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यूएनएससी में मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित किए जाने पर चीन ने चली चाल, अपने इस पॉवर का किया इस्तेमाल

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ग्लोबल आतंकी

फाइल फोटो

नई दिल्ली। पुलवामा अटैक के मास्टरमाइंड मसूद अजहर को अन्तरराष्ट्रीय आतंकवादी बनने से पहले एक बार फिर चीन ने बचा लिया है। चीन ने यूएन के विरोध में अपने वीटो पॉवर का इस्तेमाल कर आतंकी मसूद अजहर को बचा लिया है। यूएन की इस बैठक की सबसे खास बात यह है कि इसमें यूके, यूएस, फ्रांस और जर्मनी पहले से ही एक साथ थे। उन्होंने कहा यह चौथी बार हुआ है जब चीन मसूद अजहर का पिता बनकर उसे बचाया है गौरतलब है कि मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव पर रोक लगाने के लिए चीन के पास आज रात 12.30 बजे तक का वक्त था।

आपको बता दें मसूद अजहर जैश-ए-मोहम्मद सरगना का मास्टरमाइंड है। जिसने पुलवामा अटैक कराया था, जिसमें हमारे सीआरपीएफ के 40 से अधिक जवान शहीद हो गए थे। आतंकियों को अपने बच्चे की तरह पालने वाला पाकिस्तान भी इस जदोजहद में लगा हुआ है कि उसे ग्लोबल आतंकी न घोषित किया जा सके। लेकिन इस हमले के बाद भारत ने विश्व समुदाय से उसे ग्लोबल आतंकी घोषित करने की मांग की थी। भारत के अनुरोध के बाद ही यूएन में यह प्रस्ताव को लाया गया था।

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विदेश मंत्रालय ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा कि हम निराश हैं। लेकिन हम सभी उपलब्ध विकल्पों पर काम करते रहेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारतीय नागरिकों पर हुए हमलों में शामिल आतंकवादियों को न्याय के कठघरे में खड़ा किया जाए। मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि हम उन सभी देशों के बहुत-बहुत आभारी हैं, जिन्होंने अजहर को ग्लोबल आतंकवादी घोषित कराने में हमारा समर्थन किया है। इससे पहले, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 अल कायदा सेंक्शन्स कमेटी के तहत अजहर को आतंकवादी घोषित करने का प्रस्ताव 27 फरवरी को फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका ने लाया था। गौरतलब है कि 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में जैश के फिदायीन ने सीआरपीएफ के काफिले पर हमला कर दिया था जिसमें 44 जवानों की मौत हो गई थी। इस आत्मघाती हमले की वजह से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव पैदा हो गया था। अल कायदा सेंक्शन्स कमेटी के सदस्यों के पास प्रस्ताव पर आपत्ति जताने के लिए 10 दिनों का वक्त था। अनापत्ति की अवधि बुधवार को (न्यूयॉर्क के) मुताबिक समय दोपहर 3 बजे समयनुसार बृहस्पतिवार रात 12।30 बजे खत्म होनी थी। आपको बता दें आतंकी अजहर के लिए चीन ने पहले भी 3 बार वीटो पॉवर का इस्तेमाल किया है।

बता दें कि पुलवामा हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इस हमले की बड़ी आलोचना की थी। जब ये सब हो रहा था तब भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा पुलवामा हमले को लेकर जैश का नाम लिए जाने पर चीन ने अपनी टांग अडाई थी। इतना ही नहीं चीन ने पुलवामा अटैक के समय यह भी मांग की थी कि आतंकी संगठन जैश से मसूद अजहर का नाम हटाया जाए। यह जानकारी सूत्रों ने दी थी। बता दें कि पुलवामा में 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने हमले की जिम्मेदारी ली थी।http://www.satyodaya.com

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…जानिए आखिर क्यों मांग रहा पुर्तगाल बकरियों से मदद?

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पुर्तगाल। आप ने यह कहावत तो अक्सर सुनी होगी कि जरूरत पर गधे को भी बाप बनाना पड़ता है। लेकिन क्या आपने कभी यह सुना है कि जरूरत पर किसी ने बकरी को अम्मा बना लिया हो? अजी चौकिये मत ऐसा ही कुछ हुआ है। पुर्तगाल ने जंगलों की आग से होने वाले नुकसान से बचने के लिए बकरियों की शरण ली है। दरअसल, पुर्तगाल ने जंगल की आग पर काबू पाने के लिए ड्रोन तकनीक, सैटलाइट्स और एयरक्राफ्ट का भी प्रयोग किया गया। लेकिन कोई सफलता हाथ नहीं लगी। प्रशासन ने बहुत सर खपाया तो जंगलों में आग का एक कारण गांवो में घटती आबादी को पाया।

इसके पीछे वजह भी है क्योंकि पुर्तगाल में स्ट्रॉबेरी के पेड़ काफी संख्या में हैं और कई किसान इनकी खेती करते हैं। स्ट्रॉबेरी के पेड़ की पत्तियां आग के लिहाज से संवेदनशील होती हैं और बहुत जल्दी आग पकड़ लेती हैं। अधिकारियों ने पाया कि गांवो में भेड़ों और बकरियों के चरवाहों की संख्या काफी अधिक थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उनका पलायन बढ़ा है। ऐसे में जंगलों का बढ़ता आकार गांव तक पहुंच जाता है और आग लगने की घटनाएं तेजी से फैलती हैं। इसलिए अगर बकरियां होंगी तो वो इन पत्तियों को खा जाएंगी जिससे आग लगने का खतरा कम हो जाएगा।

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समस्या का हल मिलने के बाद पुर्तगाल सरकार ने इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू कर दिया है। इसके लिए कुछ खास इलाकों की पहचान की गई है। चयनित इलाकों में 6,700 एकड़ हिस्से में 40 से 50 बकरियों और भेड़ों के लिए सुरक्षित स्थान बनाए गए। इनमें 10,800 भेड़ों और बकरियों के लिए रहने की व्यवस्था की गई है।http://www.satyodaya.com

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अंतरराष्ट्रीय

मलेशिया में जाकिर नाइक पर धार्मिक उपदेश देने पर लगी रोक

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इस्लामिक उपदेशक डॉ. जाकिर नाइक  की मुसीबत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। बता दें कि मलेशिया ने जाकिर नाइक  के धार्मिक उपदेश देने पर पाबंदी लगा दी है। मलेशिया पुलिस के मुताबिक राष्ट्रीय सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए जाकिर नाइक के उपदेश देने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मलेशिया में पुलिस को इस संबंध में सर्कुलर जारी किया गया है। साथ ही रॉयल मलेशिया पुलिस के हेड ऑफ कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस दातुक असमावती अहमद ने भी इसकी पुष्टि की है।

मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मुहम्मद 3 दिन पहले ये बयान दे चुके हैं कि अगर यह साबित हो गया कि नाइक की गतिविधियां मलेशिया के लिए नुकसानदेह हैं, तो उसका स्थायी निवासी दर्जा वापस लिया जा सकता है। इसी क्रम में मलेशियाई पुलिस नाइक के मलेशिया के अल्पसंख्यकों के खिलाफ दिए बयान की जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि नाइक ने एक लॉ फर्म के जरिए पेनांग के उपमुख्यमंत्री (2) पी रामासामी, बगान डलाम असेंबली के सदस्य सतीस मुनिआंदी, पूर्व राजदूत दातुक डेनिस इगनेटियस और कलांग के सांसद चार्ल्स सेंटियागो के खिलाफ सोमवार को नोटिस भेजा। इस नोटिस में कहा गया है कि ये चारों लोग समुचित मुआवजे के साथ माफी मांगें अन्यथा दो दिन में अवमानना का केस झेलने के लिए तैयार रहें।  नाइक ने पुलिस में दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा कि इन पांचों ने उसके 8 अगस्त को दिए बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया।

ये भी पढ़ें: PM मोदी के बाद ट्रंप ने पाक पीएम इमरान खान से की बात, कहा- बनाए रखें शांति….

बता दें कि नाइक के कथित तौर पर दिए एक बयान को लेकर काफी विवाद हुआ था। आरोप है कि नाइक ने कहा था कि मलेशिया में रहने वाला भारतीय समुदाय मलेशियाई प्रधानमंत्री डॉ महातिर मोहम्मद की जगह भारत के पीएम नरेंद्र मोदी का अधिक समर्थक है। नाइक पर ये भी आरोप है कि उसने मुस्लिम बहुल मलेशिया में अल्पसंख्यक हिंदुओं और चीनी मूल के लोगों के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी कर देश की शांति भंग करने की कोशिश की। http://www.satyodaya.com

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PM मोदी के बाद ट्रंप ने पाक पीएम इमरान खान से की बात, कहा- बनाए रखें शांति….

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जम्मू-कश्मीर

फाइल फोटो

नई दिल्ली। भारत ने जम्मू-कश्मीर पर जो बड़ा फैसला लिया है उसके बाद से पाकिस्तान काफी नाराज चल रहा है। ऐसे में पाकिस्तान दुनियाभर के देशों से इस मामले में दखल देने के लिए मिन्नतें कर रहा है। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद पीएम मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सोमवार देर रात को बातचीत हुई। पीएम मोदी ने दोनों देशों के संबंधों और क्षेत्रीय मसलों को लेकर ट्रंप से चर्चा की। PM मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप से साफ कर दिया कि पाकिस्तान को आतंकवाद का रास्ता छोड़ना ही होगा। इस खास बातचीत के बीच की खास बात ये रही कि पीएम मोदी के फोन के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी ट्रंप से बात की है।

ट्रंप से मोदी ने क्या कहा?

सोमवार रात को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप से लगभग 30 मिनट तक बातचीत की थी। दोनों नेताओं के बीच भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय संबंध पर बातें हुईं। पीएम मोदी ने इस दौरान क्षेत्रीय शांति का भी मसला उठाया। प्रधानमंत्री ने पाक का नाम लिए बिना कहा कि ‘कुछ नेताओं द्वारा’ भारत के खिलाफ आपत्तिजन बयानबाजी क्षेत्रीय शांति के लिए लाभकारी नहीं है।

वहीं उन्होंने इस खास बातचीत के दौरान ये भी कहा कि आतंक और हिंसा से मुक्त वातावरण के निर्माण पर जोर दिया जाए और कहा कि ऐसे वातावरण में सीमा पार आतंकवाद की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

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वहीं पीएम मोदी की ट्रंप से बाद खत्म होने के बाद इमरान खान ने भी उनसे बात की। इमरान खान और डोनाल्ड ट्रंप की बातचीत के दौरान क्षेत्रीय मुद्दों पर बात हुई, ट्रंप ने इमरान से कहा कि वह भारत के साथ संबंधों में शांति बनाएं रखें।

इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तानी पीएम से किसी भी तरह के एक्शन, आक्रामक रुख से दूरी बनाने की बात कही है। डोनाल्ड ट्रंप ने इमरान खान को नसीहत भी दे डाली और उनसे शांति बनाए रखने को कहा, वहीं उन्होंने कहा कि आक्रामक बयान देने से बचें।

डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर दी जानकारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ट्वीट कर दोनों नेताओं से बात करने की जानकारी दी। डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा कि मैंने अपने दो अच्छे दोस्त भारत के प्रधानमंत्री मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से बात की। इस बातचीत में ट्रेड, सामरिक साझेदारी और जम्मू-कश्मीर के हालात पर भी बात की। उन्होंने लिखा कि हालात मुश्किल हैं, लेकिन बातचीत अच्छी हुई।

आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप इससे पहले जम्मू-कश्मीर के मसले में मध्यस्थता का ऑफर दे चुके हैं, लेकिन भारत ने किसी भी तरह के दखलंदाजी से इंकार कर दिया था। हालांकि, बाद में अमेरिका ने इसे भारत-पाकिस्तान का द्विपक्षीय मुद्दा बताया था।

जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान लगातार कश्मीर के मसले पर परेशान है और कई देशों से मदद मांग रहा है। लेकिन हर जगह से उसके हाथ सिर्फ निराशा लग रही है, यही कारण रहा कि वह बार-बार अमेरिका या फिर चीन की शरण में पहुंच रहा है। इस भारत के बड़े फैसले के बाद पाक बौखलाया हुआ है। उसने पाक में भारतीय फिल्मों और विज्ञापनों पर रोक लगा दी है।http://www.satyodaya.com

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August 20, 2019, 8:58 pm
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