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पुलिस ने मॉब लिंचिंग से बचाकर परिवार को सौंपा, 10 साल से भटक रही थी महिला

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आगरा। देश में बढ़ती मॉब लिंचिंग की घटनाओं को सुनकर हर व्यक्ति चिंतित है। ऐसी ही भीड़ की हिंसा का शिकार एक 10 साल से सड़कों पर भटक रही महिला भी होने वाली थी लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस ने उसे बचा लिया। पुलिस ने न सिर्फ महिला को बचाया बल्कि उसके अपनों को भी ढ़ूंढ निकाला है और अब उसे उसके घर भेजा जा रहा है।

दरअसल, यह मामला आगरा का है। यहां 60 वर्षीय मानसिक विक्षिप्त महिला शांता तड़वई आगरा की सड़कों पर भटक रही थीं। भीख मांगकर वो किसी तरह गुजारा कर रही थी। लेकिन अफवाहों से बनी भीड़ कहां अच्छे-बुरे का भेद जानती है उसे तो बस फैसला देना और उसे ताकत के बल पर लागू करना आता है। ऐसी ही एक अफवाह शमशाबाद इलाके में शांता तड़वई को लेकर भी फैल गई। लोगों ने उन्हें बच्चा चोर समझ लिया। अगर पुलिस समय पर न पहुंचती तो एक और मासूम भीड़ की हिंसा की शिकार हो जाती। खैर पुलिस उन्हें सही-सलामत ले आई और दो दिन बाद जब शांता सदमे से उबरी तो पुलिस ने उनके बारे में पूछताछ करनी शुरू की। बातचीत से पता चला कि वो गुजरात के नर्मदा जिले की रहने वाली हैं। पुलिस ने घरवालों से संपर्क किया तो महिला के भाई ने बताया कि पति की मौत के बाद अवसाद में आई शांता अचानक लापता हो गई थी।

शमशाबाद के एसएचओ अरविंद कुमार निर्वल ने बताया कि जब उसे भीड़ से छुड़ाया गया, तब हमने कॉन्स्टेबल दीपमाला को उसे सौंपा। जब शांता बोलने की स्थित में हुई तो हमने उससे उसका पता पूछा। लेकिन वह केवल गुजराती ही जानती थी। हमने बंजारपुर गांव के आदिवासी पुरुषों को बुलाया जो अकसर नौकरियों की तलाश में गुजरात जाते हैं और उन्हें गुजराती आती है। तब पता चला कि वह गुजरात के तड़वई समुदाय से है।

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दरअसल, शांता अपने पति दिनेश के साथ छोटा उदयपुर जिले के शंखेड़ा में रहती थी। पति की मौत के बाद वह अवसाद में आ गई थी और दस साल पहले अचानक घर से लापता हो गई। घरवालों ने काफी तलाश किया पर वह नहीं मिली। परिवार वाले उम्मीद भी हार चुके थे कि वह अब कभी उन्हें मिल पाएगी। http://www.satyodaya.com

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भाजपा सरकार दलितों को शिक्षा से वंचित करने की रच रही साजिश: छात्र नेता

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लखनऊ। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र नेता चंद्रशेखर ने गुरुवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की है। चंद्रशेखर ने अखिलेश यादव को अनुसूचित जाति एव जनजाति के छात्रों की समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा। जिसमें उन्होंने बताया कि भाजपा सरकार दलितों को शिक्षा से वंचित करने की साजिश कर रही है। इसी लिए भाजपा ने निजी क्षेत्र के शिक्षण संस्थानों में निःशुल्क प्रवेश की सुविधा को समाप्त किए जाने का आदेश जारी किया है।

इसके साथ ही इसमें कहा गया है कि निदेशक समाज कल्याण ने जिलाधिकारियों को राजकीय एवं अनुदानित शिक्षण संस्थाओं में निःशुल्क प्रवेश की व्यवस्था को बाध्यकारी नहीं बताने के साथ निजी शिक्षण संस्थानों में निःशुल्क प्रवेश सुविधा को अनुमन्य न करने का आदेश जारी किया हैं। स्नातक तथा परास्नातक और प्रोफेशनल कोर्सो में यह सुविधा बहाल नहीं हुई तो बड़ी संख्या में दलित छात्र शिक्षा से वंचित हो जाएंगे।

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इस पर अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार के आदेश को पूर्णतः अनुचित करार देते हुए इसकी निंदा की है। साथ ही उन्होंने कहा कि यह दलितों के साथ यह अन्याय है। सपा प्रमुख ने कहा कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ दलितों के हितों के प्रति सदैव उदासीन रहे हैं। उनकी मानसिकता में दलित आज भी उपेक्षित श्रेणी में आता है। भाजपा नेता वोट बटोरने के लिए बाबा साहेब अम्बेडकर का नाम तो लेते हैं लेकिन बाबा साहेब ने दलितों को शिक्षित बनने का जो मंत्र दिया था उसे खारिज कर रहे हैं। दलितों को उच्चशिक्षा से वंचित करने की जगह तत्काल पुरानी व्यवस्था लागू होनी चाहिए।http://www.satyodaya.com

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प्रमोद तिवारी की मांग, यूपी में न लागू किया जाए संशोधित मोटर वाहन कानून

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लखनऊ। यातायात नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माने से जनता परेशान है। दो पहिया वाहन चालकों समेत सभी को भय सता रहा है कि न जाने कहां और किस बात पर पुलिस उनका हजारों रुपए का चालान काट दे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोदी तिवारी ने जनता की ऐसी ही समस्याओं की ओर ध्यान दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखा है।
श्री तिवारी ने सीएम योगी को लिखे पत्र में कहा है कि केन्द्र के मोटर वाहन संशोधन कानून को प्रदेश में लागू न किया जाए। यदि लागू किया जाए तो नए कानून के तहत लगने वाले जुर्माने को 50 से 75 फीसदी तक कम कर दिया जाए।

प्रमोदी तिवारी ने कहा कि भाजपा शासित राज्य उत्तराखण्ड और गुजरात सहित कई गैर भाजपा शासित राज्यों ने नए कानून के आर्थिक दण्ड को आधे से भी कम कर दिया है। साथ ही देश के कई राज्यों ने अपने यहां इस कानून को लागू करने से इनकार कर दिया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि इस कानून के लागू होने से जनता को परेशानी हो रही है। नए कानून के तहत लगने वाला आर्थिक दण्ड कभी-कभी इतनी ज्यादा हो जाती है कि जुर्माना राशि वाहन की कीमत से भी ज्यादा हो जाती है। वाहन चालकों को चालान का डर दिखाकर धन उगाही भी की जा रही है, उन्हें प्रताडि.त किया जा रहा है। प्रमोद तिवारी ने कहा कि मोटर वाहन संशोधन कानून किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं है। इस कानून को लेकर जनता में केन्द्र सरकार के खिलाफ भारी नाराजगी है।

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प्रमोदी तिवारी ने कहा कि इस कानून को लागू कराने के लिए सड़कों पर जो पुलिस बल मौजूद है, उनमें से कुछ ने इसे लूट का जरिया बना लिया है। रास्ते चलते लोगों पर आर्थिक दण्ड लगाये जा रहे हैं, और खुलेआम सड़कों पर वसूली की जा रही है। श्री तिवारी ने कहा कि ‘क्या यही अच्छे दिन आने वाले थे?’ मोदी सरकार में महंगाई कम होने की जगह और बढ़ रही है, 10 करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वादा करने वाली सरकार में बेरोजगारी बढ़ गयी है। लोगों की नौकरियां छीनी जा रही हैं। किसानों की आया दोगुनी करने की बजाय डीजल- पेट्रोल और बिजली की महंगी की जा रही है। क्या मोदी सरकार का यही रामराज है? जिसका सपना मोदी जी ने देश की जनता को दिखाया था। श्री तिवारी ने कहा है कि मोदी सरकार हर मोर्चे पर असफल साबित हो रही है। अच्छे दिन का सपना दिखाने वाले मोदी जी जनता का सुख-चैन छीन रहे है, और ‘‘अच्छे दिन’’ की बजाय जनता के ‘बुरे दिन’ आ गये हैं।http://www.satyodaya.com

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भाजपा राज में समस्याएं सुरसा के मुंह की तरह बढ़ी हैं: अखिलेश यादव

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लखनऊ। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार इन दिनों ऐसे अव्यवहारिक निर्णय कर रही है जिनसे जनता को दुख और पीड़ा मिले। जनसामान्य परेशान हो। यह क्रम केन्द्र से लेकर राज्य तक में चल रहा है। केन्द्र सरकार के नए ट्रैफिक नियमों का राज्यों में विरोध शुरू हो गया है। इसरों के चंद्रयान अभियान की असफलता का दण्ड उनके वैज्ञानिकों को दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में गुरुवार से बिजली की दरों में 12 प्रतिशत तक की वृद्धि करके जनता पर भारी चोट की गई है।

उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों के चालान के नए नियमों को न मानना दर्शाता है कि ये सच में कितने जनविरोधी एवं दमनकारी है। तभी तो उन राज्यों की इतनी हिम्मत हुई है कि वो ‘सख्त फैसले‘ लेने वाले तथा कथित ‘निर्णायक नेतृत्व‘ को चुनौती दे सकें। ये भाजपा में ‘अतिकेन्द्रीकरण‘ के विरोध की शुरूआत है।

अखिलेश ने कहा कि इसरों के वैज्ञानिकों के वेतन में बढ़ोत्तरी को काटना उनका मनोबल तोड़ने वाला काम है। जब सारा देश उनके साथ खड़ा है तो सरकार को भी दिखावा छोड़कर वैज्ञानिकों को सच में गले लगाना चाहिए। उनका वेतन काटकर हतोत्साहित नहीं करना चाहिए। सरकार के इस कृत्य से हर देशभक्त दुखी है।

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वहीं, भाजपा सरकार में महंगाई सुरसा के मुंह की तरह बढ़ी है। डीजल-पेट्रोल, रसोई गैस के दाम तो बढ़े ही अब उत्तर प्रदेश में बिजली की दरों में 12 फीसद से ज्यादा वृद्धि के अलावा ट्रैफिक सुधार के नाम पर भारी जुर्माना वसूली शुरू कर दी गई है। बिना मीटर ग्रामीण कनेक्शन में 25 प्रतिशत, किसानों के लिए 14 प्रतिशत और शहरी घरेलू दरों में 15 फीसद की बढ़ोत्तरी उपभोक्ता की घरेलू अर्थव्यवस्था को अस्तव्यस्त करने की सोची समझी साजिश है। बिजली मंहगी करके सामान्य परिवारों के ऊपर भारी बोझ लादा जा रहा है। व्यापारी और दुकानदार नोटबंदी और जीएसटी से पहले से परेशान हैं अब उनकी परेशानी और बढ़ जाएगी।http://www.satyodaya.com

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