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दबंगों ने युवक की बेरहमी से की पिटाई, प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल डालकर लगाई आग…

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प्राइवेट पार्ट

फाइल फोटो

लखनऊ। जहां एक तरफ समाज आगे बढ़ जाती है और वाद-विवाद मिटा कर सभी धर्म के लोग एक साथ समाज को आगे बढ़ा रहे हैं। वहीं आज राजधानी लखनऊ के हजरतगंज के सिविल अस्पताल में बारबंकी से आये एक पीड़ित के परिजनों ने बताया कि दबंगो ने बुधवार की आधी रात अपनी पत्नी को लेने जा रहे युवक को इतना मारा की इंसानियत भी शर्म खा जाए।

प्राइवेट पार्ट

दबंगो ने युवक को इसलिए मारा क्योंकि वह दलित था। यहां तक युवक उस गांव का दामाद है और अपनी पत्नी को लेने जा रहा था। लेकिन दबंग अपने नशे में चूर उसे इतना मारा की वह जमीन पर गिर गया। लेकिन दबगों को उस पर तरस नहीं आया यहां तक दबंगों ने उसे दलित होने की सजा दी की उसके प्राइवेट पार्ट को मिट्टी का तेल डाल जला दिया और सुबह युवक के रिश्तेदरों को भी लाकर मारा। परिजनों और अधमरे युवक को कहीं शिकायत न करने की धमकी भी देकर दबंग फरार हो गए। वहीं परिजनों ने तुरंत युवक को अस्पताल ले गए साथ ही परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। सूचना पाकर मौके पर पहुंची बारबंकी पुलिस ने युवक की हालत देखते हुए उसे लखनऊ के अस्पातल मे भर्ती कराया जहां युवक जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा है।

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मिली जानकारी के अनुसार, बारबंकी के थाना देवा के रहने वाले पीड़ित की लड़ाई अपने पत्नी से हो गई थी। जिसके बाद पत्नी ने अपने पिता को बुला दहेज में दी गई बाइक और अपने दोनों बच्चे लेकर अपने मायके चली गई थी। जिसके बाद देर रात पीड़ित युवक अपनी पत्नी को लेने अपनी ससुराल पैदल जा रहा था कि बाराबंकी के देवा कोतवाली क्षेत्र के राघावपूर्वा में करीब आधा दर्जन दबंगों ने उसे रोका और पूछा, उसके नाम बताने पर दबंग आग-बबूला हो गए,क्योंकि वह एक दलित परिवार से था। दबंगों ने उसके बाद युवक की पिटाई करना शुरू कर दिया और जब दबंगों का पिटाई से मन भर गया तो युवक को दलित होने की सजा दे दी।

युवक के प्राइवेट पार्ट को पेट्रोल डाल जला दिया और उसके बाद सुबह युवक के परिजनों को बुला परिजनों को भी पीटा और उसके बाद परिजनों को जान से मरने की धमकी देकर दबंग मौके से फरार हो गए। परिजनों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी, मौके पर पहुंची पुलिस ने घायल को अस्पताल में भर्ती कराया जहां डाक्टरों ने मरीज की हालत गंभीर देखते हुवे उसे तुरंत लखनऊ रिफर कर दिया। जहां अस्पताल में डॉक्टर उसका इलाज कर रहे हैं और युवक की हालात गंभीर बनी हुई है।

वहीं अस्पताल के डॉक्टर ने बताया कि आज दिन में एक बाराबंकी से सुजीत नाम का युवक इलाज के लिए आया हुआ था। वह लगभग 25 से 30% जला हुआ था। उसके परिजन ने बताया कि कुछ दबंग लोगों ने उसके ऊपर कोई ज्वलनशील पदार्थ डाल आग लगा दी थी। उसकी कंडीशन अभी ठीक नहीं है डॉक्टर लूंगा उसका इलाज करने में जुटे हुए हैं।http://www.satyodaya.com

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बीएचयू विवाद: डॉ. फिरोज खान के साथ संविधान, निजाम और कबीर, फिर भी विरोध!

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लखनऊ।

जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान, मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान।

कबीर मर गया लेकिन वाणी अभी जिंदा है। शायद विचार को भी पता रहता है कि विवाद अनवरत जारी रहेगा इसलिये अमर हो जाए। विवाद बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर एक मुस्लिम व्यक्ति डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति का। छात्रों का धरना 12 दिन बाद भी जारी है। सात नवंबर से ही छात्र कुलपति आवास के सामने बीच सड़क पर धरना दे रहे हैं। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि फिरोज खान की नियुक्ति नियमानुसार है।

छात्रों के विरोध का तर्क

विरोध कर रहे छात्रों का कहना है कि संस्कृत के धर्म विज्ञान विभाग में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर मुस्लिम शिक्षक की नियुक्ति नहीं होने देंगे। उनका कहना कि यूनिवर्सिटी के किसी भी संकाय में किसी भी धर्म के लोगों की नियुक्ति की जा सकती है। संस्कृत के साहित्य विभाग में भी सभी धर्म के लोग पढ़ा सकते हैं। लेकिन हमारा विरोध संस्कृत के धर्म विज्ञान में मुस्लिम शिक्षक की नियुक्ति के खिलाफ है। इसके लिये छात्र बनासर हिंदू विश्वविद्यालय एक्ट और इस संकाय के बाहर लिखे शिलालेख का उदाहरण दे रहे हैं। छात्रों का कहना है कि इस शिलालेख में  मदन मोहन मालवीय ने साफ कहा है कि इस महाविद्यालय में विद्यार्थियों का प्रवेश वर्णाश्रम के नियमानुसार किया जाएगा।

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वहीं, छात्रों का ये भी कहना है कि धर्म विज्ञान को पढ़ते हुए खान-पान की भी शुद्धता का ख्याल रखना होता है, लेकिन अगर शिक्षक मुस्लिम होगा तो वह क्या मांस-मछली नहीं खाएगा? अगर वह खाएगा तो फिर क्या ‘धर्म विज्ञान’ पढ़ाने योग्य वह है?

विश्वविद्यालय प्रशासन का तर्क

बीएचयू प्रशासन का कहना है कि चयन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार गड़बड़ी नहीं है। नियुक्ति बीएचयू एक्ट के अनुसार है। वहीं, बीएचयू संविधान और यूजीसी के मानक का उल्लंघन नहीं कर सकता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15(1) के अनुसार राज्य, किसी नागरिक के विरुद्ध केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर कोई भेद नहीं करेगा।

भारत क्या कहता है?

विवाद के केंद्र में जो शिक्षक हैं फिरोज खान उनका सवाल है कि मैं एक मुसलमान हूं, तो क्या मैं संस्कृत नहीं पढ़ा सकता? बता दें, संस्कृत से फिरोज के परिवार का पुराना रिश्ता है। फिरोज ने मीडिया में बताया कि उनके दादा गफूर खान राजस्थाने के रहने वाले थे और भजन गाने के लिए मशहूर थे। डॉ. फिरोज के पिता ने भी संस्कृत की पढ़ाई की है।

अब सवाल ये है कि क्या संस्कृत का या फिर धर्मशास्त्र का अध्ययन-अध्यापन करने के लिए एक विशेष धर्म का होना जरूरी है? अगर ऐसा है तो फिर जयपुर के नाहरी का नाका स्थित स्कूल के बच्चे अपने भविष्य से क्यों खिलवाड़ कर रहे हैं? इस सरकारी स्कूल में संस्कृत पढ़ने वाले विद्यार्थियों में मुस्लिम बच्चों का बाहुल्य है। स्कूल में करीब पौने तीन सौ विद्यार्थी हैं इनमें 227 मुस्लिम समुदाय से हैं। बेहद गरीब परिवेश से आये ये बच्चे आखिर संस्कृत पढ़कर भविष्य में क्या करेंगे?

देश के आज तक की स्थिति को देखें तो यकीनन पदम श्री हासिल करेंगे या फिर प्रधानमंत्री के हाथों गोल्ड मेडल पाएंगे। जी हां, ऐसा ही हुआ है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के संस्कृत के विद्वान प्रो. वाहिद आबीदी को 2014 में भाजपा सरकार में ही संस्कृत भाषा में सम्मान के लिए पदम श्री से सम्मानित किया गया था। 2016 में उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें यश भारतीय पुरस्कार दिया।

इसी बीएचयू की बात करें तो यहां के संस्कृत विभाग की मुस्लिम छात्रा शाहिना को 2016 में खुद पीएम मोदी ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का गोल्ड मेडल दिया। शाहिना भी वेद, पुराण और उपनिषद पर रिसर्च कर रही हैं।

बात साफ है देश का संविधान और निजाम दोनों ही व्यक्ति-व्यक्ति में भेदभाव का विरोध करते हैं।

कबीर कुआं एक है, पानी भरे अनेक, बर्तन में ही भेद हैं, पानी सब में एक। http://www.satyodaya.com

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SC से मिली 5 एकड़ जमीन पर मस्जिद नहीं बनाएगा सुन्नी वक्फ बोर्ड: जुफर फारुखी…

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सुन्नी वक्फ बोर्ड

फाइल फोटो

लखनऊ। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के बाद अब सुन्नी वक्फ बोर्ड अयोध्या में पांच एकड़ जमीन पर मस्जिद बनाने न बनाने पर फैसला लिए जायेगा। सुन्नी वक्फ बोर्ड की आखिरी बैठक 26 नवंबर को होगी। जिसमे 5 एकड़ जमीन को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक सुन्नी वक्फ बोर्ड बाबरी मस्जिद के बदले में सरकार द्वारा दी जाने वाली जमीन पर मस्जिद नहीं बनाएगा।

वहीं सूत्रों की माने तो 5 एकड़ जमीन का प्रस्ताव ठुकराने की बाद अब उस जमीन पर हॉस्पिटल या एजुकेशन इंस्टीट्यूट बनाने को लेकर मिल रहे सुझावों पर विकल्प के तौर पर विचार किया जाएगा। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अलावा असदुद्दीन ओवैसी और मौलाना महमूद मदनी ने भी 5 एकड़ जमीन पर मस्जिद बनाने को शरीयत के खिलाफ बताया था।

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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने 17 नवंबर की बैठक में 5 एकड़ जमीन को शरीयत के खिलाफ बताया था। वहीं बोर्ड ने 30 दिनों के भीतर अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को चुनौती देनी की बात भी कही थी।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव जफरयाब जिलानी ने बोर्ड की बैठक के बाद कहा था, ‘‘मस्जिद अल्लाह की है और शरिया के तहत इसे किसी और को नहीं दिया जा सकता।’’ उन्होंने कहा ‘‘बोर्ड ने साफ कहा है कि वह मस्जिद की जगह अयोध्या में पांच एकड़ जमीन लेने के खिलाफ है। बोर्ड की राय है कि मस्जिद का कोई विकल्प नहीं हो सकता।’’

आपको बता दें सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर को बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले में अपने फैसले में कहा था कि 2.77 एकड़ विवादित जमीन राम लला को सौंपी जानी चाहिए, जो तीन वादियों में से एक हैं। पांच न्यायाधीशों की पीठ ने केंद्र सरकार को यह निर्देश भी दिया था कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या में पांच एकड़ जमीन दे दिया जाए।http://www.satyodaya.com

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प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने इंदिरा गांधी की प्रतिमा पर किया माल्यार्पण

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इंदिरा के फैसलों

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लखनऊ। भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की आज जयंती है। आयरन लेडी इंदिरा गांधी ने भारतीय राजनीति में अपनी एक लग पहचान बनाई थी। इंदिरा के फैसलों ने उन्हें ताकतवर नेताओं में शुमार कर दिया था। ऐसे में आज इंदिरा गांधी की जयंती पर सभी उन्हें याद किया है और तवीत कर श्रद्धांजलि अर्पित की है।

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जयंती कांग्रेस कार्यालय पर बड़े धूमधाम से मनाई गई। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने इंदिरा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। माल्यार्पण के दौरान कांग्रेस कार्यालय में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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जानकारी के मुताबिक अजय कुमार लल्लू के अलावा मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी राहुल गांधी के अलावा पीएम मोदी ने भी इंदिरा गांधी को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।http://www.satyodaya.com

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