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सोनिया गांधी ने रायबरेली से पांचवीं बार किया नामांकन

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कहा, अजेय नहीं हैं मोदी, 2004 मत भूलिए

नामांकन के दौरान राहुल गांधी व प्रियंका का उनका पूरा परिवार भी रहा मौजूद

रायबरेली। यूपीए अध्यक्ष और रायबरेली की चार बार की सांसद सांसद सोनिया गांधी ने गुरूवार को पांचवीं बार रायबरेली से नामांकन दाखिल कर दिया। इस दौरान उनके साथ बेटा, बेटी, दामाद व उनके उनके बच्चे भी उपस्थित रहे। गांधी परिवार हमेशा से रायबरेली ओर अमेठी में भावनात्मक जुडाव के आधार पर संसद पहुंचता रहा है। इसके पहले बुधवार को राहुल गांधी के नामांकन के समय भी पूरा गांधी परिवार सड.कों पर दिखा था।

नामांकन दाखिल करने के लिए कांग्रेस मुख्यालय से निकलने के पहले सोनिया गांधी ने हवन-पूजन किया। इसके बाद कलेक्टेट तक रोड शो किया। इस दौरान उनके साथ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के अलावा रॉबर्ट वाड्रा, रेहान और मिराया वाड्रा भी मौजूद रहे। रास्ते में सोनिया का काफिला भटक गया और काफी जाम लग गया जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया। खराब स्वास्थ्य के चलते सोनिया गांधी ने खुले ट्रक के बजाय गाड़ी से रोड शो किया। इस दौरान उन्होंने बीच-बीच में बाहर निकालकर कार्यकर्ताओं की तरफ हाथ भी हिलाया। रोड शो के दौरान सड़कों पर कांग्रेस समर्थकों का भारी हुजूम उमड़ आया। लोग हाथों में कांग्रेस के झंडे के साथ, न्याय योजना के प्रचार की टीशर्ट और राफेल के लिए काले झंडे भी लिए हुए थे। लगभग 700 मीटर के रास्ते पर रोड शो करते हुए सोनिया गांधी कलेक्ट्रेट पहुंची और नामांकन पर्चा भरा।

नामांकन दाखिल करने के बाद सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेतावनी देते हुए कहा कि 2004 का आम चुनाव मत भूलिए। उस समय वाजपेयी (अटल बिहारी वाजपेयी) भी अजेय थे लेकिन हम जीते। पीएम मोदी भी अजेय नहीं हैं, कांग्रेस फिर से इस बार जीत दर्ज करेगी। बता दें कि 2004 में सभी सियासी पंडितों के दावों को खारिज करते हुए कांग्रेस ने वाजपेयी सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया था।
सोनिया के साथ राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत में एक बार फिर पीएम मोदी को खुली बहस की चुनौती दी। उन्होंने कहा, भारतीय इतिहास में ऐसे कई लोग रह हैं जो यह सोचते थे कि वह अजेय हैं और भारत के लोगों से बड़े हैं। नरेंद्र मोदी ने 5 साल में भारत के लोगों के लिए कुछ नहीं किया। वह बस इतना बता दें कि उन्होंने अनिल अंबानी को ठेका कैसे दिया?

रायबरेली सीट गांधी परिवार का मजबूत गढ़ रही है और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की कर्मभूमि मानी जाती है। लेकिन इस बार चर्चा है कि अमेठी और रायबरेली में सीट बचाए रख पाना गांधी परिवार के मुश्किल है। क्योंकि दोनो ही जगह भाजपा के उम्मीदवार गांधी परिवार को कांटे की टक्कर देने की स्थिति में हैं।

सोनिया का मुकाबला दिनेश सिंह से

रायबरेली लोकसभा सीट के लिए मतदान पांचवें चरण के तहत छह मई को होगा। इस बार सोनिया का मुकाबला दिनेश प्रताप सिंह से है, जो कांग्रेस छोडकर हाल ही में भाजपा में शामिल हुए हैं। सपा और बसपा ने रायबरेली से उम्मीदवार नहीं उतारा है। सोनिया इस सीट पर 2004, 2006 (उपचुनाव), 2009 और 2014 में विजयी रही हैं।

रायबरेली में तीन बार हारा कांग्रेस उम्मीदवार

इस सीट से कांग्रेस को 1977, 1996 और 1998 में हार का सामना करना पड़ा। आपातकाल के बाद 1977 में भारतीय लोक दल के राज नारायण ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को हराया था। 1996 एवं 1998 में भाजपा उम्मीदवार अशोक कुमार सिंह ने इस सीट पर जीत दर्ज की। यहां से फिरोज गांधी, इंदिरा गांधी, अरुण नेहरू, शीला कौल और सतीश शर्मा चुनाव लड़ चुके हैं।http://www.satyodaya.com

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दारुल उलूम फरंगी महल ने कोरोना को लेकर जारी किया फतवा…

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कहा, बीमारी को छुपाना और इलाज न कराना दोनों हराम

लखनऊ। एक तरफ कोरोना महामारी देश में अपने पैर पसार रही है, तो वहीं दूसरी तरफ कई जगहों पर लोगों द्वारा कोरोना जांच का विरोध किया जा रहा है। कुछ जगहों पर तो डाक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ मारपीट की भी खबरें आई है। इसी संबंध में लखनऊ स्थित दारुल उलूम फरंगी महल की तरफ से मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने एक फतवा जारी किया है। दारुल उलूम के फतवे में कहा गया है कि कोरोना संक्रमण की जांच और इलाज कराना सभी के लिए लाजिमी है। इस बीमारी को छुपाना बहुत बड़ा जुर्म है, और इस्लाम की रोशनी में किसी की जान को अपनी जान या किसी दूसरे की जान को हालाकात हराम है।

क्योंकि अल्लाह ने कुरान में फरमाया है कि जिस किसी ने भी एक इंसान की जान बचाई तो जैसे उसने तमाम इंसानों की जान बचाई है। मौलाना ने कहा कि इस सिलसिले में दारुल उलूम फिरंगी महल में जनाब सऊद रईस एडवोकेट की तरफ से एक फतवा दाखिल किया गया है। जिसमें सवाल किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति कोरोना वायरस से मुतासिर है, लेकिन वह अपने मर्ज को छुपाता है, और इलाज कराने के लिए तैयार नहीं है। तो क्या शरीयत के हिसाब से यह दुरुस्त है? साथ ही यह भी पूछा गया है कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जारी एडवायजरी और निर्देशों पर अमल करना क्या जायज है?

यह भी पढ़ें-उप्र सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अब तक 20 लाख रुपए की बांटी ‘राहत’

इन सवालों का जवाब देते हुए दारुल उलूम फरंगी महल ने अपने फतवे में कहा, इस्लाम एक दीन फितरत है। इसमें इंसान की जान और माल को पूरी अहमियत दी गयी है। इस्लाम की हिदायत है कि खुद भी हलाकत से बचो और दूसरे को भी बचाओ। कोरोना की जांच और इलाज न कराने वाला खुद भी तबाह होगा और दूसरे की जान को भी खतरे में डालेगा। हदीस में पैगंबरे इस्लाम हुजूर सल्लल्लाहु अलैय वसल्लम ने फरमाया है किसी के लिए खुद नुकसान उठाना और दूसरों को नुकसान पहुंचाना जायज नहीं है। इस हदीस पाक की रोशनी में सहाबा इकराम ने लिखा है कि किसी को नुकसान पहुंचाना जानी हो या माली हालत यह हराम है। एक तरह से धोखा देने के बराबर है। और धोखा देना हराम है। खुद भी इस मजहब की तालीम के खिलाफ है। यह मुल्क और कौम के साथ खिलाफ था इसलिए कोरोनावायरस को छुपाना संगीन जुर्म है और इसका इलाज कराना इंसान को जरूरी है।

पूरी दुनिया के सामने एक अच्छी छवि भी देनी है

हुकूमत की तरफ से जो हिदायत दी गई हैं। हजरात में जो इतिहास थी या डॉक्टर की तरफ से सलाह दी गई है उसकी भी पाबंदी करें और उसपर मुकम्मल करना बेहद जरूरी है। कुरान में अल्लाह तबारक ताला ने फरमाया है कि अपने आप को कत्ल ना करो जो शख्स एहतियात नहीं करता खुद को भी तबाही में डालता है और ऐसा करना शरीयत की रोशनी में मुकम्मल तौर पर हराम है। लिहाजा आज फतवा जारी करके पूरे मुल्क और पूरी दुनिया के सामने एक अच्छी छवि भी देनी है। जिससे कि कोरोना वायरस की जांच कराना और उसको छिपाना अगर कोई शख्स इसकी जद में है तो उसको जांच कराना जरूरी है।http://www.satyodaya.com

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उप्र सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अब तक 20 लाख रुपए की बांटी ‘राहत’

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लखनऊ। कोरोना महामारी से निपटने के लिए हर कोई सरकार के साथ गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता में लगा हुआ है। सभी का प्रयास एक ही है कि लाॅकडाउन से कोई गरीब, मजदूर भूखा न सोए। इसी क्रम में उप्र सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड भी हर रोज राशन और भोजन का वितरण कर रहा है। बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एसएम शोएब गुरुवार को यह जानकारी दी। शोएब ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में अवकाफ के मुतवल्लियों व प्रबंध समितियों द्वारा जरूरतमंदों को खाने-पीने एवं अन्य आवश्यक सामग्री वितरित करने का काम जारी है।

यह भी पढ़ें-ठाकुरगंज में पुरानी रंजिश के चलते हुई फायरिंग, दो युवक गंभीर

लाॅकडाउन के बाद अब तक करीब 20 लाख रुपए की धनराशि से गरीबों को भोजन और राशन की सामग्री वितरित की जा चुकी है। खाने-पीने की वस्तुओं के साथ ही बोर्ड की तरफ लोगों को उनकी जरूरत की दवाएं भी वितरित की जा रही हैं। http://www.satyodaya.com

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ठाकुरगंज में पुरानी रंजिश के चलते हुई फायरिंग, दो युवक गंभीर

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लखनऊ। लॉकडाउन के दौरान जहां हर चौराहे पर पुलिस तैनात है, तो वहीं ठाकुरगंज के हरिपाल चौराहे पर असलहे से लैस रम्मन नामक युवक ने पुरानी रंजिश के चलते उस्मान पर फॉयरिंग कर दी। फायरिंग से इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायल को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया दोनों युवको की हालत खतरे से बाहर है।

ठाकुरगंज के हरिनगर चौराहे पर पुरानी रंजिश के चलते रम्मन ने फायरिंग कर दी, फायरिंग में निजाम और उस्मान घायल हो गए। फायरिंग के बाद रम्मन फरार हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों घायलों को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया। जहां डॉक्टरों ने दोनों की हालत खतरे से बाहर बताई है, ठाकुरगंज पुलिस के अनुसार रम्मन का निजाम से पूर्व में विवाद चल रहा था।

विवाद के बाद आज चौराहे पर आपस मे कहा सुनी हो गयी। उसी दौरान रम्मन ने फायरिंग कर दी। पुलिस ने निजाम की तहरीर पर अभियुक्त रम्मन, राजू और सुफियान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है, और गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है।http://www.satyodaya.com

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