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विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी कांग्रेस, प्रियंका हो सकती हैं यूपी में सीएम पद की प्रत्याशी…

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लखनऊ। लोकसभा चुनाव 2019 में करारी हार के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को जल्द ही यूपी की मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित किया जा सकता है। हालांकि, विधानसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन कांग्रेस ने अभी से बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत बनाने की रणनीति बनाई है।

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पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि कांग्रेस को सवर्ण और मुस्लिम मतदाताओं के बीच खुद को भाजपा के विकल्प के तौर पर प्रस्तुत करना चाहिए। देर-सवेर सवर्ण भी भाजपा से असंतुष्ट होकर कांग्रेस में आएंगे। इसलिए पार्टी नेतृत्व ने प्रियंका को यूपी में सक्रियता बढ़ाने के लिए कहा है। यही वजह है कि सोनभद्र का नरसंहार हो या फिर उन्नाव का रेपकांड, प्रियंका संघर्ष का कोई भी बड़ा मुद्दा नहीं छोड़ रही हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस अब यूपी में किसी भी चुनाव में सपा या बसपा से कोई समझौता नहीं करेगी। उसका प्रयास रहेगा कि ये दोनों दल यूपी में शून्य पर पहुंचें, ताकि आम मतदाता भाजपा के विकल्प के तौर पर कांग्रेस को देखने लगे।http://www.satyodaya.com

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अलीगढ़ गोलीकांड की जांच के लिए सपा भेजेगी अपना प्रतिनिधि मंडल

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लखनऊ। अलीगढ़ में पूरनमल प्रजापति के पुत्र पर हमले में मौत पर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित की गई है। जिसमें पूर्व विधायक जफर आलम, पूर्व एमएलसी दयाराम प्रजापति, रमेश प्रजापति, विनोद सविता और पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक यादव शामिल हैं।

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अलीगढ़ जनपद से पूरनमल प्रजापति समाजवादी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य है और संघर्षशील समाजवादी है। वहां 18 फरवरी को अलीगढ़ कृषि औद्योगिक प्रदर्शनी में पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ का सम्मेलन होना था। जिसके लिए पूरनमल प्रजापति अपने पुत्र नागेन्द्र के साथ बाइक पर कार्ड बांट कर घर आ रहे थे। क्षेत्र के ही पला होली चौक पर भाजपा नेता के पुत्र सचिन उर्फ पाली ने रोक लिया और मारपीट करने लगा। बचाव करने पर दबंगों ने सपा नेता पूरनमल के पुत्र सचिन प्रजापति को गोली मार दी जिनकी मौके पर ही मौत हो गई। पूरनमल व उनके भाई भी गम्भीर रूप से घायल हो गये थे। उनका इलाज मेडिकल कालेज में चल रहा है।http://www.satyodaya.com

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उत्तर प्रदेश में दौड़ेगी देश की पहली रैपिड रेल

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लखनऊ। एनसीआर में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए बन रहे भारत के पहले रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम आरआरटीएस के लिए प्रदेश सरकार ने आज पेश किए गए बजट में 900 करोड़ रुपया आवंटित किया है। इसी वर्ष भारत सरकार ने भी आरआरटीएस के लिए केंद्रीय बजट में 2,487 करोड़ रुपये आवंटित किया है।

प्रधान मंत्री ने बीते वर्ष 8 मार्च को दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर की आधारशिला रखी थी। जिसके तुरंत बाद समुचित योजना व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिहवन निगम एनसीआरटीसी टीम की विशेषज्ञता के साथ निर्माण कार्य शुरू किया गया था। 82 किमी लंबा दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर के 17 किमी के प्राथमिकता वाले हिस्से पर निर्माण कार्य चल रहा है। साथ ही कॉरिडोर के अंतर्गत दुहाई से साहिबाबाद तक पिलर निर्माण कार्य भी चल रहा है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर के पुल के लिए पहला गर्डर सेगमेंट एनसीआरटीसी के वसुंधरा, गाजियाबाद स्थित कास्टिंग यार्ड में बनाया गया है। प्राथमिकता वाले कॉरिडोर पर परिचालन मार्च 2023 से प्रस्तावित है। इस कॉरिडोर में चार स्टेशन हैं। साहिबाबाद, गाजियाबाद, गुलधर व दुहाई।

इसके साथ ही अन्य खंडों में भी तीव्र गति से काम चल रहा है। शताब्दी नगर से मोदीपुरम के बीच प्रारंभिक पाइल लोड टेस्ट चल रहा है। दिल्ली खंड में सराय काले खां से लेकर आनंद विहार तक प्रारंभिक पाइल लोड टेस्ट के लिए निविदाएं मंगाई गई हैं। न्यू अशोक नगर रैंप, नई दिल्ली से गाजियाबाद में साहिबाबाद रैंप तक टनल बोरिंग मशीन द्वारा दिल्ली के हिस्से की सुरंगों के डिजाइन और निर्माण के लिए भी निविदाएं मंगाई गई हैं। सराय काले खां और न्यू अशोक नगर आरआरटीएस स्टेशनों के लिए मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन स्कीम व जंग पुरा, नई दिल्ली में एक स्टेबलिंग यार्ड स्थापित करने के लिए डिटेल्ड डिजाइन कंसल्टेंट की नियुक्ति के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है।

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180 किमी प्रति घंटे की डिजाइन गति और 160 किमी प्रति घंटे की परिचालन गति के साथ आरआरटीएस ट्रेनें यात्रा का अद्वितीय अनुभव देगी। भारत में यह अपनी तरह की पहली ट्रेन होगी। 25केवी एसी सिस्टम के साथ एरोडायनामिक कोच इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर स्व-चालित होंगे। आरआरटीएस ट्रेनों को अत्याधुनिक तकनीक से डिजाइन किया जा रहा है। दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, आरआरटीएस कॉरिडोर क्षेत्र में प्रदूषण को नियंत्रिक करने में मदद करेगा। हाई-स्पीड रेल 60 मिनट से कम समय में मेरठ व नई दिल्ली के बीच की दूरी तय करेगी।

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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम एनसीआरटीसी, आरआरटीएस की कार्यान्वयन एजेंसी है। भारत सरकार (50%) और हरियाणा (12.5%), एनसीटी दिल्ली (12.5%), उत्तर प्रदेश (12.5%) व राजस्थान (12.5%) राज्य सरकारों का एक संयुक्त उपक्रम है। यह एनसीआर में आरआरटीएस के डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन व रख-रखाव के लिए जिम्मेदार है। यह भारत सरकार के आवास व शहरी मामलों के मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करता है। http://www.satyodaya.com

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बजट किसानों, युवाओं के लिए निराशा जनक: सुनील सिंह

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लखनऊ। लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व एम0एल0सी0 सुनील सिंह ने बजट को लेकर प्रदेश सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बड़ी तिजोरी वालों के चेहरे पर ये बजट मुस्कुराहट लाएगा। आम आदमी, किसान, बेरोजगार नौजवान, छोटे व्यापारियों के चेहरे पर मायूसी। हताशा व निराशा लाने के सिवाय कुछ नहीं है। बजट में सपने तो बड़े-बड़े दिखाए गए। लेकिन उसे हकीकत में बदलने के लिए कोई कार्य योजना नहीं है। बजट पूरी तरह निराशा-जनक और लक्ष्यविहीन है। देश का सबसे बड़ा वर्ग युवा, जिसे रोजगार की दरकार है। रोजगार कैसे मिलेगा इसके लिए बजट में सरकार ने न तो सरकारी क्षेत्र में और न ही गैर सरकारी संगठित व असंगठित क्षेत्र में कोई कार्ययेाजना प्रस्तुत की।

उन्होंने कहा कि इसके विपरीत रोजगार पाने की ट्रेनिंग देने की बात की गयी है। कृषि व किसानों को सरकार ने कुछ नहीं दिया। किसानों को सस्ती दरों पर खाद व बिजली देने का प्रावधान नहीं किया गया। गन्ना मूल्य भुगतान के लिए भी बजट में कोई उल्लेख नहीं। कुंभ में कैबिनेट बैठक करके गंगा एक्सप्रेस-वे बनाने की घोषणा करने वाली सरकार ने अपने बजट में धन आवंटित करना तो दूर गंगा एक्सप्रेस वे का जिक्र तक नहीं किया। इस बजट में गरीबों महिलाओं व युवाओं को उपहास उड़ाने वाला है। सूक्ष्म-लघु व मध्यम उद्योगों के लिए बजट बेहद कम है। इससे रोजगार की उम्मीद वाले युवाओं को बड़ा धक्का लगा है। इससे पता चलता है कि योगी सरकार को युवाओं के रोजगार देने में कोई रुचि नहीं है।

किसानों को सरकार ने कुछ नहीं दिया। किसानों को सस्ती दरों पर खाद व बिजली देने का प्रावधान नहीं किया गया। गन्ना मूल्य भुगतान के लिए भी बजट में कोई उल्लेख नहीं बजट को आकड़ों की बाजीगरी बताया। उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों को 450 रूपये प्रति कुन्तल देने के वादे के साथ सत्ता में आयी भाजपा सरकार को गन्ने के मूल्य में 10 रूपये की वृद्वि करने में 3 वर्ष का कार्यकाल लग गया। उन्होंने कहा कि कृषि पर लागत कम करने, खाद, पानी, बिजली, बीज, कृषि यंत्र, कीटनाशक आदि के दामों में कमी करने का प्रावधान इस बजट में नहीं किया गया। दूसरे राज्यों की तरह गेहूं, धान व तिलहन की फसलों के मूल्य पर प्रति कुन्तल बोनस देने का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। किसानों की आय दुगनी करने की घोषणा किसानों के साथ धोखा है। बजट में शिक्षा के लिए जो बजट आवंटित किया गया है। महिलाओ के लिए किसी भी प्रकार की कोई पेंशन या सहायता की व्यवस्था नहीं की गयी है। न ही बजट में रोजगार सृजन कोई ठोस उपाय बेरोजगारों के लिए किया गया है।

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उन्होंने कहा कि जबकि इन्वेस्टर समिटि में करोडों रूपया बहाकर सरकार ने प्रदेश में भारी पूंजी निवेश के बडे-बडे दावे किये थे। नोटबंदी व जी0 एस0 टी0 के बाद उ0प्र0 में लघु व मध्यम उद्योग बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। तमाम मझौले उद्योग बंद हो गये हैं। सरकार ने प्रस्तुत बजट में लघु-मध्यम व कुटीर उद्योग के प्रोत्साहन के लिए कोई ठोस पहल नहीं की है। कुल मिलाकर प्रदेश सरकार का यह बजट किसानों, युवाओं, महिलाओं और गरीबों, व्यापारियों व मजदूरों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण व निराशा जनक है।http://www.satyodaya.com

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February 18, 2020, 7:23 pm
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