Connect with us

अंतरराष्ट्रीय

तुर्की: एफ 35 विमान पर नीति में बदलाव करे अमेरिका

Published

on

फाइल फोटो

नई दिल्ली। तुर्की ने रूस की हवाई सुरक्षा प्रणाली एस 400 को सक्रिय करने के संकेत दे दिए हैं। उसके बाद तुर्की ने कहा है कि अमेरिका एफ 35 लड़ाकू विमान को सौपने के अपने रुख के बारे में जल्द बदलाव नहीं करेगा। तो वह एस 400 प्रणाली को सक्रिय करने से पीछे नहीं हटेगा।
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यब एर्दोगान ने हालांकि इस मामले पर उम्मीद जताई है कि अमेरिका के साथ यह मसला बातचीत के जरिए हल कर लिया जाएगा।

एर्दोगान ने मंगलवार को जस्टिस व डेवलपमेंट पार्टी के संसदीय समूह से कहा, “ द्विपक्षीय बातचीत में एस 400 को लेकर जारी विवाद को खत्म करने का प्रयास किया जायेगा। हम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से एस 400 सुरक्षा प्रणाली को लेकर जारी विवाद को अधिकारीयों के जरिये खत्म करने की पूरी कोशिश करेंगे।”

उन्होंने कहा,“ एस 400 सुरक्षा प्रणाली को छोड़ देना या सक्रिय नहीं करने का कोई सवाल ही नहीं है। इस मामले का निवारण सच्चाई के माध्यम से किया जाना चाहिए।”
गौरतलब है कि तुर्की रुसी निर्मित एस 400 सुरक्षा प्रणाली को सक्रिय करने पर विचार कर रहा है। सैन्य-तकनीकी सहयोग के लिए रूस की संघीय सेवा के प्रमुख दिमित्री शुगाव ने इसे लेकर कहा है कि एस-400 सुरक्षा के प्रणाली के संचालन प्रकिया को लेकर हम वर्ष के अंत तक तुर्की विशेषज्ञों को पूरी तरह से प्रशिक्षित कर दिया जाएगा। यह प्रणाली अगले वर्ष वसंत ऋतु से पहले युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगी।

यह भी पढ़ें: एससीओ प्रमुख: अफगानिस्तान में आतंकी खतरे से पड़ोसी देशों पर हमले की आशंका

अमेरिका तुर्की की एस-400 सुरक्षा प्रणाली खरीदने के खिलाफ था। अमेरिका का कहना था कि नाटो सुरक्षा मापदंडो के आधार पर यह हथियार प्रणाली ‘अयोग्य’ है। इससे पांच जनेरेशन वाले एफ-35 लड़ाकू विमान के संचालन पर भी असर पड़ सकता है। तुर्की ने रुसी एस-400 सुरक्षा प्रणाली खरीदने पर अमेरिका खासा नाराज हो गया था। जिसके बाद उसने इस वर्ष जुलाई में एफ-35 कार्यक्रम में तुर्की की सहभागिता को स्थगित करते हुए कहा था कि वह मार्च 2020 तक इस परियोजना से तुर्की को पूरी तरह बाहर कर देगा। वहीं रूस ने तुर्की को अपने लड़ाकू विमान एसयू-35 और एसयू 37 बेचने की इच्छा जताई है।http://www.satyodaya.com

अंतरराष्ट्रीय

प्रधानमंत्री मोदी ने किया जगन्नाथ मॉरीशस के नए सुप्रीम कोर्ट भवन का उद्घाटन

Published

on

लखनऊ। मॉरीशस भी अन्य देशों की तरह भारत संग मित्रता की झांकी सजाने जा रहा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मॉरीशस के नए सुप्रीम कोर्ट भवन का उद्घाटन के साथ मॉरीशस से मित्रता बढ़ाने की कोशिश कर रहे है। पीएम नरेंद्र मोदी और मॉरीशस के पीएम प्रविंद जगन्नाथ ने आज यानी की गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मॉरीशस की नई सुप्रीम कोर्ट बिल्डिंग का उद्घाटन किया। यह इमारत मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुईस में भारत की सहायता से बनी पहली आधारभूत संरचना है। इस वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होने वाले इस कार्यक्रम में मॉरिशस सुप्रीम कोर्ट के जज, न्याय विभाग के अधिकारी और दोनों देशों के गणमान्य लोग शामिल हुए। 

भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस भवन का निर्माण भारत के सहयोग से हुआ है। पहले भी वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री मोदी व मॉरिशस के प्रधानमंत्री ने संयुक्त रूप से वहां मेट्रो एक्सप्रेस व नया ENT अस्पताल प्रोजेक्ट का शुभारंभ हुआ था। इसका निर्णाण भारत सरकार द्वारा 2016 में मॉरीशस को दिए गए 35.3 करोड़ डॉलर के विशेष आर्थिक पैकेज से किया गया है। 

इसे भी पढ़ें- ‘भूमि पूजन’ पर हरे रंग की रत्नजड़ित पोशाक पहनेंगे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम

मॉरिशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद अदा किया और कहा, ‘एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हृदय से धन्यवाद देता हूं कि मॉरीशस उनके दिल के बहुत करीब है।’ मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘सरकार और मॉरीशस के लोगों को COVID19 वैश्विक महामारी के प्रभावी प्रबंधन के लिए बधाई देता हूं। मुझे खुशी है कि भारत समय पर दवाइयों की आपूर्ति और अनुभवों को साझा करके कोरोना प्रबंधन में सहयोग दे सका।’ प्रधानमंत्री ने आगे कहा, ‘भारत और मॉरीशस दोनों ही हमारी स्वतंत्र न्यायपालिकाओं को हमारी लोकतांत्रिक प्रणालियों के महत्वपूर्ण स्तंभों के रूप में सम्मान देते हैं। यह नई इमारत अपने आधुनिक डिजाइन और निर्माण के साथ इस सम्मान की निशानी है।’

यह परियोजना निर्धारित समय में और अनुमानित से कम लागत में पूरी हुई है। यह भवन 4700 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला है। बता दें कि इससे पहले अक्तूबर 2019 में मोदी और जगन्नाथ ने मॉरीशस में मेट्रो एक्सप्रेस परियोजना के पहले चरण और नए ईएनटी अस्पताल का उद्घाटन किया था।

भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत की ओर से दिए गए आर्थिक सहयोग से वहां का सुप्रीम कोर्ट भवन समय के साथ पूरा हो जाएगा और इससे भारतीय कंपनियों को भी मॉरिशस में मौका मिलेगा।’ http://www.satyodaya.com

Continue Reading

अंतरराष्ट्रीय

भारत आ रहे राफेल को निशाना बनाकर ईरान ने दागी थी मिसाइलें!

Published

on

नई दिल्ली। राफेल के पांच लड़ाकू विमान फ्रांस से सात हजार किलोमीटर का हवाई सफर तय करने के बाद बुधवार को भारत के अंबाला एयरबेस पहुंच गए है। लेकिन भारत पहुंचने से पहले यह यूएई में रूके थे। जिसको लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। संयुक्त अरब अमीरात की जिस अल धाफरा एयरबेस पर पांचो राफेल विमान मंगलवार रात को रुके थे उसके नजदीक ईरान का मिसाइल हमला हुआ था। यूएई के अल धाफरा एयरबेस से फ्रांस की सेनाएं ऑपरेशन करती हैं।

अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने अल धाफरा एसरबेस के नजदीक तीन मिसाइल दागी। जिसके बाद अल-धाफरा एयरपोर्ट को हाई अलर्ट पर कर दिया गया। ईरान के रिव्यूलेशनरी गार्ड्स ने इस इलाके में मॉक मिलिट्री एक्सरसाइज की थी। ईरानी मिसाइल खतरे को देखते हुए भारतीय पायलटों को भी सुरक्षित स्‍थानों पर छिपने के लिए कहा गया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी गार्ड्स ने 28 जुलाई को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होरमुज जलडमरूमध्य में एक नकली विमान वाहक पोत पर हेलीकॉप्टर के जरिए मिसाइल से हमला किया था। दरअसल यह एक मॉक ड्रिल थी। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के बीच ईरानी रिव्यूलेशनरी गार्ड्स ने अमेरिका को संदेश देने के लिहाज से इन मिसाइलों को छोड़ा था। वहीं ईरान के सरकारी टीवी ने कहा है कि ईरानी कमांडो ग्रेट प्रोफेट-14 नाम के युद्धाभ्यास के दौरान हेलिकॉप्टर से हमला करते नजर आए।

यह भी पढ़ें:- फ्रांस से भारत के लिए रवाना हुआ राफेल, 29 जुलाई को अंबाला एयरबेस पहुंचेंगे विमान

जारी एक तस्वीर में ईरानी गार्ड्स हेलिकॉप्टर से एक प्रतिकृति पर एक मिसाइल को दागते नजर आए। ये प्रतिकृति अमेरिकी युद्धपोत निमित्ज जैसी दिखती है। बता दें कि होरमुज जलडमरूमध्य और अल धाफरा एयरबेस दोनों दो किनारे पर बसे हुए हैं और इनके बीच की दूरी मात्र 320 किलोमीटर है। वहीं अमेरिकी नौसेना का निमित्ज युद्धपोत होरमुज जलडमरूमध्य से फारस की खाड़ी के बीच पैट्रोलिंग करता रहता है। जिसको लेकर ईरान आपत्ति जताता है। यूएसएस निमित्ज कैटेगरी का यह पोत पिछले सप्ताह ही हिंद महासागर से मध्य-पूर्व के समुद्री क्षेत्र में आया है।http://www.satyodaya.com

Continue Reading

अंतरराष्ट्रीय

अमेरिका: साइबर राजनयिक बोले- वैश्विक टेलीकॉम कंपनियों से जियो का मॉडल अपनाए

Published

on

लखनऊ। अमेरिका ने चीनी टेलीकॉम दिग्गज हुआवेई की तीखी आलोचना करते हुए और 5जी अवसंरचना में अविश्वसनीय चीनी उपकरणों के उपयोग के प्रति चेताते हुए दुनिया भर के दूरसंचार ऑपरेटरों से भारतीय कंपनी रिलायंस जियो के 5जी टेम्पलेट को अपनाने का आग्रह किया है।

शीर्ष अमेरिकी साइबर राजनयिक रॉबर्ट एल स्ट्रायर ने आईएएनएस से कहा, मुझे लगता है कि रिलायंस जियो का सबक यह है कि 5जी प्रौद्योगिकी के बारे में कुछ भी रहस्यमय नहीं है। इसमें 4जी प्रौद्योगिकी के समान ही घटक हैं, बस इतना है कि यह एक अलग स्तर तक विकसित हुआ है।

स्ट्रायर जियो के 100 प्रतिशत मेड-इन-इंडिया 5जी सोलूशन पर अमेरिकी मूल्यांकन पेश कर रहे थे। जिसकी घोषणा 15 जुलाई को रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कंपनी के 43वें एजीएम में की थी।

स्ट्रायर साइबर एवं अंतर्राष्ट्रीय संचार व सूचना नीति के अमेरिकी उप सहायक सचिव हैं। वह अमेरिका के लिए विदेशी सरकारों के साथ अंतर्राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा, इंटरनेट, डेटा और गोपनीयता नीति पर वार्ताओं का नेतृत्व करते हैं। उनके काम का एक बड़ा हिस्सा 5जी नेटवर्क के लिए गैर-हुआवेई उपकरणों में निवेश करने के लिए अन्य देशों को अमेरिका के पाले में शामिल करना है।

एयरटेल, वोडा आइडिया, बीएसएनएल की चीनी उपकरणों पर निर्भरता के बारे में विशेष रूप से पूछे जाने पर स्ट्रायर ने प्रौद्योगिकी जीवन चक्र और मूल्यह्रास की वास्तविकताओं के बारे में बात की, जो कि अविश्वसनीय विक्रेताओं से विश्वसनीय विक्रेताओं की तरफ जाने में काम आती हैं।

उन्होंने कहा, हमारा अभियान 5जी की तरफ बढ़ने पर केंद्रित है। लेकिन हमें यह एहसास है कि 3जी और 4जी अवसंरचना 5जी की तरफ जाने पर असर डालेगी। इसलिए हम सरकारों और दूरसंचार ऑपरेटरों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। वे यह देखें कि वे कैसे अविश्वसनीय विक्रेताओं से विश्वसनीय विक्रेताओं तक पहुंच सकते हैं।

इसे भी पढ़ें-लखनऊ: संदेहास्पद स्थिति में 65 वर्षीय वृद्ध ने फांसी लगाकर दी जान, जांच में जुटी पुलिस

अमेरिका ने 5जी के लिए केवल विश्वसनीय विक्रेताओं का उपयोग करने के फैसले के लिए स्पेन में टेलीफोनिका, फ्रांस में ऑरेंज, भारत में जियो, ऑस्ट्रेलिया में टेलस्ट्रा, दक्षिण कोरिया में एसके और केटी, जापान में एनटीटी और कनाडा और सिंगापुर के दूरसंचार ऑपरेटरों की प्रशंसा की है।

स्ट्रायर की यह टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं। जब लंदन में अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने चीन को भारत को धमकाने के लिए और हुआवेई और जेडटीई जैसी अविश्वासी चीनी आईटी कंपनियों के लिए आड़े हाथ लिया। शून्य चीनी इनपुट वाले जियो मॉडल पर स्ट्रायर ने भारत में एंटीना, बेस स्टेशन, बैकहॉल, कोर सर्वर और नेटवर्क प्रबंधन के स्वदेशी उत्पादन और इनका वैश्विक बाजार बनने के अवसरों का उल्लेख किया।

स्ट्रायर ने कहा कि अगले साल के दौरान सरकार और टेलिकॉम ऑपरेटरों द्वारा 5जी के लिए जो कुछ होने वाला है, उसके नतीजे अगर दशकों तक नहीं तो भी सालों तक महसूस किए जाएंगे।

स्ट्रायर ने कहा, माहौल हुआवेई के खिलाफ हो रहा है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के निगरानी तंत्र और सूचनाओं के दमन के खतरों के प्रति दुनिया जाग रही है। 5जी नेटवर्क के किसी भी हिस्से में हुआवेई और जेडटीई जैसे अविश्वसनीय, उच्च जोखिम वाले वेंडरों को अनुमति देने से संवेदनशील सरकारी, वाणिज्यिक और व्यक्तिगत स्तर की जानकारी खतरे में पड़ सकती है, और साथ ही सिस्टम भी व्यवधान, हेरफेर और जासूसी के दायरे में आ सकता है। http://www.satyodaya.com

Continue Reading

Category

Weather Forecast

August 3, 2020, 5:20 pm
Cloudy
Cloudy
32°C
real feel: 38°C
current pressure: 99 mb
humidity: 67%
wind speed: 1 m/s W
wind gusts: 1 m/s
UV-Index: 1
sunrise: 5:02 am
sunset: 6:23 pm
 

Recent Posts

Trending