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अर्थात-यथार्थ

‘होरी’ के नाम खुला पत्र: तू अन्नदाता है मतदाता नहीं!

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मेरे प्रिय भाई ‘होरी’!
अबे काहे के प्रिय! शिष्टाचार गया तेल लेने। इस वक्त तू अन्नदाता है मतदाता नहीं! अब तू तेल देख, तेल की धार देख!
तू उदंड कहे होता जा रहा है! तुझ पर निबन्ध लिखे जाते हैं, तो क्या तू अनुबन्ध नहीं करेगा! सरकार जब-जब तेरे भले की सोचती है, तो तू सड़कों पर धान बोने लगता है। जमीन का अधिग्रहण करने जाती है, तब-तब तू बवाल काटता है। फिर शिकायत करता है कि पुलिस-प्रशासन ने तुझे पीटा। उद्दंड को दंड नहीं तो क्या पेड़ा मिलेगा! आसानी से जमीन क्यों नहीं छोड़ देता? जमीन में तेरी नार गड़ी है क्या? जमाना चांद से मिट्टी खोद ला रहा है, एक तू है कि आज भी जमीन को अपनी मां कहता है। इमोशनल फूल! जमीन के एक छोटे से टुकड़े के लिए अपनी मिटृ पलीद कराने पर क्यों लगा है मेरे भाई!

मुआवजा! लागत! न्यूनतम समर्थन मूल्य! की रट लगा कर मरा जा रहा है। तूने जो सरकार का समर्थन किया था, उसी का मूल्य तुझे मिल रहा है। तू कोई विधायक है क्या, जो तुझे मुँह माँगी कीमत दी जाए! फसले रिजॉर्ट में नहीं रखी जाती हैं बाबू! क्या समझे!वैसे भी तेरा गुजारा कैसा चल रहा है, पूरी दुनिया जानती है। अगर खेती-किसानी से ही तेरा गुजारा चल जाता, तो आत्महत्या का रिकार्ड कायम नहीं करते तेरे भाई लोग। ओ मेरे सरकार! अगर फसल का दाम अधिक मिल भी गया, तो महंगाई छीन ले जाएगी! जब हर हाल में खोना है, तो फिर किस बात का रोना है!

मैं पूछता हूं कि उचित-अनुचित,नैतिक-अनैतिक का फैसला करने वाला तू कौन होता है? तू भूल रहा है तूने इन सब कामों के लिए चुनाव में अपना नुमाइंदा छाँटा है। और वह छटा हुआ तेरा नुमाइंदा विधानसभा-संसद में तेरे लिए चिंतामग्न है। अपने को तू बड़ा काबिल न समझ! यह नीतिगत मामला है और तू उसमे अपनी सूखी टांग न अड़ा। अरे, तुझे तो गांव का महाजन ही सारी उम्र सूद की चक्की में पीसता रहता है। उसका तो कुछ बिगाड़ नहीं पाता और चला है सरकार से पंगा लेने। अरे, तेरी अक्ल ठिकाने लगाने के लिए तो लेखपाल-कानूनगो ही काफी है, मेरे लाल!

तू बड़ा खुदगर्ज है! तेरी सोच भी संकीर्ण है। अपनी सोच में तनिक लोच ला,समझ! देश के बारे में सोच। समाज के बारे में सोच। तू बाजार से जुड़ेगा। तुझे सड़कों पर भले ही जाम मिले, पर बाजार तुझे खुला ही मिलेगा। सोच,तेरे जमीन छोड़ने से वहां चैड़ी-चैड़ी, चिकनी-चिकनी,आए हाय! सड़क बनेंगी। मॉल बनेगा। बिल्डिंग बनेंगी। सोच, तू राजपथ पर चलेगा। मॉल में घूमेगा। बिल्डिग की छाँव में सुसताएगा। पेड़ की छाँव भी कोई छाँव होती है लल्लू! बुरा मत मानना तेरे बाप-दादाओं ने खेती कर के क्या उखाड़ लिया, जो तू उखाड़ लेगा। मेरी मान, जमीन के मोह का त्याग कर, ऐत-बेत जो मुवाआजा मिले अपनी अंटी में धर और नये भारत निर्माण के लिए सुस्वागतम का वंदनवार तैयार कर।

सच-सच बता…तू ही बता… इस देश में किसान की जरूरत क्या है? यह सही है कि खेती किसान करता है, मगर क्या सिर्फ इतनी सी बात पर वह महत्वपूर्ण हो जाता है? अगर वह खेती नहीं करेंगा, तो मगरमच्छनुमा बड़ी-बड़ी कंपनिया करेंगी। कर ही रही हैं। तू शायद इस मुगालते में है कि कृषि प्रधान देश को तेरी बहुत आवश्यकता है। बेशक भारत एक कृषिप्रधान देश है। मगर उससे ज्यादा नौंटकीप्रधान देश है।

यहां का इतिहास क्या कहता है, यह भी तो जानो मेरे मिट्टी के माधव? यहां मजे में प्रधान रहता है या तो किसान नेता। किसान तो आयोगों में रहता है। रपटों में रहता है। योजनाओं में रहता है। भाषणों में रहता है। कर्ज में रहता हैं। अगर तू मजे में दिखना चाहता है, तो सरकारी विज्ञापन या ट्रेक्टर के विज्ञापन में दिख। खेत में तू बेजार ही दिखेगा,अभागे।

तुझ पर किसी कवि ने कविता ‘हे ग्राम देवता नमस्कार’ क्या लिख दिया, तू अपने को देवता समझ रहा है! तेरी शान में किसी शायर ने ‘जिस खेत से दहका को मयस्सर न हो रोटी,उस खेत के हर खोश-ए-गंदुम को जला दो’ शेर दे मारा, तो तू हवा में उड़ने लगा है! बहुत पहले किसी बूढ़-पुरनिया ने ‘उत्तम खेती मध्यम बान’ की कहावत चला दी, तो तू कल्पनालोक में भ्रमण करने लगा है! किसी गीतकार ने ‘मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरा मोती’ क्या लिखा, तू सच मान बैठा है! क्किसी राजनेता के नारे में तुम्हारी जय-जय क्या हो गई, तू अपने को खुदमुख्तार समझने लगा है! आंख खोल और देख! जिन खेतों के लिए तू मर रहा है न, उन्हीं खेतों में तेरे पुरखे खेत हुए हैं!

अच्छा यह बता तू सरकार का विरोध क्या खाकर कर रहा? किसके बल पर कर रहा है? सरकार से तेरी अनबन हो गई, तो ऐसा कौन है, जो तेरा साथ देगा? खुद पर भरोसा हो तभी कुछ करियो,किसी के कहे-सुने पर मत अइयो। आज कौन तेरे पक्ष में बोल रहे हैं! वही न, जिन्होंने कभी सत्ता में रहते हुए तेरे साथ ऐसा ही बर्ताव किया था, जो आज की वर्तमान सरकार तेरे साथ बरत रही है। जरा गौर से देख बावले!

तू अन्न पैदा करके अपने को अन्नदाता समझता है क्या! अबे ,तू अपनी जमीन पर अन्न उगा कर कौन-सा कद्दू में तीर मार लेगा। तू कम उगा या ज्यादा तेरी और करोड़ो भूखों की सेहत पर कौन सा फर्क पड़ेगा! तू सोचता है अधिक अन्न पैदा होने से देश खुशहाल होगा। देश का तो पता नहीं, अलबत्ता और अन्न उगा कर सरकार और अपनी परेशानी ही बढ़ाएगा। तेरे अतिरिक्त अन्न को रखने के लिए सरकार को अन्य गोदाम बनवाने पडेंगे। अरे निर्दयी, पहले से उलझी हुई सरकार का काम और क्यों बढ़ाता है!

अबे, तू समझता क्यों नहीं! वास्तविकता से आंख मिला। देखता नहीं सरकारी गोदामों में करोड़ों टन अन्न पड़ा-पड़ा सड़ रहा है। यहां न अन्न की कद्र है, न उसको उगाने वाले की। यहां कद्र है, तो बस क्रिकेट की और क्रिकेटरों की। देखता नहीं, रत्तीभर मुआवजा मिलने के इंतजार में विस्थापितों की पहाड़ जैसी जिंदगी कट जाती है, मगर खिलाड़ियों के ऊपर ईनाम की बारिश पल भर में हो जाती है । गोबर कहीं का!

देश को तरक्की करते हुए तू क्यों नहीं देखना चाहता? उसे आत्मनिर्भरता की राह पर आगे क्यों नहीं बढ़ने देता? राष्ट्रनिर्माण की राह में ग्रहण क्यों लगाने पर तुला है? विकास की राह में रोड़ा क्यों बनता है नासपीटे? और उस विकास की राह में, जिसे बनाने के लिए सरकार पूरी तरह से कटिबद्ध है। राई है और रोड़ा बनने की जुर्रत करता है! मरेगा! और तू कोई सेलिब्रिटी, अभिनेता नहीं जो तेरे मरने के बाद एंकर अपन गला फाड़ें और तुझे न्याय दिलाने के लिए खाना-पीना छोड़ दे!

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मेरी बात मान,तेरी अपनी बात रखने के लिए किसी से कॉन्टेक्ट मत कर ,कम्पनियों से कॉन्ट्रेक्ट कर। जमाना कारपोरेट का है। सो, कारपोरेट कर! अब देख, देश तरक्की करेगा, तो ठेकेदार भी करेगा ही। उद्योग बढ़ेगा, तो उद्योगपति भी फले-फूलेगा ही। यह एक स्वभाविक प्रक्रिया है। ऐसा ही होता आया है, ऐसा ही होता रहेगा। न तो तू कुछ कर सकता है, न ही यह सरकार। तू सरकार के ऐब न देख, तू बस वह जेब देख,जिसमें वह बैठी हुयी हैं। जब उसकी कोई हैसियत नहीं, तो तेरी क्या बिसात! तू अपनी जमीन दे , तू अपनी फसल दे, तू अपनी मंडी दे, तू अपनी हड्डी दे, अस्थिमज्जा दे,राख दे, रास्ता दे, बाजार को खुद खलिहान में आने दे और विकास का एक हिस्सा बन जा! हिस्सा! मगर तू तो विकास में से हिस्सेदारी मांग रहा है। अबे ऐसे में तुझे कौन छोडे़गा! कमबख्त, तू पिटेगा ही पिटेगा…
अरे अपना न सही तो अपनी धनिया का तो कुछ खयाल कर ले!
चले हो बथुआ उखाड़ने!

तुम्हारा शुभ चिंतक
सेवकराम,
गली नंबर 56
बोलपुरम
अखण्ड प्रदेश

अनूप मणि त्रिपाठी

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आज नवरात्रि के छठे दिन करें मां कात्यायनी की पूजा, पढ़ें आरती और मंत्र

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नई दिल्ली। आज नवरात्रि के दिन छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। ये दुर्गा मां का छठा अवतार है। शास्त्रों में कहा गया है कि मां कात्यायनी, कात्यायन ऋषि की पुत्री थीं। इसी के चलते इनका नाम कात्यायनी पड़ गया। मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी मानी गई हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अगर मां कात्यायनी की पूजा की जाए तो विवाह में आ रही सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। वहीं, अगर भक्त मां की सच्चे मन से आराधना करती हैं तो मां की आज्ञा से व्यक्ति को चक्र जाग्रति की सिद्धियां मिल जाती हैं। सिर्फ यही नहीं, व्यक्ति रोग, शोक, संताप और भय से भी मुक्ति पाता है। मां को प्रसन्न करना आसान है। आइए पढ़ते हैं मां कात्यायनी की पूजा विधि, आरती और मंत्र।

मां कात्‍यायनी की पूजा विधि:
गंगाजल से स्थान पर छिड़काव करें और मां कात्यायनी की प्रतिमा स्थापित करें। इस दिन लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनें। फिर हाथों में फूल लेकर मां को प्रणाम करें। इसके बाद मां को पीले फूल, कच्‍ची हल्‍दी की गांठ और शहद अर्पित किया जाता है। फिर मां का प्रिय भोग यानी शहद उन्हें चढ़ाएं। घर में सभी को प्रसाद वितरिक करें और स्वयं भी प्रसाद ग्रहण दें। मां की आरती करें और मंत्रों का जाप करें।

देवी कात्यायनी का मंत्र:

चंद्र हासोज्ज वलकरा शार्दू लवर वाहना।
कात्यायनी शुभं दद्या देवी दानव घातिनि।।

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देवी कात्यायनी की आरती:

जय जय अंबे जय कात्यायनी।
जय जगमाता जग की महारानी।।

बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहां वरदाती नाम पुकारा।।

कई नाम हैं कई धाम हैं।
यह स्थान भी तो सुखधाम है।।

हर मंदिर में जोत तुम्हारी।
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी।।

हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भक्त हैं कहते।।

कात्यायनी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की।।

झूठे मोह से छुड़ानेवाली।
अपना नाम जपानेवाली।।

बृहस्पतिवार को पूजा करियो।
ध्यान कात्यायनी का धरियो।।

हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी ।।

जो भी मां को भक्त पुकारे।
कात्यायनी सब कष्ट निवारे।।http://satyodaya.com

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आज नवरात्रि के पांचवे दिन ऐसे करें स्कंदमाता की आराधना, जानें मंत्र एवं आरती

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नई दिल्ली। नवरात्री का पांचवां दिन है। आज के दिन मां दुर्गा के पांचवे अवतार मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। इनकी पूजा करने से व्यक्ति के लिए मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं। साथ ही परम सुख की प्राप्ति मिलती है। इनकी 4 भुजाएं हैं। मां का आसन कमल है। यही कारण है कि इन इसी कारण इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। इनका वाहन सिंह है। व्यक्ति का मन समस्त लौकिक, सांसारिक, मायिक बंधनों से विमुक्त होकर मां के इस स्वरूप में पूर्णतः तल्लीन हो जाता है। सच्चे मन से अगर मां स्कंदमाता की आराधना की जाए तो व्यक्ति सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आइए जानते हैं मां स्कंदमाता की पूजा विधि, आरती और मंत्र।

माता स्कंदमाता की पूजा विधि:

इस दिन स्नानादि कर सभी कार्यों से निवृत्त हो जाए। फिर मां का स्मरण करें। इसके बाद स्कंदमाता को अक्षत्, धूप, गंध, पुष्प अर्पित करें। फिर पान, सुपारी, कमलगट्टा, बताशा, लौंग का जोड़ा, किसमिस, कपूर, गूगल, इलायची आदि भी चढ़ाया जाता है। मां की आरती करें। माना जाता है कि अगर स्कंदमाता की पूजा की जाए तो भगवान कार्तिकेय भी प्रसन्न हो जाते हैं।

माता स्कंदमाता के मंत्र:

1. या देवी सर्वभू‍तेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

2. महाबले महोत्साहे. महाभय विनाशिनी.
त्राहिमाम स्कन्दमाते. शत्रुनाम भयवर्धिनि..

3. ओम देवी स्कन्दमातायै नमः॥

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माता स्कंदमाता की आरती:

जय तेरी हो स्कंद माता
पांचवा नाम तुम्हारा आता

सब के मन की जानन हारी
जग जननी सब की महतारी

तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं
हरदम तुम्हें ध्याता रहूं मैं

कई नामों से तुझे पुकारा
मुझे एक है तेरा सहारा

कहीं पहाड़ों पर है डेरा
कई शहरो मैं तेरा बसेरा

हर मंदिर में तेरे नजारे
गुण गाए तेरे भगत प्यारे

भक्ति अपनी मुझे दिला दो
शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो

इंद्र आदि देवता मिल सारे
करे पुकार तुम्हारे द्वारे

दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए
तुम ही खंडा हाथ उठाए

दास को सदा बचाने आई
‘चमन’ की आस पुराने आई… http://satyodaya.com

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नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्माण्डा की इस तरह करें पूजा, पढ़ें आरती और मंत्र

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नई दिल्ली। आज नवरात्रि के चौथे दिन दुर्गा मां के कूष्माण्डा देवी की पूजा की जाती है। इस दिन साधक का मन अनाहत चक्र में अवस्थित होता है। अतः इस दिन मां कूष्माण्डा की पूजा करने से व्यक्ति पर मां की कृपा-दृष्टि बनी रहती है। मान्यता है कि जब इस सृष्टि का अस्तित्व नहीं था तब इन्हीं ने ब्रह्मांड की रचना की थी। यह सृष्टि की आदि-स्वरूपा हैं। मां कुष्माण्डा के शरीर में कांति और प्रभा भी सूर्य के समान ही दैदीप्यमान है। इनके प्रकाश से ही दसों दिशाएं उज्जवलित हैं। इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। इनके सात हाथों में क्रमशः कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा मौजूद हैं। वहीं, आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों की जपमाला सुसज्जित है। मां कूष्माण्डा का वाहन सिंह है।

इस तरह करें मां कूष्माण्डा की पूजा:

इस दिन सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर मां कूष्माण्डा का स्मरण करें। मां को धूप, गंध, अक्षत्, लाल पुष्प, सफेद कुम्हड़ा, फल, सूखे मेवे और सुहाग का सामान चढ़ाएं। मां को हलवे और दही का भोग अर्पित करें। इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। अंत में मां के मंत्र और आरती गाएं।

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मां कूष्माण्डा के मंत्र:

1. या देवी सर्वभू‍तेषु मां कूष्‍मांडा रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

2. वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्
सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम्॥

3. दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दारिद्रादि विनाशिनीम्
जयंदा धनदां कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥

4. जगन्माता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्
चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥

मां कूष्माण्डा की आरती:

चौथा जब नवरात्र हो, कूष्मांडा को ध्याते।
जिसने रचा ब्रह्मांड यह, पूजन है॥

आद्य शक्ति कहते जिन्हें, अष्टभुजी है रूप।
इस शक्ति के तेज से कहीं छांव कहीं धूप॥

कुम्हड़े की बलि करती है तांत्रिक से स्वीकार।
पेठे से भी रीझती सात्विक करें विचार॥

क्रोधित जब हो जाए यह उल्टा करे व्यवहार।
उसको रखती दूर मां, पीड़ा देती अपार॥

सूर्य चंद्र की रोशनी यह जग में फैलाए।
शरणागत की मैं आया तू ही राह दिखाए॥

नवरात्रों की मां कृपा कर दो मां।
नवरात्रों की मां कृपा करदो मां॥

जय मां कूष्मांडा मैया।
जय मां कूष्मांडा मैया॥http://satyodaya.com

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