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रूस की कोरोना वैक्सीन पर उठे कई सवाल, डॉ एलेक्जेंडर ने दिया इस्तीफ़ा

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मॉस्को: रूस का कोरोना वैक्सीन बना लेने का दावा लगातार विवादों में घिरता जा रहा है। भले ही दुनिया को पहली कोरोना वैक्सीन  रूस ने दे दी है। आपको बता दें कई देशों ने इसे खरीदने का ऑर्डर भी दे दिया है। लेकिन इसके कारगर और सुरक्षित होने पर सवाल अभी बने हुए हैं। इस वैक्सीन के रजिस्ट्रेशन के दौरान सरकार ने जो चीजें पेश की हैं, उसके अनुसार इस वैक्सीन के सुरक्षित होने पर कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। ये वैक्सीन कितनी सुरक्षित है, इसे जानने के लिए अभी तक इसकी क्लीनिकल स्टडी पूरी ही नहीं हुई है।

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आपको बता दें WHO समेत दुनियाभर के कई वैज्ञानिकों ने रूस की वैक्सीन स्पूतनिक-वी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रायल के नाम पर 42 दिन में मात्र 38 वॉलंटियर्स को ही इस वैक्सीन की डोज  दी गई है। इसके अलावा ट्रायल के तीसरे चरण पर रूस कोई भी जानकारी देने के लिए तैयार नहीं है। रूस की सरकार का कहना है कि हल्के बुखार के अलावा कोई भी साइड इफेक्ट  नहीं दिखे हैं, जबकि रिपोर्ट्स बताते हैं कि 38 वॉलंटियर्स में 144 तरह के साइड इफेक्ट देखने को मिले हैं।

डॉक्टर एलेक्जेंडर ने नियमों के उल्लंघन के विरोध में दिया इस्तीफ़ा

डॉक्टर एलेक्जेंडर रूस के टॉप डॉक्टर्स में से एक माने जाते हैं और रूसी हेल्थ मिनिस्ट्री की एथिक्स काउंसिल के भी सदस्य थे। उन्होंने वैक्सीन बनाने में की गयी इस जल्दबाजी के खिलाफ इस काउंसिल से भी इस्तीफ़ा दे दिया है। उन्होंने कहा कि रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-वी के लिए ज़रूरी मंजूरी नहीं ली गयीं थीं और इसकी घोषणा जल्दबाजी में कर दी गयी। एलेक्जेंडर ने स्पष्ट कहा है कि इस वैक्सीन के सुरक्षित होने की फ़िलहाल कोई गारंटी नहीं है।

बता दें कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि वैक्सीन से जुड़ी जानकारी अभी तक WHO के साथ साझा तक नहीं की गई हैं। इसलिए शक जाहिर किया गया है कि रूस ने वैक्सीन बनाने के लिए तय निर्देशों का पालन नहीं किया है। इस वजह से ही वह जानकारी नहीं देना चाहता है। वहीं, रूस का दावा है कि वैक्सीन ट्रायल के जो नतीजे आए हैं, उनमें बेहतर इम्युनिटी विकसित होने के परिणाम देखने को मिले हैं। किसी के भी अंदर निगेटिव साइड इफेक्ट  नहीं देखने को मिला है, लेकिन सच यह है कि जिन लोगों पर इस वैक्सीन का ट्रायल हुआ उनमें बुखार, शरीर में दर्द, शरीर का तापमान बढ़ना, सूजन जैसे साइड इफेक्ट स्पष्ट नजर आए। इसके अलावा शरीर में ऊर्जा महसूस न होना, भूख न लगना, सिरदर्द जैसे साइड इफेक्ट कॉमन थे। http://www.satyodaya.com

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कोरोना के बाद अब चीन में नपुंसक बनाने वाली बीमारी ने दी दस्तक

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लखनऊ। इससे पहले कि दुनिया कोविड-19 के कहर से बचने का कोई रास्ता खोज पाती, चीन में एक नई आफत ने दस्तक दे दी है। यहां एक नया बैक्टीरियल संक्रमण तेजी से फैल रहा है, जिसका समय पर इलाज न होने पर लोगों की नपुंसकता का कारण बन रहा है। सितंबर की शुरूआत से लेकर अब तक हजारों लोग इस बैक्टीरियल इंफेक्शन की चपेट में आ चुके हैं। इसका संक्रमण हवा से भी फैल रहा है, इसलिए यह ज्यादा घातक साबित हो रही है।

चीन के गांसु प्रांत के एक बड़े शहर लान्झोउ के हेल्थ कमीशन के मुताबिक अब तक 3,245 लोग बू्रसेलॉसिस नाम की गंभीर बीमारी के संपर्क में आ चुके हैं। प्रभावित क्षेत्र में 22 हजार से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गयी है। इस बैक्टीरियल इंफेक्शन की चपेट में आए व्यक्ति को पहले बुखार आता है, जिससे माल्टा बुखार का नाम दिया गया है।

चीन की सरकारी लैब से निकला बैक्टीरिया!

मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक यह बैक्टीरिया चीन के एक सरकारी बायो फार्मास्यूटिकल प्लांट में लीक होने के बाद फैला है। वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह पशुओं के संपर्क में आने से फैला है। यांगझोउ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर झु गुओकियांग का दावा है कि बू्रसेलाॅसिस नाम की ये घातक बीमारी संक्रमित व्यक्ति के रीप्रोडक्टिव सिस्टम को बर्बाद कर देती है। यदि रोगी को समय पर इलाज न मिले तो वह नपुंसकता का शिकार हो सकता है। हालांकि अभी तक किसी भी व्यक्ति की इससे मौत की खबर नहीं है।

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अमेरिकन इंस्टीट्यूट सीडीसी के मुताबिक, इस इन्फेक्शन से कुछ ऐसे नुकसान होते हैं जिसकी भरपाई काफी मुश्किल होती है। विशेषज्ञों के अनुसार बू्रसेलाॅसिसि नाम की यह बीमारी बू्रसेना प्रजाति के एक ग्रुप ऑफ बैक्टीरिया के कारण होती है। सूअर, बकरी, कुत्ता या भेड़ जैसे संक्रमित पशुओं के संपर्क में आने से इंसानों में यह बीमारी फैलती है।http://www.satyodaya.com

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उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के मत्स्य अधिकारी की हत्या कर शव जलाया

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नई दिल्ली। पूरी दुनिया में कोरोना की दहशत इस तरह से व्याप्त है। जिसको लेकर देशों ने नई-नई गाइडलाइन जारी की है। इसी के चलते उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के एक मत्स्य अधिकारी की गोली मारकर हत्या कर दी है। उसके बाद पेट्रोल डालकर उसका शव जला दिया है।

दक्षिण कोरिया ने इस घटना को अपमानजनक करार दिया है। रक्षा मंत्रालय ने कहा हमारी सेना इस क्रूरता की निंदा करती है। साथ ही उत्तर कोरिया से स्पष्टीकरण देने और दोषियों को दंडित करने की मांग करती है। रक्षा मंत्रालय के ने बताया कि विवादित समुद्री सीमा के पास उत्तर कोरिया के सैनिकों ने मत्स्य अधिकारी को गोली मार दी। 47 वर्षीय यह अधिकारी सरकारी नौका में सवार था।

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अधिकारी के मुताबिक मत्स्य अधिकारी उत्तर कोरिया जाना चाहता था। उत्तर कोरिया सरकार ने कोरोना वायरस को लेकर सख्त नीति अपना रखी है। नीति के तहत अवैध रूप से सीमा पार करने वाले को देखते ही गोली मार देने का आदेश है। बता दें कि इससे पहले दक्षिण कोरिया ने बुधवार को उत्तर कोरिया को अपने लापता अधिकारी का पता लगाने के लिए संदेश भेजा था। लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं आया।http://www.satyodaya.com

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बिना ऑक्सीजन के ही दस बार माउंट एवरेस्ट फतह करने वाले रीता शेरपा का निधन

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काठमांडू। नेपाल के पहले पर्वतारोही आंग रीता शेरपा का बीते सोमवार को निधन हो गया। रीता शेरपा नेपाल के ऐसे पहले पर्वतारोही थे, जिन्होंने माउंट एवरेस्ट की चोटी फतह की थी। यही नहीं उन्होंने अपने जीवन में एक या दो बार नहीं बल्कि दस बार माउंट एवरेस्ट की चोटी फतह की थी। वह ऐसा करने वाले दुनिया के एकमात्र पर्वतारोही थे।

जानकारी के मुताबिक दसवीं बार माउंट एवरेस्ट फतह करने की वजह से उनका नाम साल 2017 में गिनी बुग ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हुआ था। बताया जा रहा है कि लंबी बीमारी के बाद रीता शेरपा ने बीते सोमवार को दुनिया को अलविदा कह दिया। उन्होंने 72 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहा है।

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साथी बुलाते थे स्नो लेपर्ड

आपको बता दें कि रीता शेरपा ने 10 बार बिना ऑक्सीजन सिलिंडर के ही एवरेस्ट पर चढ़ाई की थी। उनके साथी उन्हें स्नो लेपर्ड के नाम से पुकारते थे। बताया जाता है कि रीता शेरपा ने पहली बार माउंट एवरेस्ट को फतह करने का कमाल साल 1993 में किया था। इसके बाद उन्होंने 1996 तक 10 बार माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई की।

वहीं नेपाल के पर्वतारोही संघ के पूर्व अध्यक्ष आंग तशेरिंग शेरपा ने रीता शेरपा के निधन पर दुख प्रकट करते हुए कहा है कि वे पर्वतारोहियों के सितारे थे और उनकी मौत देश और पर्वतारोही बंधुत्व के लिए गहरा आघात है। उनके शव का अंतिम संस्कार शेरपा गोंबा या धार्मिक स्थल पर किया जाएगा।http://www.satyodaya.com

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September 25, 2020, 7:36 pm
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