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महिला ने दिया छह बच्चों को जन्म, मां समेत सभी बच्चे स्वस्थ

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ह्यूस्टन। टेक्सास के ह्यूस्टन में एक महिला ने छह बच्चों को एकसाथ जन्म दिया है। दुनियाभर में 4.7 अरब में से कोई एक मामला ही ऐसा होता है, जब कोई महिला छह बच्चों को जन्म देती है। महिला ने अमेरिका के ‘द वुमेन्स हॉस्पिटल ऑफ टेक्सास’ में छह बच्चों को जन्म दिया। डाॅक्टरों के अनुसार मां समेत सभी बच्चे स्वस्थ हैं। लेकिन उन्हें अभी डाॅक्टरों की निगरानी में रखा गया है।

अस्पताल ने बताया कि थेलमा चीका ने शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार सुबह चार बजकर 50 मिनट से सुबह चार बजकर 59 मिनट के बीच चार लड़कों और दो लड़कियों को जन्म दिया। थेलमा स्वस्थ हैं। अस्पताल के बयान के अनुसार, बच्चों का वजन एक पौंड 12 औंस से दो पौंड 14 औंस के बीच है। उनकी हालत स्थिर है और उन्हें अस्पताल की नवजात गहन देखभाल इकाई में रखा गया है। थेलमा ने अपनी बेटियों का नाम जीना और जुरियल रखा है। हालांकि उन्होंने अपने बेटों का नाम अभी डिसाइड नहीं किया है।    http://www.satyodaya.com

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हाइवे पर दहशतगर्दी, यात्रियों को बस से नीचे उतारा और गोलियों से भून डाला

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कराची। दहशतगर्दी और आतंकवाद का पर्याय बन चुके पाकिस्तान में मासूमों और बेबस लोगों का कत्लेआम सामान्य बात है। लेकिन गुरुवार को एक अजीब घटना ने पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया। पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में अज्ञात बंदूकधारियों ने एक राजमार्ग पर जा रही बस को रोका, उसमें से कुछ यात्रियों को जबर्दस्ती नीचे उतारा और कम से कम 14 लोगों को गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतार दिया। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, सेना जैसी वर्दी पहने करीब 15 से 20 अज्ञात बंदूकधारियों ने कराची और ग्वादर के बीच चलने वाली पांच से छह बसों को रोका। उन्होंने ब्लूचिस्तान के ओरमारा इलाके में मकरान तटीय राजमार्ग पर एक बस को रोका, यात्रियों के पहचान पत्रों की जांच की और उनमें से करीब 16 को नीचे उतार लिया।

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डॉन समाचारपत्र ने खबर दी है कि कम से कम 14 यात्रियों की गोली मार कर हत्या कर दी गई जबकि दो यात्री भाग निकलने में सफल रहे और नजदीकी जांच चैकी पर पहुंच गये। उन्हें इलाज के लिए एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि चैकी के और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के कर्मचारी घटनास्थल पर पहुंचे और घटना की जांच कर रहे हैं. हत्या की इस घटना के पीछे की वजह और पीड़ितों की अभी तक पहचान नहीं हो सकी है। अफगानिस्तान और ईरान की सीमा से लगा बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा और गरीब प्रांत है।http://www.satyodaya.com

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वॉशिंगटन में आयोजित कार्यक्रम में RBI गवर्नर ने सुझाए गरीबी मिटाने के तरीके…

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भारत को गरीबी मिटानी है तो बढ़ानी हो जीडीपी रेट

देश एकतरफ जहां विकास की बुलंदियां छूता नजर आ रहा है।वहीं एक तबका ऐसा भी है जो आज भी मूलभूत सुविधाओं से भी दूर है।दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था होने के बावजूद भारत गरीबी की मार खा रहा है।भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास का कहना है कि अगर देश को गरीबी से मुक्ति चाहिए तो उसे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर को 8 फीसदी पर पहुंचाना होगा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और वर्ल्ड बैंक की वार्षिक ग्रीष्मकालीन बैठक में शुक्रवार को दास ने कच्चे तेल की कीमतों में बेहद तेजी से होने वाले उतार-चढ़ाव को लेकर चिंता भी जताई।

उनका कहना है कि, बीते कुछ सालों में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.5 फीसदी की औसत तेजी से प्रगति की है, लेकिन इसमें अभी और बेहतरीन प्रदर्शन की जरुरत है। इसके लिए भूमि और श्रम के क्षेत्रों में कई संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता की जरुरत है। हालांकि केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने एक बार फिर वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान भारत की आर्थिक विकास दर में थोड़ी कमी आने का इशारा किया।

बताते चलें कि आरबीआई ने पिछले सप्ताह चालू वित्त वर्ष के लिए विकास दर के 7.4 फीसदी से घटकर 7.2 फीसदी रहने का अनुमानित आंकड़ा जारी किया था। हालांकि आरबीआई ने आगामी महीनों में ब्याज दरों में और कटौती की गुंजाइश निकलने की भी संभावना जताई थी। दास ने कहा, हमारी प्राथमिकता सभी आंकड़ों पर निगरानी बनाए रखना और विकास दर में तेजी लाने और अर्थव्यवस्था की रफ्तार को बरकरार रखने के लिए समन्वित रूप से कदम उठाना है।

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शुक्रवार को अन्तराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए आरबीआई गर्वनर शशिकांत दास ने कहा कि वैश्विक वित्तीय संकट ने पारंपरिक और गैर पारंपरिक मौद्रिक नीतियों की कमियों की पोल खोल दी है। ऐसी स्थिति में उभरते हुए बाजारों में मौद्रिक अर्थशास्त्र पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। बैठक से इतर एक विशेष संबोधन में दास ने कहा, आधुनिक केंद्रीय बैंकों की नीतिगत ब्याज दर में 25 बेसिस अंक की कटौती करने या इतने ही अंक की बढ़ोतरी करने जैसी परंपरागत सोच में बदलाव भी इस चुनौती में शामिल है।http://www.satyodaya.com

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फ्रांसीसी अखबार का दावा-राफेल डील के बाद अनिल अंबानी को 1,125 करोड़ रुपए का फायदा पहुंचाया गया

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फ्रेंच अखबार की रिपोर्ट के बाद कांग्रेस ने पीएम मोदी पर फिर बोला हमला

नई दिल्ली। फ्रांस के साथ भारत की राफेल डील को लेकर वहां के एक अखबार ने नया खुलासा किया है। फ्रांसीसी अखबार लू मुंद ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि फ्रांस ने राफेल डील के ऐलान के बाद अनिल अंबानी की कंपनी के 14.37 करोड़ यूरो (करीब 1,125 करोड़ रुपये) का टैक्स माफ किया था। लु मुंद की शनिवार को प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के 36 राफेल विमान खरीदने के ऐलान के कुछ महीने बाद ही 2015 में फ्रांस सरकार ने रिलायंस कम्यूनिकेशन की फ्रांस में रजिस्टर्ड टेलिकॉम सब्सिडियरी के टैक्स को माफ कर दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक अनिल अंबानी की कंपनी के बारे में कथित तौर पर फ्रांस के अधिकारियों ने जांच की। अधिकारियों ने पाया कि 2007 से 2010 के बीच अनिल अंबानी की कंपनी पर 60 मिलियन यूरो टैक्स बकाया था। रिलायंस अटलांटिक फ्लैग फ्रांस ने 7.6 यूरो टैक्स के रूप में देने का प्रस्ताव दिया लेकिन फ्रांस के अधिकारियों ने आगे इस मामले की दोबारा जांच करने से इंकार कर दिया।

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अप्रैल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस की कंपनी दसॉ एविएशन के साथ राफेल डील की घोषणा की। 36 हथियारबंद एयक्राफ्ट खरीदने की औपचारिक घोषणा के बाद टैक्स की राशि बढ़कर 151 मिलियन यूरो के करीब हो गई। हालांकि इसी बीच प्रधानमंत्री मोदी के फ्रांस दौरे और राफेल डील की घोषणा के बाद फ्रांस के टैक्स अधिकारियों ने अनिल अंबानी के हिस्से चढ़े 143.7 मिलियन यूरो टैक्स को माफ कर दिया।

 

सेटेलमेंट के तौर पर रिलायंस के महज 7.3 मिलियन यूरो पर बात बनी जबकि असली टैक्स डेब्ट करीब 151 मिलियन यूरो के आसपास था।
फ्रांसीसी अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फ्रांस के टैक्स अधिकारियों ने रिलायंस फ्लैग अटलांटिक फ्रांस से निपटारे के रूप में 73 लाख यूरो (करीब 57.15 करोड़ रुपये) स्वीकार किए, जबकि ऑरिजिनल डिमांड 15.1 करोड़ यूरो (करीब 1182 करोड़ रुपये) की थी। रिलायंस फ्लैग का फ्रांस में टेरेस्ट्रियल केबल नेटवर्क और दूसरे टेलिकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर पर स्वामित्व है।

रिलायंस कम्युनिकेशन व रक्षा मंत्रालय ने दावे को बताया बेबुनियाद

रिलायंस कम्युनिकेशन ने फ्रांसीसी अखबार के इस दावे को खारिज किया है। कंपनी ने कहा कि टैक्स से जुड़ा मामला फ्रांस के कानून के आधार पर ही सुलझाया गया है। रिलायंस कम्यूनिकेशन ने किसी भी तरह की अनियमितता को खारिज किया है। आरकॉम ने कहा है कि टैक्स विवाद को उन कानूनी प्रावधानों के तहत हल किया गया, जो फ्रांस में संचालित सभी कंपनियों के लिए उपलब्ध हैं।
वहीं रक्षा मंत्रालय ने कहा, हमने वह रिपोर्ट्स देखी जिसमें निजी कंपनी को टैक्स में दी गई छूट और राफेल डील की प्रक्रिया के बीच कनेक्शन का अनुमान लगाया गया। मगर जिस सत्र के लिए टैक्स में छूट मिली और राफेल डील की प्रक्रिया शुरू हुई, इसके समय में कोई समानता नहीं है। ऐसे में कनेक्शन की बात पूरी तरह से गलत है। यह तोड़-मरोड़कर पेश की गई है। रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि राफेल डील और टैक्स मसले को एक साथ जोड़कर देखना पूरी तरह गलत, पक्षपातपूर्ण होने के साथ-साथ गुमराह करने की शरारती कोशिश है।
वहीं राफेल डील में कथित घोटाले का आरोप लगाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल काफी समय से पीएम मोदी पर हमला कर रहे हैं। इस बीच कांग्रेस ने फ्रेंच न्यूजपेपर की रिपोर्ट के बाद एक बार फिर पीएम मोदी पर हमला बोला है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि मोदी कृपा से फ्रांस की सरकार ने अनिल अंबानी की कंपनी के अरबों रुपये का टैक्स माफ किया।

फ्रांस के टैक्स अधिकारियों ने की थी रिलायंस फ्लैग की जांच

फ्रांसीसी अखबार के मुताबिक फ्रांस के टैक्स अधिकारियों ने रिलायंस फ्लैग की जांच की थी और पाया कि कंपनी पर 2007 से 2010 के दौरान 6 करोड़ यूरो (करीब 470 करोड़ रुपये) की टैक्स देनदारी बनती है। हालांकि, रिलायंस ने सेटलमेंट के लिए सिर्फ 76 लाख यूरो (करीब 59.5 करोड़ रुपये) की पेशकश की थी, जिसे फ्रेंट अथॉरिटीज ने ठुकरा दिया था। अथॉरिटीज ने 2010 से 2012 के लिए कंपनी की एक अन्य जांच कराई और उसे 9.1 करोड़ यूरो (करीब 712 करोड़ रुपये) अतिरिक्त टैक्स चुकाने को कहा।
अखबार की रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल 2015 तक रिलायंस पर कम से कम 15.1 करोड़ यूरो (करीब 1182 करोड़ रुपये) की टैक्स देनदारी थी। पैरिस में पीएम मोदी द्वारा राफेल डील के ऐलान के 6 महीने बाद अक्टूबर 2015 में फ्रांसीसी अथॉरिटिज ने सेटलमेंट के तहत रिलायंस से 15.1 करोड़ यूरो (करीब 1182 करोड़ रुपये) के बजाय 73 लाख यूरो (करीब 57.15 करोड़ रुपये) स्वीकर कर लिए।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तत्कालीन फ्रेंच प्रेजिडेंट फ्रांस्वा ओलांद के साथ बातचीत के बाद 10 अप्रैल 2015 को पैरिस में 36 राफेल लड़ाकू विमानों को खरीदने का ऐलान किया था। राफेल पर फाइनल डील 23 सितंबर 2016 को हुई थी। मुख्य विपक्षी कांग्रेस इस डील में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाती रही है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार एक राफेल जेट को 1,670 करोड़ रुपये में खरीद रही है जबकि यूपीए के दौरान जब डील पर बात हुई थी तब एक विमान की कीमत 526 करोड़ रुपये तय हुई थी। हालांकि, यूपीए शासनकाल में राफेल को लेकर सिर्फ बातचीत हुई थी, कोई डील नहीं।

डील में अनियमितता और अंबानी को फायदा पहुंचाने के कांग्रेस के आरोप

विमान की कीमत के अलावा कांग्रेस अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस को दसॉ एविएशन के ऑफसेट पार्टनर चुने जाने को लेकर भी सरकार पर हमला करती रही है। दसॉ ही राफेल विमानों को बनाती है। दूसरी तरफ सरकार कांग्रेस के आरोपों को खारिज करती रही है। सरकार का कहना है कि यह डील किसी कंपनी के बजाय दोनों देशों की सरकारों के बीच हुई है, जिसमें करप्शन के लिए कोई जगह नहीं है। रिलायंस डिफेंस को ऑफसेट पार्टनर बनाए जाने के सवाल पर सरकार का कहना है कि यह दसॉ का फैसला है, वह जिसे चाहे ऑफसेट पार्टनर बनाए, इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं है।

सीताराम येचुरी ने भी बोला हमला

रिपोर्ट आने के बाद माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने भी पीएम मोदी पर हमला बोला है। उन्होंने लड़ाकू विमान राफेल की खरीद के लिये फ्रांस सरकार के साथ हुये द्विपक्षीय करार मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राष्ट्रीय हितों के साथ समझौता करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मोदी फ्रांस गये, लड़ाकू विमानों की संख्या में कटौती करते हुये करार पर हस्ताक्षर कर राष्ट्रीय हितों से समझौता किया। एचएएल को करार से बाहर कर अंबानी को सौदे का हिस्सा बनाया। येचुरी ने कहा कि जनता के पैसे से कम संख्या में 41 प्रतिशत अधिक कीमत पर विमान खरीदने का करार कर अपनी सांठगांठ वाले करीबियों को कर में भारी छूट दिलायी है। उन्होंने कहा, मोदी का फार्मूला अपने धनी दोस्तों की मदद करना है। गड़बड़ी के समूचे तंत्र का खुलासा हो गया है। राफेल घोटाले में वायु सेना को दरकिनार कर प्रधानमंत्री कार्यालय सीधे तौर पर शामिल है और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार गैरकानूनी तरीके से पेरिस में समझौता वार्ता कर रहे थे। येचुरी ने कहा कि फ्रांस के राष्ट्रपति पहले ही कह चुके हैं कि मोदी ने अंबानी को इस करार में साझेदार बनाने के लिये कहा था और अब फ्रांस सरकार द्वारा अंबानी को कर में छूट देने का भी खुलासा हो गया है।

15.1 करोड़ यूरो की टैक्स डिमांड थी गैरकानूनी – आरकॉम

रिलायंस कम्यूनिकेशंस के एक प्रवक्ता ने कहा कि टैक्स डिमांड श्पूरी तरह से गलत और गैरकानूनीश् थी। कंपनी ने किसी भी तरह के पक्षपात या सेटलमेंट से किसी भी तरह के फायदे से इनकार किया है।http://www.satyodaya.com

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