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अयोध्या: रामजन्मभूमि पर खुदाई में मिलीं प्राचीन मूर्तियां, जानें क्या है पूरा मामला

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लखनऊ: अयोध्या में राम मंदिर का काम धीरे-धीरे शुरू हो चुका है। इसी बीच राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की तरफ से कराए जा रहे समतलीकरण कार्य के दौरान कुछ ऐतिहासिक अवशेष मिले हैं। इन अवशेषों में कई पुरातात्विक मूर्तियां खंभे और शिवलिंग. आमलक, कलश और चौखट शामिल हैं।

रामजन्मभूमि परिसर में मिली मूर्तियां

जानकारी के मुताबिक कई पुरातात्विक मूर्तियों में खंभे और शिवलिंग मिली है। 4 फीट से बड़ा एक शिवलिंग उस हिस्से से मिला है, जहां मलबा हटाने और समतलीकरण का काम चल रहा था।

खुदाई के दौरान क्या मिला

आपको बता दें कि खुदाई के दौरान देवी देवताओं की खण्डित मूर्तियां , अन्य कलाकृतियों के पत्थर , 7 ब्लैक टच स्टोन के स्तंभ और 6 रेड स्टैंड स्टोन के स्तम्भ और 5 फुट आकार के शिवलिंग मिली है।

11 मई से चल रहा समतलीकरण का काम

मालूम हो कि 11 मई से राम जन्म भूमि के पक्ष में फैसला आने के बाद रामलला के मंदिर निर्माण के निमित्त राम जन्म भूमि अधिग्रहीत परिसर में जमीन का समतलीकरण के साथ जिक-जैक और लोहे के बैरिकेडिंग हटाने का काम चल रहा है। साथ ही जहां भगवान राम लला विराजमान थे। उसके पीछे की जो खाई थी, उसे कई जेसीबी और ट्रैक्टर लगाकर के सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए साफ किया जा रहा है। इस दौरान ही यहां ये मूर्तियां, शिवलिंग और शिलालेख मिले हैं।

हिन्दू महासभा के वकील का जारी हुआ बयान

इस मामले के बाद हिन्दू महासभा के वकील विष्णु जैन ने एक बयान जारी किया है। उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान हम पर मुस्लिम पक्ष ने हिन्दू तालिबान के आरोप लगाया था और कहा था कि वहां पर मंदिर का कोई अवशेष नही है। इन मूर्तियों का मिलना यह उन आरोपों का जवाब है जो हम सुप्रीम कोर्ट में बहस करते चले आ रहे थे। http://www.satyodaya.com

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सिद्धार्थनगर में मिले 11 नए कोरोना पॉजिटिव, संक्रमितों की संख्या पहुंची 60

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में गुरुवार को 11 नए कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। वहीं आइसोलेशन वार्ड के 2 मरीज कोरोना निगेटिव मिलने के बाद घर भेजे गए। इसकी पुष्टि सीएमओ डॉ सीमा रॉय ने की है। मिली जानकारी के मुताबिक ये सभी मरीज सूरतगढ़, डुमरियागंज और नवगढ़ इटवा तहसील क्षेत्र के हैं। इसके साथ ही जिले में संक्रमितों की संख्या 60 हो गई है। जिसमें से 19 मरीज ठीक होकर घर जा चुके हैं।

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वहीं बुधवार को भी सिद्धार्थनगर के डुमरियागंज और सदर तहसील क्षेत्र के दो अलग-अलग क्वारंटीन हाउस से तीन नए कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले थे। इनमें एक बच्ची भी शामिल है, जिसकी उम्र लगभग दो वर्ष बताई जा रही है। सभी को बर्डपुर सीएचसी के आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है।

डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के बनगवां स्थित खैर टेक्निकल क्वारंटीन हाउस में 10 मई को मुंबई से लौटे 50 वर्षीय व्यक्ति और 19 वर्षीय युवक को क्वारंटीन किया गया था। संदिग्ध दिखने के बाद दोनों के लार का सैंपल जांच के लिए भेजा गया था। इसके अलावा सदर तहसील क्षेत्र के सिद्धार्थ पब्लिक स्कूल करौंदा मसिना में क्षेत्र के ही एक गांव के ही एक परिवार को क्वारंटीन किया गया था। बताया जा रहा है कि यह लोग 13 मई को मुंबई से घर लौटे थे। स्क्रीनिंग में संदिग्ध लगने के बाद दंपती और एक बच्ची के लार का सैंपल जांच के लिए भेजा गया था। बुधवार को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज से आई रिपोर्ट में बच्ची और डुमरियागंज के दोनों लोग पॉजिटिव मिले। http://www.satyodaya.com

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COVID-19: यूपी में अब इन नियमों पर निर्धारित होंगे रेड, ऑरेन्ज और ग्रीन जोन

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लखनऊ। लॉकडाउन 4.0 में कई शहरों में छूट दी गई है। रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन में अलग-अलग छूट है। राज्य सरकार अपने स्तर से इन छूटों को तय कर रही है। वहीं प्रदेश सरकार की तरफ से जिला प्रशासन को इस बात की अनुमति दी गई है कि वो इसे तय करें। 

प्रदेश सरकार ने जिलों में कोरोना वायरस के मरीजों की स्थिति का आकलन केन्द्र सरकार की लॉकडाउन 4.0 में रेड, ऑरेन्ज व ग्रीन जोन निर्धारित करने की गाइडलाइन को आधार बनाया है। प्रदेश सरकार ने केन्द्र सरकार की इसी गाइडलाइन के आधार पर  सभी जिलाधिकारियों को अपने हिसाब से जोन निर्धारित करने के निर्देश दिए हैं। चिकित्सा व स्वास्थ्य  विभाग के प्रमुख सचिव अमित मोहन प्रसाद ने आदेश जारी करते हुए कहा कि  केन्द्र सरकार की गाइडलाइन के आधार पर रेड, ऑरेन्ज व ग्रीन जोन निर्धारित करने छह मानक तय किए गए हैं।

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उन जिलों को गंभीर श्रेणी (रेड जोन)में रखा जाएगा जहां

  1. कुल एक्टिव केस  200 हों
  2. एक्टिव केस प्रति लाख के हिसाब से 15 हों
  3. 14 दिन में हर हफ्ते के हिसाब से वहां संक्रमित मामले दोगुने हो रहे हों
     4. मृत्यु दर छह फीसदी या उससे ज्यादा हो।
  4. प्रति लाख की आबादी पर केवल 65 लोगों की टेस्टिंग हो रही हो।
  5. जांच के नमूने की रिपोर्ट छह फीसदी की दर से लोग संक्रमित हो रहे हों। 
    ऐसे गंभीर श्रेणी के जिले क्रिटिकल स्थिति से तभी हट सकते हैं जब वहां 21 दिन तक कोई केस न आए। संक्रमित मामले 28 दिन में दोगुने हों। मृत्यु दर केवल एक फीसदी रह जाए। एक लाख की आबादी पर 200 लोगों की टेस्टिंग होने लगे। संक्रमित केसों की तादाद केवल दो फीसदी रह जाए।

ग्रीन जोन

यूपी के चिकित्सा व स्वास्थ्य  विभाग के प्रमुख सचिव अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि केन्द्र सरकार की गाइडलाइन के आधार पर पिछले 21 दिनों में कोरोना वायरस संक्रमण का कोई मामला न पाया जाए तो वह स्वयं ही ग्रीन जोन में आ जाएगा।

ऑरेंज जोन

जो जिले रेड और ग्रीन जोन की स्थितियों में न हों, वह ऑरेन्ज जोन में होंगे। चिकित्सा व स्वास्थ्य  विभाग के प्रमुख सचिव अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि रेड जोन में वर्गीकृत किए गए जिलों के डीएम संक्रमण को नियंत्रित करने  के लिए अपने जिलों में अतिरिक्त कदम उठाने के लिए अधिकृत होंगे।http://www.satyodaya.com

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UP: 69000 शिक्षकों की भर्ती का रास्‍ता साफ, SC ने खारिज की शिक्षामित्रों की याचिका

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लखनऊ। प्राथमिक शिक्षक भर्ती मामले में उत्‍तर प्रदेश की योगी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने शिक्षामित्रों की याचिका को ठुकरा दिया है। इसके साथ ही यूपी में 69000 शिक्षकों की भर्ती का रास्‍ता साफ हो गया है। गुरुवार को तीन जजों की पीठ ने शिक्षामित्रों की याचिका खारिज कर दी। सर्वोच्च अदालत के इस फैसले से यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार को बड़ी राहत मिली है। साथ ही इससे अब प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती का रास्ता भी साफ हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने आज यूपी प्राथमिक शिक्षा मित्र एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई की। शिक्षा मित्रों के संघ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इसमें UPTET के तहत 69000 शिक्षकों की बहाली का मुद्दा उठाया गया था। सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की।

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इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले में यूपी सरकार के पक्ष में फैसला दिया था. हाईकोर्ट ने सरकार के पक्ष को सही ठहराते हुए 69000 शिक्षकों की भर्ती मामले में कहा था कि तीन महीने के अंदर भर्ती की प्रक्रिया पूरी की जाए। इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ शिक्षा मित्रों के संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस बीच हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने भी 69000 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक अन्य मामले में यूपी सरकार के पक्ष में फैसला दिया था। लखनऊ बेंच ने मई की शुरुआत में दिए अपने फैसले में कट ऑफ मार्क्स के जरिए शिक्षकों की नियुक्ति को सही ठहराया था. दो जजों की पीठ ने यह फैसला दिया था।

दरअसल, शिक्षक भर्ती के लिए निकाले गए विज्ञापन में न्यूनतम कट ऑफ अंक लाने की बात कही गई थी। उस समय सरकार द्वारा जारी इस विज्ञापन में यह नहीं बताया गया था कि कट ऑफ अंक कितना होगा। कट ऑफ के बारे में सरकार ने बाद में जानकारी दी थी। इसके मुताबिक जनरल कैटेगरी के अभ्यर्थियों को 150 में से 97 (65%) अंक लाना होगा। वहीं आरक्षण कैटेगरी वाले अभ्यर्थियों के लिए 150 में से 90 यानी 60% अंक लाना अनिवार्य किया गया है।http://www.satyodaya.com

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