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पाकिस्तानी सेना महिलाओं पर कर रही अत्याचार, गुलालाई ने बयां की हकीकत

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नई दिल्ली। पाकिस्तान में न तो इंसानों की कोई कद्र है और न ही मानवाधिकारों के लिए कोई जगह है। इस्लामिक कट्टरता की जंजीरों में जकड़े इस देश में आतंकी संगठन और ताकतवर सेना का ही फरमान मानना पड़ता है। जो उनके खिलाफ आवाज उठाता है उसकी आवाज हमेशा के लिए बंद कर दी जाती है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों और अमन पसंद लोगों पर कैसे अत्याचार होता है, यह पूरी दुनिया को पता है। समय-समय पर पाकिस्तान के लोग ही उसकी पोल खोलते रहते हैं। एक बार फिर पाकिस्तान से किसी तरह भाग कर अमेरिका पहुंची एक युवती ने भारत के इस पड़ोसी देश की हकीकत पूरी दुनिया के सामने बयां की है। महिलाओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने पर पाकिस्तान सेना ने इस युवती का जीना हराम कर दिया था। इतना ही नहीं पाकिस्तान ने इस युवती पर देशद्रोह का मुकदमा भी थोप दिया। इस युवती का नाम है-गुलालाई इस्माइल। #GulalaiIsmail

गुलालाई ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा महिलाओं के दिल दहला देने वाले यौन शोषण की घटनाओं को उजागर किया है। इसी के बाद पाकिस्तानी सेना गुलालाई की दुश्मन बन गयी। किसी तरह अगस्त में भागकर अमेरिका पहुंची गुलालाई ने वहां राजनीतिक शरण के लिए आवेदन किया है। इस दौरान गुलालाई पूरी दुनिया को पाकिस्तान की सच्चाई भी बता रही हैं। गुलालाई इस समय में बू्रकलीन में अपनी बहन के साथ रह रही हैं। गुलालाई आखिर अमेरिका कैसे पहुंची, इस बारे में उन्होंने कोई खुलासा नहीं किया है। गुलालाई ने कहा कि मैं सिर्फ इतना कहना चाहती हूं कि मैंने किसी हवाई अड्डे से उड़ान नहीं भरी। गुलालाई ने कहा कि मैंने अगर अपने भागने की ज्यादा जानकारी दी तो बहुत से लोगों की जान खतरे में पड़ जाएगी।

महिला कार्यकर्ताओं के एक समूह ने प्रधानमंत्री इमरान खान को पत्र लिखकर गुलालाई इस्माइल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की थी। उन्होंने अपने ऊपर लगे देशद्रोह के मामले को गलत बताया है। महिलाओं एक समूह ने प्रधानमंत्री इमरान खान को पत्र लिखकर गुलालाई की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की थी। न्यूयार्क के डेमोके्रट सीनेटर चाल्र्स शूमर ने कहा कि मैं गुलालाई समर्थन अवश्य करूंगा क्योंकि गुलालाई अगर पाकिस्तान गईं तो वहां उनकी जान को खतरा है।

आईएसआई की सिफारिश पर शुरू हुआ उत्पीड़न

गुलालाई ने बताया है कि पिछले साल नवंबर में इस्लामाबाद उच्च न्यायालय को सूचना दी गई थी कि आईएसआई ने विदेश में कथित देशविरोधी गतिविधियों के कारण गुलालई का नाम ईसीएल में डालने की सिफारिश की है। इसके बाद गुलालई ने याचिका दायर कर उनका नाम ईसीएल में डालने के सरकार के फैसले को चुनौती दी थी। जिस पर उच्च न्यायालय ने उनका नाम हटाने का आदेश दिया। हालांकि, अदालत ने आईएसआई की सिफारिश की पृष्ठभूमि में गृह मंत्रालय को गुलालई का पासपोर्ट जब्त करने सहित उचित कदम उठाने की अनुमति दे दी थी। गुलालई दुनिया के हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में महिला अधिकारों की रक्षा के लिए ‘वॉयस फॉर पीस एंड डेमोक्रेसी’ समूह का गठन करने के लिए जानी जाती हैं।

माता-पिता को लेकर चिंतित

गुलालई इस्लामाबाद में रह रहे अपने माता-पिता को लेकर चिंतित हैं, जो आतंकी फंडिंग के आरोपों के चलते कड़ी निगरानी में हैं। उन्होंने समर्थन के लिए कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और सांसदों से मुलाकात की है।http://www.satyodaya.com

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पाकिस्तानः कांग्रेस नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने पाक के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी से की मुलाकात

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नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। उनके एक नेता ने फिर से लोगों को पार्टी की आलोचना करते की दावत दे दी है। नवजोत सिंह सिद्धू के बाद एक और कांग्रेस नेता शत्रुघ्न सिन्हा पाकिस्तान पहुंच गए हैं। उन्होंने वहां के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी से मुलाकात की। सिन्हा दो दिन के दौरे पर पाकिस्तान गए हैं। शत्रुघ्न सिन्हा ने एक बयान जारी करते हुए कहा है। कि यह एक निजी तौर पर मुलाकात है। जिसके बाद राजनीति में एक बार फिर से चर्चा तेज हो गई है।

बता दें कि शत्रुघ्न सिन्हा लाहौर में एक शादी समारोह में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान गए हुए हैं। वहीं मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने इस पर सहमति जताई कि इस उपमहाद्वीप में अमनचैन को बढ़ावा देने के लिए काम करने की अत्यधिक आवश्यकता है। अल्वी के दफ्तर की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि दोनों के बीच कश्मीर समेत अन्य मुद्दों पर भी बातचीत हुई। हालांकि, शत्रुघ्न ने सफाई देते हुए कहा है कि उनका यह दौरा पूरी तरह से निजी था और इसका राजनीति से कोई लेना देना नहीं है।

यह भी पढ़ें:- डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर पाकिस्तान को कश्मीर पर मध्यस्थता की उम्मीद

अल्वी के ऑफिस ने ट्वीट किया कि भारतीय राजनीतिज्ञ शत्रुघ्न सिन्हा ने राष्ट्रपति आरिफ अल्वी से लाहौर में शनिवार को मुलाकात की। उन्होंने दोनों देशों के बीच शांति का पुल बनाने के महत्व पर चर्चा की। सिन्हा ने कश्मीर में 200 से अधिक दिनों के लॉकडाउन पर राष्ट्रपति की चिंता का समर्थन किया। इस ट्वीट पर भारतीय यूजर्स प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग यहां तक कह रहे हैं कि वे शत्रुघ्न को अपने पास ही रख लें, तो कुछ शत्रुघ्न सिन्हा के बहिष्कार की मांग कर रहे हैं।http://www.satyodaya.com

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डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर पाकिस्तान को कश्मीर पर मध्यस्थता की उम्मीद

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नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो दिवसीय दौरे पर भारत आ रहे हैं। वह 24 फरवरी को अहमदाबाद पहुंचेंगे। जिसके बाद वह शाम को यूपी के आगरा शहर आ रहे हैं। वह यहां ताज महल का दीदार करेंगे। ट्रंप के भारत आने से पहले ही पाकिस्तान ने कश्मीर राग फिर से अलापना शुरू कर दिया है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को उम्मीद है कि ट्रंप कश्मीर पर मध्यस्थता की पेशकश जरूर करेंगे। क्योंकि 9 फरवरी को रियाद में बैठक में सऊदी अरब के दबाव के बाद कश्मीर के मुद्दे को बहस से हटा दिया गया था। इस फैसले से पाकिस्तान खफा है। वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने राष्ट्रपति ट्रंप से हुई तीन मुलाकातों में कश्मीर का मुद्दा उठाया था, जिसके बाद ट्रंप ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करने की बात कुबूल की थी। हालांकि भारत ने इस मध्यस्थता बात को सिरे से खारिज कर दिया था। अब जबकि खुद ट्रंप भारत आ रहे हैं तो मुमकिन है कि इस संबंध में अपना पक्ष साफ कर देगा। आपको यहां पर ये भी बता दें कि अमेरिका ने कश्मीर के मुद्दे पर भारत का कई बार साथ दिया है। ऐसे में पाकिस्तान की निगाहें भी ट्रंप के दौरे पर जरूर लगी होंगी।

यह भी पढ़ें:- पीएम मोदी से मिले उद्धव ठाकरे, कहा- सीएए व एनआरसी से डरने की जरूरत नहीं

विदेश कार्यालय की प्रवक्ता आइशा फारूकी ने मीडिया से बात करने हुए कहा कि मध्यस्थता के लिए राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा की गई पेशकश कुछ ठोस व्यावहारिक कदमों के जरिए आगे बढ़ाई जाएगी। फारूकी ने ट्रंप की भारत यात्रा और कश्मीर के हालात के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि चार अमेरिकी सीनेटरों ने विदेश मंत्री माइक पॉम्पिओ को पत्र लिख कर उनका ध्यान कश्मीर की स्थिति की ओर आकर्षित किया। लेकिन पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है। वह अमेरिका के सामने कई बार मध्यस्थता की गुहार लगा चुका है।http://www.satyodaya.com

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जर्मनी: हनाऊ शहर के हुक्का बार में हुई ताबड़तोड़ फायरिंग, 8 की मौत कई घायल…

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फाइल फोटो

नई दिल्ली। जर्मनी के हनाऊ शहर में ताबड़तोड़ फायरिंग हुई, जिसमें 8 लोगों की मौत हो गई। वहीं घटना में कई लोग गंभीररूप से घायल भी हुए हैं। इस दर्दनाक घटना की जानकारी अधिकारियों ने दी है।

जानकारी के मुताबिक यह हमला जर्मनी के हुक्का बार में हुआ है।पुलिस ने बताया कि इस हमले में पांच अन्य लोग घायल हो गए हैं। हालांकि हमलावरों की तलाश की जा रही है। वहीं अधिकारियों ने ये भी बताया कि पहला हमला रात को लगभग 10 बजे हुआ। इस हमले के बाद एक गहरे रंग के गाड़ी को घटनास्थल से जाते हुए देखा गया और एक अन्य स्थान पर भी गोलीबारी हुई। हालांकि पुलिस ने घटनास्थलों की घेराबंदी कर दी है।

पुलिस के मुताबिक संक्षिप्त बयान में पीड़ितों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। बयान में ये भी कहा गया है कि हमले के मकसद का अभी पता नहीं चल पाया है। हनाऊ के मेयर क्लाउस कामिंस्की ने कहा, ”यह भयानक शाम है जिसे हम हमेशा दुखी होकर याद करेंगे।

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क्षेत्रीय सार्वजनिक प्रसारणकर्ता हेसिसचर रंडफंक ने सूत्रों का हवाला देते हुए कहा कि पहला हमला शहर के केंद्र में एक हुक्का बार में हुआ था। उन्होंने कहा कि गवाहों ने आठ या नौ शॉट्स सुनने और जमीन पर कम से कम एक व्यक्ति को देखने की सूचना दी। ब्रॉडकास्टर ने कहा कि शूटर जाहिर तौर पर शहर के दूसरे हिस्से में गए थे, जहां एक और हुक्का लाउंज के अंदर गोलीबारी हुई थी। हनाऊ दक्षिण-पश्चिमी जर्मनी में है, जो फ्रैंकफर्ट से लगभग 20 किलोमीटर (12 मील) पूर्व में है। यहां करीब 100,000 निवासी हैं और यह हेस्से राज्य में स्थित है। http://www.satyodaya.com

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February 28, 2020, 4:46 pm
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