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रमजान के पाक महीने में महिला ने एक साथ 4 बच्चों को दिया जन्म, परिजन हुए निहाल…

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फाइल फोटो

ईश्वर की महिमा इंसान से परे है, किसी को मां बनने की खुशी से वंजित रख देता है, तो वहीं किसी की झोली में इतनी खुशिया डाल देता है, जो सोच से भी परे होती है। जी हां कल रात एक महिला ने एक साथ 4 बच्चों को जन्म देकर सबको चौंका दिया है।  

आपको बता दें राजधानी लखनऊ के हर्षा अस्पताल में गोंडा के कपूरपुर गांव की एक महिला ने कल रात 4 बच्चों को जन्म दिया। जच्चा और बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ बताए जा रहे है। चारों बच्चों में 2 बेटा और 2 बेटी है।

आपको बता दें कल दोपहर गर्भवती महिला अस्पताल में भर्ती हुई थी। कपूरपुर गांव की रहने वाली रेहाना ने 4 बच्चों को जन्म दिया।

इस दौरान गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर आशा मिश्रा और उनकी टीम ने बड़ा ऑपरेशन कर सफलता पूर्वक बच्चों का जन्म कराया।

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इन बच्चों के पिता का नाम जियाउल हक और माता का नाम रेहाना है। इस खबर के बाद जब सत्योदय ने हर्षा अस्पताल के डॉक्टर हारून से बात की तो उन्होंने बताया जच्चा और बच्चा पूरी तरह से स्वास्थ्य हैं। http://www.satyodaya.com   

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मुस्लिम युवक की टोपी उतरवाई, जय श्री राम का नारा न लगाने पर कर दी पिटाई

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कानपुर। जनपद से भीड़ द्वारा हिंसा की एक घटना सामने आई है। यहां के बर्रा इलाके में एक मुस्लिम युवक की पिटाई का मामला सामने आया है। आरोप है कि शुक्रवार को किदवई नगर स्थित मस्जिद से एक किशोर नमाज पढ़ कर लौट रहा था। तब ही वहां तीन-चार अज्ञात बाइक सवार आ गये। वे उसके टोपी पहनने का विरोध करने लगे। इतना ही नहीं उससे जय श्री राम का नारा लगाने को भी कहा। मना करने पर उसकी बुरी तरह पिटाई कर दी।

ताज नाम के इस युवक का कहना है कि उन्हें मेरी टोपी से एतराज था। मुझे टोपी उतारने को उन्होंने कहा था साथ ही जय श्री राम का नारा लगाने के लिए भी बोला लेकिन जब मैंने मना किया तो मुझे मारने लगे। मेरी चिल्लाने की आवाज सुनकर वहां से गुजर रहे लोग आ गए और तब मैं बच पाया। ताज ने यह भी आरोप लगाया है कि उन लोगों ने इस इलाके में दोबारा टोपी पहन कर न आने की धमकी दी है।http://www.satyodaya.com

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प्रदेश में हर दिन हो रहीं हत्या, लूट और बलात्कार की घटनाएं : अखिलेश यादव

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सपा मुखिया ने योगी सरकार पर बोला करारा हमला

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को योगी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में अंधेरनगरी, चैपट राजा की कहावत चरितार्थ हो रही है। भाजपा सरकार आंकड़े दबाकर प्रदेश में कानून व्यवस्था के नियंत्रण में होने का खोखला दावा कर रही है। जबकि कोई दिन ऐसा नहीं जाता है जब प्रदेश में हत्या, लूट और बलात्कार की घटनाएं न हो रही हों। भाजपा सरकार के बड़बोलेपन का अपराधियों पर तो कोई असर हुआ नहीं, उल्टे पुलिस ही कानून हाथ में लेकर लोगों को प्रताड़ित करने लगी है। भाजपा राज में स्थिति यह है कि अपराधी भयमुक्त हैं और जनसामान्य भयभीत।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ में एक किशोर को घर से उठाकर पुलिस चैकी में बंद रखा गया। निर्दोष से जुर्म जबरन कबूलवाने के लिए उसको बर्बरता से पीटा और बूट से पैर कुचल डाले। जब ये हाल है तो मुख्यमंत्री किस मुंह से अपने राज में शांति व्यवस्था बने रहने की बात करते हैं? मामला भाजपा के किसी नेता का हो तो उसकी रिपोर्ट तक दर्ज नहीं होती है। पुलिस विवेचना ठंडे बस्ते में चली जाती है।

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वहीं दूसरी ओर संडीला (हरदोई) में 8 साल के एक बच्चे का अपहरण करके अपराधियों ने उसकी हत्या कर दी। देहरादून-नैनीताल हाइवे पर बिजनौर पुलिस ने वाहन चेकिंग के दौरान एक अनुसूचित जाति के युवक की ऐसी पिटाई की कि उसकी मृत्यु हो गई। लखनऊ में निगोहा थाने के चौकीदार ने एक युवती से छेड़खानी कर दी। गुडम्बा इलाके में बदमाशों ने घर में घुसकर एक महिला की हत्या कर दी। मेरठ में 44वीं पीएसी वाहिनी के कमाण्ड हाउस से इंसास रायफलें गायब, लौटाने के लिए 3.50 लाख रुपए की मांग की गई। इटावा में छह दिनों से एक युवक को थाने में बंद रखा गया। संवेदनहीनता का यह उदाहरण है।
सपा मुखिया ने कहा कि सच तो यह है कि प्रदेश में भाजपा सरकार हर मोर्चे पर विफल है। उसके राज में कोई भी व्यक्ति न तो सड़क पर सुरक्षित है और नहीं जेल में। जेलों में माफिया डान अपने दरबार सजा रहे हैं और वहीं से अपराधिक गतिविधियों का विस्तार कर रहे है। अवैध खनन पर कोई रोक नहीं है। धोखाधड़ी करनेवाली कम्पनियां आराम से लोगों के पैसे लूटकर गायब हो जाती हैं। तमाम अपराधिक मामलों का लम्बे समय से खुलासा ही नहीं हो सका है। पीड़ित का ही उत्पीड़न करना पुलिस ने अपना कर्तव्य मान लिया है।

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हद तो यह है कि अगर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र भी अपनी कोई मांग उठाते हैं तो उनके ऊपर लाठियां बरसाई जाती है और गिरफ्तारियां होती है। उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। यह छात्रसंघ समाप्त किये जाने की साजिश है। भाजपा सरकार की वजह से चारों तरफ अराजकता है। जनता के सब्र का ज्यादा इम्तिहान लेना खतरनाक होगा।http://www.satyodaya.com

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निदेशक के शोषण व मनमानी से आयुर्वेदिक फार्मासिस्टों में रोष, सीएम योगी को लिखा पत्र

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लखनऊ। राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी फार्मासिस्ट संघ की कार्यकारिणी की बैठक औषधि निर्माणशाला राजाजीपुरम में सम्पन्न हुई। बैठक में निदेशालय द्वारा आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट सम्वर्ग की उपेक्षा और शोषण का आरोप लगाया गया। कार्यकारिणी की बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि आयुर्वेद निदेशक प्रो. सत्यनारायण सिंह के कार्यभार ग्रहण करने के बाद से ही फार्मेसिस्टों के साथ उपेक्षापूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। शासन के आदेशों और निर्देशों की अवहेलना आम बात हो गयी है। बैठक में पदाधिकारियों ने कहा कि वर्ष 2017 से एसीपी के पात्र फार्मेसिस्टों की एसीपी नहीं स्वीकृत की जा रही है। जबकि सरकार ने एसीपी में समयबद्धता का आदेश दिसम्बर 2013 में ही दे दिया है। इसी तरह शासन से आदेश होने के बाद भी आज तक आयुर्वेदिक फार्मेसिस्टों के समायोजन की सूची जारी नहीं की गयी। सम्वर्ग में आज तक कोई वरिष्ठता सूची न होने के कारण पदोन्नति आदि लम्बित हैं। इस संबंध में जब कभी संघ के पदाधिकारी निदेशक से वार्ता करने जाते हैं तो उन्हें अपमानित किया जाता है।

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निदेशक द्वारा सुनवाई न होने पर संघ ने अपनी समस्याएं प्रांतीय संघ आयुष सचिव के सामने रखीं। विधान परिषद सदस्य ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने आयुष सचिव से मिलकर संघ की समस्याओं से अवगत कराया। लेकिन निदेशक ने आयुष सचिव को दरकिनार कर दिया। जिसके बाद संघ ने विधान परिषद सदस्य ध्रुव कुमार त्रिपाठी के माध्यम से अपनी मांगें और समस्याएं मुख्य सचिव अनूपचन्द पाण्डेय के समक्ष उठाई। मुख्य सचिव के निर्देश पर आयुष सचिव ने 17 जून 2019 को 2 दिन में आख्या देने के लिए निदेशक को पत्र भेजा। लेकिन अभी तक निदेशक ने आख्या नहीं भेजी है। सापफ है कि निदेशक अपनी मनमानी पर उतारू हैं। पदाधिकारियों ने बताया कि अब हमने आयुर्वेदिक फार्मासिस्टों की समस्याओं के निराकरण के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। यदि अब भी हमारी समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ तो उप्र के आयुर्वेदिक फार्मेसिस्ट धरना प्रदर्शन के लिए विवश हो जाएंगे।

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संघ ने बताया कि आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में 50 प्रतिशत से अधिक चिकित्साधिकारी के पद रिक्त है। जिसका परिणाम है कि फार्मासिस्ट ही इंचार्ज हैं और चिकित्सालयों का संचालन कर रहे हैं। लेकिन उन्हें काफी मेहनताना दिया जा रहा है। पत्र में मुख्यमंत्री से मांग की है कि आयुर्वेद विभाग के निदेशक की कार्यप्रणाली पर नजर रखी जाए। आयुर्वेद फार्मासिस्टों को शोषण और उत्पीड़न से मुक्ति दिलायी जाए। विभाग की स्थिति को सुधारने के लिए किसी आइएएस को विभाग का निदेशक बनाया जाए। कार्यकारिणी की बैठक में सभी निर्वाचित पदाधिकारी मनोनीत पदाधिकारी मण्डलीय संगठन सचिव सदस्य कार्यकारिणी के अलावा प्रदेश के समस्त जनपदों के अध्यक्ष मंत्री उपस्थित थे। संघ के प्रांतीय अध्यक्ष विद्याधर पाठक, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुखलाल पटेल, महामंत्री आनन्द कुमार सिंह, संयुक्त मंत्री राम कुमार वर्मा, प्रान्तीय कोषाध्यक्ष सत्यप्रकाश द्विवेदी, प्रांतीय आय व्यय निरीक्षक सत्यवान सहित लगभग 150 के ऊपर पदाधिकारी उपस्थित थे। http://www.satyodaya.com

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