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कोरोना वायरस के बाद हंता वायरस ने मचाया हड़कंप,चीन में एक की मौत

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लखनऊ। कोरोना वायरस का कहर से दुनिया उबरी भी नहीं है कि एक और वायरस ने दुनिया में अपना पैर पसारना शुरू कर दिया दिया है। कोरोना वायरस के बाद एक और वायरस ने दुनिया भर में खलबली मचा दी है। चीन के युन्नान प्रांत में एक व्‍यक्ति की हंता वायरस से मौत होने के बाद चीन के सरकारी मीडिया संस्थान ग्लोबल टाइम्स के अनुसार चीन के यूनान प्रांत में नया वायरस फैला है। इससे एक इंसान की मौत हो गई है। इसका नाम है हंता वायरस (Hantavirus). यूएस सेंटर फॉर डिजीस एंड कंट्रोल द्वारा जारी हंता वायरस की तस्वीर. (फोटोः रॉयटर्स) हंता वायरस ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। लोगों में डर है कि कहीं चीन के वुहान शहर से जिस तरह कोरोना वायरस दुनिया भर में फैला, वैसे ही हंता वायरस न फैल जाए।

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चीन के समाचार पत्र ग्‍लोबल टाइम्‍स के मुताबिक हंता वायरस से संक्रमित व्यक्ति काम करने के लिए बस से शाडोंग प्रांत लौट रहा था। उसे हंता वायरस से पॉजिटिव पाया गया था। बस में सवार 32 अन्‍य लोगों की भी जांच की गई है। हंता वायरस का यह मामला ऐसे समय पर आया है जब पूरी दुनिया वुहान से निकले कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रही है। कोरोना वायरस से अब तक 16 हजार 500 लोगों की मौत हो गई है। यही नहीं अब तक दुनिया के 382,824 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। कोरोना वायरस की व्‍यापकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह वायरस अब 196 देशों में फैल चुका है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक हंता वायरस चूहे के संपर्क में आने से इंसान में फैलता है। सेंटर ऑफ डिजीज़ कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (Centre for Disease Control and Prevention) ने अपनी वेबसाइट पर बताया है ‘घर के अंदर व बाहर चूहे हंता वायरस का संक्रमण फैलने की शुरुआती वजह बन सकता है। अगर कोई व्यक्ति पूरी तरह स्‍वस्‍थ भी है तो भी हंता वायरस के संपर्क में आने पर उसके संक्रमित होने का खतरा रहता है।’

हालांकि कोरोना वायरस की तरह हंता वायरस इंसान से इंसान में नहीं फैलता। सेंटर ऑफ डिजीज़ कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के मुताबिक अगर कोई व्‍यक्ति चूहों के मल-मूत्र या उनके बिल की चीजें वगैरह छूने के बाद अपनी आंख, नाक और मुंह को छूता है तो उसमें हंता वायरस का संक्रमण फैल सकता है। कोरोना वायरस की तरह हंता वायरस हवा में नहीं फैलता है।

लक्षण
हालांकि कोरोना वायरस और हंता वायरस के लक्षण काफी एक जैसे हैं। दोनों ही स्थिति में बुखार, सिर में दर्द, सांस लेने में परेशानी, बदन दर्द होता है। इसके अलावा हंता वायरस से संक्रमित होने पर पेट में दर्द, उल्‍टी, डायरिया भी हो जाता है। इलाज में देरी होने पर संक्रमित इंसान के फेफड़े में पानी भी भर जाता है।

कहां से हुई हंता वायरस की शुरुआत
हंता वायरस का पहला मामला चीन से नहीं है। पहली बार इस वायरस के संक्रमण का मामला मई 1993 में दक्षिण पश्चिमी अमेरिका से आया था। ये चार कोनों- एरिजोना, न्यू मेक्सिको, कोलोराडो और उटाह का क्षेत्र था। न्यू मेक्सिको में इस वायरस से एक युवा शख्स और उसकी मंगेतर की मौत हुई थी। सीडीसी ने अपनी रिपोर्ट में कनाडा, अर्जेंटीना, बोलीविया, ब्राजील, चिली, पनामा, पैरागुए और उरागुए से भी इस तरह के मामले आने की पुष्टि की है। http://www.satyodaya.com

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भारत पर निर्भर है कोरोना का भविष्य, पहले भी ऐसे दुश्‍मनों को हराया-WHO

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लखनऊ। चीन से निकला कोरोना वायरस को हराने में भारत समेत सभी देशों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है। भारत में अभी तक कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन की स्‍टेज नहीं आई है। इस बीच विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) के निदेशक डॉ. माइकल जे रायन ने कहा है कि कोरोना वायरस(COVID19) का भविष्य में कैसा असर रहेगा यह भारत जैसी बड़ी जनसंख्या वाले देशों की कार्रवाई पर तय होगा। उन्होंने कहा, ‘चीन की तरह भारत बहुत बड़ी जनसंख्या वाला देश है। कोरोना वायरस के दूरगामी परिणाम इस बात पर निर्भर करेंगे कि बड़ी जनसंख्या वाले देश इसे लेकर क्या कदम उठाते हैं। यह बहुत जरूरी है कि भारत जनस्वास्थ्य के स्तर पर कड़े और गंभीर निर्णय अपनी लोगों के लिए लेना जारी रखे।’कोरोना वायरस को हराने में भारत समेत सभी देशों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है। भारत में अभी तक कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन की स्‍टेज नहीं आई है। इस बीच विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) के निदेशक डॉ. माइकल जे रायन ने कहा है कि कोरोना वायरस(COVID19) का भविष्य में कैसा असर रहेगा यह भारत जैसी बड़ी जनसंख्या वाले देशों की कार्रवाई पर तय होगा।

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उन्होंने कहा, ‘चीन की तरह भारत बहुत बड़ी जनसंख्या वाला देश है। कोरोना वायरस के दूरगामी परिणाम इस बात पर निर्भर करेंगे कि बड़ी जनसंख्या वाले देश इसे लेकर क्या कदम उठाते हैं। यह बहुत जरूरी है कि भारत जनस्वास्थ्य के स्तर पर कड़े और गंभीर निर्णय अपनी लोगों के लिए लेना जारी रखे।’

रायन ने कहा कि भारत ने दो मूक हत्यारों- स्मॉल पॉक्स और पोलियो के उन्मूलन में दुनिया का नेतृत्व किया। भारत में जबरदस्त क्षमता है, सभी देशों में जबरदस्त क्षमता है। जब समुदायों और समाजों को जुटाया जाता है, तो कोई भी लक्ष्‍य हासिल किया जा सकता है। बता दें कि भारत ने पोलियो से लंबी लड़ाई लड़ी और कुछ साल ही भारत पोलिया मुक्‍त हो गया है।बता दें कि भारत में अभी कोरोना वायरस के 471 मामले सामने आए हैं। भारत में अभी यह महामारी सिर्फ दूसरे चरण तक पहुंची है। हमारी यह कोशिश है कि यह तीसरे चरण यानि कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन (जहां पता ही नहीं चलता कि वायरस किसकी वजह से किसी शख्‍स में आया) तक नहीं पहुंच है। भारत पूरी ताकत के साथ कोरोना वायरस के साथ जंग लड़ रही है और डब्‍ल्‍यूएचओ समेत सभी इसकी तारीफ कर रहे हैं।

भारत में अभी तक कोरोना वायरस के कहर को काफी हद तक रोक रखा है। दिल्‍ली में पिछले 24 घंटों में कोई भी कोरोना वायरस से संक्रमित मामला सामने नहीं आया है। हां, महाराष्‍ट्र में स्थिति कुछ चिंताजनक नजर आ रही है। वहां, मरीजों की संख्या 101 हो गई है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पुणे में तीन नए मामले सामने आए हैं और संतारा में एक मामले की पुष्टि हुई है। यहां अभी तक दो लोगों की मौत हो गई है। इधर, नॉर्थ-ईस्‍ट में भी अभी सिर्फ एक मामला मणिपुर में सामने आया है।

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अमेरिका, यूरोप और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से अगर भारत की तुलना की जाए, तो अंतर साफ नजर आता है कि कोरोना वायरस की रफ्तार हिंदुस्‍तान में काफी धीमी है। इटली और अमेरिका में कोरोना वायरस के संक्रमितों की संख्‍या हजारों में पहुंच गई है। इसकी एक वजह भारत सरकार के द्वारा उठाए गए कुछ कड़े कदम भी हैं। इसके अलावा राज्‍य सरकारें भी बेहद सख्‍ती के साथ कोरोना वायरस के मद्देनजर नियमों का पालन न करने वालों से निपट रही हैं। विभिन्‍न राज्‍यों में सैकड़ों लोगों के खिलाफ लॉकडाउन का उल्‍लंघन करने पर एफआइआर दर्ज की गई है।

इस बीच अस्‍पतालों में हमारा मेडिकल स्‍टाफ भी पूरी शिद्दत के साथ मरीजों का इलाज करने में जुटा हुआ है। इसी का नतीजा है कि 25 के आसपास लोग कोरोना वायरस को मात देकर अस्‍पतालों से अपने घर पहुंच गए हैं। हालांकि, डॉक्‍टर्स और प्रशासन का अभी यही कहना है कि लोगों को दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए सतर्क रहने की जरूरत है।http://www.satyodya.com

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कोरोना की दहशतः जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने खुद को किया क्वारंटाइन

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नई दिल्ली। जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल अपने घर पर क्वारंटाइन हो गई हैं। मर्केल ने यह फैसला उनका इलाज करने वाले डॉक्टर के कोरोना वायरस (COVID-19) से संक्रमित पाए जाने के बाद लिया है। समाचार एजेंसी के अनुसार डॉक्टर ने शुक्रवार को मर्केल को न्यूमोकोकल इन्फेक्शन से बचाव की वैक्सीन दी थी। बाद में वह कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया। एंजेला मर्केल को वैक्सीन देने वाले डॉक्टर के कोरोना से संक्रमित पाए जाने के बाद क्वारंटाइन रहने का फैसला किया है। आने वाले दिनों में उनकी लगातार जांच होगी। इस दौरान वह पूरा काम घर से ही करेंगी। एजेंसी के मुताबिक जर्मनी में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 23,974 तक पहुंच गई है और अभी तक मरने वालों की संख्या 92 तक पहुंच गई है।

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इसके मद्देनजर रविवार को जर्मन सरकार ने देश में लोगों के आने-जाने को लेकर कड़े कदम उठाने की घोषणा की। समाचार एजेंसी एएनआइ ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के हवाले बातया कि दुनियाभर में इससे मरने वालों की संख्या 13,700 से ज्यादा हो गई है। वहीं, 3,18,000 लोग इससे संक्रमित हो गए हैं।http://www.satyodaya.com

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कोरोना वायरस: अमेरिका ने इस महिला पर किया वैक्सीन का पहला परीक्षण

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लखनऊ। कोरोना वायरस के लिए तैयार की जा रही वैक्सीन का पहला परीक्षण वॉशिंगटन के सिएटल शहर में रहने वाली एक स्थानीय महिला 43 साल की जेनिफर हॉलर पर किया है।
आपको बता दें कि किसी भी वैक्सीन को टेस्ट करने के लिए जानवरों का इस्तेमाल किया जाता है। क्योंकि इसके साइड इफेक्ट से जान भी चली जाती है। लेकिन अमेरिका की जेनिफर हॉलर ने बिना इसकी परवाह किए खुद पर परिक्षण करवाया है।

जेनिफ़र और उनके साथ 44 लोग वालंटियर्ली यानि स्वेच्छा से सामने आए ताकि मानव जाति पर आए इस संकट से उन्हें बचाया जा सके। जेनिफर के दो बच्चे हैं, इस पूरी प्रक्रिया में वैक्सीन के असफल होने की स्थिति में उनकी जान को ख़तरा हो सकता है।

दुनिया में बहुत कुछ बहुत बुरा हो रहा है तो बहुत कुछ बहुत अच्छा भी हो रहा है। यही अच्छे लोग और उनके अच्छे प्रयासों के चलते ये दुनिया आज भी ख़ूबसूरत है। तभी हम सभी लाख दिक्कतों के बाद भी इस दुनिया में रहना चाहते हैं।

अमेरिका में के. के. पी वॉशिंगटन रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बेहद सावधानी के साथ चार ऐसे मजबूत इच्छाशक्ति वाले सेहतमंद लोगों को इस परीक्षण के लिए चुना है। इस अध्ययन और प्रयोग की टीम लीडर डॉ. लीजा जैक्सन हैं। लीजा मानती हैं कि वैक्सीन के पहले चरण में परीक्षण के लिए तैयार इन चार लोगों के साथ अब हम टीम कोरोना वायरस हो गए हैं। ऐसे मौके पर हर कोई यही चाहता है कि इस आपात स्थिति से निपटने के लिए वह क्या और कैसे करें। जेनिफर सीटेल में ही एक टेक कंपनी में ऑपरेशन मैनेजर हैं।

इनके अलावा तीन और लोगों को इस परीक्षण का इंजेक्शन लगाया जाना है। इसके अलावा 45 अन्य लोगों को भी इसका हिस्सा बनाया जाएगा और इन्हें एक महीने के बाद दो और डोज दिए जाएंगे।

ब्रॉथल के रहने वाले 46 साल के ही नील ब्राउनिंग भी एक माइक्रोसॉफ्ट नेटवर्क इंजीनियर हैं जो इस परीक्षण टीम के सदस्य हैं। उनका कहना है कि उनकी बेटियां इस तरह के सामाजिक काम के लिए उन्हें बेहद प्रोत्साहित करती हैं और गर्व महसूस करती हैं। उनकी बेटियां मानती हैं कि ये दुनिया के उन तमाम लोगों को बचाने के लिए बेहद जरूरी है कि कोई न कोई तो यह जोखिम उठाए।

यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के डॉ एंथनी फॉसी का कहना है कि अगर यह परीक्षण कामयाब रहा तो अगले 12 से 18 महीनों के बाद ही यह वैक्सीन दुनिया भर में इस्तेमाल की जा सकेगी। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस परीक्षण से उम्मीद जताते हुए दावा किया है कि जुलाई तक अमेरिका कोरोना से मुक्त हो जाएगा। उन्होंने यह श्रेय लेने की भी कोशिश की अमेरिका में ही इस खतरनाक वायरस का पहला वैक्सीन इतने कम वक्त में बन कर तैयार होने की उम्मीद है। चीनी वैज्ञानिकों ने 65 दिन पहले इसके बारे में जानकारियां दी थीं और यह वैक्सीन परीक्षण के लिए इतनी जल्दी तैयार कर लिया गया। इसे मॉडर्ना इंक नाम की कंपनी विकसित कर रही है।

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इस समय दुनिया के तमाम देशों में कोरोना की वैक्सीन पर काम हो रहा है। दर्जनों रिसर्च संस्थान इसपर काम कर रहे हैं। अमेरिका, चीन और दक्षिण कोरिया में भी अगले महीने तक ऐसे ही वैक्सीन पर काम होने की संभावना है जिसे इनोवियो फार्मास्युटिकल्स बना रही है। सिएटल में हुए इस परीक्षण की तैयारी उस दिन के बाद से ही तेजी के साथ शुरू हो गई थी जिस दिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना को एक महामारी घोषित किया था।

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इस परीक्षण के लिए 18 से 55 साल के बीच के ऐसे लोगों को चुना जा रहा है जो भीतर से मजबूत हों और जो वैक्सीन के कड़े डोज को भी बर्दाश्त कर सकें। इस परीक्षण के लिए चुने गए लोगों को प्रयोग के लिए जितनी बार क्लीनिक बुलाया जाएगा, इसके लिए उन्हें 100 डॉलर भी दिए जाएंगे।http://www.satyodaya.com

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March 24, 2020, 6:11 pm
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