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प्रवासी मजदूरों के आने से UP में कोरोना का चढ़ा पारा, 1200 से ज्यादा पॉजिटिव

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार की मानें तो अब तक देश के विभिन्न हिस्सों से प्रदेश में 12 लाख से ऊपर कामगार मजदूर वापस अपने घरों को आ चुके हैं। इन तमाम कवायदों के बीच में सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि एक तरफ प्रदेश में लगातार जहां कोरोना संक्रमितो की संख्या बढ़ रही थी, वहीं प्रवासी मजदूरों के आने से यह समस्या कई गुना ज्यादा बड़ी होती हुई दिखाई दे रही है। अब तक उत्तर प्रदेश में 1200 से ज्यादा प्रवासी मजदूरों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है।

स्थानीय जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों ने माना है कि प्रवासी मजदूरों की वजह से लगातार चुनौतियां बढ़ रही हैं। लखनऊ के जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश कहते हैं, “राजधानी लखनऊ में अब तक 30 से ज़्यादा कोरोना पॉजिटिव केस प्रवासी कामगार मज़दूर के रूप में मिले है। अभी यह संख्या और ज्यादा हो सकती है लेकिन इनमें से ज़्यादातर लखनऊ ज़िले के नहीं हैं।

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उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों के माथे पर भी चिंता की लकीरें साफ दिखाई देती हैं। स्वास्थ्य विभाग का आंकड़ा तैयार करने वाली एजेंसी का मानना है कि अब तक जिन जिलों में आए कामगार मज़दूरों में कोरोना संक्रमण मिला है, ब्यौरा तैयार किया जा रहा है। जहां मज़दूर भारी तादाद में आए हैं।

पिछले 3 दिनों में सिर्फ बाराबंकी में 100 से ज़्यादा पॉजिटिव केस कामगार मज़दूरों से जुड़े हैं। बस्ती, सिद्धार्थ नगर, संतकबीर नगर, जौनपुर, बहराइच, श्रावस्ती, गाजीपुर, वाराणसी, आज़मगढ़, अम्बेडकर नगर, अयोध्या, सुल्तानपुर, बलिया, रायबरेली, प्रयागराज, फर्रुखाबाद, चित्रकूट, बलिया, कानपुर देहात, उन्नाव, कुशीनगर, बांदा, अमेठी, सीतापुर, गोंडा, प्रतापगढ़ में हालात ठीक नहीं हैं।http://www.satyodaya.com

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Covid-19: ग्रामीण इलाकों के क्वारंटीन सेण्टरों में बढ़ रही हैं असुविधाएं

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प्रवासी रिश्तेदारों के यहां ले रहे शरण, कांग्रेस नेता ने की प्रति व्यक्ति 3 सौ से 4 सौ करने की मांग 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के विभिन्न अंचलों में प्राइमरी स्कूलों, कन्या पाठशालाओं अथवा पंचायत भवनों जैसे सार्वजनिक स्थलों में बनाए गए क्वारंटीन सेण्टर में पीने के पानी के लिये जो हैण्ड पाईप या मोटर लगी हैं। वे काम नहीं कर रही हैं, और शौचालय भी नाकाफी है जिनका रख रखाव ऐसा नहीं है, कि उनका इस्तेमाल हो सके। अन्यथा क्वारंटीन सेण्टर की असुविधाओं का हवाला देकर लोग वहांं से अन्य अथवा अपने रिश्तेदारों के घर के लिये प्रस्थान कर रहे हैं। इससे कोविड-19 (कोरोना) के संक्रमण का खतरा है।

कांग्रेस विधान मंडल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से क्वारंटीन में रहने वाले प्रति व्यक्ति की निर्धारित धनराशि को 40 से बढ़ाकर 3 से 4 सौ करने की मांग की है। जिससे लोगों में क्वारंटीन सेण्टर में रहने के लिये आकर्षण पैदा हो सके। कांग्रेस विधान मंडल दल की नेता ने इस संबन्ध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सुझाव दिया है।

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आराधना मिश्रा मोना ने पत्र में कहा है, कि ग्रामीण क्षेत्रों से यह सूचनायें मिल रही है, कि वहां के क्वारंटीन सेण्टर सेण्टरों में अब आने वालों की संख्या बढ़ जाने से कई समस्यायें उठ रही हैं। ज्यादातर स्थलों पर पीने के पानी के लिये जो हैण्ड पाईप या मोटर लगी हैं। वे काम नहीं कर रही हैं, और शौचालय भी नाकाफी है। जिनका रख रखाव ऐसा नहीं है कि उनका इस्तेमाल हो सके।

उन्होंने कहा कि कई जगहों से यह सूचनायें प्राप्त हो रही है, कि क्वारंटीन सेण्टरों में  खान- पान का जो प्रबन्ध शुरूआत में था। वह अब निरन्तर खराब होता जा रहा है। बताया जा रहा है, कि सरकार द्वारा प्रति व्यक्ति जो 40 रूपए निर्धारित किया गया है। उसमें दो वक्त का खाना और सुबह- शाम का नाश्ता शामिल है, और दैनिक प्रयोग की चीजें संभव नहीं हो पा रही है। जिस पैमाने पर प्रवासी मजदूर तथा लॉकडाउन में फंसे लोग गांंव पहुंच रहे हैं। उससे समस्यायें और बढ़ गयी हैं।http://www.satyodaya.com

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कॉमन सर्विस सेंटर के वीएलई ग्रामीण इलाकों में उपलब्ध कराएंगे घरेलू गैस सिलेंडर

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लखनऊ। कोरोना महामारी व लाॅकडाउन के चलते ग्रामीण इलाकों में रसोई गैस सिलेंडर की डिलीवरी में हो रही जल्द ही खत्म होने वाली है। क्योंकि जल्द ही कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के वीएलई (विलेज लेवल एंटरप्रेन्योर) जरूरतमंदों को घरेलू गैस उपलब्ध कराते नजर आएंगे। वीएलई मुख्य रूप से केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ सुदूर ग्रामीण इलाकों में पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। बीते गुरुवार को भारत पैट्रोलियम लिमिटेड के उच्चाधिकारी व कॉमन सर्विस सेंटर के सीईओ दिनेश त्यागी ने उत्तर प्रदेश में इस कार्यक्रम की शुरुआत की। सीएससी ने यूपी में इस कार्यक्रम की शुरुआत 30 वीएलई के साथ की है।

सीएससी के सीईओ दिनेश त्यागी ने सुदूर ग्रामीण इलाकों में घरेलू गैस उपलब्ध कराने के कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कहा, सीएससी द्वारा जल्द ही उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में इस सुविधा की शुरुआत की जाएगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर खत्म होने के बाद भरा सिलेंडर जुटाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती है। लेकिन अब उन्हें आसानी से सिलेंडर उपलब्ध हो सकेगा। श्री त्यागी ने कहा, इस कार्यक्रम के लिए सभी वीएलई को सुरक्षा के मद्देनजर ट्रेनिंग भी दी गई है।

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सीएससी उच्च अधिकारी और पेट्रोलियम अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में यह प्रणाली बहुत सुविधाजनक होगी। ग्रामीण इलाकों के लिए इस सुविधा की शुरुआत गुरुवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुई। इस वीडियो कांफ्रेंसिंग सीएससी के सीईओ दिनेश त्यागी समेत आला अधिकारी मौजूद रहे। साथ ही भारत पेट्रोलियम के भी उच्च अधिकारियों ने हिस्सा लिया।http://www.satyodaya.com

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Lockdown: कोरोना संक्रमित गर्भवती की कराई नॉर्मल डिलीवरी, जच्चा-बच्चा स्वस्थ

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ऑपरेशन करने से हो सकता था रिस्क

लखनऊ। निशातगंज की कोरोना संक्रमित गर्भवती का लोकबंधु अस्पताल में सामान्य प्रसव हुआ है। शिशु और महिला स्वस्थ हैं। वहीं शिशु का भी नमूना लेकर जांच के लिए भेजा गया है। हांलाकि प्रसव के पहले गर्भवती का बीपी बढ़ गया था और उसके पैर में काफी सूजन भी आ गई थी। ऐसे में लोकबंधु के डॉक्टरों और स्टॉफ के सामने इस महिला प्रसव कराना भी एक बड़ी चुनौती थी। वहीं लोकबंधु प्रशासन ने अस्पताल में कोरोना संक्रमित पहली गर्भवती के सामान्य प्रसव कराने का दावा किया है। 

मूल रूप से अयोध्या की रहने वाली गर्भवती यहां निशातगंज में अपने रिश्तेदार के पास रुकी है। प्रसव पीड़ा होने पर उसे महानगर के फातिमा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां कोरोना संक्रमण की पुष्टि के बाद उसे बुधवार को लोकबंधु अस्पताल में रेफर कर दिया गया। 

लोकबंधु अस्पताल की सीएमएस डॉ अमिता यादव का कहना है कि गर्भवती जब रेफर होकर आई तो उसका बीपी काफी बढ़ा और पैर में काफी सूजन थी। उसका ब्लड ग्रुप भी निगेटिव है। ऐसे में ऑपरेशन करने में बहुत ही रिस्क लग रहा था। तब अस्पताल की डॉ सुरभि रानी ने गर्भवती का बीपी सामान्य करने का प्रयास शुरू किया। कुछ दर्द निवारक दवाएं और इंजेक्शन देकर गर्भवती का सामान्य प्रसव डॉ सुरभि के साथ नर्स तारा देवी और आया गुडिय़ा ने देर रात सुरक्षित तरीके से कराया। 

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लोकबंधु के निदेशक डॉ डीएस नेगी ने बताया कि अस्पताल में कोरोना संक्रमित पहली गर्भवती का सामान्य प्रसव कराया गया है। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है, कि आखिर महिला कोरोना संक्रमित कैसे हुई। क्योंकि जैसा उसने बताया कि वह लॉकडाउन से घर में थी। सिर्फ करीब 15 दिन पहले और फिर मंगलवार को घर से बाहर निकलकर महानगर के फातिमा अस्पताल में गई थी।http://www.satyodaya.com

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