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हमले के बाद पहली बार खुली अल नूर मस्जिद, लोगों ने निकाला मार्च

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क्राइस्टचर्च। एक सप्ताह पूर्व न्यूजीलैंड की दो मस्जिदों पर हुए हमले के बाद आज पहली बार अल नूर मस्जिद खोली गई। हालांकि बिल्डिंग का वह हिस्सा अब भी बंद है जहां हमलावर ने जमकर नरसंहार किया था, क्योंकि पुलिस अभी भी हमले की जांच कर रही है। आपको बता दें कि 15 मार्च को दो मस्जिदों पर हुई अंधाधुंध गोलीबारी में 50 लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें पांच भारतीय थे। इस हमले के बाद चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जिसमें से बाद में एक को छोड़ दिया गया था।

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शनिवार को अल नूर मस्जिद के खुलने पर हमले के पीड़ितों के सम्मान में तीन हजार लोगों ने ‘मार्च ऑफ लव’ निकाला। मार्च के दौरान कुछ लोगों ने अपने हाथों में शांति का संदेश देती हुई तख्तियां ले रखीं थीं, जबकि कुछ लोग बिल्कुल शांत थे। इस मार्च की आयोजक मनइया बटलर ने कहा कि नफरत ने हमारे चारों तरफ अंधेरा ला दिया है। अब प्यार के जरिए ही इस नफरत के अंधेरे को दूर किया जा सकता है। मस्जिद पर हुए इस हमले में अपने तीन साल के बेटे को खोने वाले एडेन डिरिए भी शनिवार को अल नूर मस्जिद में आए। उन्होंने यहां प्रार्थना करने के बाद कहा कि मैं बहुत खुश हूं।

बताते चलें कि 50 लोगों की हत्या करने वाले मुख्य आरोपी का नाम ब्रेंटन टैरंट है। वह आस्ट्रेलियाई नागरिक है। हमले के बाद जब उसे कोर्ट में पेश किया गया तो वह मुस्कुरा रहा था। टैरंट के खिलाफ जज ने हत्या के आरोप तय किये हैं। इस केस में अब 5 अप्रैल को अगली सुनवाई होगी। हालांकि टैरंट ने अभी तक जमानत की कोई अर्जी नहीं दी है। मस्जिद की दीवारों से गोलियों के निशान मिटा दिए गए हैं। दीवारों की फिर से पुताई भी की गई है। साथ ही मस्जिद में नमाज़ के दौरान भारी संख्या में पुलिसबल तैनात रहा। मस्जिद में रहकर सेवा करने वाले सईद हुसैन का कहना है कि एक बार में 15 लोगों को मस्जिद में आने की इजाजत दी जा रही है। लेकिन मस्जिद पूरी तरह से कब खुलेगी, यह जानकारी अभी नहीं है।  http://www.satyodaya.com

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कई मायनों में खास और ऐतिहासिक है हाउडी मोदी, इमरान खान भी पहुंचे अमेरिका

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लखनऊ। इस समय पूरी दुनिया के नजरें अमेरिका के ह्यूस्टन में हो रहे हाउडी मोदी इवेन्ट पर हैं। हाउडी मोदी कई मायनों में भारत के खास है और दुनिया के लिए ऐतिहासिक है। दुनिया के दो बड़े लोकतंत्र के राष्ट प्रमुख एक साथ इस कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं। हाउडी मोदी में टंप करीब डेढ़ घण्टे तक रूकेंगे और चर्चा है कि वह लोगों को संबोधित भी करेंगे। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्टपति डोनाल्ड ट्रम्प दोनों एक मंच पर होंगे। साथ ही करीब 50 अमेरिकी सांसद भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। हाल के वर्षों में ऐसा पहली बार होने जा रहा है जब दो सबसे बड़े लोकंतत्रों के नेता दुनिया में कहीं एक संयुक्त रैली को संबोधित करेंगे। हाउडी मोदी जहां भारत के गर्व और उसकी बढ़ती वैश्विक ताकत का परिचायक है वहीं पाकिस्तान के लिए यह एक और झटका है। क्योंकि भारत की हर कामयाबी और दुनिया के ताकतवर देशों के साथ बढ़ती दोस्ती पाकिस्तान को सबसे ज्यादा परेशान करती है। इस बीच पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान भी अमेरिका पहुंच गए हैं। #Howdymodi

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हाउडी मोदी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए करीब 50 हजार भारत वंशी लोगों ने रजिस्टेशन कराया है। ह्यूस्टन के जिस एनआरजी स्टेडियम में यह कार्यक्रम हो रहा है उसमें करीब 70 हजार लोगों के बैठने की जगह है। अमेरिका में यह पहली बार है जब किसी विदेशी नेता के लिए इतने बड़े प्रोग्राम का आयोजन किया जा रहा है। हाउडी मोदी भारत और अमेरिका के घनिष्ठ रिश्तों का एक उदाहरण है। पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच गहरी दोस्ती की झलक भी इसमें दिखेगी। http://www.satyodaya.com

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हाउडी मोदी कार्यक्रम के लिए अमेरिका पहुंचे पीएम मोदी, किया ऐसा काम सब कर रहे तारीफ

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अमेरिका

फाइल फोटो

नई दिल्ली। पीएम मोदी अपने 7 दिन के दौरे पर अमेरिका पहुंच चुके हैं। पीएम मोदी अपने कार्यक्रम हाउडी मोदी में शिरकत करने के लिए टेक्सास के ह्यूस्टन गए हैं। इस कार्यक्रम में हिस्‍सा लेने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी  ह्यूस्‍टन पहुंचे। स्‍वच्‍छता के समर्थक पीएम मोदी ने अमेरिका की धरती से भी इसका एक संदेश लोगों को दिया है। ह्यूस्‍टन एयरपोर्ट पर एक ऐसा दिलचस्प नजारा देखने को मिला, जिसकी लोग दिल खोल कर तारीफ कर रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक बता दें एयरपोर्ट पर जब पीएम मोदी पहुंचे, तो उनका स्‍वागत करने के लिए व्‍यापार और अंतरराष्‍ट्रीय मामलों के डायरेक्‍टर क्रिस्‍टोफर ओलसन, अमेरिकी राजदूत कैनेथ जस्‍टर के साथ अमेरिका में भारतीय राजदूत हर्षवर्धन श्रंगला मौजूद थे। वहीं इस मुलाकात के दौरान एक महिला अधिकारी ने पीएम मोदी का स्‍वागत करते हुए उन्‍हें एक गुलदस्‍ता भेंट किया। जिसके बाद उसका एक फूल जमीन पर गिर गया। ऐसे पीएम मोदी की नजर जैसे ही उस पर पड़ी उन्‍होंने उसे तुरंत खुद उठाकर अपने सहयोगी को दे दिए।

पीएम मोदी का यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। जिसके बाद लोग उनके इस वीडियों को खूब शेयर भी कर रहे हैं। ऐसे में एक यूजर ने पीएम मोदी की इस बात की तारीफ करते हुए लिखा, भले देखने में ये एक छोटी बात लगे, लेकिन यही सिंपलिसिटी उन्‍हें एक बड़ा लीडर बनाती है।

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ये पहला मौका नहीं है, जब पीएम मोदी ने स्‍वच्‍छता को लेकर इस तरह का मिजाज दिखाया हो। इससे पहले भी एक कार्यक्रम में उन्‍होंने उद्घाटन के बाद प्‍लास्‍टिक रैपर को कहीं फेंकने की बजाए अपनी जेब में रख लिया था।

जानकारी के मुताबिक पीएम नरेंद्र मोदी अमेरिका एक सप्‍ताह के दौरे पर पहुंचे हैं। दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर ये उनका पहला मौका है। हाउडी मोदी कार्यक्रम में मोदी 50 हजार लोगों को संबोधित करेंगे। वहीं प्रोग्राम में अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप भी हिस्‍सा लेंगे। वह इस दौरान भारत के लिए कुछ बड़े ऐलान भी कर सकते हैं।http://www.satyodaya.com

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पाकिस्तानी सेना महिलाओं पर कर रही अत्याचार, गुलालाई ने बयां की हकीकत

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नई दिल्ली। पाकिस्तान में न तो इंसानों की कोई कद्र है और न ही मानवाधिकारों के लिए कोई जगह है। इस्लामिक कट्टरता की जंजीरों में जकड़े इस देश में आतंकी संगठन और ताकतवर सेना का ही फरमान मानना पड़ता है। जो उनके खिलाफ आवाज उठाता है उसकी आवाज हमेशा के लिए बंद कर दी जाती है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों और अमन पसंद लोगों पर कैसे अत्याचार होता है, यह पूरी दुनिया को पता है। समय-समय पर पाकिस्तान के लोग ही उसकी पोल खोलते रहते हैं। एक बार फिर पाकिस्तान से किसी तरह भाग कर अमेरिका पहुंची एक युवती ने भारत के इस पड़ोसी देश की हकीकत पूरी दुनिया के सामने बयां की है। महिलाओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने पर पाकिस्तान सेना ने इस युवती का जीना हराम कर दिया था। इतना ही नहीं पाकिस्तान ने इस युवती पर देशद्रोह का मुकदमा भी थोप दिया। इस युवती का नाम है-गुलालाई इस्माइल। #GulalaiIsmail

गुलालाई ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा महिलाओं के दिल दहला देने वाले यौन शोषण की घटनाओं को उजागर किया है। इसी के बाद पाकिस्तानी सेना गुलालाई की दुश्मन बन गयी। किसी तरह अगस्त में भागकर अमेरिका पहुंची गुलालाई ने वहां राजनीतिक शरण के लिए आवेदन किया है। इस दौरान गुलालाई पूरी दुनिया को पाकिस्तान की सच्चाई भी बता रही हैं। गुलालाई इस समय में बू्रकलीन में अपनी बहन के साथ रह रही हैं। गुलालाई आखिर अमेरिका कैसे पहुंची, इस बारे में उन्होंने कोई खुलासा नहीं किया है। गुलालाई ने कहा कि मैं सिर्फ इतना कहना चाहती हूं कि मैंने किसी हवाई अड्डे से उड़ान नहीं भरी। गुलालाई ने कहा कि मैंने अगर अपने भागने की ज्यादा जानकारी दी तो बहुत से लोगों की जान खतरे में पड़ जाएगी।

महिला कार्यकर्ताओं के एक समूह ने प्रधानमंत्री इमरान खान को पत्र लिखकर गुलालाई इस्माइल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की थी। उन्होंने अपने ऊपर लगे देशद्रोह के मामले को गलत बताया है। महिलाओं एक समूह ने प्रधानमंत्री इमरान खान को पत्र लिखकर गुलालाई की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की थी। न्यूयार्क के डेमोके्रट सीनेटर चाल्र्स शूमर ने कहा कि मैं गुलालाई समर्थन अवश्य करूंगा क्योंकि गुलालाई अगर पाकिस्तान गईं तो वहां उनकी जान को खतरा है।

आईएसआई की सिफारिश पर शुरू हुआ उत्पीड़न

गुलालाई ने बताया है कि पिछले साल नवंबर में इस्लामाबाद उच्च न्यायालय को सूचना दी गई थी कि आईएसआई ने विदेश में कथित देशविरोधी गतिविधियों के कारण गुलालई का नाम ईसीएल में डालने की सिफारिश की है। इसके बाद गुलालई ने याचिका दायर कर उनका नाम ईसीएल में डालने के सरकार के फैसले को चुनौती दी थी। जिस पर उच्च न्यायालय ने उनका नाम हटाने का आदेश दिया। हालांकि, अदालत ने आईएसआई की सिफारिश की पृष्ठभूमि में गृह मंत्रालय को गुलालई का पासपोर्ट जब्त करने सहित उचित कदम उठाने की अनुमति दे दी थी। गुलालई दुनिया के हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में महिला अधिकारों की रक्षा के लिए ‘वॉयस फॉर पीस एंड डेमोक्रेसी’ समूह का गठन करने के लिए जानी जाती हैं।

माता-पिता को लेकर चिंतित

गुलालई इस्लामाबाद में रह रहे अपने माता-पिता को लेकर चिंतित हैं, जो आतंकी फंडिंग के आरोपों के चलते कड़ी निगरानी में हैं। उन्होंने समर्थन के लिए कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और सांसदों से मुलाकात की है।http://www.satyodaya.com

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