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अर्थात- यथार्थ

बाढ़ में हवाई दौरा

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जब बाढ़ आती है, तो फिर मजबूरन हमारे नेता को हवाई सर्वेक्षण करना पड़ता है। जब कोई नेता ऐसा करता है, तो मुझे बहुत बेबस जान पड़ता है।

आप कहेंगे कि वाह साहब वाह! आपको डूबी हुई जनता नहीं नेता बेबस नजर आ रहा। फिर मैं आप से कहूंगा कि जी हाँ, मुझे नेता बेबस नजर आ रहा है। और जनता कब नहीं डूबी थी, जो आज कुछ नया है! संसद में बढ़ते दागी प्रतिनिधियों के बारे में आपका क्या खयाल है! सूखा पड़ा तो सूखी थी, बाढ़ आई तो डूबी है। अब आप से इल्तजा है कि अब आप जरा हवाई जहाज में बैठे उस नेता के बारे में सोचें। जितनी देर उसे बैठना है, मुंह लटकाए रखना है। किसी नेता-नगरी के लिए मुद्दा लटकाना आसान है, ठीक उसी तरह जैसे किसी अधिकारी के लिए फाइल लटकाना, मगर मुंह लटकाने में मेहनत लगती है। अनुभव, कौशल सब लगता है। आप जरा वह दृश्य सोचें, जब फोटो खींचने वाला फोटो खींचने से पहले आप से मुस्कराने के लिए कहता है, सोचिए सांस रोके, पेट अंदर खींचे 10-15 सेकेंड में ही क्या हालत हो जाती है! मैं अपनी कहता हूं! बचपन में ऐसी परिस्थिति में कई बार तो मैं रोने लगा हूं और कुछेक बार हंसने। पिटाई हुई अलग से। अब फिर जरा उस नेता पर आते हैं, जो हवा में उड़ रहा! अगर वह अकेले होता या ऐसा करते वक्त उसकी फोटो-वीडियो न बनती तो उसके लिए आसान होता। वह हंस-मुस्कुरा सकता था। थकावट होने के फलस्वरूप अंगड़ाई ले सकता था। एक जैसा दृश्य निहारते-निहारते जंभाई ले सकता था। अरे कुछ नहीं अपनी बोरियत दूर करने हेतु अपनी उंगलियां चटका सकता था। जरा सोचिए! कितने सारे विकल्प मौजूद थे, मगर वह कुछ नहीं कर सकता सिवाय मुंह लटकाने के, जो ठीक इस वक्त वह बखूबी कर रहा। वह जानता है कि बगल में उसके फोटोग्राफर बैठा है, जो उसकी फोटो उतार रहा है, सो उसे अपना मुंह लटका कर रखना है। कहीं जरा सी भी कुछ ऊंच-नीच हुई तो अपोजिशन को बैठे बिठाए एक मुद्दा मिल जाएगा! जोकि उसकी पोजिशन के लिए बिल्कुल भी ठीक न होगा! ऐसे ही मुझे याद पड़ता है कि एक श्रद्धाजंलि समारोह में कुछ नेता हंस पड़े थे, फिर अगले दिन जनता ने उनको बहुत श्रद्धा से याद किया। जिसने जोक सुनाया था, वह नहीं हंसा था। वह संवेनशील माना गया। ऐसे मौकों पर एक संवेनशील नेता (अनुभवी पढ़ें) तनिक भी रिस्क नहीं लेता। सो, नेता को मुंह लटकाना है, और ऐसे लटकाना है कि कम से कम इतना तो हो कि कल जब अखबार में लोग उसे देखें (बाढ़ पीड़ित नहीं) तो बाढ़ की विकरालता से ज्यादा त्रासद उनका चेहरा दिखे! लोगों को पता चलना चाहिए कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र को देखने के बाद नेताजी बहुत प्रभावित हुए।अब सोचिए, जब तक वह जलमग्न क्षेत्रों को देखेगा, तब तक उसे देखते हुए स्वयं को चिंतामग्न होते दिखाना भी है। यह काम कम चुनौतियों से भरा नहीं है! आप इसे ऐसे समझें, किसी स्विमिंग पूल में नहाने वाले को जलमग्न क्षेत्र को देखकर फिलिंग लानी है! कल को अखबार में वह अपनी छपी फोटो देखें और खुद को दाद भी न दे पाएं, फिर इतने वर्षों की राजनीति करने का क्या फायदा!
सर्वेक्षण तो भारत की जनता के साथ जुड़ा हुआ है। रोजमर्रा के अनुभव से उसने जाना है कि अधिकतर सर्वेक्षण हवा हवाई होते हैं। और यहां नेता जमीनी हकीकत जानने के हवाई सर्वेक्षण कर रहा है। चाहत तो टाल सकता था, मगर हवाखोरी का अवसर कौन जाने देता है। वह हवाई जहाज की किनारे वाली सीट पर बैठ कर मन ही मन उनको जरूर नमन करता होगा, जिसने इस गरीब देश मे हवाई दौरा करने की रस्म रखी। जब वह हवाई सर्वेक्षण कर रहा होता है तब वह जानता है कि ऐसा करने से बाढ़ प्रभावित जनता कोई फायदा नहीं होगा। होगा वही जो होता आ रहा है। पिछले साल भी बाढ़ आई थी। परसाल भी वही हुआ था, जो इस साल अभी हो रहा है। उसे संतोष है कि जो भी होगा वह आपदा कोष से होगा। आपदा कोष का खयाल आते ही वो मन ही मन मुस्कुराता है। वह एकदम से दार्शनिक हो जाता है। देखा जाए तो बाढ़ क्या है! इफरात पानी। जरूरत से बहुत ज्यादा एकमुश्त पानी। पानी था तो आपदा हुई। पैसा होता तो बरकत कहते।

चूंकि भारत विविधताओं वाला देश है, तो कभी-कभी नेता और प्रभावित इलाका एक-दूसरे को बदल लेते हैं। हवाई दौरा मगर जरूर होता है। कहा न रस्म है! लोकतंत्र में रस्म-रिवाजों का बहुत महत्व है। सो नेता जी का हवाई सर्वेक्षण जारी है। जहाज जनता से इतने ऊपर से उड़ रहा है कि उनको क्या मालूम उसमें कौन बैठा है! अगर हवाई जहाज नीचे भी उड़ता, तब भी उनकी दिलचस्पी यह कतई जानने की न होती कि उसमें कौन बैठा है! वे अगर ऊपर देखते हैं, तो इस चाहत में कि उस में से राहत बरसेगी! दूसरे, ऐसी स्थिति में भी हवाई जहाज उनके लिए कुतूहल का विषय अवश्य बना हुआ है !

बचपन का टीवी पर हवाई जहाज से पैकेट गिराने का दृश्य मुझे याद है। ऊपर से पैकेट फेंके जाते और नीचे लोग दौड़ कर उसे लपकते। जिनको नहीं मिलते वे ऊपर देखते हुए अपना हाथ हिलाते। ऊपर से जैसे कृपा बरस रही हो। रोमांचकारी होने के साथ दयनीय लगता। आज भी ऐसे दृश्य देखे जा सकते हैं। प्राकृतिक आपदा के आगे प्रबंधन कुछ नहीं कर सकता! खासतौर पर जब प्रबंधन ही आपदा का किया जाए। बाढ़ आती है। उसे कोई बुलाता नहीं। फिर भी वो आती है। आ जाती है। आती है तो फिर व्यवस्था को पानी-पानी कर देती है, जब तक रहती है पानी पिलाती रहती है, जब जाती है तो शासन-प्रशासन पानी मांगता दीखता है। जनता को तो पीने की कम घोंटने की आदत ज्यादा है चाहे वो थूक हो या गुस्सा! ।

जब समाचार वाचिका कहती हैं कि बाढ़ के कारण कई गांव, कई लोगों से सम्पर्क कट गया है। तो मैं कहता हूं कि देखा जाए तो ये इलाके कटे ही है क्यों कि चुनाव बाद से नेता जी सत्ता से सटे ही हैं। यह बाढ़ ही है जो उन बेचारों से संपर्क करने का बांध बनी हुई है। बाढ़ की इस भूमिका को हमारे यहां का लोकतंत्र कभी नहीं भूल सकता।

बाढ़ में नेता का हवाई दौरा देख कर मेरा एक मित्र कहता है कि इनको बोट से जायजा लेने जाना चाहिए था, तब अच्छे से जानते और महसूस करते। मुझे महसूस शब्द सुनकर हंसी आई। मैंने उससे कहा’, इतना सोचना भी ठीक नहीं मित्र! समानुभूति छोड़ो सहानभूति ही मिल जाए, कृपा समझो! और रही बात बोट से जाने की, अगर चुनाव होते और वोट लेना होता, तो बोट से नेता जरूर जाता’ मेरा वह मित्र फिर बोलता है’, बरसात के मौसम में फिर चुनाव होने चाहिए!’
मैं इसके जवाब में शायर जमाली का यह शेर उसकी तरफ बढ़ा देता हूं,

‘तुम आसमाँ की बुलंदी से जल्द लौट आना
हमें ज़मीं के मसाइल पे बात करनी है’

अनूप मणि त्रिपाठी

अर्थात- यथार्थ

चैत्र नवरात्रि 2020: सातवें दिन होती है मां कालरात्रि देवी की पूजा

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दुर्गा की सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती है। मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है, लेकिन ये सदैव शुभ फल ही देने वाली हैं। इसी कारण इनका एक नाम शुभंकरी भी है। दुर्गा पूजा के सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा और आराधना की जाती है। उनके साक्षात्कार से मिलने वाले पुण्य का वह भागी हो जाता है। मां कालरात्रि दुष्टों का नाश करने वाली हैं। दानव, दैत्य, राक्षस, भूत, प्रेत आदि इनके स्मरण मात्र से ही भयभीत होकर भाग जाते हैं। ये ग्रह-बाधाओं को भी दूर करने वाली हैं। नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की अराधना की जाती है। इस दिन साधक का मन सहस्त्रार चक्र में होता है। मां के इस स्वरूप को अपने हृदय में अवस्थित कर साधक को एकनिष्ठ भाव से उनकी अराधना करनी चाहिए।

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कालरात्रि माता का आराधना मंत्र-
जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तु ते।।

उपासना मंत्र-
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

आकस्मिक संकटों रक्षा करती हैं कालरात्रि माता
देवी को अक्षत्, धूप, गंध, रातरानी पुष्प और गुड़ का नैवेद्य आदि से विधिपूर्वक पूजा करने कालरात्रि माता प्रसन्न होती हैं और भक्तों को शुभ फल का वरदान देती हैं। पूजा करने के बाद दुर्गासप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करना न भूलें। पूजा के अंत में दुर्गा आरती भी जरूर करें। शुभ फल देने के लिए कालरात्रि का दूसरा नाम शुभंकरी भी है। कहा जाता है कि मां कालरात्रि की अराधना से भक्तों को आकस्मिक संकट से रक्षा होती है।http://www.satyodaya.com

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राशिफल: जानिए 31 मार्च का दिन आपके लिए कैसा रहेगा…

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राशि फलादेश मेष :- (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ)
परिवार में आवाजाही बनी रहेगी। उत्साहवर्धक सूचना प्राप्त होगी। उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। जोखिम न उठाएं। तनाव रहेगा, मान बढ़ेगा। प्रसन्नता रहेगी। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। शारीरिक कष्ट से बाधा संभव है।

राशि फलादेश वृष :- (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। बेरोजगारी दूर होगी। आय में वृद्धि होगी। यात्रा से लाभ होगा। प्रतिद्वंद्वी सक्रिय रहेंगे। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। यात्रा मनोरंजक होगी। लाभ के अवसर बढ़ेंगे। विवाद को बढ़वा न दें।

राशि फलादेश मिथुन :- (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
फालतू खर्च होगा। लेन-देन में सावधानी रखें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। पुराना रोग उभर सकता है। चिंता रहेगी, बाकी सामान्य रहेगा। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। रुका हुआ धन मिल सकता है।

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राशि फलादेश कर्क :- (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। रुके कार्यों में गति आएगी। धनलाभ होगा। नए अनुबंध हो सकते हैं। जल्दबाजी से बचें। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। आय के नए स्रोत प्राप्त होंगे।

राशि फलादेश सिंह :- (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आंखों में कष्ट संभव है। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। योजना फलीभूत होगी। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। प्रतिद्वंद्वी शांत रहेंगे। आय बढ़ेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा।

राशि फलादेश कन्या :- (ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
राजकीय सहयोग से लाभ के अवसर बढ़ेंगे। धन प्राप्ति सुगम होगी। दौड़धूप अधिक रहेगी। तनाव रहेगा। पूजा-पाठ में मन लगेगा। निवेश शुभ रहेगा। प्रसन्नता रहेगी। नई योजना बनेगी। मान-सम्मान मिलेगा।

राशि फलादेश तुला :- (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
परिवार के वरिष्ठजनों के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। दूसरों के झगड़ों में न पड़ें। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। लेन-देन में सावधानी रखें।

राशि फलादेश वृश्चिक :- (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
कोर्ट व कचहरी में अनुकूलता रहेगी। प्रेम-प्रसंग में सफलता मिलेगी। व्यावसायिक गतिविधि बढ़ेगी। विवेक से कार्य करें। लाभ होगा। निवेश व यात्रा मनोनुकूल रहेंगे। चिंता रहेगी। तीर्थदर्शन संभव है। पूजा-पाठ में मन लगेगा।

राशि फलादेश धनु :- (ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)
विरोधी सक्रिय रहेंगे। तनाव बना रहेगा। भूमि व भवन के कार्य बड़ा लाभ देंगे। रोजगार में वृद्धि होगी। जोखिम लेने का साहस कर पाएंगे। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। उन्नति होगी। कोर्ट व कचहरी में अनुकूलता रहेगी। धनार्जन होगा।

राशि फलादेश मकर :- (भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)
विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करेगा। किसी आनंदोत्सव में भाग लेने का मौका मिलेगा। स्वादिष्ट भोजन का आनंद प्राप्त होगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। क्रोध पर नियंत्रण रखें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें।

राशि फलादेश कुंभ :- (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
मेहनत अधिक होगी। लाभ में कमी रहेगी। बुरी सूचना मिल सकती है, धैर्य रखें। घर-बाहर अशांति रह सकती है। थकान महसूस होगी। दूसरों के झगड़ों में न पड़ें। चोट, चोरी व विवाद आदि से हानि संभव है। फालतू खर्च होगा।

राशि फलादेश मीन :- (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
मेहनत का फल पूरा-पूरा मिलेगा। मान-सम्मान में वृद्धि होगी। व्यवसाय ठीक चलेगा, रोजगार में वृद्धि होगी। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। जल्दबाजी न करें। भूमि व भवन संबंधी योजना बनेगी। स्वास्‍थ्य कमजोर रहेगा।http://www.satyodaya.com

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नवरात्रि के छठवें दिन होती है मां कात्यायनी की पूजा, जानें इनका महत्व

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लखनऊ: दुर्गा के छठे स्वरूप का नाम कात्यायनी है। कत नामक महर्षि के पुत्र ऋषि कात्य ने भगवती पराम्बा की उपासना कर उनसे घर में पुत्री के रूप में जन्म लेने की प्रार्थना की थी। मां भगवती ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली थी। इन्हीं कात्य गोत्र में विश्व प्रसिद्ध महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए थे। कुछ काल के बाद दानव महिषासुर का अत्याचार पृथ्वी पर बहुत बढ़ गया, तब भगवान् ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों ने अपने-अपने तेज का अंश देकर महिषासुर के विनाश के लिए एक देवी को उत्पन्न किया। महर्षि कात्यायन ने सर्वप्रथम इनकी पूजा की। इसी कारण से यह कात्यायनी कहलाईं। भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने के लिये ब्रज की गोपियों ने इन्हीं की पूजा यमुना तट पर की थी। नवरात्र के छठे दिन साधक का मन आज्ञा चक्र में होता है।

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कत्यायनी माता पूजा मंत्र
चंद्रहासोज्जवलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्यादेवी दानवघातिनी।।

कत्यायनी माता पूजा महत्व…
मान्यता है कि कत्यायनी माता की विधिवत पूजा करने से सभी भौतिक व अध्यात्मिक मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इस चैत्र नवरात्रि के छठवें दिन 30 मार्च, दिन सोमवार को मां कत्यायनी की पूजा की जाएगी। इस दिन खासकर शिक्षा के क्षेत्र में रुचि रखने वाले लोगों को पूजा करना चाहिए। नवरात्रि का व्रत रखने वाले लोग भी माता कत्यायनी की पूजा करते हैं। कहा जाता है कि इनकी पूजा करने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है।http://www.satyodaya.com

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April 1, 2020, 2:33 pm
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