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लखनऊ एयरपोर्ट से 27 घरेलू उड़ानों को मिली मंजूरी,यात्रियों को किया जाएगा क्वारंटाइन

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लखनऊ। कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के बीच सोमवार से घरेलू हवाई यात्रा की शुरुवात हो रही है। लॉकडाउन के दो महीने बाद लखनऊ एयरपोर्ट से 25 मई से घरेलू उड़ाने बहाल हो जाएंगी। कुल 27 उड़ानों को मंजूरी मिली है। यह उड़ाने लखनऊ से दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, बंगलूरू, कोलकाता और हैदराबाद के लिए रवाना होंगी खास बात यह है कि डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन की ओर से जारी सूची में कई उड़ानें ऐसी हैं, जो एक जून के बाद से उड़ान भरेंगी। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप पुरी ने ट्वीट कर जानकारी दी थी कि 25 मई से देशभर में घरेलू विमान सेवा शुरू कर दी जाएगी। इसी क्रम में शुक्रवार को डीजीसीए की ओर से विमानों की सूची जारी की गई है। इसमें एयरबस के साथ-साथ एटीएस श्रेणी के विमान भी शामिल हैं। डीजीसीए ने कुल 448 उड़ानों को मंजूरी दी है।

लॉकडाउन से पहले लखनऊ से 49 घरेलू और 11 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें ऑपरेट हो रही थीं। जबकि अभी सिर्फ 27 उड़ानों को ही अनुमति दी गई है। लखनऊ एयरपोर्ट पर तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को एयरपोर्ट के घरेलू टर्मिनल के बाहर पांच मेगा पिक्सल का एक कैमरा लगा दिया गया। इससे यात्रियों की आईडी, टिकट की जांच भीतर बैठे सुरक्षाकर्मी कर सकेंगे। घरेलू उड़ान सेवाओं के 25 मई से शुरू होने और भारत में 31 मई तक लॉकडाउन लागू होने के बीच कोई विरोधाभास नहीं है। 

हवाई यात्रियों के लिए  सेतु ऐप है और इसका स्टेटस ग्रीन है तो यह पासपोर्ट की तरह है। जिन यात्रियों में कोविड-19 के लक्षण नहीं हैं और आरोग्य सेतु ऐप पर ग्रीन स्टेटस है, उन्हें क्वारंटाइन में भेजे जाने की जरूरत नहीं है। साथ ही अगर किसी व्यक्ति में कोविड-19 के लक्षण दिखेंगे तो उस यात्री को क्वारंटाइन किया जाएगा । साथ ही सरकार के निर्देश के अनुसार लखनऊ एयरपोर्ट के बाहर लगा कैमरे से यात्रियों के टिकट को चैक किया जाएगा।

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गौरतलब है कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए देश में लागू लॉकडाउन की वजह से दो महीने से अधिक समय से देश में विमान सेवाओं पर रोक है। अब सरकार ने 25 मई के कुछ रूटों पर घरेलू विमान सेवा शुरू करने का फैसला किया है। केंद्र सरकार ने घरेलू हवाई यात्रा के दौरान सभी यात्रियों के लिए आरोग्य सेतु ऐप अनिवार्य किया है। हालांकि, 14 साल से कम आयु के बच्चों को इससे छूट दी गई है। 

इसके साथ ही आपको ये भी बता दें कि सभी घरेलू उड़ानें दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डे पर टर्मिनल 3 (टी3) से ऑपरेट होंगी। देश में कोरोना वायरस के मामलों की बात करें तो ये आंकड़ा एक लाख से अधिक हो गया है। भारत में कोरोना वायरस (कोविड-19) के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। रोजाना हजारों की संख्या में नए मामले सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि पिछले 24 घंटों में भारत में कोरोना वायरस के मामलों में 6,654 मामलों की अब तक सबसे बड़ी बढ़त हुई है और 137 मौतें हुई हैं। देश में अब कोरोना वायरस पॉजिटिव मामलों की कुल संख्या 1,25,101 है, इसमें 69,597 सक्रिय मामले और 3,720 मौतें शामिल हैं। http://www.satyodaya.com

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राहुल गांधी के वीडियो में प्रवासी श्रमिकों के लिए हमदर्दी कम नौटंकी ज्यादा: मायावती

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कहा, मजदूरों की ऐसी हालत की असली कसूरवार कांग्रेस ही है

लखनऊ। लाॅकडाउन के बीच प्रवासी श्रमिकों को लेकर सियासी घमासान तेज है। कांग्रेस और सपा प्रवासी श्रमिकों की अनदेखी का आरोप लगाकर उत्तर प्रदेश सरकार पर सियासी तीर छोड़ रही है। शनिवार को पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रवासी मजदूरों से बातचीत का एक वीडियो अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया। जिसमें उन्होंने 16 मई को सुखदेव विहार फ्लाईओवर के पास मजदूरों से बातचीत के कुछ अंश डाले हैं। राहुल गांधी के इस वीडियो पर योगी सरकार तो पीछे रह गई। बसपा सुप्रीमो मायावती ने राहुल गांधी को जमकर लताड़ लगाई।

पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इस वीडियो को नाटक करार दिया है। इसके साथ ही मायावती ने प्रवासी श्रमिकों की दुर्दशा के लिए कांग्रेस की पूर्व सरकारों को ही जिम्मेदार ठहराया है। बसपा सुप्रीमों ने शनिवार को अपने ट्विटर हैंडल पर कई ट्वीट किए हैं। पहले ट्वीट में उन्होंने श्रमिकों की दुर्दशा के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार बताते हुए लिखा, आज पूरे देश में कोरोना लॉकडाउन के कारण करोड़ों प्रवासी श्रमिकों की जो दुर्दशा दिख रही है। उसकी असली कसूरवार कांग्रेस है। क्योंकि आजादी के बाद इनके लंबे शासनकाल के दौरान अगर रोजी-रोटी की सही व्यवस्था गांव व शहरों में की गई होती तो इन गरीब मजदूरों को दूसरे राज्यों में पलायन नहीं करना पड़ता।

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दूसरे ट्वीट में यूट्यूब पर जारी किए गए वीडियो को लेकर मायावती ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, वर्तमान में कांग्रेसी नेता ने लॉकडाउन त्रासदी के शिकार कुछ श्रमिकों के दुःख-दर्द बांटने वाला जो वीडियो डाला है, उसमें हमदर्दी कम, नाटक ज्यादा दिख रहा है। कांग्रेस अगर यह बताती कि उसने उनसे मिलते समय कितने लोगों की वास्तविक मदद की है तो यह बेहतर होता।

भाजपा सरकारें मिलकर इन मजदूरों को गांवों में ही बनाएं आत्मनिर्भर

उन्होंने आगे लिखा, वर्तमान समय में केन्द्र और प्रदेश की भाजपा सरकारें कांग्रेस के पदचिन्हों पर ना चलकर, इन बेहाल मजदूरों को उनके गांवों और शहरों में ही रोजी-रोटी की सही व्यवस्था करें। भाजपा सरकार इन प्रवासी श्रमिकों को आत्मनिर्भर बनाने की नीति पर ईमानदारी से अमल करे ताकि आगे इन्हें ऐसी दुर्दशा न झेलनी पड़े। अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए मायावती ने लिखा कि बसपा के जिन प्रवासी मजदूरों को उनके घर लौटने पर उन्हें गांवों से दूर अलग-थलग रखा गया है, उन्हें उचित सरकारी मदद नहीं मिल रही है। ऐसे लोगों को अपना मानकर उनकी भरसक मानवीय मदद करने का प्रयास करें। मजलूम ही मजलूम की सही मदद कर सकता है।

वित्त मंत्री ने भी राहुल गांधी के वीडियो को बताया ड्रामेबाजी

बता दें कि राहुल गांधी के इस वीडियो को केन्द्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण भी ड्रामेबाजी करार दे चुकी हैं। वित्त मंत्री ने कहा है कि राहुल गांधी ने मजदूरों के साथ बैठकर और उनसे बात करके उनका समय बर्बाद किया है। सड़क पर बैठकर बात करने से मजदूरों की समस्या का हल नहीं होगा। उन्हें मजदूरों के साथ सामान उठाकर उनके साथ पैदल जाना चाहिए था। उन्हें मजदूरों के बच्चों को और उनके सामान को उठाकर उनके साथ चलना चाहिए था।http://www.satyodaya.com

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सोशल डिस्टेंसिंग के साथ धार्मिक स्थलों को भी खोला जाए: मुकेश सिंह चौहान

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कांग्रेस नेता ने सीएम योगी लिखा पत्र

लखनऊ। शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मुकेश सिंह चौहान ने प्रदेश के सभी धार्मिक स्थलों को भी खोले जाने की मांग की है। लखनऊ शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश सिंह ने इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखा है। श्री सिंह ने पत्र में लिखा है कि सोशल डिस्टेंसिंग व लाॅकडाउन का पालन करते हुए बंद पड़े धार्मिक स्थलों को भी खोला जाए। श्री चौहान ने लिखा है कि सरकार ने लाॅकडाउन के बीच जरूरी सेवाओं व वस्तुओं के साथ कई अन्य दुकानों को भी छूट दी है। जिसमें शराब की दुकानें भी शामिल हैं। इसलिए धार्मिक स्थलों को भी खोला जाना चाहिए। क्योंकि भारत एक आस्था प्रधान देश है। यहां करोड़ों लोगों को मंदिर, मस्जिद, गुरुद्धारा और गिरजाघरों से काफी लगाव है।

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इन आस्था स्थलों से उन्हें शांति मिलती है, जो रोग आदि से लड़ने में उन्हें शक्ति प्रदान करती है, जिसे चिकित्सा विज्ञान भी मानता है। ऐसे में प्रमुख धार्मिक स्थलों को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ लाॅंकडाउन का पूरा पालन करते हुए खोलना उचित होगा। कांग्रेस नेता ने कहा है कि कोरोना से श्रद्धालुओं को बचाने के लिए प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सरकारी कार्यालयों की तरह टनल सेनेटाइजर मशीन का उपयोग किया जा सकता है। http://www.satyodaya.com

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मोदी सरकार की अमानवीय नीतियों के खिलाफ मेहनतकशों ने दर्ज कराया विरोध

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वर्कर्स फ्रंट से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भी पीएम को मांग पत्र भेजा 

लखनऊ। मोदी सरकार की मजदूर विरोधी व अमानवीय कार्यवाहियों के कारण मेहनतकशों ने पूरे देश में प्रतिवाद दर्ज कराकर असहमति और अविश्वास व्यक्त किया है। उत्तर प्रदेश समेत देश के कई प्रांतों में वर्कर्स फ्रंट से जुड़े मजदूरों और मजदूर किसान मंच के कार्यकर्ताओं ने अपना विरोध दर्ज कराया है। 

केन्द्रीय श्रम संगठनों के आहवान पर आयोजित राष्ट्रव्यापी विरोध के तहत प्रधानमंत्री को ट्वीटर और ईमेल द्वारा मांग पत्र भेजा गया। सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, गोण्ड़ा, आगरा, इलाहाबाद, जौनपुर, लखनऊ आदि जिलों में विरोध कार्यक्रम किए गए।  

वर्कर्स फ्रंट अध्यक्ष दिनकर कपूर और मजदूर किसान मंच के अध्यक्ष पूर्व आईजी एसआर दारापुरी ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा की जा रही श्रमिक विरोधी कार्यवाहियां देश के विकास को अवरूद्ध कर देगी। सरकार ने मजदूरों को न र्सिफ बेसहारा छोड़ दिया है बल्कि उसे मिले संविधान प्रदत्त अधिकारों को भी छीनने में लगी हुई है। असहाय मजदूरों पर लाठी चलवाकर बहादुर बन रही आरएसएस-भाजपा की सरकारें अंदर से बेहद डरी हुई है। बड़े कारपोरेट घरानों के लाभ के लिए लगातार तानाशाही की ओर यह सरकार बढ़ रही है और न्यूनतम प्रतिवाद का अधिकार भी यह सरकार नहीं दे रही है, यहां तक कि सरकार से सोशल मीडिया पर भी असहमति व्यक्त करने पर मुकदमें कायम किए जा रहे है। 

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प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में वर्कर्स फ्रंट व मजदूर किसान मंच द्वारा सभी प्रवासी मजदूरों को नि:शुल्क घर भेजने, कोरोना से पीडि़त सभी मजदूरों और नागरिकों के नि:शुल्क चिकित्सा, राशन और रोजगार, पांच हजार रूपए नकद देने, घर वापसी के दौर में मृतक हुए और क्षतिग्रस्त्र हुए सभी प्रवासी मजदूरों को समुचित मुआवजा, सभी प्रवासी मजदूरों के उत्पीडऩ पर रोक तथा श्रम सुधार के नाम पर लाए जा रहे मजदूर विरोधी आदेश, अध्यादेश एवं अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से निरस्त कराने और कर्मचारियों के डीए, वेतन व भत्तों की कटौती वापस कराने व सार्वजनिक क्षेत्र का निजीकरण पर रोक लगाने की मांगों को उठाया। http://www.satyodaya.com

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May 23, 2020, 5:08 pm
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