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शिवपाल सपा से गठबंधन को तैयार, कहा अखिलेश मान जाएंगे तो 2022 में बनाएंगे सरकार

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लखनऊ। मंगलवार को इटावा में में एक कार्यक्रम के दौरान प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने 2022 के चुनाव को लेकर कहा कि वह सबसे पहले समाजवादी पार्टी से गठबंधन करना चाहते हैं। उन्होने कहा कि वे सपा से गठबंधन करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि अब अखिलेश को भी इस बात के लिए मान लेना चाहिए। उनका कहना था कि कुछ भी हो मुख्यमंत्री तो अखिलेश ही बनेंगे। शिवपाल बोले, मैं कई बार कह चुका हूं मुझे मुख्यमंत्री नहीं बनना है।

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उन्होने कहा कि अखिलेश मान जाएंगे तो 2022 में सरकार भी बना लेंगे। इसके साथ ही उनका कहना था कि सैफई में नेताजी के जन्मदिन पर परिवार को एकजुट होकर इसे मनाना चाहिए। प्रसपा प्रदेशभर में 22 नवंबर को नेताजी मुलायम सिंह यादव का जन्मदिन मनाने जा रही है। इस मौके पर शिवपाल ने परिवार के सभी लोगो को आमंत्रित किया है।http://www.satyodaya.com

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सिटी फुटबॉल ग्रुप ने इंडियन सुपर लीग की टीम मुंबई सिटी एफसी में बड़ी हिस्सेदारी खरीदी

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लखनऊ। भारत और मैनचेस्टर, इंग्लैंड-भारतीय फुटबॉल के लिए आज बड़ा दिन है। अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सिटी फुटबॉल ग्रुप (सीएफजी) ने इंडियन सुपर लीग की टीम मुंबई सिटी एफसी में मैज्योरिटी स्टेक हासिल करने के समझौते पर सहमति जताई है। मुंबई सिटी एफसी, सिटी फुटबाॅल ग्रुप नेटवर्क का आठवां क्लब होगा। सीएफजी क्लब के पास 65 प्रतिशत शेयर होंगे। वहीं मौजूदा शेयर धारकों, अभिनेता और फिल्म निर्माता रणबीर कपूर और बिमल पारेख के पास संयुक्त रूप से 35 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी। यह निवेश कुछ फुटबॉल निकायों की मंजूरी के बाद पूरा हो जाएगा।

अधिग्रहण की घोषणा आज सीएफजी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी फेरान सोरियानो और फुटबॉल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड एवं रिलायंस फाउंडेशन की चेयरपर्सन नीता अंबानी ने की। घोषणा के वक्त क्लब के फैंस मौजूद थे। इस सौदे से मुंबई सिटी एफसी को ग्रुप के कमर्शियल और फुटबॉल की जानकारियों का फायदा मिलेगा। साथ ही क्लब की पहुंच सीएफजी ग्लोबल कमर्शियल प्लेटफॉर्म तक होगी।

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मुंबई सिटी एफसी का घरेलू मैदान 8,000 की क्षमता वाला मुंबई फुटबॉल एरिना है जो एक बहुउद्देश्यीय स्पोर्टस फैसिलिटी, अंधेरी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में स्थित है। सिटी फुटबॉल ग्रुप दुनिया की अग्रणी फुटबॉल क्लबों की संचालक है। इसे इंग्लिश प्रीमियर लीग चैंपियंस के स्वामित्व के लिए जाना जाता है। मैनचेस्टर सिटी एफसी में, यूएस की न्यूयॉर्क सिटी, ऑस्ट्रेलिया की मेलबर्न सिटी एफसी, जापान की योकोहामा एफ मैरिनो, उरुग्वे की क्लब एटलेटिको टॉर्क, स्पेन की गिरोना एफसी और चीन की सिचुआन जिउनिउ एफसी शामिल है।

सीएफजी के अब दुनिया भर में 13 ऑफिस और 8 फुटबॉल क्लब तथा फुटबॉल से संबंधित व्यवसाय हैं। मार्च 2013 में अपनी स्थापना के बाद से समूह का काफी विस्तार हुआ है, और अब 2,000 से अधिक कर्मचारियों को रोजगार देता है। इसमें 1,500 से अधिक फुटबॉल खिलाड़ी हैं जो हर साल 2,500 से अधिक मैच खेलते हैं। ‘सिटीजन गिविंग’ अभियान के माध्यम से, सीएफजी ने अपने 2019 संस्करण में मुंबई सहित छह महाद्वीपों में फैले सामुदायिक कार्यक्रमों को भी समर्थन दिया है।

यह घोषणा सीएफजी के लिए काफी व्यस्त समय में आई है। मुंबई सिटी एफसी का अधिग्रहण करने के ठीक पहले, ग्रुप ने सिल्वर लेक के साथ एक नए इक्विटी निवेश का समझौता किया, इसमें समूह को मूल्यांकन $ 4.8 बिलियन किया गया। पिछले हफ्ते, मैनचेस्टर सिटी एफसी ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में लगातार पांचवे वर्ष रिकॉर्ड राजस्व और मुनाफा दर्ज किया।

इंडियन सुपर लीग और भारतीय फुटबॉल में सिटी फुटबॉल ग्रुप का स्वागत करते हुए नीता अंबानी ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक अवसर है, भारतीय फुटबॉल ने जो ऊचाईयों को हासिल की है यह उसका जश्न है। भारतीय फुटबॉल को लेकर यह हमारी प्रतिबद्धता और विजन को प्रमाणित करता है।http://www.satyodaya.com

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बीजेपी की प्राथमिकता किसान नहीं कारपोरेट हैं: अखिलेश यादव

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लखनऊ। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने गुरुवार को गोंड से लखनऊ आए किसानों से पार्टी मुख्यालय में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा है। अखिलेश ने कहा कि आज किसान अगर बदहाल है तो इसके लिए भाजपा सरकार की गलत नीतियां जिम्मेदार हैं। भाजपा सरकार किसानों के हित में कदम उठाने के बजाय झूठे वादों से उन्हें बहकाती रही है। किसानों की जमीनें छीनकर उन्हें बेघर और बेरोजगार बनाया जा रहा है। भाजपा सरकार अगर किसानों की अधिगृहीत जमीन का उचित मुआवजा नहीं दे सकती है तो उनकी जमीनें वापस कर देनी चाहिए। उन्होंने कहा भाजपा सरकार गलत लोगों की है, इसे हटना चाहिए।

पूर्व मंत्री योगेश प्रताप सिंह तथा पूर्व विधायक बैजनाथ दुबे ने अखिलेश यादव को जनपद गोंडा में सरयू नहर खण्ड प्रथम द्वारा वाजिब मुआवजा न दिए जाने के संबंध में एक ज्ञापन भी सौंपा। किसानों का कहना था कि उन्हें अखिलेश पर विश्वास है। उनके कार्यकाल में ही किसान लाभान्वित हुए हैं।

अखिलेश यादव ने कहा कि गरीब किसान को पर्याप्त मुआवजा मिले तो वह दूसरी जगह जमीन खरीद सकता है, खुद घर बना सकता है। समाजवादी सरकार में किसानों से विकास कार्यों के लिए जमीन लेते समय चार गुना तक बढ़ाकर मुआवजा दिया गया। 302 किमी लंबे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे और पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के लिए किसानों ने अपनी जमीनें दीं, हमने उनको मुंह मांगा मुआवजा दिया। कोई आंदोलन नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि भाजपा और सपा सरकार के दृष्टिकोण में बुनियादी फर्क है। भाजपा की प्राथमिकता में किसान, गांव और खेती नहीं कारपोरेट घराने हैं। किसान के धान की सरकारी खरीद नहीं हो रही है। बिचौलिए 1200 रुपये में धान खरीद रहे हैं। गन्ने का बकाया दाम नहीं मिला है। हर तरह से किसान का उत्पीड़न हो रहा है। समाजवादी सरकार ने सभी योजनाएं जनहित के लिए बनाई। छात्र-छात्राओं को लैपटॉप दिए जो अभी भी चल रहे हैं। महिलाओं को पेंशन दी। समाजवादी पार्टी की अगली सरकार में यह पेंशन राशि पांच सौ रुपए से और ज्यादा बढ़ाई जाएगी। लोहिया आवास के लिए 3 लाख 32 हजार रुपये दिए गए थे। इन आवासों में सोलर पैनल लगा था, जिससे पंखा बिजली चलने पर कोई बिल नहीं देना होता। उन्होंने कहा कि हमारा इरादा गरीबों, पिछड़ों, किसानों के सपनों को पूरा करना है। इसी के साथ उन्होंने ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव की मांग भी उन्होंने दुहराई।

सपा प्रमुख ने आगे कहा कि नोटबंदी ने अर्थव्यवस्था को बर्बाद किया है। इससे न कालाधन कम हुआ और न ही आतंकवाद मिटा। दरअसल, रूपया काला-सफेद नहीं होता है, उसका लेनदेन काला-सफेद होता है। इसी तरह भाजपा सरकार ने डायल-100 को बदलकर 112 कर दिया। यही उनका काम रहा है।

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अखिलेश को किसानों ने जो ज्ञापन सौंपा है, उसमें बताया गया कि जनपद गोंडा के सरयू नहर खण्ड प्रथम द्वारा तरबगंज ब्रांच में धनई पट्टी रजबहा का निर्माण कार्य चल रहा है।  इस माईनर पर ग्राम परसा गोंडरी विधानसभा क्षेत्र कटरा बाजार व धानीगांव सालपुर धौताल विधानसभा क्षेत्र करनैलगंज के निवासी किसानों की जमीनें अधिग्रहीत कर उन्हें 14 हजार रुपये और कुछ को 17 लाख 85 हजार रुपए प्रति बीघा दिया गया तो प्रभावित किसान आंदोलित हो उठे। 18 नवंबर 2019 से किसान धरने पर बैठ गए हैं, वे खेत में टेंट लगाकर बैठे हैं। गोंडा के प्रभावित किसानों का कहना है कि इस परियोजना में जमकर फर्जी भुगतान हुआ है। अधिग्रहण के पूर्व किसानों को नोटिस भी नहीं दिया गया है। एक विधवा शकुंतला पत्नी अशोक कुमार के पांच बच्चे हैं। उसके पास डेढ़ बीघा जमीन है। कमलेश किसान के पास 6 बीघा जमीन है, उसके 3 भाई हैं और कुल 16 लोगों का परिवार है। बेनी माधव सिंह, रजनीश यादव, जमील अहमद, शिव बोध सिंह, रंगनाथ आदि ने भी किसानों का दर्द बताया। अखिलेश यादव ने किसानों से सहानुभूति जताते हुए उनकी मदद का आश्वासन दिया है।http://www.satyodaya.com

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मां की सेवा करने के लिए मांगा था तबादला, लेकिन मौत के बाद मिली तैनाती

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दारोगा संजीव की मौत के दिन आयी तबादले की सूचना

लखनऊ। यूपी पुलिस में तैनात न जानें कितने पुलिसकर्मी अपने जिले में तैनाती चाहते हैं। जिससे कि वह अपने परिवार का ध्यान रख सकें। लेकिन उनकी तैनाती नहीं की जाती है। परिवार बेटे की आस में निगाहें बिछाएं इंतजार करते रह जाते हैं। लेकिन उनका बेटा उन तक नहीं पहुंच पाता और उनकी याद में उनका देहांत भी हो जाता है। ऐसी ही एक निंदनीय घटना झांसी में देखने को मिली है। जहां यूपी पुलिस में तैनात एक सबइंस्पेक्टर अपना तबादला अपने घर के पास चाह रहा था। जिससे कि वह अपनी बीमार की देखभाल कर सके, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मां बेटे के आने का इंतजार करती रही और उसका देहांत हो गया। मां की हुई मौत के बाद ही झांसी जिले में तैनात दारोगा संजीव कुमार जादौन का सोमवार को हार्ट अटैक से निधन हो गया। उनके करीबी साथियों की मानें तो संजीव अपने घर के पास तैनाती चाहते थे। वह ट्रांसफर न होने से बहुत परेशान थे।

बता दें कि दारोगा संजीव ने घर के पास तैनाती के लिए एक साल पहले ट्रांसफर की अर्जी दी थी। क्योंकि उनकी मां बहुत ज्यादा बीमार थीं। वह मां के इलाज के लिए घर के पास ही तैनाती चाहते थे और साथ ही पास रहकर उनकी सेवा करना चाहते थे। लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी उनका ट्रांसफर नहीं हुआ। उनकी मां का 10 नवंबर को निधन हो गया। उनके साथ काम करने वाले पुलिसकर्मियों ने बताया कि मां के निधन से वह टूट सा गए थे। वह मां को अक्सर याद करके रोने लगते थे। साथ की हैरान कर देने वाली बात यह है कि दारोगा का जीते जी तो तबादला नहीं हुआ लेकिन जिस दिन संजीव का निधन हुआ, ठीक उसी दिन उनके तबादले का लेटर भी आ गया।

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संजीव कुमार जादौन बुलंदशहर के रहने वाले थे। वह बुलंदशहर में ही तैनाती चाहते थे। उनके एक करीबी ने बताया कि वह पूरी ईमानदारी से साथ ड्यूटी करते थे। लेकिन तबादले का आदेश न आने से वह निराश रहने लगे थे। मां के निधन के बाद वह सोमवार को पुलिस चौकी पर बैठे थे कि अचानक उनके सीने में तेज दर्द होने लगा। जिसके बाद उन्हें दिल्ली ले जाया गया, मगर बचाया नहीं जा सका। मंगलवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया। संजीव के निधन से पुलिस साथी काफी दुखी हैं। हर किसी का कहना है कि अगर उनका ट्रांसफर हो जाता, तो शायद आज यह स्थिति न होती और दोनो लोग जिंदा होते। http://www.satyodaya.com

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