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यूपी-उत्तराखंड में जहरीली शराब से मरने वालों की संख्या हुई 108 से अधिक, 75 लोग गिरफ्तार  

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जहरीली शराब

फाइल फोटो

नई दिल्ली । मौत के सौदागरों को इनती सख्त कार्रवाही होने के बाद भी डर नहीं लग रहा है। वह अभी भी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में उसी रफ्तार से जहरीली शराबों को को बेच रहे हैं। हाल ही में जहरीली शराब से यूपी और उत्तराखंड में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। जिसके बाद से यूपी सरकार और प्रशासन सख्ती के साथ कार्रवाही में जुटा हुआ है।

उत्तर प्रदेश के आबकारी विभाग के अनुसार हादसे पर अब तक 297 मुकदमा दर्ज करके 175 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके साथ ही अकेले सहारनपुर में 10 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। आपको बता दें जहरीली शराब के धंधे को बंद करने के लिए राज्य सरकार ने इसे बेचने और बनाने वाले के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा एक्ट (रासुका) लगाने की तैयारी कर रही है। अगर हम जहरीली शराब से हुई मौतों के ताजे आंकड़े की बात करे, तो अब तक 108 लोगों की मौत हो चुकी है।

जानकारी के मुताबिक जब जहरीली शराब से मरने वालों की संख्या 100 के पार हुई, तब योगी सरकार सख्त होकर आला अधिकारियों को फटकार लगाई। जिसके बाद से अवैध शराब बनाने और बेचने के खिलाफ 15 दिन का अभियान शुरू किया गया। अभियान के तहत सहारनपुर में अब तक 39 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 35 मुकदमें दर्ज किए गए हैं। सहारनपुर में अवैध शराब की भठ्ठियों से 36,100 किलो लेहन, 250 लीटर कच्ची शराब और 60 लीटर अंग्रेजी शराब बरामद हुई है। इतना ही नहीं सिर्फ सहारनपुर में 16 गांव के लोग इस जहरीली शराब की चपेट में आ चुके हैं।

शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे। इसके बाद अवैध शराब के खिलाफ पूरे प्रदेश में जोरदार अभियान चलाया जा रहा है। अवैध शराब के ठिकानों पर पुलिस और आबकारी विभाग ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है। इस पूरे अभियान पर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) निगरानी रख रहे हैं। इसी बीच सरकार ने शराब पीड़ितों के परिजनों के लिए मुआवजे की घोषणा कर दी है। मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख और इलाज कर रहे लोगों को 50-50 हजार रुपये का मुआवजा सरकार की ओर से दिया जाएगा।

जहरीली शराब की इस भयवाह घटना के बाद राज्य के आबकारी मंत्री जय प्रताप सिंह आज दोपहर  लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं। जहरीली शराब के कारण दोनों राज्यों में मिलाकर अब तक 108 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें उत्तर प्रदेश में 77 और उत्तराखंड में 31 लोगों की मौत हुई है। उत्तराखंड के रुड़की में अब तक 31 लोग मारे जा चुके हैं। जबकि यूपी में सहारनपुर में 69 और कुशीनगर में 8 लोगों की मौत की खबर है। दोनों राज्यों में मौत का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है, क्योंकि रुड़की में अभी भी कई लोगों की तबीयत गंभीर रूप से ख़राब है।

इस जहरीली शराब से हो रही मौतों के बीच दूसरी पार्टियां भी अपनों रोटियां सेंक रही हैं। जहरीली शराब से हो रही मौतों को लेकर वह एक बार फिर बीजेपी सरकार पर तंज कसने को तैयार है। अभी हाल ही में राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल दुबे ने प्रदेश में जहरीली शराब से बड़ी संख्या में हुई मौतों पर दुख व्यक्त करते हुए इसके लिए प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पहले ही लखनऊ, उन्नाव, कानपुर और कई अन्य जिलों में कार्रवाई की होती तो आज सहारनपुर और कुशीनगर में इस तरह की घटना नहीं घटती।

इतना ही नहीं उन्होंने जहरीली शराब से मारे गए लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये और बीमारों को 2-2 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग भी की थी। उन्होंने शराब माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग भी की है।http://www.satyodaya.com

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पुलिस ने प्रयागराज एयरपोर्ट से पूर्व IAS कन्नन गोपीनाथन को हिसारत में लिया

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प्रयागराज: पूर्व आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन को पुलिस ने शनिवार को प्रयागराज एयरपोर्ट से हिरासत में ले लिया है। बताया जा रहा है कि कन्नन गोपीनाथन को  सीएए और एनआरसी के खिलाफ होने वाले एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए बुलाया गया था, लेकिन पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। साथ ही एयरपोर्ट पर उन्हें लेने आई गाड़ियों को भी पुलिस ने कब्जे में लिया है।

बता दें कि पटेल संस्थान द्वारा ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम ने प्रयागराज में CAA को लेकर कार्यक्रम का आयोजन किया था, जिसमें वह शामिल होने के लिए जा रहे थे। वहीं सीएए और एनआरसी के खिलाफ बैठक आयोजित करने वाले लोगों के अनुसार जिला प्रशासन ने कन्नन गोपीनाथन को बैठक में हिस्सा लेने की इजाजत दी थी।

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इससे पहले 4 जनवरी को  अधिकारी कन्नन गोपीनाथन  को पुलिस ने आगरा के सैंया टोल प्लाजा पर हिरासत में ले लिया था। इस दौरान वह आगरा से होते हुए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी  जा रहे थे ,लेकिन यूपी एसटीएफ ने उन्हें हिरासत में लिया था। बताते चलें कि कन्नन गोपीनाथन UT कैडर के IAS अधिकारी रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को निरस्त करने के फैसले के विरोध में कन्नन ने दादरा एवं नगर हवेली में अपनी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया था। http://www.satyodaya.com

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पुलिस ने 18 महीने के मासूम के खिलाफ दर्ज किया भैंस चोरी का मुकदमा

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां पुलिस का एक अजीबोगरीब कारनामा प्रकाश में आया है। जिले की खंडासा पुलिस ने 18 माह के मासूम को अपने रोजनामचा में बतौर आरोपी दर्ज कर रखा है। इतना ही नहीं, 3 दिन से पुलिस इस मासूम आरोपी के घर दबिश भी दे रही है। मामला सामने आया तो पुलिस प्रकरण को लिपकीय गलती बता रही है।

मामला खंडासा थाना क्षेत्र के कोटिया गांव का है। यहां रहने वाले तरुण कुमार ने बीते 9 जनवरी को खंडासा पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि गांव के ही पिता-पुत्र ने उनकी भैंस चोरी करने का प्रयास किया। खंडासा पुलिस में मामले की तहरीर ली और भारतीय दंड विधान की धारा 379 के तहत कोठिया गांव निवासी अनिल कुमार और उसके पुत्र के नाम रिपोर्ट दर्ज कर ली। रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश में 3 दिन आरोपी के घर दबिश भी दी।

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दबिश देने गई पुलिस को बच्चे के दादा गोपी ने पूरा वाकया बताया। बताया कि उसने कोई भैंस चोरी का प्रयास नहीं किया है। मामला आपसी विवाद और मारपीट का है। वहीं नामजद किया गया उनका पोता महज डेढ़ साल का है। डेढ़ साल का मासूम ऐसी वारदात भला कैसे कर सकता है? गोपी ने दबिश देने गए पुलिस के सामने अपने डेढ़ साल के बच्चे को भी प्रस्तुत किया। बावजूद इसके पुलिस ने अपनी विवेचना आगे नहीं बढ़ाई और बच्चे का नाम नहीं निकाला।

शनिवार को जब मामला मीडिया के जरिए चर्चा में आया तो पुलिस अधिकारी लिपिकीय त्रुटि बता रहे हैं। सवाल यह है कि कथित भैंस चोरी के प्रयास के मामले में पुलिस को 9 दिन तक अपने रोजनामचे में दर्ज गलती का एहसास तक नहीं हुआ। मामला चर्चा में आने के बाद पुलिस दावा कर रही है कि ऐसा लिपिकीय त्रुटि के चलते हुआ।

क्षेत्राधिकारी मिल्कीपुर राजेश कुमार राय का कहना है कि रिपोर्ट दर्ज करते समय लिपिकीय गलती के चलते डेढ़ साल के मासूम को संदिग्ध आरोपी दर्ज कर दिया गया। खंडासा पुलिस को अपनी विवेचना में इस गलती को सही कर लेने का निर्देश दिया गया है। मगर सवाल यह है कि 9 दिनों तक पुलिस को आखिर अपनी गलती का एहसास क्यों नहीं हुआ? आखिर पुलिस प्रकरण की कौन सी विवेचना और जांच-पड़ताल कर रही थी?http://www.satyodaya.com

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सगे भाइयों की पीट-पीटकर हत्या, काम की तलाश में गए थे गुजरात…

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लखनऊ: यूपी के कासगंज जिले के रहने वाले दो सगे भाइयों की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई है। जिसके बाद शनिवार को दोनों भाइयों के शव उनके गांव लाए गए, तो परिवार में कोहराम मच गया। दोपहर बाद दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। थाना गंजडुडवारा क्षेत्र के गांव मिजुरी निवासी संजीव कुमार और नीरचंद्र पुत्रगण सोनपाल कढ़ाई के कारीगर थे। दोनों भाई काम की तलाश में गुजरात के सूरत गए हुए थे।

जहां दोनों को काम मिल जाने के बाद वह किराए का मकान लेकर रहें लगे थे। जानकरी के अनुसार 14 जनवरी को दोनों भाइयों का उसी मकान में किराए पर रह रहे बिहार व ओडिशा के लोगों से वाद-विवाद हो गया था। जिसके बाद दोनों की मारपीट कर हत्या कर दी गई। जिसकी सूचना मकान मालिक ने मृतकों के परिजनों को सूचना दी थी।

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सूचना मिलते ही परिजन  सूरत के लिए रवाना हो गए। जहां पोस्टमार्टम के बाद परिजन दोनों के शव लेकर शनिवार को गांव पहुंचे। जिसके बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी गांव पहुंच गए। दोनों भाइयों की मौत से परिजनों को रो-रोकर बुरा हाल है। मृतकों में संजीव शादीशुदा बताया जा रहा था। http://www.satyodaya.com

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