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चंद्रशेखर आजाद के बिना सशस्त्र क्रांति का इतिहास लिखना असंभव: शैलेन्द्र दुबे

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भारतीय नागरिक परिषद ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और शहीद चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर वर्चुअल संगोष्ठी का किया आयोजन

लखनऊ। कोरोना संकट के बीच गुरुवार को मां भारती के दो महान सपूतों की जयंती मनाई गयी। भारतीय नागरिक परिषद ने गूगल मीट के माध्यम से वीडियो कांफ्रेंसिंग का आयोजन किया। जिसमें प्रतिभागियों ने आजादी के संग्राम में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और शहीद चंद्रशेखर आजाद के योगदान, बलिदान को याद किया गया। संगोष्ठी की शुरूआत प्रख्यात कवि देवकीनंदन शांत ने क्रांतिकारियों पर लिखी अपनी कविता से की। भारतीय नागरिक परिषद के मंत्री निशा सिंह ने देशभक्ति के गीत सुना कर कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।

संगोष्ठी की अध्यक्षता भारतीय नागरिक परिषद के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश अग्निहोत्री ने की। जबकि मुख्य वक्ता के रूप में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे उपस्थित रहे।संगोष्ठी में अपने विचार रखते हुए शैलेंद्र दुबे ने कहा, जब 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी बुझने वाली थी, तभी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने एक बार पुनः स्वतंत्रता संग्राम की अलख प्रज्वलित कर दी।

1857 के बाद बम, तमंचे की वैचारिक क्रांति के जनक के रूप में बाल गंगाधर तिलक हमेशा याद रखे जाएंगे। चाफेकर बंधुओं ने लोकमान्य तिलक से ही प्रेरणा लेकर अंग्रेज अफसर रेंड और आर्यस्ट को मौत के घाट उतार दिया था। श्री दुबे ने कहा, लोकमान्य तिलक महान क्रांतिकारी होने के साथ-साथ महान गणितज्ञ, दर्शनशास्त्री, लेखक और संपादक भी थे।

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केसरी और मराठा समाचार पत्रों का उन्होंने कुशलतापूर्वक संपादन किया। गीता रहस्य जैसी पुस्तक लिखकर उन्होंने आध्यात्मिक क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी।

उत्तम कोटि के संगठनकर्ता भी थे चन्द्रशेखर आजाद

अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद को याद करते हुए श्री दुबे ने कहा, सशस्त्र क्रांति का इतिहास चंद्रशेखर आजाद के बगैर लिखना संभव ही नहीं है। चंद्रशेखर आजाद का व्यक्तित्व काकोरी क्रांति के 4 शहीदों राम प्रसाद बिस्मिल, राजेंद्र नाथ लाहड़ी, अशफाक उल्ला खान और रोशन सिंह तथा सरदार भगत सिंह के साथ इतना बंधा हुआ है कि जब कभी भी इन पांचों की जीवनी लिखी जाती है तो अनायास ही चंद्रशेखर आजाद का नाम बार-बार आता है। चंद्रशेखर आजाद उन थोड़े से महान क्रांतिकारियों में थे, जो अत्यंत उत्तम कोटि के संगठन कर्ता होने के साथ-साथ त्याग की उदात्त भावना से पूर्ण रूप से परिचालित होते थे।

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर फेडरेशन के चेयरमैन ने कहा, चंद्रशेखर आजाद बहुत ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन उन्होंने भगत सिंह, विजय कुमार सिन्हा, भगवानदास माहौर और वैशम्पायन जैसे विद्वान क्रांतिकारियों का नेतृत्व किया। चंद्रशेखर आजाद के नाम से ब्रिटिश हुकूमत थर-थर कांपती थी।

आजाद ने अपने क्रांतिकारीत्व को नहीं लगने दिया बट्टा

चंद्रशेखर आजाद को जीवित या मृत गिरफ्तार करने के लिए स्कॉटलैंड यार्ड के सबसे योग्य पुलिस अधिकारी नॉट बाबर को ओएसडी बनाकर भारत भेजा गया था। ब्रिटिश हुकूमत से संघर्ष करते हुए उन्होंने अपनी ही गोली से अपने जीवन को खत्म कर लिया और हमेशा के लिए अमर हो गए। श्री दुबे ने कहा, इसमें संदेह नहीं है कि चंद्रशेखर आजाद ने कर्म से या विचारों से कभी कोई ऐसी बात नहीं की जिससे उनके क्रांतिकारीत्व को किसी प्रकार का बट्टा लग सके। इस कसौटी पर बहुत कम क्रांतिकारी खरे उतरते हैं। चंद्रशेखर आजाद क्रांतिकारियों के प्रेरणास्रोत थे।

इन्होंने भी रखे विचार

संगोष्ठी में भारतीय नागरिक परिषद के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश प्रकाश अग्निहोत्री, संस्थापक न्यासी एवं एडवोकेट रमाकांत दुबे, सावरकर विचार मंच के अध्यक्ष डॉ अजय दत्त शर्मा और महामंत्री रीना त्रिपाठी ने भी अपने विचार रखे।

संगोष्ठी में यह भी रहे उपस्थित

इस अवसर पर मुख्य रूप से आईआईटी खड़गपुर के पूर्व निदेशक प्रोफेसर एसके दुबे, एचएन पांडे, एसके वर्मा, सूर्यकांत पवार,निशा सिंह, प्रेमा जोशी, डॉ.नीना शर्मा, एसएन मिश्रा, देवेंद्र शुक्ला, शिव प्रकाश दीक्षित, अजय द्विवेदी, धनंजय द्विवेदी, अनिल सिंह, धीरज पांडेय, पुस्पेंद्र मिश्रा एडवोकेट अमित कुमार भदौरिया, दयाशंकर पांडे, रामविलास, अश्वनी सिंह, विनोद कुमार यादव, अभिषेक उपाध्याय, राकेश गुप्ता, देवेन्द्र द्विवेदी, मेजर गौर, प्रकाश चंद तिवारी, तेज नारायण, दयानंद तिवारी, वेद प्रकाश शुक्ला, अश्विनी सिंह, अभिजीत आनंद पत्रकार ,दयानंद तिवारी, तृप्ति भदोरिया, अजय कुमार पाल, रेनू त्रिपाठी, शरद मिश्रा, अश्वनी उपाध्याय, राजेश त्रिवेदी, भूषण शुक्ला तथा शिव शंकर पांडे, राम मनोरथ अवस्थी, मनोज गौड़, अखिलेश्वर त्रिपाठी उपस्थित थे।

मेधावियों का हुआ सम्मान

जन्म जयंती समारोह के अंत में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के मेधावी विद्यार्थियों अथर्व द्विवेदी, अनीशा सिंह, हरसिल अवधपाल, शताक्षी सिंह को भारतीय नागरिक परिषद की ओर से सम्मानित किया गया और योग्यता प्रमाणपत्र दिए गए।http://www.satyodaya.com

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अक्षम जवानों की सूची न सौंपने पर DGP मुख्यालय ने जताई नाराजगी

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में कार्यरत 50 वर्ष से अधिक उम्र के जवानों की सूची न उपलब्ध कराने पर डीजीपी मुख्यालय ने नाराजगी जाहिर की है। सरकार का निर्देश है कि जनपदों पुलिस विभाग के उम्रदराज और भ्रष्ट व अक्षम अफसरों व जवानों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देकर बाहर किया जाए। इस संबंध में डीजीपी मुख्यालय ने 5 सितंबर को सभी जिला कप्तानों से सूची मांगी थी। एक महीने से ज्यादा का समय बीतने के बाद भी जिलों से सूची नहीं आई है।

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जिसके बाद डीजीपी मुख्यालय ने सभी जोन के एडीजी, पुलिस कप्तानों और पुलिस कमिश्नर को रिमाइंडर भेजा है। सूत्रों के मुताबिक डीजीपी मुख्यालय ने सभी जिलों से 50 वर्ष से अधिक उम्र वाले सभी पुलिसकर्मियों की स्क्रीनिंग कर 25 अक्टूबर तक सूची मांगी है। मुख्यालय ने 31 मार्च 2020 को 50 वर्ष की आयु पूरी कर चुके पुलिस कर्मियों की स्क्रीनिंग कराए जाने के निर्देश दिए थे। सरकार के निर्देश के मुताबिक यूपी पुलिस में सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर तक की स्क्रीनिंग कर अनिवार्य सेवानिवृत्त दी जानी है।http://www.satyodaya.com

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बरेली के कथित लव-जेहाद मामले में आया नया मोड़, युवती का वीडियो भी वायरल

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ दिनों में लव-जेहाद के कई मामले सामने आ चुके हैं। आगरा, कानपुर, सुल्तानपुर और मेरठ सहित कई जनपदों में हाल में ऐसे मुद्दों पर काफी हंगामा मच चुका है। भोली-भाली लड़कियों को प्यार के जाल में फंसाकर उनका धर्म परिवर्तन कराकर निकाह किया गया। यूपी बरेली एक ऐसा ही एक मामला इन दिनों चर्चा में है। यहां रहने वाले समुदाय विशेष के एक युवक हिन्दू समाज की युवती को अपने प्यार में फंसाकर बहला-फुसला कर भगा ले गया। चैतरफा हंगामे के बीच लड़की का एक वीडियो भी वायरल हुआ है। जिसमें युवती कह रही है कि अब वह बालिक हो चुकी है। जो कुछ भी हुआ है, वह उसकी मर्जी से हुआ। बिलाल के साथ शादी भी उसने अपनी मर्जी से की है।

कोचिंग के लिए निकली और फिर नहीं लौटी

17 अक्टूबर को कोचिंग के लिए निकली युवती अचानक गायब हो गयी। परिजनों ने जब उसकी खोज-खबर शुरू की तो पता चला कि वह एक युवक के साथ गई है। इसके बाद युवती के पिता ने इलाके के बिलाल घोसी, उसकी मां-बहन, उसके दोस्त विशाल व शिवम के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई।

कई वर्षों से युवती के पीछे पड़ा था बिलाल

युवती सहेलियों व परिजनों का कहना है कि बिलाल पिछले कई वर्षों से उसके पीछे पड़ा हुआ था। दो वर्ष पहले बिलाल ने युवती के साथ छेड़छाड़ की थी। परिजनों को पता चलने ने पर बिलाल के घर जाकर उसके पिता रजा से शिकायत भी की थी। पीडि.त पिता का आरोप है कि पुलिस से भी शिकायत की थी, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय बिलाल को चेतावनी देकर छोड़ दिया था। युवती की सहेलियों ने बताया कि बिलाल इसके बाद भी युवती को छेड़ता रहा। वह कई लड.कियों को अपने प्यार के जाल में फंसाकर उनका यौन शोषण कर चुका है।

माथे पर तिलक और हाथ पर कलावा बांधता था बिलाल

हिन्दू समाज की युवतियों को फंसाने के लिए बिलाल घोसी अपने माथे पर चंदन का तिलक लगाता था और कलाई पर कलावा बांधता था। खुद के मुस्लिम होने की पहचान छिपाकर वह सोशल मीडिया पर हिन्दू लड़कियों को अपने प्यार के झांसे में लेता था।

आठवीं फेल है बिलाल, बीएससी कर रही है छात्रा

परिजनों ने बताया कि बिलाल और छात्रा सातवीं तक एक साथ पढ़ते थे। आठवीं में फेल होने के बाद बिलाल अपने पिता के दूध के कारोबार में मदद करने लगा। इलाके में ही उसकी डेयरी की दुकान है। जबकि छात्रा ने पढ़ाई जारी रखी। युवती इस समय बीएससी करने के साथ कम्प्यूटर की कोचिंग कर रही थी। पिता ने बताया कि सब कुछ जानते हुए भी बेटी बिलाल के प्यार के झांसे में आ गई।

हिन्दू संगठनों में आक्रोश, थाने पर हंगामा

कथित लव जेहाद के इस मामले को लेकर कई दिनों से जमकर बवाल भी मचा हुआ है। भाजपा, बजरंगज दल सहित कई हिन्दू संगठनों ने स्थानीय थाने में हंगामा किया। पुलिस द्वारा अभद्रता करने पर भीड़ ने थाने में तोड़फोड़ शुरू कर दी। जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज कर दिया। मामला लखनऊ तक पहुंचा। हंगामा बढ़ने पर शासन थाने के कई पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है।

आठ लाख रुपए और मां के जेवर भी ले गयी युवती

युवती के पिता एक निजी स्कूल में कैशियर हैं। पुलिस को दी तहरीर में पिता ने बताया कि युवती अपने साथ घर में रखे हुए आठ लाख रुपए और अपनी मां के जेवर भी ले गयी है। पिता बेटी की हत्या किए जाने की भी आशंका जाहिर की है। पुलिस युवक-युवती की तलाश में जुटी हुई है। दोनों की अंतिम लोकेशन हल्द्वानी, मुरादाबाद होते हुए दिल्ली में मिली है। हालांकि अभी तक दोनों को बरामद नहीं किया जा सका है।http://www.satyodaya.com

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बागपत: बिना अनुमति दाढ़ी रखने पर निलंबित हुआ SI, 3 बार दी गई थी हिदायत

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बागपत। उत्तर प्रदेश के बागपत जनपद के रामाला थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर इंतसार अली को बिना अनुमति लंबी दाढ़ी रखने के आरोप में पुलिस अधीक्षक ने निलंबित करते हुए पुलिस लाइन भेज दिया। बताया जा रहा है कि पुलिस अधीक्षक ने दरोगा इंतसार अली को तीन बार दाढ़ी कटवाने की चेतावनी दी थी। साथ ही उन्हें दाढ़ी रखने के लिए विभाग से अनुमति लेने को भी कहा था। लेकिन पिछले कई महीनों से दरोगा इंतसार अली आदेश की अनदेखी करते हुए दाढ़ी रख रहे थे। सहारनपुर निवासी इंतसार अली यूपी पुलिस में एसआई के पद पर भर्ती हुए थे। पिछले तीन साल से वह बागपत जिले में कार्यरत हैं। लॉकडाउन से पहले उन्हें रमाला थाने में तैनाती दी गई थी। पुलिस विभाग के नियमों के विपरीत लंबी दाढ़ी रखने को लेकर चर्चा में आए थे।

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एसपी अभिषेक सिंह ने न्यूज़ 18 से बताया कि पुलिस मैनुअल के अनुसार, पुलिस बल में तैनात रहते हुए सिख समुदाय के पुलिसकर्मियों को छोड़कर कोई भी अन्य अधिकारी या कर्मचारी दाढ़ी नहीं रख सकता और अगर कोई रखना चाहता है तो उसे प्रशासन से अनुमति लेनी होगी। लेकिन, दारोगा इंतसार अली बिना अनुमति के ही दाढ़ी रख रहे थे। जिसकी शिकायत मिल रही थी। काफी समझाने और नोटिस देने के बावजूद भी उन्होंने दाढ़ी नहीं कटवाकर अनुसाशनहीनता दिखाई है। इस पर दरोगा के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
एसआई इंतसार अली का कहना है कि वह नवंबर 2019 से ही अनुमति के प्रयास में लगा हुआ है। लेकिन अभी तक विभाग से अनुमति नहीं मिल सकी है।http://satyodaya.com

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