरकार ने किसी भी पक्षी के निर्यात पर रोक लगा दी है। इसके संबंधित सभी बटेरों को मारने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। फार्मो से आसपास 7 किमी दूर तक सैनिटाइज किया जा रहा है और बचाव कार्य जारी है।

भारत में भी कोविड-19 के बाद बर्ड फ्लू और स्वाइन फ्लू के मामले सामने आने लगे हैं। केरल में इसकी शुरूआत हो चुकी है। वहां अबतक दो मामले सामने आए हैं। केरल सरकार ने मुर्गियों को मारने का आदेश जारी कर दिया हैं। केरल के रोग निरीक्षण अधिकारी के मुताबिक बर्ड फ्लू से निपटने के लिए 35 विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं। इन टीमों ने पोल्ट्री फार्मों से मुर्गियों को मारने और उनके निस्तारण का काम भी शुरू कर दिया गया है। साथ ही जिला कलेक्टर के आदेश पर प्रभावित क्षेत्र के आसपास 10 किलोमीटर के दायरे में अंडा, चिकन व अन्य जानवरों की खरीद-फरोख्त पर तत्काल रोक लगा दी गई है।

यह भी पढ़ें:- कोरोना की दहशतः महाराष्ट्र सरकार के सभी कार्यालय 7 दिन के लिए बंद

बर्ड फ्लू को देखते हुए भारत सरकार ने अफ्गानिस्तान, फिलीपींस और मलेशिया से आने वाले लोगों पर तत्काल बैन लगा दिया है। नागर विमानन महानिदेशालय ने भी भारतीय एडवाइजरी के संबंध में एक सर्कुलर जारी किया है। यह प्रतिबंध 31 मार्च तक जारी रहेगा। भारत सरकार ने कोरोना के संक्रमण को ध्यान में रखते हुए इन तीन देशों के अलावा यूरोपीय संघ, तुर्की और यूके के यात्रियों के प्रवेश पर भी बैन लगाया है। इनका बैन भी 31 मार्च तक जारी रहेगा।http://www.satyodaya.com

Continue Reading

अंतरराष्ट्रीय

Coronavirus: अमेरिका शुरू कर रहा है कोरोना वायरस के टीके का ट्रायल…

Published

on

वाशिंगटन, एपी। अमेरिकी सरकार का कोरोना वायरस से बचाने के लिए बनाए गए टीके का नैदानिक परीक्षण सोमवार से शुरू होने जा रहा है। अधिकारी ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर बताया कि परीक्षण के पहले प्रतिभागी को सोमवार को प्रायोगिक टीका दिया जाएगा। परीक्षण के बारे में सार्वजनिक तौर पर फिलहाल कोई घोषणा नहीं की गई है।उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (एनआईएच) इस परीक्षण के लिए धन मुहैया करा रहा है और यह सिएटल में ‘कैसर परमानेंट वाशिंगटन हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट’ में हो रहा है। जन स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संभावित टीके की पुष्टि में एक साल से 18 महीने तक का वक्त लगेगा। यह परीक्षण 45 युवा एवं स्वस्थ स्वेच्छाकर्मियों के साथ शुरू होगा जिन्हें एनआईएच और मॉर्डर्ना इंक के संयुक्त प्रयासों से विकसित टीके लगाए जाएंगे हालांकि प्रत्येक प्रतिभागी को अलग-अलग मात्रा में सुई लगाई जाएगी। इस बात की कोई संभावना नहीं है कि कोई भी प्रतिभागी इससे संक्रमित होगा क्योंकि इस टीके में वायरस नहीं है।

यह भी पढ़े :- केजीएमयू में महिला डॉक्टर के उत्पीड़न मामले की जांच शुरू…

वायरस के अस्थायी टीकों पर भी काम 

दुनिया भर के दर्जनों शोधकर्ता का समूह कोरोना वायरस का वैक्सीन बनाने की रेस में लगा हुआ है, क्योंकि इसके मामले लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं। कुछ शोधकर्ता अस्थायी टीकों पर भी काम कर रहे हैं, जो कि लोगों के स्वास्थ्य को एक या दो महीने तक प्रॉटेक्ट कर सकता है। जबतक की वायरस का कोई पक्का इलाज नहीं मिल जाता।

5800 से ज्यादा लोगों की हो चुकी है मौत

दुनिया भर में फैले कोरोना वायरस से 156,000 से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं, जबकि 5,800 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, कम संक्रमण वाले लोग लगभग दो सप्ताह में ठीक हो जाते हैं, जबकि अधिक गंभीर संक्रमण वाले लोगों को ठीक होने में तीन सप्ताह से छह सप्ताह तक का समय लग सकता है।http://www.satyodaya.com

Continue Reading

Category

Weather Forecast

March 23, 2020, 7:46 am
Fog
Fog
19°C
real feel: 20°C
current pressure: 1010 mb
humidity: 88%
wind speed: 0 m/s N
wind gusts: 0 m/s
UV-Index: 1
sunrise: 5:37 am
sunset: 5:49 pm
 

Recent Posts

Trending