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हैदराबाद में प्रियंका रेड्डी की निर्मम हत्या के विरोध में कांग्रेस ने निकाला कैंडल मार्च

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लखनऊ। हैदराबाद में महिला पशु चिकित्सक प्रियंका रेड्डी की निर्मम हत्या व प्रदेशभर में महिलाओं और बेटियों के साथ हो रहे अपराधों को लेकर उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने सोमवार को कैंडल मार्च निकाला। यह कैंडल मार्च प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू के नेतृत्व में परिवर्तन चौक स्थित सुभाष चन्द्र बोस की प्रतिमा से जीपीओ पार्क स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा तक निकाला गया।

प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने संबोधित करते हुए कहा कि हैदराबाद में जिस प्रकार महिला चिकित्सक की नृशंस हत्या की गयी है। उससे पूरा देश स्तब्ध है। निश्चित तौर पर आज देश में कानून व्यवस्था चरमराई हुई है। प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है। मैनपुरी, शाहजहांपुर, संभल और बदायूं की घटनाएं इस बात का उदाहरण है कि प्रदेश में जंगलराज कायम हो गया है और प्रदेश की महिलाएं असुरक्षित हैं। बीजेपी का ‘बेटी बचाओ’ नारा खोखला साबित हुआ है। जिस प्रकार मैनपुरी में घटना हुई है। उस पर सरकार को बिना विलंब किए सख्त कार्यवाही करनी चाहिए। गांधी प्रतिमा पर बैठे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की।

अजय कुमार लल्लू ने कहा कि देश में अजीबों गरीब स्थित है। चाहे हैदराबाद की घटना हो या फिर रांची की और यूपी में मैनपुरी, इटावा की घटना हो। इससे यह साबित हो गया है कि देश व पदेश में कानून का राज खत्म हो गया है। मैनपुरी की घटना पर कहा कि पुलिस के द्वारा कार्रवाई न करने पर प्रियंका गांधी के द्वारा सरकार को चिट्ठी लिखे जाने के बाद सरकार नींद से जागी और एसपी को हटाया और सीबीआई जांच की सिफारिश की। वहीं बेटियों और महिलाओं में भय व्याप्त है। कहा कि जबतक इन सभी को इंसाफ नहीं मिल जाएगा। कांग्रेस प्रदर्शन करती रहेंगी।

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कैंडल मार्च में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद प्रमोद तिवारी, कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा, पूर्व विधायक श्यामकिशोर शुक्ल, वीरेन्द्र मदान, अनूप गुप्ता, शमीना शफीक, ममता चैधरी, अमरनाथ अग्रवाल, जीशान हैदर, गौरव चौधरी, शिव पाण्डेय, डा. उमाशंकर पाण्डेय, पंकज तिवारी, पूर्व पार्षद प्रदीप कनौजिया और अजय श्रीवास्तव अज्जू सहित कार्यकर्ता शामिल हुए।http://www.satyodaya.com

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राहतः नोएडा व लखनऊ में लाॅकडाउन के बीच बच्चों से फीस वसूली पर रोक

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जिला प्रशासन ने निजी स्कूलों को दी सख्त हिदायत

लखनऊ। लाॅकडाउन के चलते सब कुछ ठप है। लोगों की काम, धंधे सब बंद हैं। लेकिन इस बीच तमाम प्राइवेट स्कूल बच्चों के अभिभावकों पर फीस जमा करने का दबाव बना रहे थे। ऐसे में रविवार को यूपी के नोएडा और लखनऊ प्रशासन ने अभिभावकों को बड़ी राहत दी है। नोएडा के नए जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने रविवार को एक आदेश में सभी प्राइवेट स्कूलों को फीस वसूली का दबाव न बनाने को कहा है। इस संबंध में जिलाधिकारी ने जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र जारी कर यह आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

डीएम सुहास ने पत्र में कहा है कि पूरे देश में लाॅकडाउन है। लोग संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे में अगर कोई भी स्कूल 14 अप्रैल यानी लॉकडाउन के बीच अभिभावकों से फीस मांगता है तो उसपर आदेश का उल्लघंन करने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 51 के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी। जिसमें एक साल की सजा या अर्थदण्ड या दोनों और यदि कोई लोक क्षति होती है तो यह सजा दो वर्ष की भी हो सकती है। नोएडा डीएम के फरमान के कुछ घण्टे बाद लखनऊ के जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने भी ऐसा ही एक आदेश जारी कर दिया है। जिसमें उन्होंने राजधानी के सभी प्राइवेट स्कूलों की फीस वसूली पर फिलहाल रोक लगा दी है।

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बाद में समायोजित करें तीन महीने की फीस

जिलाधिकारी ने कहा है कि कोई भी निजी स्कूल अप्रैल, मई और जून की फीस न मांगे। साथ कोई भी स्कूल बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा से भी वंचित न करें। नाम काटने की शिकायत मिलने संबंधित स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लखनऊ डीएम ने कहा, स्कूल 3 महीने की फीस बाद में समायोजित कर सकते हैं। बता दें कि इससे पहले वाराणसी के जिलाधिकारी ने लाॅकडाउन के दौरान बच्चों की फीस वसूली पर रोक लगायी थी। http://www.satyodaya.com

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लॉकडाउन: डॉक्टरों के पास न तो पर्याप्त टेस्टिंग किट और न ही पीपीई- अखिलेश यादव

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लखनऊ। कोरोना महामारी से बचने के लिए जहां सरकार सख्त नजर आ रहा है। वहीं विपक्षी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस संकट काल में ट्वीट कर केंद्र की मोदी व प्रदेश की योगी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण को रोकने की कोशिश में लगे स्वास्थ्य कर्मियों के पास न तो पर्याप्त टेस्टिंग किट्स हैं और न ही पर्याप्त संख्या में पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) हैं। यहां तक की गरीबों को खिलाने के लिए भोजन भी नहीं है। यही हमारे सामने आज प्रमुख चुनौतियां हैं।

वहीं, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रविवार को रात नौ बजे नौ मिनट तक रोशनी करने की अपील पर शेर के सहारे तंज कसा। उन्होंने ट्वीट किया कि सोचो अंदर की रोशनी बुझाकर, कौन पा सका है बाहर के उजाले। बता दें कि अखिलेश यादव इसके पहले भी कोरोना से बचाव के तरीकों पर सवाल उठाकर केंद्र व प्रदेश सरकार की आलोचना करते रहे हैं।

इसे भी पढ़ें- निजामुद्दीन मरकज व तबलीगी ज़मात पर लगे पूर्ण प्रतिबन्ध- विश्व हिन्दू परिषद्

इसके उलट बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती बसपा विधायकों से इस महामारी से लड़ने में प्रदेश सरकार का साथ देने की अपील की थी जिस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आभार भी जताया था।http://www.satyodaya.com

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निजामुद्दीन मरकज व तबलीगी ज़मात पर लगे पूर्ण प्रतिबन्ध- विश्व हिन्दू परिषद्

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लखनऊ। तबलीगी जमात व उसके निजामुद्दीन मरकज की देश व्यापी करतूतों के कारण सम्पूर्ण भारत आज गम्भीर संकट में है। विश्व हिन्दू परिषद् ने इसे इस्लामिक कट्टरपंथी व आतंक का पोषक बताते हुए इस पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाने की मांग की है। विहिप के केन्द्रीय संयुक्त महा-सचिव डॉ सुरेन्द्र जैन ने कहा है, कि हम सभी भारतीयों का जीवन संकट में डालने वाले तब्लीकी जमात के आर्थिक श्रोतों का पता लगाकर उसके बेंक खातों, कार्यालयों व कार्यकलापों पर अबिलम्ब विराम लगाया जाए। उन्होंने कहा कि 8 दिन के लाकडाउन के कठिन परिश्रम के बाद पूरा देश राहत की सांस ले रहा था।

कोरोना पीड़ितों की वृद्धि दर मात्र 2.8 रह गई थी। तभी 30 मार्च को मरकज निजामुद्दीन में एक भयंकर विस्फोट हुआ। वहां से 2300 से अधिक तब्लीगियों को निकाला गया। जिनमें से 500 कोरोना पीड़ित थे और 1800 को क्वारंटाइन करना पड़ा। 9 हजार से अधिक तबलीगी पूरे देश में कोरोना वायरस फैला रहे हैं। 31 तारीख को वृद्धि दर अचानक बढ़कर 43.02% हो गई। सारा देश सकते में आ गया। मस्जिदों मदरसों में छिपे हुए देशी-विदेशी संक्रमित मौलवियों की धरपकड़ होने लगी। इनके कारण सामुदायिक संक्रमण की संभावनाएं बढ़ गई। 14-15 मार्च को मुंबई में 2 से 3 लाख तबलीगीयों का इज्तेमा होना वाला था। विहिप के विरोध के कारण उसे रोक दिया गया।

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अगर वह हो जाता तो पहले से ही कोरोना में नंबर एक पर महाराष्ट्र के साथ पूरे देश की स्थिति क्या होती इसकी आज कल्पना भी नहीं की जा सकती ! डॉ जैन ने कहा कि अपने इस घोर अपराध के लिए शर्मिंदगी महसूस करने की जगह इन संक्रमित मौलवियों को छुपाने के लिए पुलिस-कर्मियों व स्वास्थ्य कर्मियों को देश की पचासियों बस्तियों में दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया। इनकी ही जान बचाने गए डॉक्टरों पर हमले किए गए। क्वॉरेंटाइन किए गए तब्लीगी नर्सों के साथ अश्लील हरकतें करने लगे और डॉक्टरों पर थूकने लगे। नरेला के क्वॉरेंटाइन सेंटर में तो सेना के चिकित्सकों और सैनिकों को ही बुलाना पड़ा। केवल निजामुद्दीन में ही नहीं, देश भर में मौलवियों ने मुस्लिम समाज को भड़काने वाले भाषण भी दिए।

बंगाल के एक मौलवी अब्बास सिद्दीकी ने तो नमाजियों को भड़काते हुए यहां तक कह दिया कि अल्लाह ऐसा वायरस भेजें जिससे 50 करोड़ हिंदू खत्म हो जाए। विहिप के संयुक्त महा सचिव ने यह भी कहा कि कोरोना पीड़ित व्यक्तियों की संख्या में से आधे से अधिक संख्या तबलीगी, मौलवी या उनसे संक्रमित लोगों की है। संपूर्ण देश तब्लीगियों और उनसे प्रभावित कट्टरपंथियों के इस व्यवहार से बहुत आश्चर्यचकित व खिन्न है। ऐसा लग रहा है कि कोरोना संक्रमण को हथियार के रूप में प्रयोग कर इनमें आत्मघाती बम बनने की होड़ लगी है.http://www.satyodaya.cam

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