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हांगकांग प्रदर्शन: 23 साल का लड़का बना चीन की आफत, ट्विटर-फेसबुक ने भी चलाया चाबुक

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नई दिल्ली। पिछले काफी दिनों से हांगकांग में चीन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहा है। यह विरोध प्रदर्शन एक प्रत्यर्पण विधेयक के खिलाफ शुरू हुआ था। हालांकि हांगकांग की सरकार ने विधेयक तो वापस ले लिया लेकिन युवाओं का आंदोलन खत्म नहीं हुआ। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि हांगकांग में लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक मजबूत हो। रविवार को यहां एक लाख से भी अधिक लोग अपनी मांगो को लेकर सड़कों पर उतरे थे। लगातार बढ़ रहे विरोध प्रदर्शन को देख अब चीन अफवाहों का सहारा लेकर इस अहिंसक प्रदर्शन को बदनाम करने की कोशिश में लगा है।

चीन सोशल मीडिया के जरिए भ्रामक प्रचार कर रहा है। फेसबुक और ट्विटर ने भी इसकी पुष्टि करते हुए मंगलवार को बयान जारी किया है। साथ ही ऐसे अफवाहों को फैलाने वाले अकाउंट्स भी बंद कर दिए हैं।

क्या है प्रत्यर्पण विधेयक?

हांगकांग में लगातार युवा बढ़ी संख्या में चीन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। रविवार को पेइचिंग की गंभीर चेतावनियों को दरकिनार करते हुए एक लाख से अधिक की संख्या में लोगों ने यहां लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। ये विरोध प्रत्यर्पण विधेयक के खिलाफ शुरू हुआ था, जिसके मुताबिक अगर कोई हांगकांग का व्यक्ति चीन में कोई अपराध करता है या प्रदर्शन करता है तो उसके खिलाफ हांगकांग में नहीं बल्कि चीन में मुकदमा चलाया जाएगा। बस फिर क्या जैसे ही ये विधेयक आया लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उनके गुस्से को नेतृत्व मिला एक 23 साल के लड़के जोशुआ वांग का। इस जबरदस्त विरोध प्रदर्शन को देखते हुए हांगकांग प्रशासन ने विधेयक तो वापस ले लिया लेकिन इसके बावजूद युवाओं ने प्रदर्शन जारी रखा। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि हांगकांग में लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक मजबूत हो।

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फेसबुक और ट्विटर का चला चाबुक

चीन बढ़ते विरोध प्रदर्शन को देखते हुए भ्रामक प्रचार के जरिए अब इस आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। सोशल मीडिया के जरिए वो इस प्रदर्शन की तस्वीर हिंसक और युद्ध जैसी पेश करने का प्रयास कर रहा है। इस बात की पुष्टि मंगलवार को फेसबुक और ट्विटर ने भी कर दी है। फेसबुक और ट्विटर ने कहा कि ऐसे भ्रामक और गलत जानकारी देनेवाले सोशल मीडिया अकाउंट्स को बंद कर दिया गया है। फेसबुक ने कहा, ‘3 फेसबुक ग्रुप, 7 फेसबुक पेज और 5 अकाउंट्स को हॉन्ग कॉन्ग प्रदर्शन के खिलाफ भ्रामक जानकारी देने के कारण बंद कर दिया गया।’  वहीं, ट्विटर ने भी जानकारी दी है कि 936 अकाउंट्स को बंद कर दिया गया है इसके साथ ही राज्य प्रायोजित अकाउंट्स को भी बंद किया जाएगा।

विधेयक के पीछे चीन की चालाकी?

अब सवाल ये है कि आखिर क्यों चीन इस तरह का विधेयक लाना चाह रहा था हांगकांग के लिए? दरअसल, हांगकांग चीन का एक हिस्सा जरूर है लेकिन वो उसका विशेष प्रशासनिक क्षेत्र है। इसका मतलब ये है कि चीन के पास हांगकांग में सीमित अधिकार हैं जैसे रक्षा और विदेशी मामले चीन के नियंत्रण में हैं अन्य मामलों में हांगकांग को ‘उच्च स्तर की स्वायत्तता’ प्राप्त है। लेकिन प्रत्यर्पण विधेयक के बाद हांगकांग की युवा आबादी को लगा कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी इस विधेयक के जरिए हांगकांग पर अपना दबदबा कायम करना चाहती है। जिसकी वजह से वहां युवा सड़कों पर उतर आए हैं। इस आंदोलन की सबसे दिलचस्प बात ये है कि प्रदर्शन करने वाले भी युवा हैं और उनको नेतृत्व देने वाला भी एक 23 साल का युवा लड़का है। इस लड़के का नाम जोशुआ वांग है।

क्यों खास है ये लड़का?

ये पहली बार नहीं है जब जोशुआ वांग चर्चा में रहे हों। इसके पहले 2014 में वे तब दुनिया की नजरों में आए थे जब उन्होंने ‘अम्ब्रेला मूवमेंट’ चलाया था। उस वक्त उनकी उम्र महज 19 साल थी। इसी आंदोलन के कारण प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका टाइम ने जोशुआ का नाम साल 2014 के सबसे प्रभावी किशोरों में शामिल किया था।

इतना ही नहीं,  साल 2015 में फॉर्च्युन मैगजीन ने उन्हें ‘दुनिया के महानतम नेताओं’ की लिस्ट में जगह दी थी। वहीं, साल 2018 में वांग को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भी नामित किया गया। जोशुआ फिलहाल हांगकांग की राजनीतिक पार्टी डेमोसिस्टो के महासचिव हैं। उन्होंने महज 19 साल की उम्र में ये पार्टी बनाई थी।http://www.satyodaya.com

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रूस की कोरोना वैक्सीन पर उठे कई सवाल, डॉ एलेक्जेंडर ने दिया इस्तीफ़ा

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मॉस्को: रूस का कोरोना वैक्सीन बना लेने का दावा लगातार विवादों में घिरता जा रहा है। भले ही दुनिया को पहली कोरोना वैक्सीन  रूस ने दे दी है। आपको बता दें कई देशों ने इसे खरीदने का ऑर्डर भी दे दिया है। लेकिन इसके कारगर और सुरक्षित होने पर सवाल अभी बने हुए हैं। इस वैक्सीन के रजिस्ट्रेशन के दौरान सरकार ने जो चीजें पेश की हैं, उसके अनुसार इस वैक्सीन के सुरक्षित होने पर कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। ये वैक्सीन कितनी सुरक्षित है, इसे जानने के लिए अभी तक इसकी क्लीनिकल स्टडी पूरी ही नहीं हुई है।

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आपको बता दें WHO समेत दुनियाभर के कई वैज्ञानिकों ने रूस की वैक्सीन स्पूतनिक-वी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रायल के नाम पर 42 दिन में मात्र 38 वॉलंटियर्स को ही इस वैक्सीन की डोज  दी गई है। इसके अलावा ट्रायल के तीसरे चरण पर रूस कोई भी जानकारी देने के लिए तैयार नहीं है। रूस की सरकार का कहना है कि हल्के बुखार के अलावा कोई भी साइड इफेक्ट  नहीं दिखे हैं, जबकि रिपोर्ट्स बताते हैं कि 38 वॉलंटियर्स में 144 तरह के साइड इफेक्ट देखने को मिले हैं।

डॉक्टर एलेक्जेंडर ने नियमों के उल्लंघन के विरोध में दिया इस्तीफ़ा

डॉक्टर एलेक्जेंडर रूस के टॉप डॉक्टर्स में से एक माने जाते हैं और रूसी हेल्थ मिनिस्ट्री की एथिक्स काउंसिल के भी सदस्य थे। उन्होंने वैक्सीन बनाने में की गयी इस जल्दबाजी के खिलाफ इस काउंसिल से भी इस्तीफ़ा दे दिया है। उन्होंने कहा कि रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-वी के लिए ज़रूरी मंजूरी नहीं ली गयीं थीं और इसकी घोषणा जल्दबाजी में कर दी गयी। एलेक्जेंडर ने स्पष्ट कहा है कि इस वैक्सीन के सुरक्षित होने की फ़िलहाल कोई गारंटी नहीं है।

बता दें कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि वैक्सीन से जुड़ी जानकारी अभी तक WHO के साथ साझा तक नहीं की गई हैं। इसलिए शक जाहिर किया गया है कि रूस ने वैक्सीन बनाने के लिए तय निर्देशों का पालन नहीं किया है। इस वजह से ही वह जानकारी नहीं देना चाहता है। वहीं, रूस का दावा है कि वैक्सीन ट्रायल के जो नतीजे आए हैं, उनमें बेहतर इम्युनिटी विकसित होने के परिणाम देखने को मिले हैं। किसी के भी अंदर निगेटिव साइड इफेक्ट  नहीं देखने को मिला है, लेकिन सच यह है कि जिन लोगों पर इस वैक्सीन का ट्रायल हुआ उनमें बुखार, शरीर में दर्द, शरीर का तापमान बढ़ना, सूजन जैसे साइड इफेक्ट स्पष्ट नजर आए। इसके अलावा शरीर में ऊर्जा महसूस न होना, भूख न लगना, सिरदर्द जैसे साइड इफेक्ट कॉमन थे। http://www.satyodaya.com

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रूस का कोरोना वैक्सीन बनाने का दावा, राष्ट्रपति की बेटी के शरीर में बनी एंटीबॉडीज

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दुनिया समेत विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी मांगा सबूत

लखनऊ। विश्व में कोरोना का कहर लगाता जारीहै। वैश्विक महामारी से बचने के लिए भारत, अमेरिका समेत तमाम देश मिलकर कोरोना वायरस से मुकाबला करने की रणनीति बना रहे हैं। वैश्विक संकट से निबटने के लिए कई तरीके अपनाए गए, लेकिन अभी तक कोई कामयाबी हासिल नहीं हो पाई है। कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के करीब 9 महीने बाद दुनियाभर के लिए एक राहतभरी खबर सामने आई है। रूस ने दावा किया है कि उसने कोरोना की वैक्सीन बना ली है।

वैक्सीन नाम स्पूतनिक-V रखा गया

रूस ने कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने की रेस में बाजी मारते हुए मंगलवार को कोविड-19 की वैक्सीन बना लेने का ऐलान कर दिया। जिसका नाम स्पूतनिक-V रखा है और इसके इस्तेमाल को लेकर मंजूरी भी मिल गई है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने की घोषणा की, ‘हमने कोरोना की सुरक्षित वैक्सीन बना ली है और देश में रजिस्टर्ड भी करा लिया है। मगर रूस के इस दावे को दुनिया संदेह भरी निगाहों से देख रही है।

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WHO ने जताया आशंका

क्योंकि इस वैक्सीन को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आशंका जताया है, कि इस वैक्सीन के तीसरे फेज का ट्रायल अभी पूरा नहीं हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि रूस ने अभी तक विकसित किए जा रहे कोरोना वैक्सीन के बारे में जानकारी नहीं है। WHO ने रूस को वैक्सीन के मामले में जल्दबाजी न दिखाने के लिए कहा है और उसके इस रवैये को खतरनाक भी बताया है।

बेटी के शरीर में बनी एंटीबॉडीज

उधर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा उनके वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस की ऐसी वैक्सीन तैयार कर ली है जो कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ कारगर है। देश ने कोरोना वायरस के खिलाफ पहला टीका विकसित कर लिया है जो कोविड-19 से निपटने में ‘बहुत प्रभावी’ ढंग से काम करता है और ‘एक स्थायी रोग प्रतिरोधक क्षमता’ का निर्माण करता है। इसके साथ ही उन्होंने खुलासा किया मैंने इस वैक्सीन का प्रयोग अपनी दो बेटियों में एक बेटी को पहली वैक्सीन लगवाई है और वह अच्छा महसूस कर रही है।

इस टीके का इंसानों पर दो महीने तक परीक्षण किया गया और ये सभी सुरक्षा मानकों पर खरा उतरा है। वैक्सीन को तय योजना के मुताबिक रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय और रेग्युलेटरी बॉडी का अप्रूवल मिल गया है। इस वैक्सीन को सबसे पहले फ्रंटलाइन मेडिकल वर्कर्स, टीचर्स और जोखिम वाले लोगों को दिया जाएगा।http://www.satyodaya.com

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ट्रंप का आदेश: भारत के बाद अमेरिका में भी ‘Chinese App TikTok’ बैन

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दिनेश चावला

नई दिल्ली: अमेरिका ने टिकटॉक ऐप को खतरा बताते हुए बैन लगाने का आदेश दिय़ा है। बताया जा रहा है कि इस आदेश में कहा गया है कि 45 दिन के दौरान अमेरिकी क्षेत्राधिकार के अधीन बाइटडांस के साथ कोई भी लेन-देन नहीं किया जाएगा।

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अमेरिका ने भारतीय कार्रवाई का हवाला देते हुए आदेश में कहा, ‘भारत सरकार ने हाल ही में पूरे देश में TikTok और अन्य चीनी मोबाइल ऐप के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि वे डाटा चोरी कर रहे थे और उपयोगकर्ताओं के डेटा को अनधिकृत तरीके से उन सर्वरों में प्रसारित कर रहे थे जिनके भारत के बाहर के सर्वर हैं।’

पिछले महीने भारत टिकटॉक और वीचैट पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश बना था। भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए यह प्रतिबंध लगाया था। भारत ने 106 चीनी ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया है। भारत के इस कदम का ट्रंप प्रशासन और अमेरिकी सांसदों ने स्वागत किया था।http://www.satyodaya.com

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