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आजम, तंजीन और अब्दुल्ला के खिलाफ अदालत ने जारी किया गैर जमानती वारंट

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लखनऊ। समाजवादी पार्टी के सासंद आजम खान उनकी पत्नी विधायक तंजीन फातिमा और पुत्र विधायक अब्दुल्ला की एक बार फिर मुश्किलें बढ़ गई है। अदालत ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया है। यह वारंट फर्जी जन्म प्रमाण पत्र से जुड़ा हुआ है।

अदालत ने फर्जी जन्म प्रमाण पत्र को लेकर आजम उनकी पत्नी और पुत्र के खिलाफ पहले संमन जारी हुआ था। दरअसल उन्हें बुधवार तीनों सदस्यों को इस मामले में अदालत में हाजिर होना था। लेकिन वह शाम तक कोर्ट में पेश नहीं हुए। इस पर अदालत ने इसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी।

बीजेपी नेता आकाश सक्सेना ने धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत आजम खान और उनके पूरे परिवार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। एडीजे कोर्ट में सुनवाई के दौरान आजम खान और उनके परिवार को कोर्ट में अनुपस्थित पाया गया। इसके बाद तीनों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया। इसमें एक मामला 2019 लोकसभा चुनाव में आचार सहिंता उल्लंघन का और दूसरा पड़ोसी से मारपीट करने के आरोप का है।

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यह है मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट में आजम और अब्दुल्ला के खिलाफ दायर याचिका में कहा गया है कि सीबीएसई की 10वीं की मार्क्सशीट में उनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 दर्ज है। जबकि क्वीन मैरी अस्पताल में उनका जन्म हुआ और वहां उनकी जन्म तिथि 30 सितंबर 1990 दर्ज है।http://www.satyodaya.com

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प्राथमिक स्कूलों में नामी कंपनी के बांटे गए स्वेटर, क्वालिटी व साइज में मिली गड़बड़ी

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प्राथमिक स्कूलों

फाइल फोटो

लखनऊ। प्राथमिक स्कूलों में स्वेटर वितरण में गड़बड़ियां देखने को मिल रही हैं। जो स्वेटर स्कूल में बांटे जा रहे हैं उनकी क्वालिटी और साइज़ को लेकर कई सारी शिकायतें मिली हैं। इतना ही नहीं कई स्कूलों के छात्रों को जो स्वेटर बांटे गए हैं उनका लेबल भी बदल दिया गया है। हालांकि गड़बड़ी मिलने पर विभाग ने स्वेटर के नमूने को जांच के लिए भेज दिया है।

इसी तरह जिले में बेसिक के 1367 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक के 472 विद्यालय हैं। इनमें करीब 1,87,000 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इन सभी को नि:शुल्क स्वेटर बांटा गया। इनकी गुणवत्ता को लेकर शिकायतें मिली हैं। कई विद्यालयों को जो स्वेटर दिए गए हैं, उनके लेबल भी बदल दिए  गए हैं।

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ऐसे में आरोप है कि जो लेबल लगा था उसे हटवाकर फेमस कंपनी का लेबल लगाया गया है।  यह लेबल हटाने के चक्कर में कई स्वेटरों की बुनाई भी खराब हो चुकी है। वहीं, स्वेटरों के साइज को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं।  छात्र की लंबाई के अनुसार स्वेटर नहीं दिए गए हैं। कक्षा 6 से 8 तक के कई छात्रों को छोटे साइज के स्वेटर वितरित किए गए हैं।

शिकायतों के मुताबिक स्वेटरों को मानकों पर खरा नहीं बताया जा रहा है। स्वेटर उपलब्ध कराने के लिए शासन ने कुछ नियम लागू किए हैं। बीएसए डॉ अमर कांत सिंह ने बताया कि स्वेटर में 30 प्रतिशत ऊन और 70 फीसदी एक्रेलिक धागा होना जरूरी है। अगर स्वेटर में इससे कम मानक हुआ तो स्वेटर की गुणवत्ता खराब मानी जाएगी। http://www.satyodaya.com

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सीएम योगी की कैबिनेट बैठक में नियत यात्रा भत्ता बढ़ाने को मिली मंजूरी…

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कैबिनेट बैठक

फाइल फोटो

लखनऊ। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक संपन्न हुई है। इस कैबिनेट बैठक के दौरान सीएम योगी ने प्रदेश के 1.5 लाख कर्मचारियों को नियत यात्रा भत्ते की सौगात दी है। कैबिनेट ने 1 नवंबर 2012 से राजकीय क्रमिको को दिए जा रहे नियत यात्रा या वाहन भत्ते को 100 के स्थान पर 200, 200 को 300, 300 को 450 व 400 को 600 रुपये कर दिए जाने को मंजूरी दी गई है।

जानकारी के मुताबिक राज्य वेतन समिति ने अपनी सातवीं रिपोर्ट में स्थाई मासिक भत्ता (नियत यात्रा भत्ता) के संबंध में संस्तुतियां दी थी।  ऐसे में 14 मई, 2018 के अंक में वेतन समिति की इस संबंध में दी गई संस्तुति को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। इसमें कर्मियों को मिल रहे मौजूदा भत्ते में तीन गुना वृद्धि की संस्तुति की गई थी, जिस पर कैबिनेट ने मंगलवार को मंजूरी दे दी है।

नियत भत्ते के अलावा इन प्रस्तावों को भी मिली मंजूरी

उत्तर प्रदेश आबकारी भांग की फुटकर दुकानों की नियमावली 2019 के प्रस्ताव को मंजूरी। अब दुकानों का आवंटन ई-लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा।

गोरखपुर में शहीद अशफाक उल्ला खान प्राणि उद्यान की तृतीय पुनरीक्षित लागत 234.36 करोड़ जीएसटी मिलाकर मंजूरी दी गई। यह 121.34 एकड़ क्षेत्रफल में बनेगा। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान के साथ ही वन्यजीवों के संरक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा।

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प्रयागराज के बहादुरपुर ब्लॉक के कोटवा गांव में बंद पड़ी पीएचसी के स्थान पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाए जाने के लिए पुरानी जर्जर इमारत को गिराने के प्रस्ताव को मंजूरी।

जगदगुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय अधिनियम में बदलाव। विकलांग की जगह ‘दिव्यांग’ होगा। वहीं आईटी इलेक्ट्रॉनिक विभाग की जगह अब दिव्यांगजन विभाग के अधीन होगा। पहले सरकारी मदद नहीं मिल सकती थी, अब पूरी तरह से सरकारी मदद मिलेगी।http://www.satyodaya.com

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स्वास्थ्य मंत्री ने गोरखपुर में बच्चों की मौत के आकड़ों पर अखिलेश को दिया ये जवाब

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लखनऊ: सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को प्रदेश मुख्यालय पर प्रेस कांफ्रेंस कर कहा था कि जेएनयू में हुआ हमला एक सोची समझी साजिश थी, जिसे भाजपा ने करवाया था। साथ ही पुलिस बवाल और हिंसा करने वालों को शह दे रही थी। भाजपा ये नहीं चाहती है कि गरीब बच्चे जेएनयू पढ़े और पढ़ लिखकर कुछ बन सके। यूपी सरकार व प्रशासन पर कई सवाल उठ रहे हैं। किस तरह से मुंह छुपा कर कई लोग जेएनयू परिसर में घुसे और वहां तोड़फोड़ की।

जिसके बाद अखिलेश यादव ने इसी क्रम में कहा था कि जनवरी से अक्टूबर 2019 के बीच गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज (बीआरडी) में एक हजार से ज्यादा बच्चों की मौत हुई, लेकिन मृतकों की संख्या को सरकार के निर्देश पर कम दिखाया गया क्योंकि सरकार का कहना था कि आंकड़े ठीक रहने चाहिए। साथ ही कहा था इसकी जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज की अध्यक्षता में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम से करवाई जानी चाहिए।

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जिसके बाद आज मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री जयप्रकाश सिंह ने अखिलेश यादव के बच्चों की मौत वाले बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि अखिलेश यादव कहां से आंकड़े लाते हैं मुझे पता नहीं है।  अखिलेश यादव इस बात की जानकारी दें कि किस अस्पताल में किन परिस्थितियों में बच्चों की मौतें हुई।  आगे उन्होंने कहा कि अखिलेश को ऐसे आरोप लगाते हुए बिल्कुल भी शोभा नहीं देता है।  पूर्व मुख्यमंत्री होते हुए भी ऐसी नासमझी बातें करना और बचपने की बातें करना अखिलेश की बौखलाहट दिखा रहा है।  उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए हम संकल्पित है।  

यूपी के अस्पतालों में साल भर में 10 करोड़ मरीज जाते हैं और वहां  के जो भी आंकड़े आते हैं, वह हम जारी करते हैं।  ऐसे आंकड़ों की जानकारी सिर्फ अखिलेश यादव को है, उनको बताना चाहिए यह आंकड़े वह कहां से लाएं हैं।  इसी कड़ी में आगे कहा कि जनता जागरूक है डॉक्टर जानते हैं कौन सी बीमारी में क्या इलाज करना है? बुखार से पीड़ित हर व्यक्ति की मौत नहीं होती है।  अखिलेश यादव के आरोपों में कोई भी तथ्य नहीं है।  अखिलेश यादव बोले तो हम इस मामले की जांच कराने के लिए तैयार हैं।  http://www.satyodaya.com

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