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सिंधु जल समझौते को लेकर पाकिस्तान ने दी इंटरनेशनल कोर्ट फॉर आर्बिट्रेशन में जाने की धमकी

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फ़ाइल फोटो

इस्लामाबाद। पुलवामा हमले के बाद भारत की कार्रवाइयों से बौखलाए पाकिस्तान ने कहा है कि भारत सिंधु नदी समझौते के तहत उसकी तरफ बहने वाले पानी को नहीं रोक सकता है और अगर ऐसा हुआ तो वह इंटरनेशनल कोर्ट फॉर आर्बिट्रेशन में जाएगा। पाकिस्तान के एक न्यूज चैनल ने सिंधु जल से जुड़े पाकिस्तान के नियमित आयोग के एक शीर्ष अधिकारी के हवाले से बताया है कि भारत लगातार पानी को लेकर आक्रामकता दिखाता रहा है।

पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा कि अगर भारत रावी, सतलज और ब्यास नदियों का पानी रोकेगा तो इस्लामाबाद इंटरनेशनल कोर्ट फॉर आर्बिट्रेशन में जाएगा। बता दें कि पुलवामा आत्मघाती हमले के बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले महीने कहा था कि भारत ने अपने हिस्से के पानी को पाकिस्तान में जाने से रोकने का फैसला किया है। उस समय पाकिस्तान ने इस पर प्रतिक्रिया में कहा कि भारत अगर अपने हिस्से का पानी रोकता है तो उसे कोई फिक्र नहीं है।

पाकिस्तानी न्यूज चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा कि जल और ऊर्जा मंत्रालय पाकिस्तान को पानी रोकने संबंधी भारत के कदम की समीक्षा कर रहा है। सिंधु जल समझौते के तहत, भारत पाकिस्तान की तरफ पानी के बहाव को नहीं रोक सकता है और अगर वे ऐसा करते हैं तो हम इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन में जाएंगे। अधिकारी ने कहा कि भारत के सिंधु जल आयोग ने पानी का बहाव रोकने संबंधी कदम के बारे पाकिस्तान को कुछ नहीं बताया है। अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान की तरफ बहने वाले पानी की धारा को मोड़ने में भारत को कई साल लगेंगे। 1960 में हुए सिंधु जल समझौते के तहत पश्चिमी नदियों- सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी पाकिस्तान के हिस्से में है और पूर्वी नदियों- रावी, ब्यास और सतलज का पानी भारत के हिस्से में है।   http://www.satyodaya.com

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11वीं सदी में उमर खय्याम की बहुमुखी प्रतिभा से चमक उठा था ईरान, अब गूगल ने डूडल बनाकर किया याद…

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लखनऊ। दुनिया की महान और विशेष विभूतियों को गूगल अपने खास अंदाज में याद करता है। 11वीं सदी में अपनी बहुमुखी प्रतिभा से पारस सहित पूरी दुनिया को आलोकित करने वाले उमर खय्याम की शनिवार को 971वीं जयंती पर गूगल ने इस महान आत्मा को डूडल बनाकर याद किया है। उमर खय्याम महान कवि, गणितज्ञ, दार्शनिक और खगोलशास्त्री थे। उनका जन्म 18 मई 1048 ईसवी में उत्तर पूर्वी ईरान के निशानपुर में हुआ था। खय्याम के पिता इब्राहीम खेमा (तंबू) बनाने का काम करते थे और खय्याम को फारसी में खेमा के अर्थ में इस्तेमाल किया जाता है। उनका दर्शन खाओ, पियो और मौज करो की विचारधारा पर आधारित था।#Google Doodle

उमर खय्याम को कई गणितीय और विज्ञान की खोजों के लिये जाना जाता है। वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने घन समीकरण को हल करने का आसान तरीका निकाला। उन्होंने कोण विच्छेदन से जुड़ी ज्यामितीय हल भी उपलब्ध कराया। खय्याम ने ज्यामिति बीजगणित की स्थापना की, जिसमें उनहोने अल्जेब्रिक समीकरणों के ज्यामितीय हल प्रस्तुत किये। इसमें हाइपरबोला तथा वृत्त जैसी ज्यामितीय रचनाओं द्वारा क्यूबिक समीकरण का हल शामिल है। उसने अलजेब्रा में व्यापक द्विघात समीकरण का भी विचार दिया। उन्होंने द्विपद गुणांक और पास्कल त्रिकोण की त्रिकोणीय सरणी की भी स्थापना की। इतना ही नहीं उमर खय्याम ने संगीत और अल्जेब्रा पर अंकगणित की समस्याएं नाम से एक किताब भी लिखी। उनके महत्वपूर्ण खोजों में जलाली कैलेंडर भी शाामिल है। जलाली कैलेंडर एक सौर कैलेंडर था, जिसमें 33 साल के दिन, सप्ताह, तारीख और लीप वर्ष का पता लगाया जा सकता था। बाद में इसी के आधार पर कैलेंडर बने। इसे जलाली संवतया सेल्जुक संवत भी कहा जाता है। ये जलाली कैलेंडर आज भी इरान और अफगानिस्तान में इस्तेमाल किया जाता है।

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खगोलशास्त्र के क्षेत्र में काम करते हुए खय्याम ने एक सौर वर्ष की दूरी दशमलव के छह स्थानों तक शुद्ध प्राप्त की। इस आधार पर उन्होने एक नए कैलेंडर का आविष्कार किया। उस समय की ईरानी हुकूमत ने इसे जलाली कैलेंडर के नाम से लागू किया। वर्तमान ईरानी कैलंडर जलाली कैलेंडर का ही एक मानक रूप है। गणित, खगोल और विज्ञान के अलावा खय्याम अपनी रूबाइयों (चार पंक्तियों वाली कविता) के लिए भी मशहूर हैं। उमर खय्याम की रूबाइयों की शोहरत में, अंग्रेजी भाषा के कवि एडवर्ड फिट्ज जेराल्ड (1809-1883) का बड़ा हाथ है। जेराल्ड खुद भी अच्छे कवि थे लेकिन कविता के पाठकों में वह अपनी कविताओं से अधिक खय्याम की रुबाइयों के अनुवादक के रूप में अधिक पहचाने जाते हैं। जीवन की अर्थहीनता में व्यक्तिगत अर्थ की खोज,
खय्याम की रूबाइयों का केंद्रीय विषय है।
अपने समय के सबसे प्रसिद्ध विद्वानों में से एक खय्याम ने खुरासान प्रांत के शासक मलिक शाह प्रथम के सलाहकार और ज्योतिषी के रूप में काम किया। भारत के मशहूर शायर निदा फाजली ने एक बार एक मीडिया हाउस से बात करते हुए कहा था कि रूबाइयों को शोहरत ईरान में मिली। खासकर 11वीं सदी में उमर खय्याम के दौर में। वहीं हिन्दी के प्रसिद्ध कवि दिवंगत हरिवंश राय बच्चन ने अपनी किताब मधुशाला में उमर खय्याम के बारे में लिखा है कि पिता जी ने उमर खय्याम के बारे में केवल इतना बतलाया था कि यह फरसी का एक कवि है. इसने अपनी कविता रुबाइयों में लिखी है जैसे तुलसीदास ने चौपाइयों में। रुबाई का शाब्दिक अर्थ ही चौपाई है। पिता जी ने कितनी बारीकी से यह बात बता दी थी, अब समझ में आता है।#EdwardFitzGerald
उमर खय्याम की मृत्यु 4 दिसंबर 1131 में 83 साल की उम्र में हुई। उनके शरीर को निशाबुर, ईरान में ही मौजूद खय्याम गार्डन में दफनाया गया।http://www.satyodaya.com

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अब सिनेमा हाल में भी बेडरूम, लेटकर एंजॉय करें मूवी…

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स्विट्जरलैंड। बेडरूम सिनेमा में मूवीज़ देखने की बात ही अलग है। आराम से लेटकर पॉपकॉर्न खाते हुए फिल्म देखना और कोल्ड ड्रिंक्स पीना। दूसरों को रास्ता देने के लिए ना कोई सीट एडजस्ट करने की जरुरत और ना ही पैरों को मोड़ कर बैठने का झंझट।

इस बेडरूम सिनेमा में आप आराम से लेटकर मूवी को एंजॉय कर पाएंगे। ये वीआईपी बेडरूम सिनेमा खुला है स्विट्जरलैंड में। यहां आने वाले टूरिस्ट्स के सफर को और भी मज़ेदार एक्सपीरिएंस देने के लिए इस सिनेमा की शुरुआत की गई।

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इस सिनेमा को बनाने वाले पाथ कंपनी के सीईओ वेनानज़ियो दी बैको का कहना है कि इस वीआईपी सिनेमा में साफ-सफाई का भी खास ध्यान रखा गया है।

यहां कि बेडशीट्स और कवर्स हर शो के बाद बदल दिए जाते हैं।  आगे बताया कि इस सिनेमा हॉल में 11 डबल बेड लगाए गए हैं, जिनके सिर को आराम देने वाले हेडरेस्ट खुद एडजस्ट हो जाते हैं। इस सिनेमा में फिल्म देखने के लिए आपको 48 डॉलर यानी लगभग 3 हज़ार 360 रुपये की टिकट लेनी होगी। इसके अलावा पाथ सिनेमा ने 350 लोगों की कपैसिटी वाला एक सिंगल सोफा वाला आईमैक्स सिनेमा भी बनाया है।http://www.satyodaya.com

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व्यापार युद्ध पर शी चिनफिंग ने डॉनल्ड ट्रंप को घेरा, एशियाई देशों से की ग्लोबलाइजेशन को बचाने की अपील

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पेइचिंग। चीन और अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर छिड़ गया है। पिछले सप्ताह ही अमेरिका ने चीनी उत्पादों पर सीमा शुल्क बढ़ा दिया था। अब चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने परोक्ष रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप पर हमला बोला है। चिनफिंग ने कहा अगर कोई भी सभ्यता आज के समय में खुद को सर्वश्रेष्ठ मानती है तो ये मूर्खतापूर्ण है। मौजूदा समय में किसी भी देश के लिए दुनिया से कट कर रहना संभव नहीं है।

बता दें, यह बातें चीनी राष्ट्रपति ने ‘डायलॉग ऑफ एशियन सिविलाइजेशन’ विषय पर आयोजित सम्मेलन के शुरुआती सत्र में कही हैं। कार्यक्रम में भारतीय दूतावास प्रभारी एक्विनो विमल, , आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशनियान और यूनान के राष्ट्रपति प्रोकोपीस पावलोपोलस, श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना मौजूद थे। शी चिनफिंग ने एशियाई देशों से ग्लोबलाइजेशन को बचाने की अपील की और कहा कि आज यह किसी भी देश के लिए संभव नही है कि वह अपने दरवाजे अन्य देशों के लिए बंद कर दे। यदि कोई देश ऐसा करता है तो वह अपनी जीवंतता खो बैठेगा। एक सभ्यता दूसरी सभ्यता से श्रेष्ठ है यह सोचना मूर्खतापूर्ण होगा।

गौरतलब है, कि अमेरिका ने चीनी उत्पादों पर पिछले ही सप्ताह सीमा शुल्क बढ़ा दिया था। चीन से आने वाले करीब 200 अरब डॉलर के उत्पादों पर आयात शुल्क को 10 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया था। जिसके बाद चीन ने भी अमेरिका पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का फैसला लिया है।http://www.satyodaya.com

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May 20, 2019, 6:11 am
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