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प्रदेश

मुख्यमंत्री योगी की बैठक से पहले जमा कराए गए अफसरों के मोबाइल…

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लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश की कानून व्यवस्था की समीक्षा करने के लिए अलग-अलग जिलों के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक व पुलिस अधीक्षकों के साथ बैठक की।मुख्यमंत्री की बैठक में भाग लेने वाले अधिकारियों के फोन पहली बार बाहर जमा कराए गए। बता दें कि पिछले दिनों फरमान जारी किया गया था कि मंत्रीगण व अफसर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होने वाली बैठकों में फोन नहीं ले जा सकेंगे। उन्हें बैठक कक्ष के बाहर ही अपना फोन छोड़ना होगा।


जिसको लेकर मुख्य सचिव ने आदेश जारी किया था, जिमसें कहा गया था कि लोकभवन स्थित मंत्रिपरिषद कक्ष में किसी का भी मोबाइल फोन लाना प्रतिबंधित है। यह पत्र उप मुख्यमंत्री, सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार के सभी राज्यमंत्रियों व राज्यमंत्रियों के निजी सचिवों को दिया गया था। वहीं आज इस आदेश का आज पालन भी हुआ, जहां बुधवार को कानून व्यवस्था को लेकर हुई बैठक में अफसरों के फोन बाहर रखवा लिए गए।  

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इस बैठक में देर से पहुंचने वाले कई अधिकारियों को एंट्री नहीं मिली । लोकभवन में में हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने महिलाओं के साथ बढ़ रहें अपराधों पर बेहद नाराजगी दिखाई हैं। बता दें कि बैठक में मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी, मंडलों व जिलों के अधिकारी मौजूद रहें। http://www.satyodaya.com

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देश

सपा सरकार में मंत्री रहे गायत्री प्रसाद प्रजापति के घर सीबीआई का छापा

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फाइल फोटो

लखनऊ । सपा सरकार में मंत्री रहे गायत्री प्रसाद प्रजापति सहित अवैध खनन से जुड़े नेताओं व अफसरों के 22 ठिकानों पर सीबीआई छापेमारी कर रही है । गायत्री प्रासाद प्रजापति के घर के अंदर टीम कर रही है पड़ताल । इस दौरान गायत्री के अमेठी स्थित घर में सीबीआई के करीब आधा दर्जन अधिकारी मौजूद हैं । आवास विकास में है गायत्री प्रजापति का आवास ।

आपको बता दें कि रेप केस के आरोप में जेल में बन्द है गायत्री प्रजापति । वहीं, गायत्री प्रजापति के भतीजे से सीबीआई पूछताछ कर रही है । इसके अलावा सिंचाई विभाग में घोटाले को लेकर कई जगह सीबीआई ने छापे मारे हैं ।

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सीबीआई टीम ने मीडिया को इस मामले में कुछ भी बताने से किया इंकार । छापेमारी की कार्रवाई जारी है । http://www.satyodaya.com

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प्रदेश

नीति आयोग का प्रस्ताव नामंजूर, बिजली वितरण व निजीकरण का विरोध करेंगे कर्मचारी

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बिजली सेक्टर में किसी भी निजीकरण का प्रबल विरोध होगा

लखनऊ। नीति आयोग द्वारा बिजली वितरण का निजीकरण और शहरों व ग्रामीण क्षेत्रों में फ्रेंचाइजी मॉडल लागू करने के प्रस्ताव पर बिजली कर्मचारियों ने कड़ा ऐतराज जताया है। कर्मचारियों व इन्जीनियरों ने कहा है कि बिजली सेक्टर में किसी भी प्रकार से निजीकरण करने की कोशिश की गई तो इसका प्रबल विरोध होगा।
आल इण्डिया पॉवर इन्जीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बुधवार को जारी बयान में बताया कि नीति आयोग द्वारा जारी स्ट्रेटेजी पेपर में उन्हीं बातों का उल्लेख है जो इलेक्ट्रिसिटी (एमेंडमेंट ) बिल 2014 और 2018 में सम्मिलित थीं द्य उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी (एमेंडमेंट ) बिल 2014 और 2018 विगत लोकसभा में पारित न हो पाने के कारण लैप्स हो गए और नई लोकसभा में पुनः इस बिल को रखने के पहले बिजली कर्मचारियों व् इंजीनियरों से वार्ता होनी चाहिए द्य उन्होंने कहा कि फेडरेशन ने वार्ता हेतु केंद्रीय विद्युत् मंत्री आर के सिंह को पत्र भेजकर समय माँगा है।

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आल इण्डिया पॉवर इन्जीनियर्स फेडरेशन का यह कहना है कि बिजली के क्षेत्र में विगत 25 वर्षों में किये गए निजीकरण और फ्रेंचाइजी के सभी प्रयोग पूरी तरह असफल साबित हुए हैं। ऐसे में इन्हीं असफल प्रयोगों को आगे बढ़ाने के नीति आयोग के प्रस्ताव पर जल्दबाजी में एकतरफा निर्णय लेने के बजाय केंद्र सरकार को बिजली कर्मियों को विश्वास में लेकर सार्थक ऊर्जा नीति बनानी चाहिए जिससे आम लोगों को सस्ती और गुणवत्तापरक बिजली उपलब्ध हो सके।
उन्होंने कहा कि बिजली बोर्डों के विघटन का प्रयोग विफल रहा है, मात्र विघटन कर नई बिजली कंपनियों के गठन से घाटा तो निरंतर बढ़ ही रहा है, अनावश्यक प्रशासनिक खर्चे भी बढ़ गए हैं। अतः बिजली कंपनियों के एकीकरण की जरूरत है जिससे उत्पादन, पारेषण और वितरण में बेहतर सामंजस्य हो सके। विघटन के बाद की स्थिति यह है कि एक ओर उत्पादन और पारेषण कंपनियों को मुनाफे के नाम पर अरबों रूपए का इनकम टैक्स देना पद रहा है तो वहीं दूसरी ओर वितरण कम्पनियां सरकार की दोषपूर्ण ऊर्जा नीति के चलते अरबों रुपए के घाटे में हैं। इनकम टैक्स और घाटे दोनों की भरपाई अंततः आम उपभोक्ताओं से बिजली टैरिफ बढ़ा कर की जा रही है जो किसी के हित में नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नीति आयोग की रिपोर्ट के आधार पर निजीकरण की कोई एकतरफा कार्यवाही की गई तो देश के 15 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर राष्ट्रव्यापी आंदोलन प्रारम्भ करने हेतु बाध्य होंगे।http://www.satyodaya.com

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क्राइम-कांड

पत्रकार की पिटाई करने के आरोपी जीआरपी एसएचओ और कॉन्स्टेबल सस्पेंड…

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उत्तर प्रदेश के शामली जिले में पटरी से उतरी मालगाड़ी की कवरेज करने गए एक पत्रकार की पिटाई करने के आरोपी जीआरपी एसएचओ राकेश कुमार और कॉन्‍स्‍टेबल संजय पवार को सस्‍पेंड कर दिया गया है। यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने कहा है कि आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इन दोनों पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि उन्‍होंने पत्रकार अमित शर्मा के साथ बदसलूकी की और उसके साथ अमानवीय कृत्य किए। इससे पहले बुधवार सुबह पत्रकारों ने आरोपी अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन किया था।

पीड़ित पत्रकार अमित शर्मा ने बताया कि पिटाई करने के बाद पुलिसकर्मियों ने उन्‍हें हिरासत में लिया। हिरासत में उन्‍हें नंगा किया गया और उनके मुंह में पेशाब किया गया। आरोप है कि पुलिसकर्मी सादी वर्दी में थे और उन्होंने घटनास्थल पर ही गाली गलौज और मारपीट शुरू कर दी। साथ ही मीडियाकर्मियों का माइक भी छीन लिया। पिटाई की घटना का विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

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पत्रकार ने आरोप लगाया है कि पुलिसवाले उनसे कैमरा छीनने लगे और कैमरा नीचे गिर गया। वह कैमरा उठाने के लिए झुके तो सादी वर्दी में एक पुलिसवाले ने पिटाई शुरू कर दी और भद्दी गालियां देने लगा। मीडियाकर्मी ने आरोप लगाया है कि पुलिसकर्मी करीब 200 मीटर उन्‍हें पिटाई करते हुए ले गए और उन्हें लॉकअप में बंद कर दिया और फिर मुंह में पेशाब की। पत्रकार शर्मा ने बताया कि रेलवे की एक खबर चलाने के बाद पुलिसवाले उनसे नाराज थे।

बता दें कि यह घटना शामली शहर के धीमानपुरा फाटक के पास की है जहां ट्रैक बदलने के दौरान मालगाड़ी के कुछ डिब्बे पटरी से उतर गए थे। डिब्बे उतरने की वजह से जोर की आवाज भी हुई। शामली-सहारनपुर रेल मार्ग पर इस हादसे की वजह से ट्रैफिक प्रभावित रहा। आरोपी पुलिसकर्मियों को पहले लाइन हाजिर किया गया लेकिन बाद में लखनऊ से निर्देश मिलने पर सस्‍पेंड कर दिया गया।http://www.satyodaya.com

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June 12, 2019, 3:57 pm
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