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पारिवारिक विवादों के चलते युवक ने टंकी पर चढ़कर कूदने का किया प्रयास  

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लखनऊ। राजधानी में आए दिन लोग अपनी मांगों को लेकर आत्मदाह करने और टंकी पर चढ़कर कूदने की धमकी देते रहते हैं। ऐसे में आज एक युवक ने पानी की टंकी पर चढ़कर कूदने की धमकी दे रहा था। जिसके बाद लोगों में अफरा-तफरी मच गई।

यह पूरा मामला मवैया 2 नंबर रेलवे क्रासिंग के के पास के पानी टंकी का है। जहां एक युवक अपने किसी पारिवारिक विवाद के चक्कर में टंकी पर चढ़कर कूदने की धमकी देने लगा, जिसके बाद वहां आसपास के लोगों ने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी भी तरह युवक को समझा-बुझाकर नीचे उतारा। युवक के नीचे आने के बाद पुलिस ने उसे तुरंत थाने ले जाकर कार्रवाई करने में जुटी हुई है। http://www.satyodaya.com

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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुलाई प्रेसवार्ता, बीजेपी पर बोला जमकर हमला   

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लखनऊ। लोकसभा चुनाव की तारीख तय हो जाने के बाद पार्टियां एक-दूसरे पर जमकर हमला बोल रही हैं। ऐसे में आज हुए प्रेसवार्ता में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने बीजेपी पर जमकर हमला बोला है। पार्टी ने 3 छोटे दलों के साथ गठबंधन का ऐलान किया है। यूपी में निषाद पार्टी, राष्ट्रीय समानता दल और जनवादी सोशलिस्ट पार्टी के साथ सपा ने गठबंधन किया है।

इस चुनाव के दौरान सभी पार्टियों के उम्मीदवार एक-दूसरे की मदद करेंगे। ऐसे मौके पर अखिलेश ने कहा कि गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में भी हमने ऐसा ही गठबंधन किया था। जिसे बड़े-बड़े राजनीतिक नेता भी नहीं समझ पाए थे।

ये भी पढ़े: सपा के बाद अब यूपी के लिए बीजेपी ने जारी की स्टार प्रचारकों की लिस्ट, इन दिग्गज नेताओं का नहीं है नाम  

बता दें इससे पहले अखिलेश ने ट्वीट कर बीजेपी पर भी निशाना साधा था। अखिलेश ने लिखा कि भारतीय जनता पार्टी के चुनावी मुद्दे इस बार विपक्ष और चौकीदार हैं। इसके बाद उन्होंने लिखा कि भाजपा के प्रचारक राज्यपाल, सरकारी एजेंसियां और हमारी मीडिया हैं।

इतना ही नहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ये भी कहा कि भाजपा की चुनावी रणनीति सोशल मीडिया नफ़रत और पैसा का है। सपा कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जनवादी पार्टी सोशलिस्ट, बसपा, निषाद पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल का बैनर लगा था।http://www.satyodaya.com

 

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जानें कुंडा के बाहुबली विधायक ‘राजा भैया’ का रियासत से सियासत तक का पूरा सफर…

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कुंडा में रघुराज युग का उदय 

उत्तर प्रदेश की सियासत का एक बड़ा हिस्सा, नाम रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ ‘राजा भैया’ राजा भैया का जन्म 31 अक्टूबर, 1967 को प्रतापगढ़ के भदरी रियासत में हुआ था। उनके पिता का नाम उदय प्रताप सिंह और माता का मंजुल राजे है। मंजुल राजे भी एक शाही परिवार से नाता रखती है। रघुराज प्रताप सिंह को राजा भैया और तूफान सिंह के नाम से भी जाना जाता है। इनके दादा बजरंग बहादुर सिंह, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और  हिमांचल प्रदेश के राज्यपाल थें। रघुराज के पिता राजा उदय प्रताप सिंह विश्व हिन्दू परिषद व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मानद पदाधिकारी रह चुके हैं। राजा भैया अपने परिवार के पहले ऐसे सदस्य थें जिन्होंने पहली बार राजनीतिक क्षेत्र में प्रवेश किया। रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का विवाह बस्ती रियासत की राजकुमारी भान्वी देवी से हुआ। इनके दो पुत्र शिवराज एंव ब्रृजराज व दो पुत्रियां राधवी और ब्रृजेश्वरी है।

राजा भैया की तालीम (शिक्षा)

रघुराज प्रताप की प्राथमिक शिक्षा नारायणी आश्रम, प्रयागराज के महाप्रभु बाल विद्यालय से हुई। सन् 1985 में भारत स्काउट एंड गाइड हाई स्कूल से दसवीं तथा सन 1987 में इलाहाबाद के एक इंटरमीडिएट स्कूल से बारहवी की पढ़ाई पूरी की। लखनऊ विश्वविद्यालय से इन्होंने कानून में स्नातक की डिग्री हासिल की है। घुड़सवारी और निशानेबाजी के शौकीन राजा भैया लखनऊ विश्वविद्यालय  से मिलिट्री साइंस और भारतीय मध्यकालीन इतिहास में स्नातक हैं। राजा भैया के बारे में कहा जाता है कि वे साइकल चलाने से लेकर हवाई जहाज उड़ाने तक का कारनामा करते हैं।

पिता-पुत्र का सम्बन्ध

पिता -पुत्र के संबंधो पर चर्चा करना इसलिए आवश्यक हो जाता है क्योंकि जिस राजा भैया को लोग बाहुबली और दबंग के रूप में देखते है, उस दबंग राजा को अपने पिता से डर लगता था। बचपन में वह उनसे कभी आंख भी नहीं मिला पाते थें। रघुराज के पिता उदय प्रताप सिंह ख़ुद दून स्कूल में पढ़े थें लेकिन उन्होंने राजा भैया को औपचारिक शिक्षा दिए जाने पर एतराज़ था। उनका मानना था कि शिक्षा हासिल करने से राजा भैया बुज़दिल हो जाएंगे पर राजा भैया की मां ने बिना ज़ाहिर किए उन्हें प्राथमिक शिक्षा दिलवाई।

रघुराज प्रताप सिंह का राजनीतिक सफ़र

महज 24 साल की उम्र में अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले राजा भैया ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अपना चुनाव जीता था। 1993 में हुए विधानसभा चुनाव से उन्होंने राजनीति में कदम रखा था। तब से वह लगातार अजेय बने हुए हैं।

कल्याण के विरोध के बाद भी कुंडा में रघुराज राज 

विधानसभा चुनाव 1996 में जब वे चुनाव लड़ रहे थें तब उनके खिलाफ प्रचार करने मुख्यमंत्री कल्याण सिंह कुंडा पहुंचे। कल्याण सिंह ने वहां कहा था- ‘गुंडा विहीन कुंडा करौं, ध्वज उठाय दोउ हाथ।’ लेकिन बीजेपी उम्मीदवार राजा भैया से चुनाव हार गए।  सन् 1919 में इण्डियन जनरल इलेक्शन में इन्होंने राजकुमारी रत्ना सिंह के खिलाफ (जो कि इसी परिवार से ही सम्बंधित हैं), अपने चचेरे भाई अक्षय प्रताप सिंह को उतार दिया। राजा भैया कद्दावर राजनेता छवि के प्रभाव से उनके भाई भी उस चुनाव में जीत गए थे।

भाजपा और सपा ने मंत्री पद से नवाजा

राजा भैया 1993 और 1996 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी समर्थित, तो 2002, 2007 और 2012  के चुनाव में एसपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधायक चुने गए। राजा भैया, बीजेपी की कल्याण सिंह सरकार और एसपी की मुलायम सिंह सरकार में भी मंत्री बने।

राजा भैया को सन 1997 में भाजपा के कल्याण सिंह के मंत्रीमंडल में कबानी मंत्री, वर्ष 1999 व 2000 में राम प्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह के कैबिनेट में खेल कूद एंव युवा कल्याण मंत्री बनाया गया। साल 2004 में समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव की सरकार में रघुराज प्रताप खाद्य एवं रसद विभाग के मंत्री बने।

राजा भैया का उत्तर प्रदेश की सियासी रसूक 

दरअसल, रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की इस कवायद को सवर्णों को लामबंद करने की मुहिम के रूप में देखा जा रहा है। बता दें कि राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से हुए मतभेद के बाद से ही वे नई सियासी जमीन तलाश रहे हैं। कहा जा रहा है कि सपा से रिश्ते खराब होने के बाद राजा भैया का यह बड़ा सियासी दांव है।

मंत्रिमंडल से देना पड़ा था इस्तीफा  

15 मार्च, 2012 में सपा की सरकार बनने के बाद वो एक बार फिर मंत्रिमंडल में शामिल कर लिए गएं। लेकिन प्रतापगढ़ के कुंडा में डिप्टी एसपी जिया उल-हक की हत्या के सिलसिले में नाम आने के बाद रघुराज प्रताप सिंह को अखिलेश मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा। सीबीआई जांच के दौरान कथित क्लिनचिट मिलने के बाद उनको आठ महीने बाद फिर से मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया गया।

तालाब में घड़ियाल पालने का आरोप

रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की बेंती कोठी के पीछे 600 एकड़ के तालाब से कई तरह के किस्से जुड़े हैं। लोगों के बीच धारणा थी कि राजा भैया ने इस तालाब में घड़ियाल पाल रखे थें। वे अपने दुश्मनों को मारकर उसमें फेंक देते थे। हालांकि, राजा भैया इस लोगों का मानसिक दिवालियापन बताते हैं। 2003 में मायावती सरकार ने भदरी में उनके पिता के महल और उनकी कोठी पर छापा मरवाया था।

कुंडा के तलाब में मिला था कंकाल

बेंती के तालाब की खुदाई में एक नरकंकाल मिला था। बताया जाता है कि वह कंकाल कुंडा क्षेत्र के ही नरसिंहगढ़ गांव के संतोष मिश्र का था। संतोष का कसूर ये था कि उसका स्कूटर राजा भैया की जीप से टकरा गया था और कथित तौर पर उनके लोग उसे उठाकर ले गए और इतना मारा कि वह मर गया। बाद में उसके शव को बेंती तालाब के पास दफना दिया गया।

राजा भैया का दरबार और उनका न्याय

उस दौर में हर सुबह राजा भैया अपने महल के बाहर दालान में दरबार लगाते थें। गांव के मर्द, औरत और बच्चे अपनी शिकायतें और झगड़े लेकर अदालत की बजाए उनके दरबार में पहुंचते थें।  जहां राजा भैया तुरंत “न्याय” कर देते थें। उनके महल के बाहर कमर तक झुके हाथ जोड़े लोगों की क़तार लगी रहती थी।

राजा भैया के हाथी घोड़े और सामंती ठाठ-बाट

राजा भैया के पास करीब 200 करोड़ से ज्यादा चल-अचल संपत्ति बताई जाती है। इसमें पैतृक संपत्ति भी शामिल है। राजा भईया बुलेट, जिप्सी के साथ ही हेलीकॉप्टर की सवारी का शौक रखते हैं। राजा भैया को घुड़सवारी का बहुत शौक है।

जब माया सरकार में कुंडा के राजा भैया पर बरपा था कहर

वैसे तो सियासत में आने के साथ ही रघुराज पर तमाम आपराधिक मामले भी दर्ज होते गएं। लेकिन साल 2002 में मायावती सरकार में रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया के खिलाफ चले जबरदस्त अभियान में राजा भइया और उनके समर्थकों के खिलाफ जमकर चाबुक चला था। राजा भैया पर पोटा की धाराएं लगाई गईं। रघुराज और उनके पिता उदय प्रताप सिंह को जेल में डाल दिया गया।

बाहुबली विधायक राजा भैया की नई पार्टी का ऐलान

रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की इस कवायद को सवर्णों को लामबंद करने की मुहिम के रूप में देखा जा रहा है। बता दें कि राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से हुए मतभेद के बाद से ही वे नई सियासी जमीन तलाश रहें थें। जिसके बाद उन्होंने जनसत्ता दल (लोकतान्त्रिक) पार्टी का गठन किया।http://www.satyodaya.com

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बीजेपी के स्टार प्रचारकों की लिस्ट में नाम न होने पर फूटा मुरली मनोहर जोशी का गुस्सा, कानुपर के वोटरों को पत्र लिख कही ये बात  

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भारतीय जनता पार्टी
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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने यूपी के 80 सीटों पर अपने 40 स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी कर दी है। ऐसे में बीजेपी के दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी और लाल कृष्ण आडवाणी को टिकट नहीं दिया गया है। बताया जा रहा है कि इसकी सूचना खुद पार्टी के महासचिव रामलाल ने मुरली मनोहर जोशी को दी और उन्हें पार्टी ऑफिस जाकर इसका ऐलान करने को भी कहा है। लेकिन मनोहर जोशी ने चुनाव न लड़ने का ऐलान करने से साफ मना कर दिया है। इतना ही नहीं इस दौरान उन्होंने कानपुर के वोटरों को एक पत्र लिखा और इस बात की सूचना दी कि रामलाल ने उन्हें चुनाव न लड़ने के लिए कहा है।

माना जा रहा है कि कानपुर से मुरली मनोहर जोशी का टिकट बीजेपी से लगभग कट गया है और वह भी आडवाणी की तरह ही इस बार चुनावी अखाड़े में नहीं दिखेंगे। करीबी सूत्रों की मानें तो मुरली मनोहर जोशी को जितना दुख उनके टिकट काटे जाने की सूचना से नहीं है, उतना उसे पहुंचाए जाने के तरीके से है। मुरली मनोहर जोशी का कहना है कि अगर उनके टिकट काटे जाने का फैसला बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह खुद बताने आते तो उन्हें अच्छा लगता।

ये भी पढ़े: अमरोहा से राशिद अल्वी नहीं बल्कि अब ये दिग्गज नेता लड़ेंगे चुनाव, जानिए कौन

दरअसल, जब बीजेपी महासचिव रामलाल ने मुरली मनोहर जोशी को टिकट काटे जाने की सूचना दी, तो चुनाव न लड़ने का खुद से ऐलान करने के लिए मुरली मनोहर जोशी की तरह लाल कृष्ण आडवाणी भी तैयार नहीं हुए। मुरली मनहोर जोशी की तरह राम लाल को कहा था अगर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह खुद आकर पार्टी का फैसला बताते तो हमें अच्छा लगता। बता दें कि लालकृष्ण आडवाणी ने भी कहा था कि अगर अमित शाह उन्हें फैसला बताने आते तो उन्हें अच्छा लगता और वह पार्टी से इतने दुखी नहीं नहीं होते।

बीजेपी पार्टी के फैसले के बाद मुरली मनोहर जोशी ने कानपुर में अपने मतदाताओं को एक पत्र लिखा और कहा कि रामलाल ने उनसे चुनाव न लड़ने के लिए कहा है। इससे पहले राम लाल लालकृष्ण आडवाणी से भी ये बातें कह चुके हैं।

जानकरी के मुताबिक बीजेपी ने बढ़ती उम्र का हवाला देकर लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी समेत कई बूढ़े हो चुके नेताओं के टिकट काट लिए हैं। इससे पहले सोमवार को यूपी के लिए बीजेपी द्वारा जारी स्टार प्रचारकों की लिस्ट में भी लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी का नाम नहीं है।http://www.satyodaya.com

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