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अब अमेरिका भी बोला, ‘मोदी है तो मुमकिन है’…

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वॉशिंगटन। अपने पहले कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कुछ ऐसे निर्णय लिए और उन्हें उनके अंजाम तक पहंुचाया कि 2019 का आम चुनाव आते-आते जुमला ही चल निकला…’मोदी है तो मुमकिन है’। इस नारे को भाजपाइयों ने जमकर भुनाया और जनता ने इस पर विश्वास करते हुए मोदी को दोबारा से केन्द्र की सत्ता ऐतिहासिक जीत के साथ सौंपी। लेकिन अब दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका को भी विश्वास हो गया है कि ’मोदी है तो मुमकिन है’।
भारत और अमेरिका के संबंधों को नई ऊंचाई तक पहुँचाने की बात छिड़ी तो अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा, ’मोदी है तो मुम्किन है’।
उन्होंने कहा कि भारत में नारा चला था कि ’मोदी है तो मुमकिन है’, दोनों देशों के बीच संबंधों में भी ऐसा हो सकता है। इंडिया आइडियाज समिट कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पॉम्पियो ने कहा कि हम आगे बढ़ना चाहते हैं। हमेशा के लिए मजबूत संबंध स्थापित करते हुए रणनीतिक मोर्चे पर काम करना चाहते हैं, जिससे दोनों देशों को फायदा हो। मोदी और ट्रंप प्रशासन के नेतृत्व में हम भविष्य के लिए संभावनाएं देखते हैं।

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हिंद प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन की बात इशारों में करते हुए पॉम्पियो ने कहा कि दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाले लोकतंत्र को सबसे पुरानी डेमोक्रेसी से मिलकर साझा विजन पर काम करना चाहिए। साझेदारी, आर्थिक खुलेपन, उदारता और संप्रभुता पर चलते हुए संबंधों को मजबूती देना होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत के समक्ष अपने संबंधों को बेहतर करने का सुनहरा अवसर है। बता दें कि 24 जून से 30 जून तक पॉम्पियो भारत, श्रीलंका, जापाना और दक्षिण कोरिया के दौरे पर होंगे। चीन के अलावा इन देशों की पॉम्पियो की यात्रा से साफ है कि वह क्षेत्र में चीन के मुकाबले शक्ति संतुलन स्थापित करने की अमेरिकी नीति पर अमल करते हुए दौरा करेंगे।http://www.satyodaya.com

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फार्चून की ‘बिजनेस पर्सन ऑफ द इयर’ की लिस्ट में भारतवंशी सत्य नडेला टॉप पर

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न्यूयॉर्क। फॉर्चून ने ‘बिजनस पर्सन ऑफ द इयर’ 2019 की लिस्ट जारी की है। इस लिस्ट में कारोबार जगत के 20  दिग्गजों को शामिल किया गया है। खास बात यह है कि तीन भारतीय मूल के लोगों को भी इसमें जगह मिली है। इनमें माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ (CEO) सत्या नडेला, मास्टरकार्ड के सीईओ अजय बंगा और अरिस्टा की प्रमुख जयश्री उल्लाल शामिल हैं। यही नहीं इस लिस्ट में टॉप पर सत्या नडेला हैं। वहीं, अजय बंगा आंठवें और जयश्री उल्लाल 18वें स्थान पर हैं।

बता दें, इस लिस्ट में उन्हें शामिल किया गया है, जिन्होंने साहसिक लक्ष्य हासिल किए, असंभव सी दिखने वाली परिस्थितियों का समाधान किया और इनोवेटिव समाधान खोजे हैं। वहीं, 10 वित्तीय क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया है। इसमें शेयर धारकों को रिटर्न से लेकर पूंजी पर रिटर्न शामिल है। सत्य नडेला को प्रथम स्थान मिला है। उनके बारे में में फॉर्चून ने लिखा है कि 2014 में जब उन्हें कंपनी की कमान सौंपी गई थी तब वह न तो वह बिल गेट्स जैसे संस्थापक थे और न ही अपने पूर्ववर्ती स्टीव बामर की तरह का बड़ा व्यक्तित्व।

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लिस्ट में दूसरे स्थान पर पर्थ की कंपनी फोर्टेसक्यू मेटल्स समूह की एलिजाबेथ गेन्स रही और प्यूमा के सीईओ ब्योर्न गुल्डन को पांचवा स्थान मिला है। अलीबाबा के सीईओ डेनियल झांग 16वें स्थान पर हैं।http://www.satyodaya.com

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तुर्की: एफ 35 विमान पर नीति में बदलाव करे अमेरिका

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फाइल फोटो

नई दिल्ली। तुर्की ने रूस की हवाई सुरक्षा प्रणाली एस 400 को सक्रिय करने के संकेत दे दिए हैं। उसके बाद तुर्की ने कहा है कि अमेरिका एफ 35 लड़ाकू विमान को सौपने के अपने रुख के बारे में जल्द बदलाव नहीं करेगा। तो वह एस 400 प्रणाली को सक्रिय करने से पीछे नहीं हटेगा।
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यब एर्दोगान ने हालांकि इस मामले पर उम्मीद जताई है कि अमेरिका के साथ यह मसला बातचीत के जरिए हल कर लिया जाएगा।

एर्दोगान ने मंगलवार को जस्टिस व डेवलपमेंट पार्टी के संसदीय समूह से कहा, “ द्विपक्षीय बातचीत में एस 400 को लेकर जारी विवाद को खत्म करने का प्रयास किया जायेगा। हम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से एस 400 सुरक्षा प्रणाली को लेकर जारी विवाद को अधिकारीयों के जरिये खत्म करने की पूरी कोशिश करेंगे।”

उन्होंने कहा,“ एस 400 सुरक्षा प्रणाली को छोड़ देना या सक्रिय नहीं करने का कोई सवाल ही नहीं है। इस मामले का निवारण सच्चाई के माध्यम से किया जाना चाहिए।”
गौरतलब है कि तुर्की रुसी निर्मित एस 400 सुरक्षा प्रणाली को सक्रिय करने पर विचार कर रहा है। सैन्य-तकनीकी सहयोग के लिए रूस की संघीय सेवा के प्रमुख दिमित्री शुगाव ने इसे लेकर कहा है कि एस-400 सुरक्षा के प्रणाली के संचालन प्रकिया को लेकर हम वर्ष के अंत तक तुर्की विशेषज्ञों को पूरी तरह से प्रशिक्षित कर दिया जाएगा। यह प्रणाली अगले वर्ष वसंत ऋतु से पहले युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगी।

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अमेरिका तुर्की की एस-400 सुरक्षा प्रणाली खरीदने के खिलाफ था। अमेरिका का कहना था कि नाटो सुरक्षा मापदंडो के आधार पर यह हथियार प्रणाली ‘अयोग्य’ है। इससे पांच जनेरेशन वाले एफ-35 लड़ाकू विमान के संचालन पर भी असर पड़ सकता है। तुर्की ने रुसी एस-400 सुरक्षा प्रणाली खरीदने पर अमेरिका खासा नाराज हो गया था। जिसके बाद उसने इस वर्ष जुलाई में एफ-35 कार्यक्रम में तुर्की की सहभागिता को स्थगित करते हुए कहा था कि वह मार्च 2020 तक इस परियोजना से तुर्की को पूरी तरह बाहर कर देगा। वहीं रूस ने तुर्की को अपने लड़ाकू विमान एसयू-35 और एसयू 37 बेचने की इच्छा जताई है।http://www.satyodaya.com

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एससीओ प्रमुख: अफगानिस्तान में आतंकी खतरे से पड़ोसी देशों पर हमले की आशंका

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नई दिल्ली । संयुक्त राष्ट्र, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के प्रमुख व महासचिव व्लादिमीर नोरोव ने बताया कि अफगानिस्तान और उसके सीमावर्ती क्षेत्र में आतंकवादी खतरा चिंताजनक है। यह पूरे मध्य व दक्षिण एशियाई देशों में अस्थिरता और आतंकवादी गतिविधियों को फैला सकता है।

नोरोव ने संयुक्त राष्ट्र-एससीओ की उच्च स्तरीय बैठक में मंगलवार को कहा,“अफगानिस्तान सीमा क्षेत्र में मौजूदा स्थिति काफी खतरनाक है। जिससे पड़ोसी और मध्य एशियाई देशों में आतंकवादी गतिविधियां और अस्थिरता फैलने के संभावित खतरे व्याप्त हैं।” उन्होंने कहा कि हाल ही में आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) का उज्बेकिस्तान के साथ सीमा पर एक ताजिक चौकी पर हमला इस खतरे की प्रासंगिकता की पुष्टि करता है।

ताजिक अधिकारियों के अनुसार छह नवंबर को ईशकोबोड चेकपॉइंट पर हुए हमले में आईएस के 20 आतंकवादी शामिल थे। ताजिक सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में 15 आतंकवादी मारे गए, जबकि पांच अन्य को गिरफ्तार कर लिया गया।

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अफगानिस्तान में सरकारी सुरक्षा बलों व कट्टरपंथी तालिबान आतंकवादियों के बीच लंबे समय से संघर्ष जारी है। तालिबान के अलावा यहां कई इलाकों में आईएस और अल कायदा से जुड़े संगठनों के आतंकवादी भी सक्रिय हैं। ये संगठन सुरक्षा बलों पर हमले करते रहते हैं। जिसमें कई सुरक्षाकर्मी व नागरिक मारे जा चुके हैं। अनेकों घायल हैं। यह हमला अब दूसरे देशों से जुड़ी सीमाओं पर स्थित सुरक्षा चौकियों पर भी हो रहा है।http://www.satyodaya.com

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