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मुख्तार अब्बास नकवी को पेश की जाएगी जरदोजी से बनी उनकी तस्वीर

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लखनऊ । पुराने लखनऊ की तंग गलियों में जरदोजी का पुश्तैनी काम करने वाले शबाब हुसैन और उनके परिवार ने केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की अपने जरदोजी के नायाब हुनर के जरिए खूबसूरत तस्वीर बनाई है। जो वो जल्द ही मुख्तार अब्बास नकवी को तोहफे में देकर जरदोजी के कारीगरों की मुश्किलात का जिक्र करेंगे।

शबाब हुसैन और उनके परिवार के लोगों ने दिन-रात कड़ी मेहनत करके अपने नायाब हुनर जरदोजी के जरिए केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की बेहद ही खूबसूरत तस्वीर तैयार की है। इस खूबसूरत तस्वीर को तैयार करने वाले शबाब हुसैन का कहना है कि केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने अब तक अल्पसंख्यकों के लिए काफी काम किए हैं और हमें पूरी उम्मीद है कि वह जरदोजी के कारीगरों के लिये भी कुछ बेहतर कदम जरूर उठाएंगे। जिससे जरदोजी के कारीगर इस काम को छोड़ने पर मजबूर नहीं होंगे।

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गौरतलब है की नवाबों के वक्त से अदब की सरजमीं लखनऊ में जरदोजी का काम कभी बहुत बड़े पैमाने पर मुस्लिम कारीगर किया करते थे। लेकिन ज्यादा मेहनत और कम आमदनी के चलते इस बेशकीमती और नायाब हुनर को कारीगर छोड़ना ही मुनासिब समझ रहे हैं। जिससे कही न कही डर इस बात का भी है कि यह काम एक दिन पूरी तरह खत्म न हो जाये। इस बेशकीमती काम को करने वालों के हालात इतने खराब हो चुके हैं कि दिन रात कड़ी मशक्कत करने के बावजूद बच्चो की तालीम और बुनयादी सहुलियात तो दूर दो वक्त की रोटी भी खा पाना मुश्किल है। जिसपे हुकुमत को गौर करने की जरूरत है।http://www.satyodaya.com

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अयोध्या फैसला: डीजीपी ओपी सिंह ने पत्र लिखकर पुलिसकार्मिकों को सराहा

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लखनऊ। अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला दिया। फैसले का इंतजार पूरा देश सालों से कर रहा था। फैसला बड़ा था क्योंकि दो धर्मों की भावनाएं भी इसके साथ जुड़ी थीं। लिहाजा पुलिस पर काफी दबाव था कि फैसले के बाद किसी तरह की अप्रिय घटना न होने पाए। पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई। पुलिस ने सोशल मीडिया से लेकर सड़कों-चौराहों तक कड़ी नजर रखी। अब इसे लेकर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह ने पुलिस कार्मिकों का आभार व्यक्त करते हुए उनकी सराहना की है।

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डीजीपी ने पत्र लिखकर कहा कि, विभिन्न त्योहारों एवं सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कारण सुरक्षा का परिदृश्य कानून-व्यवस्था के लिए काफी चुनौतीपूर्ण था। लेकिन आप सभी ने शांति और कानून-व्यवस्था में अपना शत-प्रतिशत योगदान दिया। मैं आप सभी की आभारपूर्वक सह्रदय सराहना करता हूं। http://www.satyodaya.com

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क्राइम-कांड

होमगार्ड ड्यूटी घोटाला: होमगार्ड कार्यालय में लगी आग पर सीएम योगी सख्त नाराज

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प्रमुख सचिव व डीजी होमगार्ड से शाम तक मांगी रिपोर्ट, दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी का दिया आदेश

लखनऊ। नोएडा के जिला कलेक्ट्रेट स्थित जिला कमांडेंट होमगार्ड के कार्यालय में सोमवार देर रात लगी आग पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। उत्तर प्रदेश में होमगार्डों की ड्यूटी लगाने में हुए करोड़ों रुपए के घोटाले की जद में आए नोएडा जिला कमांडेड होमगार्ड कार्यालय में संदिग्ध अवस्था में लगी आग की आंच लखनऊ तक पहुंच चुकी है। इस अग्निकांड में वह बक्शा पूरी तरह से खाक हो गया जिसमें साल 2014 से अब तक होमगार्डों की नियुक्ति प्रतिनियुक्ति संबंधी मस्टर रोल रखे हुए थे। स्थानीय पुलिस ने कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। # Home guard duty scam

मंगलवार को सीएम योगी ने अग्निकांड का संज्ञान लेते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव व डीजी होमगार्ड से शाम तक पूरी रिपोर्ट तलब की है। सीएम योगी ने घटना की जांच फॉरेंसिक टीम से कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी और एसएसपी को आदेश दिया है कि मंगलवार शाम तक अग्निकांड के दोषियों को गिरफ्तार करें।
डीजीपी ओपी सिंह ने भी अग्निकांड को गंभीर मामला बताया है। डीजीपी ने बताया कि अग्निकांड की जांच के लिए गुजरात से विधि विज्ञान की टीम बुलाई गयी है। हालांकि घोटाला सामने आने के बाद भी नोएडा के होमगार्ड कमांडेंट डीडी मौर्या के खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी न होना शासन की मंशा पर सवाल खड़े कर रही है।

अपराध शाखा कर रही घोटाले की जांच

सूत्रों के मुताबिक अग्निकांड की जांच के लिए नगर पुलिस अधीक्षक (एसपी सिटी) के नेतृत्व में एक जांच टीम बनाई गयी है। जबकि होमगार्डों की ड्यूटी लगाने में हुए करोड़ों रुपए के घोटाले की जांच गौतमबुद्ध नगर पुलिस की अपराध शाखा कर रही है। इस घोटाले का एक मुकदमा सूरजपुर थाने में दर्ज है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) गौतमबुद्ध नगर वैभव कृष्ण ने बताया कि सोमवार देर रात पुलिस को सूचना मिली कि जिला कलेक्ट्रेट स्थित जिला कमांडेंट होमगार्ड के कार्यालय में आग लग गई है। सूचना मिलते ही सूरजपुर थाने के प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र दीक्षित व एफएसओ सूरजपुर मौके पर पहुंचे। वहां उन्हें होमगार्ड के वेतन का मास्टरोल वाला एक बड़ा बक्सा जली हुई अवस्था में पड़ा मिला। बक्से के अंदर मौजूद सभी मस्टरोल पूरी तरह से जल गए थे।

जानिए, कैसे किया गया करोड़ों रुपए का घोटाला

बता दें कि नोएडा पुलिस ने पिछले दिनों होमगार्ड की फर्जी हाजिरी लगाकर करोड़ों रुपए के घोटाले का खुलासा किया है। एसएसपी वैभव कृष्ण को शिकायत मिली थी कि जिले में होमगार्ड हाजिरी को लेकर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। एसएसपी की तरफ से मामले की जांच एसपी सिटी विनीत जायसवाल को सौंपी गई। नोएडा के एसपी सिटी ने अपनी जांच में खुलासा किया है कि शहर क्षेत्र के कई थानों में होमगार्डों की फर्जी ड्यूटी दिखाकर करोड़ों रुपए का भुगतान कराया गया है।

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जांच में खुलासा हुआ है कि होमगार्ड थानों में काम पर नहीं आ रहे थे, लेकिन उनकी हाजिरी लगाकर विभिन्न थानाध्यक्षों की फर्जी हस्ताक्षर और मुहर के सहारे बैंक से उनका वेतन लिया जा रहा था। घोटाले का खुलासा होने के बाद होमगार्ड महानिदेशक ने जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। इस मामले की जांच अभी चल ही रही थी कि जिला कमांडेंट होमगार्ड कार्यालय में लगी आग में सारे रिकार्ड जलकर स्वाहा हो गए । http://www.satyodaya.com

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बीएचयू विवाद: डॉ. फिरोज खान के साथ संविधान, निजाम और कबीर, फिर भी विरोध!

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लखनऊ।

जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान, मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान।

कबीर मर गया लेकिन वाणी अभी जिंदा है। शायद विचार को भी पता रहता है कि विवाद अनवरत जारी रहेगा इसलिये अमर हो जाए। विवाद बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर एक मुस्लिम व्यक्ति डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति का। छात्रों का धरना 12 दिन बाद भी जारी है। सात नवंबर से ही छात्र कुलपति आवास के सामने बीच सड़क पर धरना दे रहे हैं। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि फिरोज खान की नियुक्ति नियमानुसार है।

विरोध कर रहे छात्रों का तर्क

विरोध कर रहे छात्रों का कहना है कि संस्कृत के धर्म विज्ञान विभाग में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर मुस्लिम शिक्षक की नियुक्ति नहीं होने देंगे। उनका कहना कि यूनिवर्सिटी के किसी भी संकाय में किसी भी धर्म के लोगों की नियुक्ति की जा सकती है। संस्कृत के साहित्य विभाग में भी सभी धर्म के लोग पढ़ा सकते हैं। लेकिन हमारा विरोध संस्कृत के धर्म विज्ञान में मुस्लिम शिक्षक की नियुक्ति के खिलाफ है। इसके लिये छात्र बनासर हिंदू विश्वविद्यालय एक्ट और इस संकाय के बाहर लिखे शिलालेख का उदाहरण दे रहे हैं। छात्रों का कहना है कि इस शिलालेख में  मदन मोहन मालवीय ने साफ कहा है कि इस महाविद्यालय में विद्यार्थियों का प्रवेश वर्णाश्रम के नियमानुसार किया जाएगा।

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वहीं, छात्रों का ये भी कहना है कि धर्म विज्ञान को पढ़ते हुए खान-पान की भी शुद्धता का ख्याल रखना होता है, लेकिन अगर शिक्षक मुस्लिम होगा तो वह क्या मांस-मछली नहीं खाएगा? अगर वह खाएगा तो फिर क्या ‘धर्म विज्ञान’ पढ़ाने योग्य वह है?

विश्वविद्यालय प्रशासन का तर्क

बीएचयू प्रशासन का कहना है कि चयन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार गड़बड़ी नहीं है। नियुक्ति बीएचयू एक्ट के अनुसार है। वहीं, बीएचयू संविधान और यूजीसी के मानक का उल्लंघन नहीं कर सकता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15(1) के अनुसार राज्य, किसी नागरिक के विरुद्ध केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर कोई भेद नहीं करेगा।

भारत क्या कहता है?

विवाद के केंद्र में जो शिक्षक हैं फिरोज खान उनका सवाल है कि मैं एक मुसलमान हूं, तो क्या मैं संस्कृत नहीं पढ़ा सकता? बता दें, संस्कृत से फिरोज के परिवार का पुराना रिश्ता है। फिरोज ने मीडिया में बताया कि उनके दादा गफूर खान राजस्थाने के रहने वाले थे और भजन गाने के लिए मशहूर थे। डॉ. फिरोज के पिता ने भी संस्कृत की पढ़ाई की है।

अब सवाल ये है कि क्या संस्कृत का या फिर धर्मशास्त्र का अध्ययन-अध्यापन करने के लिए एक विशेष धर्म का होना जरूरी है? अगर ऐसा है तो फिर जयपुर के नाहरी का नाका स्थित स्कूल के बच्चे अपने भविष्य से क्यों खिलवाड़ कर रहे हैं? इस सरकारी स्कूल में संस्कृत पढ़ने वाले विद्यार्थियों में मुस्लिम बच्चों का बाहुल्य है। स्कूल में करीब पौने तीन सौ विद्यार्थी हैं इनमें 227 मुस्लिम समुदाय से हैं। बेहद गरीब परिवेश से आये ये बच्चे आखिर संस्कृत पढ़कर भविष्य में क्या करेंगे?

देश के आज तक की स्थिति को देखें तो यकीनन पदम श्री हासिल करेंगे या फिर प्रधानमंत्री के हाथों गोल्ड मेडल पाएंगे। जी हां, ऐसा ही हुआ है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के संस्कृत के विद्वान प्रो. वाहिद आबीदी को 2014 में भाजपा सरकार में ही संस्कृत भाषा में सम्मान के लिए पदम श्री से सम्मानित किया गया था। 2016 में उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें यश भारतीय पुरस्कार दिया।

इसी बीएचयू की बात करें तो यहां के संस्कृत विभाग की मुस्लिम छात्रा शाहिना को 2016 में खुद पीएम मोदी ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का गोल्ड मेडल दिया। शाहिना भी वेद, पुराण और उपनिषद पर रिसर्च कर रही हैं।

बात साफ है देश का संविधान और निजाम दोनों ही व्यक्ति-व्यक्ति में भेदभाव का विरोध करते हैं।

कबीर कुआं एक है, पानी भरे अनेक, बर्तन में ही भेद हैं, पानी सब में एक।

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