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सीएम योगी को बम से उड़ाने की धमकी, गोमतीनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज

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लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बम से उड़ाने की धमकी दी गयी है। डायल 112 की सोशल मीडिया डेस्क के वॉट्सऐप पर भेजे इस मैसेज के बाद राजधानी पुलिस हरकत में आ गई। सीएम योगी को समुदाय विशेष के लिए खतरा बताते हुए 21-22 मई की रात करीब साढ़े 12 बजे योगी की हत्या की धमकी दी गयी है। इस संबंध में प्रभारी निरीक्षक धीरज कुमार ने थाना गोमतीनगर में एफआईआर दर्ज कराई है। मोबाइल नंबर 8828453350 से धमकी भरा मैसेज भेजा गया है। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्जकर जांच पड़ताल शुरू कर दी है।

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बता दें कि सीएम योगी को इससे पहले भी कई बार धमकी दी जा चुकी है। इसके एक दिन पहले ही कांग्रेस नेता पंकज पुनिया को सोशल मीडिया पर सीएम योगी के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने पर गिरफ्तार किया जा चुका है। http://www.satyodaya.com

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लॉकडाउन: राजस्थान सरकार पर बरसी मायावती, ट्वीट कर कही ये बात…

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लखनऊ। देश में कोरोना वायरस का कहर जारी है। जिसकी वजह से प्रवासी मज़दूरों की परेशानियां बढ़ती जा रही है। लगातार हजारों मजदूर पैदल ही अपने घर के लिए रवाना हो रहे हैं। इस बीच यूपी में योगी सरकार और कांग्रेस के बीच लगातार राजनीतिक बयानबाजी जारी है। अब गुरुवार राजस्थान सरकार ने कोटा से यूपी बॉर्डर तक भेजे गए बच्चों की बसों का किराया यूपी सरकार को सौंपा गया। जिस पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस पर निशाना साधा है।

उन्होंने शुक्रवार को ट्वीट कर राजस्थान सरकार को घेरा है। मायावती ने ट्वीट में लिखा राजस्थान की कांग्रेसी सरकार द्वारा कोटा से करीब 12000 युवा-युवतियों को वापस उनके घर भेजने पर हुए खर्च के रूप में यूपी सरकार से 36.36 लाख रुपए और देने की जो मांग की है। वह उसकी कंगाली व अमानवीयता को प्रदर्शित करता है। दो पड़ोसी राज्यों के बीच ऐसी घिनौनी राजनीति दुखःद है। लेकिन कांग्रेसी राजस्थान सरकार एक तरफ कोटा से यूपी के छात्रों को अपनी कुछ बसों से वापस भेजने के लिए मनमाना किराया वसूल रही है तो वहीं दूसरी तरफ अब प्रवासी मजदूरों को यूपी में उनके घर भेजने के लिए बसों की बात करके जो राजनीतिक खेल खेल कर रही है यह कितना उचित व कितना मानवीय है?

मायावती ने इसी के साथ पश्चिम बंगाल व ओडिशा में अम्फान तूफान की वजह से हुई तबाही पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा कि अम्फान तूफान के तांडव से खासकर पश्चिम बंगाल में जो व्यापक तबाही व बर्बादी हुई है वह अति-दुखद है। जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित है, ऐसे में खासकर केन्द्र सरकार को आगे बढ़कर हर प्रकार से राज्य को वहां के हालात सामान्य बनाने में मदद करनी चाहिए।

बता दें कि लॉकडाउन की वजह से कोटा में पढ़ने वाले बच्चे वहां पर ही फंस गए थे। यूपी सरकार ने अपने प्रदेश के बच्चों को वापस बुलाने का जिम्मा उठाया। अब दावा किया जा रहा है कि राजस्थान राज्य परिवहन निगम की बसों से छात्रों को झांसी और आगरा पहुंचाया गया। गहलोत सरकार ने योगी सरकार को 3636664 रुपये का बिल भेज दिया है। इससे पकले भी गहलोत सरकार यूपी सरकार से डीजल के लिए 19 लाख रुपए ले चुकी है।http://www.satyodaya.com

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शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने लिम्ब सेंटर को covid-19 हॉस्पिटल बनाए जाने का किया विरोध

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लखनऊ। लिम्ब सेंटर को कोविड-19 हॉस्पिटल बनाए जाने का विरोध करते हुए कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने राजनाथ सिंह रक्षा मंत्री भारत सरकार व सांसद लोकसभा लखनऊ क्षेत्र, मुख्यमंत्री, मंत्री चिकित्सा शिक्षा, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा से दिव्यांगों और आम जनता के हित में लिंब सेंटर की जगह कहीं और कोविड हॉस्पिटल बनाने का अनुरोध किया है। मोर्चे के अध्यक्ष वी पी मिश्रा ने बताया कि लिम्ब सेंटर को जो कोविड अस्पताल बनाने का निर्णय एक समिति ने लिया है।

उसको केजीएमयू की अधिशासी परिषद द्वारा पारित नही किया गया है। लिम्ब सेंटर परिसर पूरी तरह तकनीकी एवं चिकित्सीय आधार पर कोविड अस्पताल के लिए अनुपयुक्त है। साथ ही साथ यदि इस लिम्ब सेंटर को कोविड अस्पताल में परिवर्तित कर दिया गया तो प्रदेश के लाखों दिव्यांगजन, कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण तथा पुनर्वास के लिए वंचित हो जाएंगे। साथ ही साथ प्रदेश के एक मात्र जेई एवं एक्यूट इंसेफलाइटिस के इलाज वाले केंद्र जिसको शासन ने 5 करोड़ की लागत से स्थापित किया है उसके बंद हो जाने से, जापानी इंसेफेलाइटिस मरीजो का इलाज भी नही हो सकेगा।

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केजीएमयू के एक समिति द्वारा प्रस्तावित कोविड अस्पताल को कोई अन्य सुरक्षित परिसर में निर्मित किया जाये और इस दिव्यांगजन केंद्र को दिव्यांगजनो हेतु संरक्षित रखा जाए। शासन द्वारा कहा गया था कि लिंब सेंटर की जगह कोई और जगह देखकर पुनः प्रस्ताव भेजा जाए लेकिन समिति ने पुनः लिंब सेंटर का ही प्रस्ताव भेजा जो जनहित में नही है। जबकि 466 बेड का ट्रामा सेंटर भी इस उपयोग में पी जी आई की भाँति लाया जा सकता है चूँकि वर्तमान में इमरजेंसी मानसिक रोग विभाग से संचालित हो रही है। द्विव्यांग मरीजों की चिंता एवं जनहित को देखते हुए इस संबंध में कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा द्वारा चिकित्सा शिक्षा विभाग सहित सभी माननीय को पत्र लिखकर पूरी समस्या से अवगत कराया गया।

उत्तर प्रदेश के दिव्यांगों का एकमात्र विशिष्ट पुनर्वास केंद्र लिंब सेंटर के संबंध में श्री मिश्र का कहना है कि डिपार्टमेंट ऑफ आर्थोपेडिक के.जी.एम.सी. के अंतर्गत वर्ष 1971 में श्रीमती इंदिरा गांधी जी ने बांग्लादेश वार के समय 9 करोड़ रूपया दिया था, लाॅटरी फंड से इसका नाम आर्टिफिशियल लिंब सेंटर एवं प्रोस्थेटिक वर्कशॉप रखा गया। उस समय वर्कशॉप, फिजियोथेरेपी, आकुपेशनल थेरेपी, वोकेशनल सेक्शन तथा ओपीडी का स्थापना एवं संचालन शुरू हुआ। 1974 से 76 के पूर्व बिल्डिंग का निर्माण हुआ और सौ बेड का अस्पताल पैराप्लोजिया सेंटर, ऑपरेशन थिएटर वगैरा शुरू हुए। उसी समय दिव्यांगों के लिए लकड़ी का हाल और रीक्रिएशनल यूनिट शुरू हुआ।

जहां पर विकलांगो को शारीरिक रूप से सक्षम बनाए जाने के लिए खेलकूद सिखाएं जाते थे, जिसके माध्यम से पैरा ओलंपिक 1976-1981 में यहां के दिव्यांगों ने 6 गोल्ड मेडल जीते तभी वोकेशनल यूनिट की स्थापना हुई तथा आजीविका हेतु आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगारपरक कार्य भी सिखाए जाते थे। मोर्चे का कहना है कि कंवेंशन सेंटर को कोविड हॉस्पिटल में आसानी से तब्दील किया जा सकता है। इसके अलावा परिसर में कई अन्य भवन हैं जो बनकर लगभग तैयार हैं, फिलहाल के तौर पर उनका भी इस्तेमाल किया जा सकता है।http://www.satyodaya.com

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अयोध्या: रामजन्मभूमि पर खुदाई में मिलीं प्राचीन मूर्तियां, जानें क्या है पूरा मामला

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लखनऊ: अयोध्या में राम मंदिर का काम धीरे-धीरे शुरू हो चुका है। इसी बीच राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की तरफ से कराए जा रहे समतलीकरण कार्य के दौरान कुछ ऐतिहासिक अवशेष मिले हैं। इन अवशेषों में कई पुरातात्विक मूर्तियां खंभे और शिवलिंग. आमलक, कलश और चौखट शामिल हैं।

रामजन्मभूमि परिसर में मिली मूर्तियां

जानकारी के मुताबिक कई पुरातात्विक मूर्तियों में खंभे और शिवलिंग मिली है। 4 फीट से बड़ा एक शिवलिंग उस हिस्से से मिला है, जहां मलबा हटाने और समतलीकरण का काम चल रहा था।

खुदाई के दौरान क्या मिला

आपको बता दें कि खुदाई के दौरान देवी देवताओं की खण्डित मूर्तियां , अन्य कलाकृतियों के पत्थर , 7 ब्लैक टच स्टोन के स्तंभ और 6 रेड स्टैंड स्टोन के स्तम्भ और 5 फुट आकार के शिवलिंग मिली है।

11 मई से चल रहा समतलीकरण का काम

मालूम हो कि 11 मई से राम जन्म भूमि के पक्ष में फैसला आने के बाद रामलला के मंदिर निर्माण के निमित्त राम जन्म भूमि अधिग्रहीत परिसर में जमीन का समतलीकरण के साथ जिक-जैक और लोहे के बैरिकेडिंग हटाने का काम चल रहा है। साथ ही जहां भगवान राम लला विराजमान थे। उसके पीछे की जो खाई थी, उसे कई जेसीबी और ट्रैक्टर लगाकर के सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए साफ किया जा रहा है। इस दौरान ही यहां ये मूर्तियां, शिवलिंग और शिलालेख मिले हैं।

हिन्दू महासभा के वकील का जारी हुआ बयान

इस मामले के बाद हिन्दू महासभा के वकील विष्णु जैन ने एक बयान जारी किया है। उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान हम पर मुस्लिम पक्ष ने हिन्दू तालिबान के आरोप लगाया था और कहा था कि वहां पर मंदिर का कोई अवशेष नही है। इन मूर्तियों का मिलना यह उन आरोपों का जवाब है जो हम सुप्रीम कोर्ट में बहस करते चले आ रहे थे। http://www.satyodaya.com

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