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पाक: सूफी दरगाह के बाद हुआ बम ब्लास्ट, 3 की मौत 18 घायल…

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सूफी दरगाह

फाइल फोटो

नई दिल्ली। पुलवामा अटैक के बाद दुनिया में लगातार धमाकों की गूंज सुनाई दे रही है। महाराष्ट्र के बाद पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर लाहौर में सूफी दरगाह के बाद बम ब्लास्ट हुआ है। जिसमें कम से कम 3 लोगों की मौत और 18 लोग घायल हुए हैं। जानकारी के मुताबिक सूफी दरगाह के बहार ब्लास्ट में 3 पाकिस्तानी पुलिस अधिकारी शहीद हुए हैं। वहीं 18 से ज्यादा लोग घायल हए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया गया है। हालांकि पुलिस ने भी इस जोरदर धमाके की पुष्टि कर दी है।

वहीं इस धमाके के बीच मौजूद पुलिसवालों का कहना है कि विस्फोट शहर के एक भीड़भाड़ वाले इलाके में दक्षिण एशिया के सबसे बड़े सूफी दरगाहों में से 11 वीं शताब्दी के दाता दरबार दरगाह में महिला आगंतुकों के लिए प्रवेश द्वार के पास हुआ।

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आपको बता दें कि इस दरगाह को 2010 में भी टारगेट किया गया था, जब यहां पर सुसाइड अटैक में 40 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। जबकि इस दरगाह पर सुरक्षा की पूर्ण व्यवस्था होती है।

वहीं स्थानीय पुलिस अधिकारी मोहम्मद काशिफ का कहना है कि ये आत्मघाती हमला सुरक्षा अधिकारियों के वाहन को टारगेट करके किया गया होगा।http://www.satyodaya.com

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हांगकांग प्रदर्शन: 23 साल का लड़का बना चीन की आफत, ट्विटर-फेसबुक ने भी चलाया चाबुक

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नई दिल्ली। पिछले काफी दिनों से हांगकांग में चीन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहा है। यह विरोध प्रदर्शन एक प्रत्यर्पण विधेयक के खिलाफ शुरू हुआ था। हालांकि हांगकांग की सरकार ने विधेयक तो वापस ले लिया लेकिन युवाओं का आंदोलन खत्म नहीं हुआ। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि हांगकांग में लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक मजबूत हो। रविवार को यहां एक लाख से भी अधिक लोग अपनी मांगो को लेकर सड़कों पर उतरे थे। लगातार बढ़ रहे विरोध प्रदर्शन को देख अब चीन अफवाहों का सहारा लेकर इस अहिंसक प्रदर्शन को बदनाम करने की कोशिश में लगा है।

चीन सोशल मीडिया के जरिए भ्रामक प्रचार कर रहा है। फेसबुक और ट्विटर ने भी इसकी पुष्टि करते हुए मंगलवार को बयान जारी किया है। साथ ही ऐसे अफवाहों को फैलाने वाले अकाउंट्स भी बंद कर दिए हैं।

क्या है प्रत्यर्पण विधेयक?

हांगकांग में लगातार युवा बढ़ी संख्या में चीन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। रविवार को पेइचिंग की गंभीर चेतावनियों को दरकिनार करते हुए एक लाख से अधिक की संख्या में लोगों ने यहां लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। ये विरोध प्रत्यर्पण विधेयक के खिलाफ शुरू हुआ था, जिसके मुताबिक अगर कोई हांगकांग का व्यक्ति चीन में कोई अपराध करता है या प्रदर्शन करता है तो उसके खिलाफ हांगकांग में नहीं बल्कि चीन में मुकदमा चलाया जाएगा। बस फिर क्या जैसे ही ये विधेयक आया लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उनके गुस्से को नेतृत्व मिला एक 23 साल के लड़के जोशुआ वांग का। इस जबरदस्त विरोध प्रदर्शन को देखते हुए हांगकांग प्रशासन ने विधेयक तो वापस ले लिया लेकिन इसके बावजूद युवाओं ने प्रदर्शन जारी रखा। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि हांगकांग में लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक मजबूत हो।

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फेसबुक और ट्विटर का चला चाबुक

चीन बढ़ते विरोध प्रदर्शन को देखते हुए भ्रामक प्रचार के जरिए अब इस आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। सोशल मीडिया के जरिए वो इस प्रदर्शन की तस्वीर हिंसक और युद्ध जैसी पेश करने का प्रयास कर रहा है। इस बात की पुष्टि मंगलवार को फेसबुक और ट्विटर ने भी कर दी है। फेसबुक और ट्विटर ने कहा कि ऐसे भ्रामक और गलत जानकारी देनेवाले सोशल मीडिया अकाउंट्स को बंद कर दिया गया है। फेसबुक ने कहा, ‘3 फेसबुक ग्रुप, 7 फेसबुक पेज और 5 अकाउंट्स को हॉन्ग कॉन्ग प्रदर्शन के खिलाफ भ्रामक जानकारी देने के कारण बंद कर दिया गया।’  वहीं, ट्विटर ने भी जानकारी दी है कि 936 अकाउंट्स को बंद कर दिया गया है इसके साथ ही राज्य प्रायोजित अकाउंट्स को भी बंद किया जाएगा।

विधेयक के पीछे चीन की चालाकी?

अब सवाल ये है कि आखिर क्यों चीन इस तरह का विधेयक लाना चाह रहा था हांगकांग के लिए? दरअसल, हांगकांग चीन का एक हिस्सा जरूर है लेकिन वो उसका विशेष प्रशासनिक क्षेत्र है। इसका मतलब ये है कि चीन के पास हांगकांग में सीमित अधिकार हैं जैसे रक्षा और विदेशी मामले चीन के नियंत्रण में हैं अन्य मामलों में हांगकांग को ‘उच्च स्तर की स्वायत्तता’ प्राप्त है। लेकिन प्रत्यर्पण विधेयक के बाद हांगकांग की युवा आबादी को लगा कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी इस विधेयक के जरिए हांगकांग पर अपना दबदबा कायम करना चाहती है। जिसकी वजह से वहां युवा सड़कों पर उतर आए हैं। इस आंदोलन की सबसे दिलचस्प बात ये है कि प्रदर्शन करने वाले भी युवा हैं और उनको नेतृत्व देने वाला भी एक 23 साल का युवा लड़का है। इस लड़के का नाम जोशुआ वांग है।

क्यों खास है ये लड़का?

ये पहली बार नहीं है जब जोशुआ वांग चर्चा में रहे हों। इसके पहले 2014 में वे तब दुनिया की नजरों में आए थे जब उन्होंने ‘अम्ब्रेला मूवमेंट’ चलाया था। उस वक्त उनकी उम्र महज 19 साल थी। इसी आंदोलन के कारण प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका टाइम ने जोशुआ का नाम साल 2014 के सबसे प्रभावी किशोरों में शामिल किया था।

इतना ही नहीं,  साल 2015 में फॉर्च्युन मैगजीन ने उन्हें ‘दुनिया के महानतम नेताओं’ की लिस्ट में जगह दी थी। वहीं, साल 2018 में वांग को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भी नामित किया गया। जोशुआ फिलहाल हांगकांग की राजनीतिक पार्टी डेमोसिस्टो के महासचिव हैं। उन्होंने महज 19 साल की उम्र में ये पार्टी बनाई थी।http://www.satyodaya.com

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ट्रंप से बात करने पर PM मोदी पर भड़के ओवैसी, अमेरिकी राष्ट्रपति को लेकर कही ये बात…

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डोनाल्ड ट्रंप

फाइल फोटो

नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर 30 मिनट तक बात करने के पीएम मोदी पर विपक्ष जमकर निशाना साध रहे हैं। ऐसे में एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने अब पीएम मोदी पर तीखा हमला बोला है। ओवैसी ने कहा कि अगर कश्मीर हमारा द्विपक्षीय मुद्दा है तो फिर पीएम मोदी को ट्रंप से बात करने की क्या जरूरत थी। इतना ही नहीं ओवैसी ने सवाल करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप दुनिया के चौधरी हैं या पुलिसवाले हैं क्या?

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जानकारी के मुताबिक जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने और सूबे के पुनर्गठन के चलते पाकिस्तान से तनातनी के बीच पीएम मोदी ने 19 अगस्‍त को ट्रंप से बात की थी। दोनों नेताओं के बीच फोन पर करीब 30 मिनट तक लंबी वार्ता हुए थी। इस दौरान पीएम मोदी ने पाक से अपने संबंधों को लेकर इशारों-इशारों में ट्रंप से कहा कि कुछ नेताओं का भारत के खिलाफ हिंसा का रवैया शांति की प्रक्रिया में बाधा बन रहा है। हालांकि पीएम मोदी का इशारा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की तरफ था, जिन्होंने हाल में भारत विरोधी कई बयान दिए हैं।

ट्रंप ने की मध्यस्थता की पेशकश

बता दें पीएम मोदी से बातचीत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर पर मध्यस्थता की पेशकश की है। ट्रंप ने कश्मीर में हिंदू-मुस्लिम का राग अलापते हुए कहा कि वह पीएम नरेंद्र मोदी से इस मुद्दे पर इस हफ्ते के अंत में जरूर बात करेंगे।

ट्रंप से पीएम मोदी का फोन पर करना पड़ा भारी

मध्यस्थता को लेकर अब विपक्ष ने पीएम को घेरना शुरू कर दिया है। ओवैसी ने पीएम पर हमला बोलते हुए कहा, मैं काफी हैरान हूं कि जिस मुद्दे को पीएम द्विपक्षीय बताते हैं, उसी मुद्दे पर ट्रंप से क्या बात करते हैं। उन्होंने कहा इस मामले में किसी तीसरे को लाने की क्या जरूरत है। इसका मतलब ट्रंप का दावा सही है, जब वह कह रहे हैं कि मोदी ने कश्मीर पर हमें मध्यस्थता करने के लिए कहा है।

वहीं ओवैसी ने ये भी कहा कि ‘रेडियो पर आप ( मोदी) कुछ और बात करते हैं। संसद में कुछ और बात करते हैं और बाद में आप ट्रंप से बात करने लगते हैं। मुझे बिल्कुल नहीं समझ आ रहा कि इस मामले में ट्रंप से बात करने की क्या जरूरत पड़ गई। हमने सर्जिकल स्ट्राइक किया, बालाकोट किया, क्या हमने उस समय भी ट्रंप से पूछा था? तो फिर इस बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति बात करने की क्या जरूरत है।http://www.satyodaya.com

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ट्रंप ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे पर की मध्यस्थता की पेशकश, जानिए क्या कहा…..

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डोनाल्ड ट्रंप

फाइल फोटो

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर कश्मीर को लेकर मध्यस्थता की पेशकश कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा पीएम मोदी से बातचीत के दौरान वह एक बार फिर इस मुद्दे को उठाएंगे। अमेरिका ने पीएम नरेंद्र मोदी से कश्मीर में तनाव कम करने के लिये कदम उठाने का अनुरोध किया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि “कश्मीर बेहद जटिल जगह है। यहां हिंदू हैं और मुसलमान भी और मैं नहीं कहूंगा कि उनके बीच काफी मेलजोल है।” उन्होंने कहा, “मध्यस्थता के लिये जो भी बेहतर हो सकेगा, मैं वो जरूर करूंगा।”

बता दें इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से फोन पर बातचीत की थी और उन्हें कश्मीर पर भारत के खिलाफ बयानबाजी में एहतियात बरतने को कहा । ट्रम्प ने साथ ही स्थिति को मुश्किल बताया और दोनों पक्षों से संयम बरतने को कहा था। ट्रंप ने, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सोमवार को फोन पर करीब 30 मिनट बात करने के बाद इमरान खान से बात की थी। मोदी ने बातचीत के दौरान पाकिस्तानी नेताओं द्वारा भारत विरोधी हिंसा के लिए उग्र बयानबाजी और उकसावे का मुद्दा उठाया था।

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जानकारी के मुताबिक कश्मीर मुद्दे को लेकर भारत के खिलाफ अपनी मुहिम जारी रखते हुए इमरान खान ने रविवार को भारत सरकार को ‘फासीवादी’ और ‘श्रेष्ठतावादी’ करार दिया था तथा कहा था कि यह पाकिस्तान और भारत में अल्पसंख्यकों के लिए खतरा है। उन्होंने यह भी कहा था कि दुनिया को भारत के परमाणु आयुध की सुरक्षा पर भी निगाह रखनी चाहिए क्योंकि यह न केवल क्षेत्र, बल्कि विश्व पर असर डालेगा।

वहीं व्हाइट हाउस ने कहा कि इमरान खान से बातचीत के दौरान, ट्रम्प ने दोनों पक्षों से तनाव बढ़ने से बचने और संयम रखने को कहा है। वहीं उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने अमेरिका-पाकिस्तान आर्थिक एवं व्यापार सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम करने पर भी सहमति जतायी है।http://www.satyodaya.com

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