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लखनऊ : बेखौफ बदमाशों ने घर में घुसकर महिला को मारी गोली

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लखनऊ। राजधानी में अपराध ग्राफ चरम पर है जिससे आये दिन बेखौफ बदमाश किसी न किसी वारदात से पुलिस के ईकबाल को चुनौती देते नजर आ रहे हैं। हाल में ही देश के टॉप थ्री थानों में शुमार गुडंबा थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी रवींद्र नाथ राय को एसएसपी कलानिधि नैथानी ने औचक निरीक्षण के दौरान लाइन हाजिर कर दिया था। इसके बाद कमान नए इंस्पेक्टर के हाथों में सौंपी गई थी। शुक्रवार रात नए इंस्पेक्टर को बदमाशों ने फिर चुनौती देते हुए सनसनीखेज हत्याकांड को अंजाम दिया। गुडंबा थाना क्षेत्र में शुक्रवार रात 43 वर्षीय महिला की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र के गढ़ी निवासी प्रेमा देवी (43) परिवार संग रहती थी। शुक्रवार रात लगभग 10:30 बजे अज्ञात शख्स द्वारा प्रेमा को गोली मार दी गई। दरवाजा खोलते ही अज्ञात शख्स ने प्रेमा के सर पर गोली मार दी। घायल अवस्था मे प्रेमा को ट्रामा पहुंचाया गया जहां उसकी मौत हो गई। घटना की जानकारी पाकर गुडंबा पुलिस व एसएसपी कलानिधि नैथानी मौके पर पहुंचे। फिलहाल एसएसपी कलानिधि नैथानी की मौजूदगी में पुलिस टीम मामले की तफ्तीश में जुटी है व शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

घटना के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई। घटनास्थल पर लोगो का भारी हुजूम इकट्ठा हो गया। दबे शब्दों में स्थानीय लोगो द्वारा हत्या के पीछे मृतका के करीबी के होने की आशंका जताई गई है। सूत्रीय जानकारी के मुताबिक मृतका प्रेमा के पति प्रेमशंकर की भी 5 वर्ष पूर्व इसी तर्ज पर हत्या हुई थी। हालांकि इंस्पेक्टर गुडंबा इस बात से इनकार कर रहे है। फिलहाल पुलिस हर बिंदु पर मामले की पड़ताल करने की बात कर रही है।

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सिर में फंसी थी गोली, जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने मामूली चोट बताकर दे दी छुट्टी

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नोएडा। उत्तर प्रदेश के दनकौर से एक बड़ा ही हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां करीब हफ्ता भर पहले सब्जी सप्लाई को लेकर एक विवाद में गोलियां चलीं थीं। गोलीबारी में सब्जी विक्रेता शरीफ को लगा कि उसके सिर से छूकर गोली निकल गई है। उसका चेकअप भी जिला अस्पताल में हुआ। डॉक्टरों ने मामूली चोट का मेडिकल बनाकर उसे घर भी भेज दिया। लेकिन जब शरीफ के सिर का दर्द बंद नहीं हुआ तो दोबारा डॉक्टरों को दिखाया। फिर जो हुआ उसमें डॉक्टरों की हैरान कर देने वाली लापरवाही उजागर हुई। दरअसल, गोली उसके सिर से छूकर नहीं निकली थी बल्कि सिर में ही अटकी थी।

शुक्रवार को जानकारी मिलने के बाद शरीफ और उसके परिजनों ने जिला अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाया है। पीड़ित के घरवालों ने मामले की शिकायत सीएमओ से की है।

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दरअसल, 6 दिन पहले यानि कि 4 अगस्त को रीलखा गांव निवासी महेश का भतीजा एलकार सिकंदराबाद से गाड़ी में सब्जी भरकर ला रहा था। उसके साथ शरीफ भी गाड़ी में बैठा था। उसी दौरान कनारसी गांव के बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। गोलीबारी में शरीफ के सिर पर गोली लग गई थी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर घायल को इलाज के लिए भेज दिया था।

बता दें, सीएमओ अनुराग भार्गव का कहना है कि अस्पताल में हंगामे की सूचना मिली थी। मौके पर अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भेजकर लोगों को शांत कराया गया। मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। फिलहाल हॉस्पिटल प्रशासन ने उस रेडियोलोजिस्ट के खिलाफ जांच बैठाई है, जिसने डॉक्टर्स को अलर्ट नहीं किया।http://www.satyodaya.com

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क्राइम-कांड

यूपी एसटीएफ ने करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह का किया पर्दाफाश

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लखनऊ। एयरटेल की डीडीटीएम मशीन लगाने, टावर लगाने, बीमा पालिसी कैंसिल कराने, आईपीओ में इनवेस्ट कराकर रूपया कम समय में दोगुना करने का प्रलोभन देकर सिक्योरिटी, जीएसटी, स्टेट ट्रांजक्शन चार्ज आदि के नाम पर अब तक लगभग 200 लोगों से 5 करोड़ की ठगी करने वाले गिरोह के सरगना सहित दो सदस्य लगभग एक लाख ग्राहकों के अनाधिकृत डेटा के साथ यूपी एसटीएफ की टीम ने नोएडा से गिरफ्तार किया है। बताया गया कि डाॅक्टर अशोक कुमार दुबे पश्चिम टोला थाना पुरवा जनपद उन्नाव निवासी से उनकी छत पर डिजिटल डाटा मशीन लगाने हेतु उनसे लगभग 20 लाख रूपया की धोखाधड़ी के सम्बन्ध में थाना पुरवा जनपद उन्नाव में मुकदमा दर्ज हुआ था। मुकदमा दर्ज होने पर भी अब तक कोई भी कार्रवाई न होने के कारण पुलिस द्वारा एसटीएफ का सहयोग प्राप्त करने की अपेक्षा की गयी थी।

जिसके बाद ही एसपी विशाल विक्रम सिंह के पर्यवेक्षण में निरीक्षक विमलेश कुमार सिंह के निर्देशन मे मुख्यालय स्थित साइबर क्राइम टीम द्वारा अभिसूचना संकलन की कार्रवाई शुरू की गयी। अभिसूचना संकलन के दौरान ज्ञात हुआ कि शुभम मिश्रा, जो एक फर्जी कालसेंटर संचालक है। नोयडा सेक्टर 6 में एक फर्जी काल सेंटर के माध्यम से एयरटेल की डीडीटीएम मशीन लगाने, टावर लगाने, बीमा पालिसी कैंसिल कराने, आईपीओ में इनवेस्ट कराकर रूपया कम समय में दोगुना करने का प्रलोभन देकर सिक्योरिटी, जीएसटी, स्टेट ट्रांजेक्शन चार्ज आदि के नाम पर भारत भर मे आईडी सैल्यूशन, वैल्यूएैडेड सर्विसेज एफडी सर्विस, आइटी सविर्सेज और आईबीएल इंडिया आदि फर्जी कम्पनी बनाकर ठगी कर रहा है व गोडैडी समेत अपबम/इींतजपंपतजमसण्बव का डोमेन खरीद कर लोगों को भारतीय एयरटेल के नाम से ईमेल कर विश्वास दिलाता है कि वह भारतीय एयरटेल कम्पनी का अधिकारी है।

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जिसके बाद ही एसटीएफ ने मुखबिर के माध्यम से उपरोक्त सूचना को विकसित करते हुए साइबर टीम द्वारा आरोपियों को नोयडा से गिरफ्तार किया गया है। जिनसे लैपटाप, 4 मोबाइल, 3 एटीएम कार्ड, 9 चेक ठगी का शिकार हुए लोगों के जिनको कैश होने से रोका गया था जिसकी कीमत 16,20000 (सोलह लाख बीस हजार), पैन कार्ड, वाईफाई राउटर, 4 वाकी टाकी, लगभग एक लाख प्वाइंट अनाधिकृत डेटा (लाइफ इंश्योरेंश से सम्बन्धित), 300 पेज लगभग रिज्यूम, 50 पेज लेटर पैड फोरस्टार बिजनेस सैल्यूशन, एक प्रिंटर एचपी लेजरजेट, दो आधार कार्ड, दो डायरी जिसमे कस्टर से ठगे गये रूपयों का विवरण अंकित हैं, 15 रजिस्टर जिनमें कस्टमर से ठगे गये रूपयों का विवरण है, 100300 (एक लाख तीन सौ रूपया) नकद की बरामदगी हुई है।

एसटीएफ ने उपरोक्त मुकदमें के सम्बन्ध में पूछताछ पर गिरोह के मास्टरमांइड शुभम मिश्रा द्वारा डाॅक्टर अशोक दुबे से लगभग 20 लाख रूपये की ठगी किया जाना स्वीकार किया गया। शुभम मिश्रा द्वारा बताया गया कि 2014 में आईएमएस नोयडा से बीबीए की डिग्री प्राप्त करने के बाद इंडिया इंफोलाइन इंश्योरेंश ब्रोकर कम्पनी ज्वाइन किया। उसके बाद नेटअम्बेट, एसएमसी, डाॅक्टर हुड, श्रीधर, क्रासरोड, भ्ॅव्डच् मार्केटिंग प्रा.लि. आदि इंश्योरेंस ब्रोकर कम्पनियां ज्वाइन की। उन कम्पनियों से ही लोगों का बीमा कराकर उनको विश्वास दिलाकर अलग-अलग प्रलोभन देकर ठगी करता रहा है। इसके बाद जनवरी 2019 मे अपनी खुद की कम्पनी ऐडमायर बनाकर काल सेंटर का काम प्रारम्भ कर दिया, जहां पर सचिन, नितिन, पुरूषोत्तम, पंकज, सारदा आदि के माध्यम से अलग-अलग नामों व विभागों का बताकर कालिंग कराकर एयरटेल की डीडीटीएम मशीन लगाने, टावर लगाने, बीमा पालिसी कैंसिल कराने, आईपीओ में इनवेस्ट कराकर रूपया कम समय में दोगुना करने का प्रलोभन देकर सिक्योरिटी, जीएसटी, स्टेट ट्रांजक्शन चार्ज आदि के नाम पर भारत भर में आईडी सैल्यूशन, वैल्यूऐडेड सर्विसेज एफडी सर्विस, आइटी सविर्सेज और आईबीएल इंडिया फर्जी कम्पनी के 10-12 बैंक एकाउंट जो सरताज व करन द्वारा किराये पर दिये जाते थे। इन्ही बैंक एकाउंटों में लगभग 200 लोगों से ठगी कर चुके हैं।

जिसमें बताया कि मुख्य रूप से डाॅक्टर अशोक दुबे उन्नाव से 20 लाख, बीना त्रिपाठी ग्रेटर नोयडा से 24 लाख रूपये, दीपक पटना बिहार से 12 लाख रूपये, प्रदीप गोस्वामी असम से 13 लाख रूपये, रमेश गुप्ता मुम्बई से 11 लाख रूपये, पारस नाथ वर्मा इलाहाबाद से 163 लाख रूपये, राजन नेगी बैंगलूरू से 50 लाख रूपये उमाशंकर इलाहाबाद से 17 लाख रूपये आदि से ठगी की गयी है। इस गिरोह का जाल दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, एनसीआर क्षेत्र में फैला हुआ है। वहीं गिरफ्तार आरोपियों की अन्य अपराधिक गतिविधियों के सम्बन्ध में जानकारी की जा रही है। साथ ही प्राप्त डेटा का एनालिसिस किया जा रहा है। डेटा ब्रीच किस इश्योरेंस ब्रोकर कम्पनी से हुआ है इस सम्बन्ध में भी जांच की जा रही है। साथ ही बताया गया है कि पकड़ा गए इस गैंग द्वारा अब तक लगभग 5 करोड़ की ठगी की जा चुकी है।http://www.satyodaya.com

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पुलिस ने मॉब लिंचिंग से बचाकर परिवार को सौंपा, 10 साल से भटक रही थी महिला

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आगरा। देश में बढ़ती मॉब लिंचिंग की घटनाओं को सुनकर हर व्यक्ति चिंतित है। ऐसी ही भीड़ की हिंसा का शिकार एक 10 साल से सड़कों पर भटक रही महिला भी होने वाली थी लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस ने उसे बचा लिया। पुलिस ने न सिर्फ महिला को बचाया बल्कि उसके अपनों को भी ढ़ूंढ निकाला है और अब उसे उसके घर भेजा जा रहा है।

दरअसल, यह मामला आगरा का है। यहां 60 वर्षीय मानसिक विक्षिप्त महिला शांता तड़वई आगरा की सड़कों पर भटक रही थीं। भीख मांगकर वो किसी तरह गुजारा कर रही थी। लेकिन अफवाहों से बनी भीड़ कहां अच्छे-बुरे का भेद जानती है उसे तो बस फैसला देना और उसे ताकत के बल पर लागू करना आता है। ऐसी ही एक अफवाह शमशाबाद इलाके में शांता तड़वई को लेकर भी फैल गई। लोगों ने उन्हें बच्चा चोर समझ लिया। अगर पुलिस समय पर न पहुंचती तो एक और मासूम भीड़ की हिंसा की शिकार हो जाती। खैर पुलिस उन्हें सही-सलामत ले आई और दो दिन बाद जब शांता सदमे से उबरी तो पुलिस ने उनके बारे में पूछताछ करनी शुरू की। बातचीत से पता चला कि वो गुजरात के नर्मदा जिले की रहने वाली हैं। पुलिस ने घरवालों से संपर्क किया तो महिला के भाई ने बताया कि पति की मौत के बाद अवसाद में आई शांता अचानक लापता हो गई थी।

शमशाबाद के एसएचओ अरविंद कुमार निर्वल ने बताया कि जब उसे भीड़ से छुड़ाया गया, तब हमने कॉन्स्टेबल दीपमाला को उसे सौंपा। जब शांता बोलने की स्थित में हुई तो हमने उससे उसका पता पूछा। लेकिन वह केवल गुजराती ही जानती थी। हमने बंजारपुर गांव के आदिवासी पुरुषों को बुलाया जो अकसर नौकरियों की तलाश में गुजरात जाते हैं और उन्हें गुजराती आती है। तब पता चला कि वह गुजरात के तड़वई समुदाय से है।

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दरअसल, शांता अपने पति दिनेश के साथ छोटा उदयपुर जिले के शंखेड़ा में रहती थी। पति की मौत के बाद वह अवसाद में आ गई थी और दस साल पहले अचानक घर से लापता हो गई। घरवालों ने काफी तलाश किया पर वह नहीं मिली। परिवार वाले उम्मीद भी हार चुके थे कि वह अब कभी उन्हें मिल पाएगी। http://www.satyodaya.com

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August 10, 2019, 5:26 pm
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