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अदिति सिंह का सदन में जाना, बीजेपी का मुस्कुराना, कांग्रेस पर कहर ढा गया

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लखनऊ। राजनीति और ताश दोनों में ही तुरूप का इक्का बड़े काम का होता है, बस राजनीति में फर्क इतना होता है कि कब तुरूप का इक्का अपने ही बादशाह को मात दे दे कुछ कहा नहीं जा सकता। कांग्रेस के साथ भी कुछ ऐसा ही होता दिख रहा है। रायबरेली से कांग्रेस की विधायक अदिति सिंह जिन्हें प्रियंका गांधी हाथ पकड़ कर राजनीति में लाईं थी अब वो खुद के पैरों पर अलग राह पकड़ती दिख रही हैं। दरअसल, 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन लखनऊ में प्रियंका गांधी की अगुवाई में कांग्रेस का मार्च था जिसको लेकर कांग्रेस ने व्हिप भी जारी किया था। वहीं दूसरी ओर योगी सरकार की ओर से 36 घंटे तक चलने वाला विधानसभा सत्र बुलाया गया जिसमें पूरा विपक्ष नदारद रहा लेकिन अदिति सिंह ने अपनी पार्टी की व्हिप को नजरंदाज कर विधानसभा सत्र में हिस्सा लिया। अब उनके पार्टी से अलग राह पकड़ने का तोहफा भी मिल गया है। अदिति सिंह को प्रदेश सरकार ने वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की है।

शासन के निर्देश पर गुरुवार सुबह से ही अदिति सिंह की सुरक्षा में गाड़ी के साथ एक एस्कॉर्ट और दो अतरिक्त गनर तैनात किया गया है। अब उनके साथ हर जगह पर आने-जाने के दौरान सुरक्षा स्कोर्ट भी चलेगा। कांग्रेस के विरोध के बावजूद भी अदिति सिंह के विधानमंडल सत्र में भाग लेने पर जब उनसे सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह देशहित के मुद्दे पर पार्टी लाइन से हमेशा हटकर चलती हैं। उन्होंने कहा, ‘मैंने अर्टिकल 370 हटाने के सरकार के फैसले का स्वागत किया था। इतना ही नहीं उन्होंने ये भी कहा कि मेरे पिता ने जो मुझे सिखाया है, मैं हमेशा उसी रास्ते पर चलती हूं।’

अदिति ने सतत विकास के लक्ष्य पर कहा कि वह दलगत भावना से ऊपर उठकर राष्ट्रपिता के सम्मान में सदन में आई हैं। इतना ही नहीं अदिति ने ये भी कहा कि बचपन से बापू की कहानी सुनती आ रही हैं, लेकिन पंचायतीराज व्यवस्था का क्या हाल है?

वहीं, अदिति ने कांग्रेस की तरफ से विधानसभा कार्यवाही में पहुंचीं अदिति सिंह ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि प्रदेश में पानी और गरीबी की कई समस्याएं हैं। सफाई और पानी जैसी समस्याओं पर मैंने हमेशा काम किया। प्रदेश के कई जनपदों में आर्सेनिक पानी की समस्या है, जिसके लिए मैं चाहती हूं टंकी लगनी चाहिए।

बदलते समीकरणों को साधने का प्रयास

अदिति सिंह के कांग्रेस के व्हिप के बावजूद विधानमंडल सत्र में शामिल होने को लेकर कहा जा रहा है कि वो इस वक्त प्रदेश में बदलते राजनीतिक समीकरणों को साधने का प्रयास कर रही हैं। दरअसल, अदिति रायबरेली के सदर से पूर्व विधायक और बाहुबली नेता अखिलेश सिंह की बेटी हैं। अखिलेश सिंह का उनके क्षेत्र में बड़ा रूतबा था। कांग्रेस भी उनको लाख कोशिशें के बावजूद हरा नहीं पाई थी। बाद में उन्हें कांग्रेस में शामिल कर लिया गया। इससे कांग्रेस को विधानसभा चुनावों के साथ-साथ लोकसभा चुनाव में भी मदद मिली। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के लिए भी वोटों में इजाफा हुआ। लेकिन कुछ समय पहले बीमारी के चलते उनका निधन हो गया। उनके निधन के बाद इलाके के बाहुबलियों ने फिर से सिर उठाना शुरू कर दिया। कुछ दिन पहले ही रायबरेली लखनऊ रोड पर अदिति सिंह पर एक कथित हमले की भी घटना हुई। इसकी गूंज दिल्ली तक सुनाई दी और इस घटना का प्रियंका गांधी ने भी विरोध किया। लेकिन कहीं न कहीं अदिति को ऐसा लगने लगा है कि अगर उनको अपने क्षेत्र के प्रतिद्वंदियों से निपटना है तो दिल्ली के नेताओं के सहारे ऐसा संभव नहीं होगा। शायद यही वजह है कि उन्होंने पार्टी के आदेश की परवाह किये बगैर प्रदेश विधानमंडल के सत्र में भाग लिया और अब उनको वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा के रूप में ईनाम भी मिल गया है।

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कांग्रेस का किला हुआ कमजोर

रायबरेली को कांग्रेस पार्टी का मजबूत किला माना जाता था। जी हां, ऐसा पहले कहा जाता था अब इस किले में दरारे पड़ने लगी हैं। रायबरेली की 5 विधानसभा सीटों में से दो कांग्रेस, दो बीजेपी और एक समाजवादी पार्टी के पास थी। लेकिन कांग्रेस एमएलए दिनेश प्रताप सिंह ने बीजेपी ज्वॉइन कर ली जिसके बाद उनके भाई जो कि हरचंदपुर से विधायक हैं वो भी एक तरह से बीजेपी में ही माने जाते हैं। यानी चार विधायक पहले से ही बीजेपी के खाते में हैं। अदिति सिंह के जाने पर विधायकों की संख्या 5 हो जाएगी। इस लोकसभा चुनाव में जीत का अंतर देखते हुए ऐसा लगता है कि अदिति सिंह का बीजेपी में जाना कांग्रेस का किला पूरी तरह से ढहा देगा। http://www.satyodaya.com

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गैंगेस्टर विकास दुबे का हुआ अंतिम संस्कार, पत्नी व बेटा भी रहा मौजूद

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लखनऊ। 5 लाख के इनामी व दुर्दांत अपराधी विकास दुबे का आज सुबह एनकाउंटर के बाद हैलट अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया। जिसके बाद विकास दुबे का शव उसके परिजनों को सौंप दिया गया। देर शाम कानपुर के भैरवघाट पर विकास दुबे का संस्कार कर दिया गया। इस मौके पर उसकी पत्नी ऋचा दुबे व बेटा भी वहां मौजूद रहे। इससे पहले विकास शाम करीब छह बजे हैलट अस्पताल के तीन डाॅक्टरों ने विकास दुबे के शव का पोस्टमार्टम किया।

विकास दुबे को तीन गोलिया लगी थीं। दो गोलियां उसके सीने में जबकि एक कमर में लगी थी। पोस्टमार्टम के बाद शिवली निवासी विकास दुबे के बहनोई दिनेश तिवारी ने गैंगेस्टर का शव रिसीव किया। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में विकास दुबे का शव भैरव घाट ले जाया गया, जहां विद्युत शव दाह गृह में अंतिम संस्कार कर दिया गया। अंतिम संस्कार के बीच ऋचा दुबे अचानक मीडिया पर भड़क गईं। उन्होंने मीडिया पर विकास दुबे को मरवाने का आरोप लगाते कहा, समय आने पर सभी का हिसाब करूंगी।

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आज सुबह जब विकास दुबे के एनकाउंटर की खबर उसकी मां को मिली तो उन्होंने कहा, जो हुआ सब ठीक हुआ। वहीं उसके पिता ने कहा कि मेरा बेटा यदि मेरा कहा मानता तो आज इस गति को नहीं प्राप्त होता। विकास दुबे के माता-पिता काफी बुजुर्ग हैं। उन्हें विकास दुबे के अंतिम संस्कार से दूर रखा गया।http://www.satyodaya.com

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कानपुर के भैरवघाट विकास दुबे का हुआ अंतिम संस्‍कार, पत्‍नी और बेटा हुए शामिल

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कानपुर के भैरवघाट विकास दुबे का हुआ अंतिम संस्‍कार, पत्‍नी और बेटा हुए शामिल

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यूपी मेट्रो ने सराहनीय कार्य करने वाले कर्मचारियों को किया सम्मानित

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लि. (यूपीएमआरसीएल) के प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने सराहनीय कार्य करने वाले कर्मचारियों को सम्मानित किया। शुक्रवार को गोमती नगर स्थित प्रशासनिक भवन में आयोजित सम्मान समारोह में यूपीएमआरसीएल प्रबंध निदेशक ने सभी विजेताओं को बधाई दी और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कुमार केशव ने कहा, आपकी तत्परता और कर्तव्यनिष्ठा से यूपी मेट्रो का हर यात्री खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करता है। आपकी मौजूदगी ने प्रत्येक यात्री के अंदर मेट्रो के प्रति भरोसा कायम किया है।

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श्री केशव ने बताया कि इसी वर्ष फरवरी में सिंगार नगर मेट्रो स्टेशन में तैनात सुरक्षा गार्ड आरके उपाध्याय को 10 साल का एक बच्चा बिना टोकन के यात्रा करता मिला। पूछने पर उसने बताया कि वह अपने पिता से नाराज होकर दिल्ली जा रहा है। गार्ड ने तत्काल बच्चे के घर वालों से संपर्क कर उसे उसके परिजनों को सौंप दिया। इसी तरह फरवरी में 11 वर्ष की एक छोटी बच्ची मेट्रो से यात्रा के दौरान अपने माता-पिता से बिछड़ गई।

बादशाहनगर मेट्रो स्टेशन पर तैनात नोडल सुरक्षा गार्ड आशीष प्रताप सिंह ने उस छोटी बच्ची की मदद की और उसे उसकी अम्मी से मिलाया। कुमार केशव ने कहा कि यूपी मेट्रो में यात्रियों की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जाता है। इसमें मेट्रो परिसर में नियुक्त सुरक्षाकर्मी मुख्य भूमिका निभाते हैं। वे अपनी मुस्तैदी से न केवल यात्रा को सुरक्षित बनाते हैं बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में यात्रियों की मदद भी करते हैं।

मेट्रो परिसर को स्वच्छ रखते हैं हाउसकीपिंग के कर्मचारी

सुरक्षाकर्मियों के साथ-साथ हाउसकीपिंग के कर्मचारी मेट्रो परिसर को स्वच्छ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे कर्मचारियों के कार्य को सम्मान देने और प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें यूपी मेट्रो की ओर से हर माह पुरस्कृत किया जाता है। हाउसकिपिंग के सम्मानित चार लोगों में फरवरी माह के लिए मनीष श्रीवास्तव, मार्च माह के लिए अशर्फी लाल, अप्रैल के लिए रमेश निषाद और मई माह के सराहनीय कार्य के लिए संध्या को पुरस्कृत किया गया।http://www.satyodaya.com

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