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सीओ कैंट को धमकाते मंत्री स्वाति सिंह का कथित ऑडियो वायरल

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लखनऊ। योगी सरकार में मंत्री स्वाति सिंह का कथित तौर पर एक ऑडियो वायरल हुआ है, जिसमें वो सीओ कैंट को धमकाते हुए नजर आ रही हैं। हालांकि, इस ऑडियो की सत्यता का फिलहाल दावा नहीं किया जा सकता है।

ऑडियो में मंत्री स्वाति सिंह सीओ कैंट बीनू सिंह से अंसल पर हुई एफआईआर से नाराज लग रही हैं। कथित वायरल आडियो में इस तरह सीओ को धमकातीं मिली मंत्री स्वाति सिंह…

स्वाति सिंह- सीओ साहब आपने अंसल पर कोई एफआईआर लिखा है?

सीओ कैंट- हां, एक कनौडिया करके थीं, पति-पत्नी का मैटर था, उसमें लिखा गया है एफआईआर…

स्वाति सिंह- क्यों लिखा है? आपको पता नहीं है कि ऊपर से आदेश है कि अभी कोई एफआईआर लिखा नहीं जाएगा। सारे फेक एफआईआर लिखे जा रहे हैं उसके ऊपर।

सीओ कैंट- नहीं, वो तो जांच करके लिखी गई थी।

स्वाति सिंह- कौन सी जांच हो गई भई? कौन सी जांच हो गई, इतना हाईप्रोफाइल केस है पूरा जांच चल रहा है सीएम साहब तक के संज्ञान में ये सब चीजें हैं। आप कौन सी जांच कर रही हैं? अभी चार दिन हुए हैं आपको।

सीओ कैंट- नहीं तो, पहले की एप्लीकेशन है न उसकी, पांच-छह महीने पहले की।

स्वाति सिंह- अरे फर्जी है सब… खत्म करिए उसको… एक दिन आकर बैठ लीजिएगा, अगर यहां पर काम करना है तो… ठीक है? मैं गलत काम नहीं बोलती हूं, पता कर लीजिएगा।

सीओ कैंट- ठीक है।

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सोशल मीडिया पर मंत्री स्वाति सिंह का कथित वायरल ऑडियो कौतुहल का विषय बना हुआ है। सब इस ऑडियो की सच्चाई जानना चाहते हैं। सत्योदय ने जब सीओ कैंट से इस वायरल ऑडियो के बारे में जानने का प्रयास किया तो उनसे बात नहीं हो पाई। सीओ कैंट का सीयूजी नंबर रिसीव नहीं हो रहा है। पुलिस की तरफ से भी अभी तक इस वायरल ऑडियो की पुष्टि नहीं की गई है। सूत्रों के अनुसार, पीजीआई थाने में अंसल के खिलाफ धारा 406 गबन, 504 गाली-गलौच और 506 धमकी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।http://www.satyodaya.com

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मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह के तहत अब तक प्रदेश में कुल 96 हजार विवाह संपन्न: मंत्री

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लखनऊ। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 2017 से अब तक कुल 96 हजार से ज्यादा जोड़ों का विवाह कराया जा चुका है। जबकि वर्ष 2019 में अब तक कुल 24 हजार 318 जोड़ों का विवाह संपन्न हो चुका है। समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री ने बताया कि मुख्यमंत्री ने 21 हजार जोड़ो का लक्ष्य तय किया था। जिसकी तुलना अब तक 24 हजार से ज्यादा जोड़ों का विवाह संपन्न हो चुका है। जिसमें अल्पसंख्यक वर्ग के 3020, पिछड़ा वर्ग के 7810, अनुसूचित जाति जनजाति के 12,487 व सामान्य वर्ग के 1001 जोड़े शामिल हैं।

गरीबों तबके की सहायता और सामाजिक समरसता के लिए लागू की गई इस योजना में अब तक उत्साहजनक सफलता मिली है। मंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत 2 लाख तक की वार्षिक आय वाले सभी परिवारों के बच्चों को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह में जोड़ों को सरकार की तरफ से कुल 51 हजार रुपए की धनराशि दी जा रही है। शादी करने वाले जोड़ों को सरकार की तरफ से दहेज का सामान दिया जा रहा है। मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में सभी धर्मों को शामिल किया गया है।

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इस योजना के अन्तर्गत विधवा और तलाक सुधा महिलाओं को भी शामिल किया गया है। समाज कल्याण मंत्री ने बताया कि योजना के अंतर्गत 250 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान है। लखीमपुर में सबसे ज्यादा जोड़ों का विवाह कराया गया। दाम्पत्य जीवन की खुशहाली के लिए कन्या के खाते में 35 हजार रुपए का अनुदान दिया जाता है। http://www.satyodaya.com

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सरकार की प्राथमिकता में किसान नहीं पूंजीपति हैं: अखिलेश यादव

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लखनऊ। किसानों के मुद्दे को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार के रहते किसानों का भला नहीं होने वाला है। धान किसान, आलू किसान और गन्ना किसान बदहाली के दौर से गुजरने को मजबूर हैं। किसान को उसकी फसल का लागत मूल्य तक नहीं मिल रहा है जबकि लागत का डेढ़ गुना दिए जाने का वादा है। गन्ना किसान को बकाया पर ब्याज भी नहीं मिल रहा है। धान उद्योगपतियों से मिलकर किसानों को सरकार लुटवा रही है। मुख्यमंत्री के आदेश उनके कार्यालय परिसर के ही अंदर हवा में गूंजते रहते हैं।

अखिलेश ने कहा कि धान किसान की बड़ी दुर्दशा है। कई जिलो में जल भराव से अगली फसल भी नहीं हो सकेगी। अकेले बलिया में 4 हजार एकड़ धान की खेती डूब गई है। खेतो में अभी पानी भरा है। कई जनपदों में धान बीमारी का शिकार हैं। जहां स्थिति ठीक-ठाक है वहां धान खरीद महज दिखावे की चीज बन गई है। राज्य सरकार का लक्ष्य तो 50 लाख मीट्रिक टन का है लेकिन अभी तक मात्र 6.18 लाख टन की ही खरीद हुई है।

उन्होंने कहा कि सरकारी निर्देशों के बावजूद प्रदेश में धान खरीद केंद्र बहुत जगहों पर खुल नहीं पाए हैं। जहां खुले भी हैं वहां 1815 रुपये प्रति कुन्तल के निर्धारित मूल्य पर खरीद नहीं हो रही है। बिचैलियों के साथ धान खरीद केंद्र के अधिकारियों की मिलीभगत की शिकायते हैं। वहां किसान को इतना परेशान किया जाता है कि वह आढ़तियों को औने-पौने दाम पर धान बेचकर चला जाता है। कई जगह मजबूरन किसान द्वारा 1200 रुपये प्रति कुन्तल में धान बेचा जा रहा है। आलू किसान को तो बहुत आश्वासन दिए गए लेकिन हकीकत में वह आज भी उपेक्षा का शिकार है। उसे न तो न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल पा रहा है और नहीं उसकी फसल खरीद की व्यवस्था है। वह बाजार में औने-पौने दाम पर फसल बेचने को बाध्य है।

अखिलेश ने जारी बयान में कहा कि सबसे बुरी दशा तो गन्ना किसान की है। जब से राज्य में भाजपा सत्ता में आई है, उसके बकाया भुगतान में जानबूझकर देरी हो रही है। केंद्रीय शुगर केन सप्लाई एण्ड परचेज एक्ट और यूपी शुगर केन कंट्रोल आर्डर के अनुसार मिलों में गन्ना खरीद के 14 दिनों बाद भुगतान पर ब्याज पाने का किसानों को अधिकार है लेकिन इस पर अफसर और सरकार संजीदा ही नहीं है। किसान मिल मालिकों की मेहरबानी पर रहने को मजबूर हैं क्योंकि सरकार की प्राथमिकता में किसान नहीं, पूंजीपति है। किसान कर्ज लेकर बीज, कीटनाशक, सिंचाई आदि की व्यवस्था करता है बदले में उसे सिर्फ उपेक्षा और जलालत ही मिल रही है। किसानों के दर्द को भाजपा सरकार महसूस करना ही नहीं चाहती है। किसान के हजारों करोड़ रुपयों पर मिल मालिक कुंडली मारे बैठे हैं।

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सपा प्रमुख ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भाजपा सरकार ने बर्बाद करके रख दिया है। समाजवादी सरकार में किसानों के हितों को वरीयता दी गई थी। भाजपा सरकार पूंजीघरानों को रियायतें बांटती है। किसान, खेती और गांवों की दशा दिन पर दिन बिगड़ती जा रही है। समाजवादी सरकार ने कुल बजट का 75 प्रतिशत भाग कृषि क्षेत्र पर खर्च किया था। भाजपा ने किसानों को कर्जदार बना दिया और उसे आत्महत्या करने को विवश कर दिया है। भाजपा सरकार में किसानों की यही नियति रहेगी।http://www.satyodaya.com

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सुप्रीम कोर्ट ने तथ्यों के आधार पर नहीं दिया अयोध्या फैसला- ‘’इमरान हसन’’

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लखनऊ। अल इमाम वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष इमरान हसन सिद्दीकी ने लालबाग स्थित अपने आवास पर प्रेस वार्ता कर हाल ही में आए देश के सबसे चर्चित विषय बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सुन्नी वक्फ बोर्ड के मेंबरों से कोर्ट में रिव्यू डालने की गुजारिश की।

इमरान हसन ने कहा कि मुख्य वक्ता के रूप में मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करता हूं। मेरे साथ इस देश के तमाम मुसलमान भी इस फैसले का सम्मान करते हैं। क्योंकि मुसलमानों पर पिछले 30 सालों से यह इल्जाम लगता आ रहा था कि मुसलमानों ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाई। लेकिन न्यायालय ने गलत साबित कर दिया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जिन तर्कों को सामने रखा गया उनके अनुकूल फैसला नहीं है। तर्कों के आधार पर फैसला हमारे हक में आना चाहिए था। कोर्ट ने खुद स्वीकार किया है कि बाबरी मस्जिद राम मंदिर को तोड़कर नहीं बनाई गई और ना ही वहां कोई खुदाई में कोई भी ऐसा अवशेष मिला जिससे यह साबित हो कि वहां राम मंदिर था। दूसरी सबसे अहम बात कि जब कोर्ट ने यह माना कि मस्जिद को तोड़ा गया व मूर्तियां रखी गई यह गैरकानूनी है।तो कोर्ट को उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश देना चाहिए। जिन लोगों ने मस्जिद को तोडा व उनके कहने पर जनता ने इस काम को अंजाम दिया उन सभी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

सुना नहीं अभी कहां की जब कोर्ट ने पहले ही कहा था कि इस केस का फैसला धार्मिक भावनाओं के आधार पर नहीं किया जाएगा पर जो फैसला आया तो वह आस्था के आधार पर हुआ। उन्होंने न्यायालय से अपील की कि इस फैसले को भविष्य में किसी भी मामले में उदाहरण बनाकर ना पेश किया जाए। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गए फैसले कानून बन जाते हैं।

उन्होंने सुन्नी वक्फ बोर्ड इस मामले में सभी पक्षकारों खासकर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड  और  कौम के उलेमाओ से अपील करते हुए कहा कि इस मामले को रिव्यू में ले जाना ही होगा। वक्फ बोर्ड इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही ना बरतें। उन्होंने कहा मैं इस देश के मुसलमानों से अपील करता हूं कि वह इस मामले से सीख लेते हुए अपनी मजदूरों को आबाद रखें और शरीयत पर चलने की पूरी कोशिश करें।

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वहीं PADAM संस्था के अध्यक्ष डी. के आनंद ने कहा कि देश के 5000 वर्ष के इतिहास में आर्यों का युग रहा है। जिसमें तीन काल रहे हैं जिनमें कहीं भी मंदिर का रिवाज नहीं रहा। वहीं बुद्ध धर्म के राजा सम्राट अशोक ने 84000 बुद्धविहारों का निर्माण किया। जब पूरब से लेकर अफगानिस्तान तक थे। लेकिन सम्राट अशोक के आखिरी वंश के राजा ब्रह्मदत्त की हत्या पंतजलि व पुष्पमित्र शुंग से करा कर 84000 बुधविहारों को तोड़ा गया और दो लाख भिक्षुओं की हत्याएं कराई गई। मौजूदा समय में देश के अधिकतर टीलों के नीचे बुधविहार के अवशेष पाए जाते हैं। वहीं बाबरी मस्जिद के बगल में जो खुदाई हुई और वहां से जो अवशेष मिले उसे न्यायालय ने मंदिर या मस्जिद का मानने से इनकार कर दिया।  उन्होंने कहा कि मेरा मानना यह है कि अगर यह अवशेष मंदिर या मस्जिद के नहीं हैं तो फिर किसके हैं।

वहीं संस्था के सलाहकार शकील अहमद ने कहा कि फैसले में गलती है। फैसला आस्था के आधार पर दिया गया है। टाइटल फेल कर दिया है। जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका था कि हम फैसला आस्था के नाम पर नहीं देंगे। तो फिर ऐसा क्यों अगर मान लिया जाए कि आज भी मस्जिद वहीं पर बनी होती तो क्या कोर्ट उसको हटाकर मंदिर बनाने की इजाजत देती। मेरा मानना है कि सभी पक्षकारों को रिव्यू में जाना चाहिए।http://www.satyodaya.com

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