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आने वाले सात दिनों में देश को मिल जाएगा नया प्रधानमंत्री : अखिलेश यादव

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जनता का उत्साह देखकर लग रहा है…नमो-नमो की छुट्टी होने जा रही है: मायावती

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने गुरुवार को वाराणसी में महागठबंधन के प्रत्याशी बनारस से शालिनी यादव, चंदौली से डाॅ0 संजय चैहान और मिर्जापुर से रामचरित्र निषाद के समर्थन में आयोजित विशाल जनसभाओं को संबोधित किया।#Mayawati
सभा को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा कि जनता का उत्साह देखकर लग रहा है कि नमो-नमो की छुट्टी होने जा रही है। आजादी के बाद केन्द्र और राज्यों में कांग्रेस लंबे समय तक सत्ता में रही। लेकिन अपनी गलत नीतियों और कार्य प्रणाली के कारण कांग्रेस को सत्ता से बाहर जाना पड़ा। इसी प्रकार बीजेपी अपनी पूंजीवादी, जातिवादी, संकीर्ण, सांप्रदायिक नीतियों के चलते सत्ता से बाहर जाने वाली है। बीजेपी ने अपने चुनावी वादों का एक हिस्सा भी पूरा नहीं किया।
बसपा प्रमुख ने कहा कि भाजपा के राज में गरीब, मुसलमान, किसान, दलित का विकास नहीं हुआ है। अभी भी दलित और अन्य पिछड़े वर्ग का सरकारी नौकरियों में आरक्षण प्रभावहीन बना हुआ है। सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में गरीबों की हालत खराब है।

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बीजेपी और आरएसएस के चलते अल्पसंख्यकों पर हो रही जुल्म चरम सीमा तक पहुंच गयी है। अपर कास्ट गरीबों की हालत भी खराब है। नोटबंदी और जीएसटी को बिना प्लान के लागू किया गया, जिससे बेरोजगारी बढ़ी है। नोटबंदी से भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ बल्कि रक्षा सौदे भी भ्रष्टाचार से अछूते नहीं है। मायावती ने कहा कि बीजेपी की नींद उड़ गयी है। इनके लटके चेहरे बता रहे हैं कि इनकी सरकार जाने वाली है। प्रधानमंत्री जी चुनावी जनसभाओं में रोना रो रहे है कि विपक्षी दल उन पर व्यक्तिगत हमले कर रहे हैं। जबकि प्रधानमंत्री जी और भाजपा के लोगों ने महागठबंधन के लिये अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया। यह महापरिवर्तन लाने का महागठबंधन है। यह गठबंधन तब तक चुप नहीं बैठेगा जब तक केन्द्र और प्रदेश से बीजेपी को बाहर ना कर दें।


वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में कहा कि अब सात दिनों के बाद ही देश को नया प्रधानमंत्री मिलने जा रहा है। यही नया प्रधानमंत्री नया भारत बनाएगा। प्रधानमंत्री जी से बड़ा धोखेबाज कोई नहीं। वाराणसी को क्योटो शहर बनाने का वादा किया पर वाराणसी जो प्राचीन नगर है, धर्म और संस्कृति की नगरी है, उसका स्वरूप भी बिगाड़ दिया। तमाम मंदिर तोड़ दिए गए। सदियों से सजाई गई विरासत खत्म कर दी। गंगा को निर्मल और स्वच्छ बनाने की कसम खाई थीं, वह कसम भी भुला दी। समाजवादी सरकार ने वरूणा नदी की स्वच्छता का काम शुरू किया था, भाजपा सरकार ने उसे रोक दिया। अब देश वाराणसी की ओर देख रहा है। दुनिया के प्रतिष्ठित पत्रों ने लिखा है कि मोदी दुबारा प्रधानमंत्री बने तो लोकतंत्र का खात्मा हो जाएगा। लोकतंत्र बचाने के लिए अब एक भी वोट बंटे नहीं, एक भी वोट घटे नहीं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री समाज को बांटने वाले है। उनका काम नफरत फैलाना है। गुजरात माडल जैसा कोई माडल नहीं है। कांग्रेस पार्टी ने आजादी के बाद देश को गलत दिशा में ले जाने का काम किया है। प्रधानमंत्री गरीबों के प्रधानमंत्री नहीं, ये देश के एक प्रतिशत संपन्न लोगों के प्रधानमंत्री है। श्री मोदी दुनिया के हर कोने में घूम आए हैं। उन्होंने डिजीटल इंडिया, मेकइन इंडिया, स्किल इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया की बातंे की पर इनका कोई जमीनी असर नहीं दिखाई पड़ा। नोटबंदी और जीएसटी ने देश की अर्थव्यवस्था चैपट की। बैंको में जमा हमारा पैसा लेकर विदेश भाग गए। #Gujaratmodel
श्री अखिलेश यादव ने कहा कि देशवासियों के न अच्छे दिन आए, नहीं नौजवानों को नौकरियां मिली। गंगा में नाव चलाने वालों को भी धोखा मिला। बुनकरों की दशा बदहाल है। वाराणसी के एक बुजुर्ग भाजपा विधायक धरने पर बैठे थे तब समाजवादी सरकार ने वाराणसी को 24 घंटे बिजली सप्लाई दी, अब भाजपा के मुख्यमंत्री जी इसका श्रेय ले रहे हैं।

अखिलेश ने कहा कि भाजपा के लोग भी जान गए हैं कि अब केन्द्र की सत्ता में महागठबंधन आ रहा है। इससे वे सो नहीं पा रहे है। घबड़ाए हुए है। चुनाव में हार चेहरे पर दिखने लगी है। बंगाल की घटनाओं से भी ये घबड़ा गए है। चुनाव के पहले चरण से ही गठबंधन सब जगह जीत रहा है। यह गठबंधन जातियों का नहीं, गरीबों का, दिलों से बना है। यह टूटने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद से लड़ने का दम भरने वाले एक जवान से मुकाबला नहीं कर पाए। श्री यादव ने कहा कि यहां साइकिल तेजी से चलाएं।#MajorAlliance
राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष अजीत सिंह ने अपने भाषण में कहा कि प्रधानमंत्री जी संघ के प्रचारक पहले भी थे आज भी हैं। वे सपने दिखाते है पर उन्हें जमीन पर उतारना उनके वश में नहीं। स्मार्ट सिटी, 2 करोड नौकरियां, अच्छे दिन के नारे सब हवाई साबित हुए हैं। वे अपने 5 वर्ष के काम का जिक्र नहीं करते हैं। खुद को गरीब बताते है और 70 करोड उनके कपड़ो पर खर्च आता है। उनकी 56 इंच की छाती में गरीबों, किसानों, नौजवानों, अल्पसंख्यको के लिए कोई जगह नही है। वे जीत गए तो फिर चुनाव नहीं होंगे।

देश

23 मई का परिणाम आने के बाद विधान सभा चुनाव के एजेंडे पर जुटेगी योगी सरकार

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फाइल फोटो

लखनऊ । देश में लोकसभा चुनाव के आखरी चरण यानी सातवें चरण का चुनाव बाकी है । 19 मई को आखिरी चरण के चुनाव हो जाने के बाद 23 मई को मतगणना होगा । जिसके बाद कौन सत्ता में आएगा कौन सत्ता से बहार जाएगा ये फैसला मतगणना के दिन होगा । परिणामों के बाद 2022 के एजेंडे पर जुटेगी सरकार पहली कैबिनेट बैठक से शुरू होगा काम आवारा पशुओं की समश्याओ पर प्राथमिकता से होगा निवारण । अधिकारी परिणामों के बाद कैबिनेट बैठक की तिथि पर जल्द होगा फैसला भर्तियों पर सरकार करेगी फोकस मेट्रो के साथ ही अन्य विकास कार्यो शिलान्यास पर सरकार तेजी से करेगी काम ।

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लेकिन देखने की बात ये होगी की क्या उत्तर प्रदेश के होने वाले 2022 के विधान सभा चुनाव में गठबंधन बरकरार रहेगी या अलग- अलग चुनाव लड़ेगी । अगर लड़ेगी तो वो किन मुदों को लेकर योगी सरकार को घेरती है सबसे दिलचस्प यही देखना होगा । योगी सरकार किन मुद्दों पर विपक्षी पार्टी को रोकने का काम करेगी यह भी दिलचस्प होगा ।http://www.satyodaya.com

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देश

मायावती पर आठवले का पलटवार-कहा, पीएम मोदी की पत्नी की चिंता छोड. पहले खुद कर लें शादी

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फाइल फोटो

लखनऊ । लोकसभा चुनाव के सातवें चरण यानी आखी चरण का चुनाव प्रचार आज शाम 6 बजे थम जाएगा । ऐसे में वाराणसी में पीएम मोदी के लिए चुनाव प्रचार करने गए एनडीए के सहयोगी व मोदी सरकार में मंत्री रामदास आठवले ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बसपा सुप्रीमो मायावती पर हमला बोला है । आठवले पीएम मोदी की पत्नी को लेकर दिए गए मायावती के बयान की निंदा की और कहा कि मायावती को पीएम के पत्नी की चिंता छोड़ कर खुद शादी कर लेनी चाहिए ।

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इसके साथ ही आठवले ने महागठबंधन और अखिलेश यादव पर भी जमकर हमला बोला । उन्होंने अखिलेश यादव के देश को नया प्रधानमंत्री मिलने वाले बयान पर कहा कि ये अखिलेश यादव को नहीं दिखाई देगा मगर पूरे देश की जनता को नरेंद्र मोदी एक बार फिर पीएम के रूप में दिखाई देंगे ।

आपको बता दें कि बसपा प्रमुख मायावती ने पिछले दिनो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उनकी पत्नी को लेकर हमला बोला था ।http://www.satyodaya.com

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टेक्नोलॉजी

बंद हो रहे एटीएम से बढ़ सकती है दिक्कतें, जानिए वजह…

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बढ़ती जा रही है कैश की मांग, घट रही है एटीएम की संख्या

एक तरफ देश भर में कैश की मांग बढ़ती जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ एटीएम की संख्या लागातर कम होती जा रही है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने आंकड़े जारी कर बताया है कि कैसे दो साल में एटीएम की संख्या में कमी आई है।

ATM से ट्रांजेक्शन की सुविधा के साथ जिस रफ्तार से बढ़ी है उसी रफ्तार से एटीएम की संख्या में कमी आती जा रही है। आपका एटीएम या तो बंद मिलेंगे या फिर बिना कैश के मिलेंगे। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के मुताबित पिछले दो सालों में एटीएम की संख्या में बड़ी कटौती हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में एटीएम की संख्या में आ रही गिरावट के कारण कैश की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।

सख्त नियमों के कारण देश में ATM चलाना ज्यादा महंगा पड़ रहा है, जिसकी वजह से सैकड़ों एटीएम  या तो बंद हो गए हैं या बंद होने के कगार पर हैं। कैश निकालने के लिए लंबी-लंबी कतारें लगानी पड़ सकती हैं। बैंकों में घंटों लाइन में लगकर कैश निकालने का इंतजार करना पड़ सकता है।

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आरबीआई  की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले दो सालों में देश में ATM की संख्या में गिरावट आई है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक ब्रिक्स देशों में शामिल देशों के मुकाबले भारत ऐसा देश है जहां एटीएम की संख्या पहले से कम है। यहां प्रति 100,000 लोगों पर कुछ एटीएम हैं। आपको बता दें कि कॉन्फिडेरेशनल ऑफ एटीएम इंडस्‍ट्रीज (CATMi) ने पिछले साल चेतावनी दी थी कि साल 2019 में भारत के आधे से ज्यादा एटीएम बंद हो जाएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक देश में करीब 2 लाख 38 हजार एटीएम हैं, जिनमें से करीब 1 लाख 13 हजार एटीएम मार्च 2019 तक बंद होने थे।

न सिर्फ सरकारी बैंक बल्कि प्राइवेट बैंक भी अपने एटीएम की संख्या में कटौती कर रही है। अकेले स्टेट बैंक 1,000 से ज्यादा मशीनों को बंद कर दिया है। मार्च 2016 में 199,099 एटीएम देश में था जो कि एक मार्च 2017 में बढ़कर 208,354 हो गया। मार्च 2018 में कमी देखने को मिली और यह घटकर 207,052 हो गए। अब मार्च 2019 तक 202,196 एटीएम बचे हैं।

आईएमएफ के मुताबिक रूस में जहां हर 1 लाख व्यक्ति पर 164 एटीएम हैं तो वहीं ब्राजील में 107 एटीएम हैं। चीन में हर 1 लाख व्यक्ति पर एटीएम की संख्या 81 है तो दक्षिण अफ्रीका में यह 68 है। अगर भारत की बात करें तो एक लाख की आबादी पर सबसे कम एटीएम हैं। यहां मात्र 22 एटीएम प्रति 1 लाख व्यक्ति हैं।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष आईएमएफ के आंकड़ों से भी पता चला है कि ब्रिक्स देशों में सबसे कम एटीएम भारत में ही है।

असिस्टेंट मैनेजर आयूष चंद्रा

सत्योदय से बात-चीत के दौरान जैदपुर ब्रांच ग्रामीण बैंक असिस्टेंट मैनेजर आयूष चंद्रा ने बताया कि बैंक अपने खर्चे को कम करने के लिए एटीएम की संख्या कम की जा रही है और ज्यादातर एटीएम बैंक के पास ही रखे जाएंगे और बैंक में ड्यूटी करने वाले गार्ड की ही ड्यूटी एटीएम पर लगाई जायेगी।http://www.satyodaya.com

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May 17, 2019, 7:46 pm
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