Connect with us

प्रदेश

बीएचयू विवाद: डॉ. फिरोज खान के साथ संविधान, निजाम और कबीर, फिर भी विरोध!

Published

on

लखनऊ।

अभय सिन्हा

जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान, मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान।

कबीर मर गया लेकिन वाणी अभी जिंदा है। शायद विचार को भी पता रहता है कि विवाद अनवरत जारी रहेगा इसलिये अमर हो जाए। विवाद बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर एक मुस्लिम व्यक्ति डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति का। छात्रों का धरना 12 दिन बाद भी जारी है। सात नवंबर से ही छात्र कुलपति आवास के सामने बीच सड़क पर धरना दे रहे हैं। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि फिरोज खान की नियुक्ति नियमानुसार है।

विरोध कर रहे छात्रों का तर्क

विरोध कर रहे छात्रों का कहना है कि संस्कृत के धर्म विज्ञान विभाग में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर मुस्लिम शिक्षक की नियुक्ति नहीं होने देंगे। उनका कहना कि यूनिवर्सिटी के किसी भी संकाय में किसी भी धर्म के लोगों की नियुक्ति की जा सकती है। संस्कृत के साहित्य विभाग में भी सभी धर्म के लोग पढ़ा सकते हैं। लेकिन हमारा विरोध संस्कृत के धर्म विज्ञान में मुस्लिम शिक्षक की नियुक्ति के खिलाफ है। इसके लिये छात्र बनासर हिंदू विश्वविद्यालय एक्ट और इस संकाय के बाहर लिखे शिलालेख का उदाहरण दे रहे हैं। छात्रों का कहना है कि इस शिलालेख में  मदन मोहन मालवीय ने साफ कहा है कि इस महाविद्यालय में विद्यार्थियों का प्रवेश वर्णाश्रम के नियमानुसार किया जाएगा।

ये भी पढ़ें: मायावती ने देश में बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर जताई चिंता, ट्वीट कर कही ये बात…

वहीं, छात्रों का ये भी कहना है कि धर्म विज्ञान को पढ़ते हुए खान-पान की भी शुद्धता का ख्याल रखना होता है, लेकिन अगर शिक्षक मुस्लिम होगा तो वह क्या मांस-मछली नहीं खाएगा? अगर वह खाएगा तो फिर क्या ‘धर्म विज्ञान’ पढ़ाने योग्य वह है?

विश्वविद्यालय प्रशासन का तर्क

बीएचयू प्रशासन का कहना है कि चयन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार गड़बड़ी नहीं है। नियुक्ति बीएचयू एक्ट के अनुसार है। वहीं, बीएचयू संविधान और यूजीसी के मानक का उल्लंघन नहीं कर सकता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15(1) के अनुसार राज्य, किसी नागरिक के विरुद्ध केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर कोई भेद नहीं करेगा।

भारत क्या कहता है?

विवाद के केंद्र में जो शिक्षक हैं फिरोज खान उनका सवाल है कि मैं एक मुसलमान हूं, तो क्या मैं संस्कृत नहीं पढ़ा सकता? बता दें, संस्कृत से फिरोज के परिवार का पुराना रिश्ता है। फिरोज ने मीडिया में बताया कि उनके दादा गफूर खान राजस्थाने के रहने वाले थे और भजन गाने के लिए मशहूर थे। डॉ. फिरोज के पिता ने भी संस्कृत की पढ़ाई की है।

अब सवाल ये है कि क्या संस्कृत का या फिर धर्मशास्त्र का अध्ययन-अध्यापन करने के लिए एक विशेष धर्म का होना जरूरी है? अगर ऐसा है तो फिर जयपुर के नाहरी का नाका स्थित स्कूल के बच्चे अपने भविष्य से क्यों खिलवाड़ कर रहे हैं? इस सरकारी स्कूल में संस्कृत पढ़ने वाले विद्यार्थियों में मुस्लिम बच्चों का बाहुल्य है। स्कूल में करीब पौने तीन सौ विद्यार्थी हैं इनमें 227 मुस्लिम समुदाय से हैं। बेहद गरीब परिवेश से आये ये बच्चे आखिर संस्कृत पढ़कर भविष्य में क्या करेंगे?

देश के आज तक की स्थिति को देखें तो यकीनन पदम श्री हासिल करेंगे या फिर प्रधानमंत्री के हाथों गोल्ड मेडल पाएंगे। जी हां, ऐसा ही हुआ है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के संस्कृत के विद्वान प्रो. वाहिद आबीदी को 2014 में भाजपा सरकार में ही संस्कृत भाषा में सम्मान के लिए पदम श्री से सम्मानित किया गया था। 2016 में उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें यश भारतीय पुरस्कार दिया।

इसी बीएचयू की बात करें तो यहां के संस्कृत विभाग की मुस्लिम छात्रा शाहिना को 2016 में खुद पीएम मोदी ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का गोल्ड मेडल दिया। शाहिना भी वेद, पुराण और उपनिषद पर रिसर्च कर रही हैं।

बात साफ है देश का संविधान और निजाम दोनों ही व्यक्ति-व्यक्ति में भेदभाव का विरोध करते हैं।

कबीर कुआं एक है, पानी भरे अनेक, बर्तन में ही भेद हैं, पानी सब में एक।

http://www.satyodaya.com

प्रदेश

लॉकडाउन का हुआ आज 13वां दिन, यूपी के छह जिलों को किया जाएगा हॉटस्पॉट

Published

on

लखनऊ। कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी की जंग में संपूर्ण भारत लॉकडाउन का आज 13वां दिन है। यूपी के छह जिले नोएडा, आगरा, मेरठ, गाजियाबाद, लखनऊ व सहारनपुर को हॉट स्पॉट में रखा गया है। इन जिलों में 181 संक्रमित मिले हैं। जबकि, राज्य में अब तक 295 टेस्ट पॉजिटिव पाए गए। इनमें एक इंडोनिशयन नागरिक समेत 139 तब्लीगी जमाती पॉजिटिव पाए गए हैं। योगी सरकार ने लॉकडाउन के दौरान किसी को राशन व खाने की दिक्कत न हो, इसके लिए अन्नपूर्णा व सप्लाई मित्र पोर्टल लॉन्च किया है।

इसे भी पढ़ें-COVID-19:सिंगर कनिका कपूर की छठवीं रिपोर्ट भी आई नेगेटिव,होगी डिस्चार्ज

लखनऊ: राज्य में अब तक 9103 एफआईआर

लॉकडाउन के दौरान आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर किसी को भी सड़कों पर निकलने की इजाजत नहीं है। बावजूद इसके प्रदेश के कई जिलों में लोग बेवजह सड़कों पर टहलते हुए मिले। राज्य में अब तक लॉकडाउन के उलंघन के आरोप में 9103 एफआईआर दर्ज हुई है। जमाखोरी व कालाबाजारी के आरोप में 170 एफआईआर भी दर्ज की गई है।

इसे भी पढ़ें- बालों को वायरस से बचाने के लिए दरोगा सहित 75 पुलिसकर्मियों ने करवाया मुंडन

इस दौरान वाहन चालकों से 4.45 करोड़ रुपए जुर्माना वसूला गया है। प्रदेश में 5301 बैरियर लगाकर 10.75 लाख वाहनों की चेकिंग की गई। 2.30 लाख वाहनों के चालान हुए और 16498 वाहन सीज किए गए हैं।http://www.satyodaya.com

Continue Reading

प्रदेश

राहतः नोएडा व लखनऊ में लाॅकडाउन के बीच बच्चों से फीस वसूली पर रोक

Published

on

जिला प्रशासन ने निजी स्कूलों को दी सख्त हिदायत

लखनऊ। लाॅकडाउन के चलते सब कुछ ठप है। लोगों की काम, धंधे सब बंद हैं। लेकिन इस बीच तमाम प्राइवेट स्कूल बच्चों के अभिभावकों पर फीस जमा करने का दबाव बना रहे थे। ऐसे में रविवार को यूपी के नोएडा और लखनऊ प्रशासन ने अभिभावकों को बड़ी राहत दी है। नोएडा के नए जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने रविवार को एक आदेश में सभी प्राइवेट स्कूलों को फीस वसूली का दबाव न बनाने को कहा है। इस संबंध में जिलाधिकारी ने जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र जारी कर यह आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

डीएम सुहास ने पत्र में कहा है कि पूरे देश में लाॅकडाउन है। लोग संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे में अगर कोई भी स्कूल 14 अप्रैल यानी लॉकडाउन के बीच अभिभावकों से फीस मांगता है तो उसपर आदेश का उल्लघंन करने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 51 के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी। जिसमें एक साल की सजा या अर्थदण्ड या दोनों और यदि कोई लोक क्षति होती है तो यह सजा दो वर्ष की भी हो सकती है। नोएडा डीएम के फरमान के कुछ घण्टे बाद लखनऊ के जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने भी ऐसा ही एक आदेश जारी कर दिया है। जिसमें उन्होंने राजधानी के सभी प्राइवेट स्कूलों की फीस वसूली पर फिलहाल रोक लगा दी है।

यह भी पढ़ें-कोरोना हो हारना ही होगा…पूरे भारत ने दीया जलाकर जताया संकल्प

बाद में समायोजित करें तीन महीने की फीस

जिलाधिकारी ने कहा है कि कोई भी निजी स्कूल अप्रैल, मई और जून की फीस न मांगे। साथ कोई भी स्कूल बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा से भी वंचित न करें। नाम काटने की शिकायत मिलने संबंधित स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लखनऊ डीएम ने कहा, स्कूल 3 महीने की फीस बाद में समायोजित कर सकते हैं। बता दें कि इससे पहले वाराणसी के जिलाधिकारी ने लाॅकडाउन के दौरान बच्चों की फीस वसूली पर रोक लगायी थी। http://www.satyodaya.com

Continue Reading

प्रदेश

लॉकडाउन: डॉक्टरों के पास न तो पर्याप्त टेस्टिंग किट और न ही पीपीई- अखिलेश यादव

Published

on

लखनऊ। कोरोना महामारी से बचने के लिए जहां सरकार सख्त नजर आ रहा है। वहीं विपक्षी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस संकट काल में ट्वीट कर केंद्र की मोदी व प्रदेश की योगी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण को रोकने की कोशिश में लगे स्वास्थ्य कर्मियों के पास न तो पर्याप्त टेस्टिंग किट्स हैं और न ही पर्याप्त संख्या में पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) हैं। यहां तक की गरीबों को खिलाने के लिए भोजन भी नहीं है। यही हमारे सामने आज प्रमुख चुनौतियां हैं।

वहीं, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रविवार को रात नौ बजे नौ मिनट तक रोशनी करने की अपील पर शेर के सहारे तंज कसा। उन्होंने ट्वीट किया कि सोचो अंदर की रोशनी बुझाकर, कौन पा सका है बाहर के उजाले। बता दें कि अखिलेश यादव इसके पहले भी कोरोना से बचाव के तरीकों पर सवाल उठाकर केंद्र व प्रदेश सरकार की आलोचना करते रहे हैं।

इसे भी पढ़ें- निजामुद्दीन मरकज व तबलीगी ज़मात पर लगे पूर्ण प्रतिबन्ध- विश्व हिन्दू परिषद्

इसके उलट बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती बसपा विधायकों से इस महामारी से लड़ने में प्रदेश सरकार का साथ देने की अपील की थी जिस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आभार भी जताया था।http://www.satyodaya.com

Continue Reading

Category

Weather Forecast

April 6, 2020, 12:37 pm
Sunny
Sunny
35°C
real feel: 37°C
current pressure: 1010 mb
humidity: 20%
wind speed: 4 m/s W
wind gusts: 4 m/s
UV-Index: 9
sunrise: 5:22 am
sunset: 5:56 pm
 

Recent Posts

Trending