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जानें क्यों मनाते हैं ईद, क्या है जंग-ए-बद्र जिसके बाद शुरू हुई ये त्यौहार, जानें इतिहास

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लखनऊ। इस्लामिक हिजरी कैलेंडर के मुताबिक ईद साल में दो बार आती है। आज ईद उल फितर है। सबसे पहले जो ईद आती है, उसे ईद-उल-फित्र या मीठी ईद कहते हैं। इसे सेवइयों वाली ईद भी कहा जाता है। यह ईद रोजा खत्म होने के बाद मनाई जाती है। दरअसल पहली ईद-उल-फित्र पैगंबर मुहम्मद ने सन् 624 ईस्वी में जंग-ए-बदर के बाद मनाई थी। जब रमज़ान माह खत्म होता है तो रात में चांद देखने के बाद अगले दिन ईद उल फितर मनाई जाती है। ईद उल फितर में कई मीठे पकवान बनाए जाते हैं- जैसे- किमामी सेवईं, शीर खुरमा और फिरनी। आइए जानते हैं ईद उल फितर का ऐतिहासिक महत्व…

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ईद उल फितर का इतिहास:
इस्लाम धर्म के मुताबिक़, जंग-ए-बद्र के बाद ईद उल फितर की शुरुआत हुई थी. जंग-ए-बद्र पैगम्बर मोहम्मद, उनके अनुयायियों और उनके घोर विरोधी अबू जहल और उसकी सेना के बीच हुई थी. जंग में पैगम्बर मोहम्मद के पास जहां महज केवल 313 अनुयायी थे। वहीं अबू जहल के पास बड़ी सेना, घुड़सवार, हाथी, घोड़े सब कुछ था. लेकिन इसके बावजूद भी पैगम्बर मोहम्मद और उनके अनुयायियों ने जंग जीत ली। जंग-ए-बद्र में इतिहास में पहली बार किसी लड़ाई में मुसलमानों को विजय मिली थी।

यह लड़ाई पैगंबर मुहम्मद साहब के नेतृत्व में लड़ी गई थी. जिस जगह यह जंग लड़ी गई थी वहां बद्र नाम का एक कुआं था। कुएं के नाम पर ही जंग को जंग-ए-बद्र कहा गया. मुसलमान लोगों ने जीत के जश्न को ईद के रूप में मनाया। जीत की ख़ुशी में लोगों में मीठे पकवान भी बांटे गए। इसी वजह से इसे मीठी ईद भी कहा जाता है। जंग-ए-बद्र की शुरुआत रमजान के पहले दिन से हुई थी। इस दौरान पैगंबर मुहम्मद साहब और उनके अनुयायी रोजा थे और जिस दिन जंग खत्म हुई उस दिन ईद मनाई गई।

ईद का महत्व:

ईद लोगों को भाईचारे का पैगाम देती है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को ईदी और फितरा (दान) देने की परंपरा है ताकि हर कोई ईद की खुशियां मना सके। ईद की नमाज के बाद परिवार वालों को फितरा दिया जाता है जिसमें 2 किलो ऐसी चीज दी जाती है। जिसका प्रतिदिन खाने में इस्तेमाल हो. इसमें गेंहूं, चावल, दाल, आटा कुछ भी हो सकता है। इसे मीठी ईद भी कहते हैं क्योंकि रोजों के बाद ईद-उल-फित्र पर जिस पहली चीज का सेवन किया जाता है, वह मीठी होनी चाहिए। वैसे मिठाइयों के लेन-देन, सेवइयों और शीर खुर्मा के कारण भी इसे मीठी ईद कहा जाता है।http://www.satyodaya.com

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गोरखपुर : मुख्यमंत्री ने पुलिस गश्त के लिए 100 स्कूटियों को दिखाई हरी झण्डी

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लखनऊ। दो दिवसीय दौरे पर गोरखपुर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को सुबह गोरखनाथ मंदिर में पूजा अर्चना की। इसके बाद सीएम योगी ने विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इसी क्रम में आज मुख्यमंत्री ने जनपद गोरखपुर में गोरखनाथ मन्दिर से महिला पुलिस की गश्त के लिए 100 स्कूटियों को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। स्कूटियों के इस दस्ते के माध्यम से शहर की सड़कों के साथ-साथ कस्बों में भी अब महिला पुलिस गश्त करेगी।

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इस मौके पर डीआईजी राजेश डी. मोदक, एएसपी डाॅ. सुनील गुप्ता सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।http://www.satyodaya.com

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कोविड-19 व इंसेफलाइटिस पर हर हाल में लगाएं लगाम : सीएम योगी

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दो दिवसीय दौरे पर गोरखपुर पहुंचे मुख्यमंत्री ने बीआरडी मेडिकल काॅलेज में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा बैइक की

लखनऊ। गोरखपुर में एक समीक्षा बैठक करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अफसरों से कहा कि कोविड-19 और इंसेफलाइटिस पर हर हाल में लगाम लगाएं। मुख्यमंत्री ने कहा सावधानी के बावजूद यदि किसी को बीमारी हो जाए तो उसे अच्छे से अच्छा इलाज दिया जाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को गोरखपुर के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे हैं। सुबह गोरखनाथ मंदिर में पूजा अर्चना के बाद मुख्यमंत्री बीआरडी मेडिकल कालेज पहुंचे। यहां उन्होंने कोविड-19 और इंसेफेलाइटिस मरीजों का हाल जाना। इसके बाद बीआरडी मेडिकल काॅलेज में ही गोरखपुर एवं बस्ती मण्डल में संचारी रोगों के नियंत्रण के सम्बन्ध में समीक्षा बैठक की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संचारी रोगों, जेई, एईएस, कोविड-19 आदि पर नियन्त्रण के लिए सभी विभाग आपस में समन्वय बनाकर कार्य करें। इनसे बचाव के लिए लोगों को जागरूक करें। कहा कि कोविड-19 संक्रमण सहित संचारी रोगों से बचाव व उपचार के लिए माइक्रो प्लान बनाकर कार्य किया जाए। जिलाधिकारी नियमित रूप से इसकी माॅनीटरिंग करें।

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समीक्षा बैठक करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, दोनों मण्डलों में जेई एईएस का प्रकोप अधिक होता है। इसलिए यह समीक्षा बैठक की जा रही है। कोविड-19 पर नियन्त्रण के लिए कोविड हेल्प डेस्क बहुत उपयोगी है। जनपद स्तर पर टीम-11 गठित की गयी है। जिलाधिकारी नियमित रूप से जनपद स्तरीय टीम-11 के कार्यों की निगरानी करें।

पाइप पेयजल की स्कीमों को प्रभावी रूप से लागू करें

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छ पेयजल के लिए पाइप पेयजल की स्कीमों को प्रभावी रूप से लागू किया जाए। आम जन को पानी उबालकर पीने तथा अपने आस-पास सफाई रखने के लिए निरन्तर जागरूक किया जाए। जहां पर जेई/एईएस के मामले आ रहे है, उन गांवों का निरीक्षण किया जाए। साफ-सफाई, पेयजल आदि की व्यवस्था में किसी भी कमी को तत्काल ठीक कराया जाए। एम्बुलेंस सेवाओं को निरन्तर कार्यशील रखा जाए। लापरवाही बरतने वाले के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाये।

स्वच्छता का वृहद अभियान चलाने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए लगातार आईएमए, नर्सिंग होम एसोसिएशन आदि संस्थाओं के साथ संवाद बनाया जाए। रैपिड एण्टीजेन टेस्ट को बड़े पैमाने पर अपनाया जाए। चिकित्सा कर्मियों को मेडिकल इंफेक्शन से सुरक्षित रखने के लिए प्रशिक्षण जारी रखा जाए। स्वच्छता का वृहद अभियान चलाने के साथ ही, गांव-गांव में निगरानी समितियां, स्वच्छाग्रहियों आदि को सक्रिय किया जाए। प्रत्येक ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय का निर्माण एक माह में पूर्ण कर लिया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य में तेजी लाई जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि कहीं भी जलजमाव की स्थिति न रहे।

डाॅक्टर नियमित रूप से वाॅर्डों में राउण्ड लें

कहा कि नाॅन कोविड अस्पतालों में स्क्रीनिंग की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सभी स्वास्थ्य कार्यों का सम्बन्धित अधिकारी द्वारा नियमित निरीक्षण किया जाता रहे। डाॅक्टर नियमित रूप से वाॅर्डों में राउण्ड लें। कोविड अस्पताल के इन्चार्ज प्रतिदिन भर्ती मरीजों के स्वास्थ्य के बारे में उनके परिजनों को जानकारी देते रहें। अनलाॅक के दौरान शासन की गाइडलाइनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाए।

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मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों एवं मुख्य चिकित्साधिकारियों को निर्देशित किया कि जनपद स्तर पर जेई एईएस से बचाव व उपचार की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। चिकित्सालयों में ऑक्सीजन की कमी न होने पाए। जेई एईएस की ट्रेनिंग की समुचित व्यवस्था की जाए। इसके लिए जनपद स्तर पर मास्टर ट्रेनर भी तैयार किये जाए।

मेडिकल काॅलेज में गम्भीर व रेफरल से आये मरीजों का ही इलाज हो

मुख्यमंत्री ने कहा कि जेई व एईएस के मरीजों को सम्बन्धित जनपद के ईटीसी सेण्टर/पीकू/मिनी पीकू/जिला अस्पताल में समुचित उपचार उपलब्ध कराया जाए। मरीज सीधे बीआरडी मेडिकल काॅलेज में न आएं। मेडिकल काॅलेज में गम्भीर व रेफरल से आये मरीजों का इलाज किया जाए। यदि मरीज सीधे मेडिकल काॅलेज आया है तो सम्बन्धित की जवाबदेही भी तय की जाए।इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद, मण्डलायुक्त गोरखपुर जयन्त नार्लिकर, मण्डलायुक्त बस्ती अनिल सागर सहित सम्बन्धित जनपदों के जिलाधिकारी एवं स्वास्थ्य विभाग के जनपदीय अधिकारी उपस्थित थे।

टीबी सर्वे के लिए संचालित बस का किया अवलोकन

इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ने टीबी सर्वे के लिए संचालित बस का अवलोकन किया। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि बस में एक्सरे मशीन, सीबी नेट के साथ ही वाई-फाई से भी कनेक्टेड है। टीबी का पूरे देश में सर्वे चल रहा है। भारत सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2025 तक पूरे देश को टीबी मुक्त कर दिया जाए। इसी उद्देश्य से टीबी सर्वे कराया जा रहा है।

बीएसएल-2 प्लस प्रयोगशाला की नई बिल्डिंग का किया उद्घाटन

मुख्यमंत्री ने उभरते रोग जनकों की जांच के लिए स्थापित आईसीएमआर की बीएसएल-2 प्लस प्रयोगशाला की नई बिल्डिंग का फीता काटकर उद्घाटन किया। उन्होंने 100 शैय्या वाॅर्ड का निरीक्षण कर एनआईसीयू के बच्चों के स्वास्थ्य आदि की जानकारी प्राप्त की। साथ ही चिकित्सकों को आवश्यक निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान मण्डलायुक्त जयन्त नार्लिकर, जिलाधिकारी के. विजयेन्द्र पाण्डियन, एसएसपी डाॅ सुनील गुप्ता एवं अन्य सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित रहे।http://www.satyodaya.com

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ब्राह्मण समाज को एकजुट करने के लिए ‘ब्रह्म चेतना संवाद’ शुरू करेंगे जितिन प्रसाद

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ब्राह्मण चेतना परिषद के संरक्षक ने कहा, यूपी में समाज के अस्तित्व पर खतरा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में ब्राह्मणों के खिलाफ हो रहे अत्याचार और उत्पीड़न के विरोध में ब्राह्मण चेतना परिषद सोशल मीडिया पर ब्रह्म चेतना संवाद शुरू करने जा रही है। ब्राह्मण चेतना परिषद के संरक्षक व पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने सोमवार को एक पत्र जारी कर यह जानकारी दी। जितिन प्रसाद ने पत्र में कहा है कि ब्राह्मण समाज ने कभी किसी हक नहीं मारा। हमारी संस्कृति रही है कि हमने समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का प्रयास किया है। लेकिन आज ब्राह्मण समाज को उसके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।

खासकर उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों से ब्राह्मण समाज को हाशिए पर पहुँचाने का प्रयास जारी है। यहां समाज के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। वर्तमान सरकार में ब्राह्मण समाज के दर्जनों लोगों की हत्याएं हुई हैं। जानलेवा हमले हुए हैं। लेकिन समाज को न्याय नहीं मिला। बल्कि सरकार ब्राह्मण समाज के अपराधियों को संरक्षण दे रही है।

समाज के लोग प्रदेश में खुद को अपमानित, असुरक्षित और असहाय महसूस कर रहे हैं। मैंने समय-समय पर समाज को न्याय दिलाने का प्रयास किया है। यूपी में वर्तमान हालात में अब जरूरी हो गया है कि हम आपसी मतभेद भुलाकर अपने समाज को न्याय दिलाने के लिए एक साथ आएं।

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इसके लिए जरूरी है कि हम अपने सुझाव और समस्याएं एक-दूसरे के साथ साझा करें। साथ ही उनके निराकरण का सामूहिक प्रयास करें। ताकि हमारा खोया हुआ गौरव वापस मिल सके। परिषद ने निर्णय लिया है कि सोशल मीडिया पर ब्राह्म चेतना संवाद शुरू किया जाएगा। जिसमें ज्यादा से ज्यादा लोगों को एक मंच पर लाकर समाज को ताकवर बनाया सके।http://www.satyodaya.com

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