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वॉशिंगटन में आयोजित कार्यक्रम में RBI गवर्नर ने सुझाए गरीबी मिटाने के तरीके…

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भारत को गरीबी मिटानी है तो बढ़ानी हो जीडीपी रेट

देश एकतरफ जहां विकास की बुलंदियां छूता नजर आ रहा है।वहीं एक तबका ऐसा भी है जो आज भी मूलभूत सुविधाओं से भी दूर है।दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था होने के बावजूद भारत गरीबी की मार खा रहा है।भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास का कहना है कि अगर देश को गरीबी से मुक्ति चाहिए तो उसे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर को 8 फीसदी पर पहुंचाना होगा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और वर्ल्ड बैंक की वार्षिक ग्रीष्मकालीन बैठक में शुक्रवार को दास ने कच्चे तेल की कीमतों में बेहद तेजी से होने वाले उतार-चढ़ाव को लेकर चिंता भी जताई।

उनका कहना है कि, बीते कुछ सालों में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.5 फीसदी की औसत तेजी से प्रगति की है, लेकिन इसमें अभी और बेहतरीन प्रदर्शन की जरुरत है। इसके लिए भूमि और श्रम के क्षेत्रों में कई संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता की जरुरत है। हालांकि केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने एक बार फिर वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान भारत की आर्थिक विकास दर में थोड़ी कमी आने का इशारा किया।

बताते चलें कि आरबीआई ने पिछले सप्ताह चालू वित्त वर्ष के लिए विकास दर के 7.4 फीसदी से घटकर 7.2 फीसदी रहने का अनुमानित आंकड़ा जारी किया था। हालांकि आरबीआई ने आगामी महीनों में ब्याज दरों में और कटौती की गुंजाइश निकलने की भी संभावना जताई थी। दास ने कहा, हमारी प्राथमिकता सभी आंकड़ों पर निगरानी बनाए रखना और विकास दर में तेजी लाने और अर्थव्यवस्था की रफ्तार को बरकरार रखने के लिए समन्वित रूप से कदम उठाना है।

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शुक्रवार को अन्तराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए आरबीआई गर्वनर शशिकांत दास ने कहा कि वैश्विक वित्तीय संकट ने पारंपरिक और गैर पारंपरिक मौद्रिक नीतियों की कमियों की पोल खोल दी है। ऐसी स्थिति में उभरते हुए बाजारों में मौद्रिक अर्थशास्त्र पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। बैठक से इतर एक विशेष संबोधन में दास ने कहा, आधुनिक केंद्रीय बैंकों की नीतिगत ब्याज दर में 25 बेसिस अंक की कटौती करने या इतने ही अंक की बढ़ोतरी करने जैसी परंपरागत सोच में बदलाव भी इस चुनौती में शामिल है।http://www.satyodaya.com

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रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रेन की बस से हुई जोरदार टक्कर, नौ की मौत 8 घायल….

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मैक्सिको

फाइल फोटो

मैक्सिको। दुनियाभर में सड़क हादसों का कहर लगातार जारी है। आए दिन लोगों की रोड एक्सीडेंट में मौत होती रहती है। इसी तरह मैक्सिको के क्युरेतारो राज्य के सैन जुआन डेल रियो शहर में शुक्रवार को एक बस को कार्गो ट्रेन ने टक्कर मार दी। टक्कर लगने से 9 लोगों की मौत और 8 लोग जख्मी हो गए। जबकि इन सभी को अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां 6 लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है। घायलों में बस का ड्राइवर भी है, जिसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

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राज्य के रक्षा विभाग के मुताबिक, हादसे की तस्वीरों से पता चलता है कि रेलवे क्रॉसिंग पर चेतावनी लिखी हुई थी। हादसे के वक्त बस रेलवे ट्रैक को क्रॉस कर रही थी, इसी दौरान तेज रफ्तार ट्रेन से टकरा गई। हालांकि इस हादसे का शिकार हुए मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका  जताई जा रही है।http://www.satyodaya.com

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इथियोपिया के ‘नेल्सन मंडेला’ हैं अबी अहमद, यूं ही नहीं बन गए ‘शांतिदूत’

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लखनऊ। प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाले अबी अहमद अली को इथियोपिया का नेल्सन मंडेला कहा जाता है। सेना में खुफिया अधिकारी रह चुके अबी अहमद ने 80 के दशक में अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत की। 2014 ओर 2015 के बीच वह मंत्री भी रहे। फरवरी 2018 में डेमोक्रेटिक पीपल आर्गेनाइजेशन ऑफ ओरम के अध्यक्ष बने। जबकि फरवरी 2018 में इथियोपियन पीपल्स रिवोल्यूशनरी फ्रंट के अध्यक्ष बने। अप्रैल 2018 में देश के प्रधानमंत्री बनने के साथ ही अबी अहमद ने साफ कर दिया कि वह इरिट्रिया के साथ शांति वार्ता जारी रखेंगे। इसके लिए अबी ने गंभीर प्रयास भी किए।

अबी ने इरिट्रिया के राष्टपति इसाइस अफवर्की के साथ शांति वार्ता पर लगातार आगे बढ.ते रहे। अबी के प्रयासों का परिणाम यह हुआ कि पिछले 22 साल से दोनों देशों के बीच चल रहे संघर्ष का अंत हो गया। अबी अहमद और राष्ट्रपति इसाइस ने नो पीस, नो वार सिद्धांत पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने जुलाई और सितंबर 2019 में शांति समझौतों का ऐलान किया। इस सफलता ने अबी को अफ्रीका महाद्वीप का हीरो बना दिया। अबी को अब इथियोपियो का नेल्शन मंडेला तक कहा जाने लगा है।

यूं ही नहीं इथियोपिया के नेल्सन मंडेला बन गए अबी अहमद

अबी अहमद अफ्रीकी देशों में सबसे युवा राष्ट्राध्यक्ष हैं। नेल्सन मंडेला उनके आदर्श हैं। अबी मात्र 13 साल के थे जब दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्टपति रंगभेद के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे। मंडेला के प्रति अबी की दीवानगी इसी बात से समझी जाती है कि वह नेल्सन मंडेला की तस्वीर वाली टी-शर्ट पहनते हैं। प्रधामंत्री बनते ही अबी अहमद ने देश में तेजी से सुधार प्रक्रिया शुरू की। प्रधानमंत्री बनने के 100 दिन के अंदर उन्होंने देश से आपातकाल खत्म किया।

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मीडिया को आजादी दी, जेलों में बंद विपक्षी नेताओं को रिहा किया। इतना ही नहीं अबी ने देश के बाहर निर्वासित जीवन बिता रहे विपक्षी नेताओं को भी अपने देश बुला लिया। इरिटिया के साथ अपने देश की शत्रुता खत्म करने के साथ ही अबी अहमद ने कई अंतरराष्टीय विवादों में भी मध्यस्थता की है।http://www.satyodaya.com

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इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद को मिला 2019 का नोबेल शांति पुरस्कार

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नई दिल्ली। नोबेल का प्रतिष्ठित शांति पुरस्कार इस बार इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली को मिलेगा। शुक्रवार को नोबेल फाउण्डेशन ने उनके नाम का ऐलान किया। अली को नोबेल पुरस्कार उनके देश के कट्टर शत्रु देश इरिट्रिया के साथ संघर्ष को सुलझाने में ऐतिहासिक कामयाबी के लिए दिया जाएगा। नोबेल पुरस्कार कमेटी ने अबी अहमद अली के नाम का ऐलान करते हुए बताया, नबी को शांति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्राप्त करने के प्रयासों के लिए और विशेष रूप से पड़ोसी इरिट्रिया के साथ सीमा संघर्ष को सुलझाने के निर्णायक पहल के लिए इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इथियोपिया और इरीट्रिया के बीच 22 साल पुराने युद्ध के अंत में अहम भूमिका निभाने के चलते अबी अहमद अली को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

बता दें कि भारत-पाकिस्तान की तरह ही इथियोपिया और इरीट्रिया के बीच शत्रुता थी। लेकिन अबी अहमद के प्रयासों से दोनों देशों के बीच 22 साल से चल रहे युद्ध का 2018 में अंत हो गया। 2019 के नोबेल पुरस्कार के नाम के लिए स्वीडिश की 16 वर्षीय जनवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थुनबर्ग का नाम सबसे ऊपर था।

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सोशल मीडिया पर ग्रेटा के लिए कैंपेन भी चल रहा था। नोबेल शांति पुरस्कार के लिए जर्मन चांसलर एंजेला मार्केल का नाम भी चल रहा था। लेकिन स्वीडिश एकेडमी ने सभी को चौकाते हुए इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद के नाम का ऐलान कर दिया। बता दें कि इथियोपिया अफ्रीका का दूसरा सबसे घनी आबादी वाला देश है। साथ ही यह पूर्वी अफ्रीका का का सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश भी है।http://www.satyodaya.com

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