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कैबिनेट ने इन 6 प्रस्तावों पर लगाया मुहर, बुजुर्गों को भी मिली सौगात

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फाइल फोटो

लखनऊ । मंगलवार को योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में छह प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई है।

-प्रदेश में लघु माइक्रो ग्रेवी की स्थापना हेतु नियमवाली 1961 में छठवां संशोधन किया गया है । ताजी बियर के तहत यह संशोधन किया गया है । जिसमे होटल में माइक्रो ग्रेवी लगाया गया है । जिसमे बियर का उत्पादन होता है । देश के 7 राज्यो में ऐसी व्यवस्था है ।

-यूपी के होटल, रेस्टोरेन्ट, पब में पहले लाइसेंस फीस 25 हजार थी जिसे बढ़ाकर ढाई लाख की गई है । लाइसेंस नवीनी करण के लिये 2 लाख रुपये लगेंगे। प्रतिदिन 600 लीटर 2.1 लाख लीटर प्रतिवर्ष से अधिक उत्पादन नहीं होगा

-वृद्धा अवस्था पेंशन 400 से बढ़कर 500 रुपये किया जाना है राज्य अंश में 100 रुपये की और वृद्धि की गई है । 79 से ऊपर के बुजुर्ग को पहले से ही 500 रुपये पेंशन दी जा रही है । 41 लाख लाभार्थी अभी पेंशन पा रहे हैं । जनवरी से यह बढ़ा हुआ पैसा लागू होगा ।

-रायबरेली में एम्स का निर्माण चल रहा है । 2020 में निर्माण को पूरा करना है । वहां जर्जर घर पड़े हैं उसे घ्वस्त करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा है । 76 आवास को ध्वस्त किया जाएगा ।

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-पीजीआई के रेजिडेंट डॉक्टरों की आयु भर्ती के लिए अब 2 साल बढ़ाकर कर 35 से 37 साल कर दिया गया है ।

-बेसिक शिक्षा में कक्षा के लिए सहायक शिक्षा के लिए बीटीसी के साथ अब शिक्षकों को बीएड करने संबंधी निर्णय को आज नियमावली के परिशिष्ट में शामिल किया गया । http://www.satyodaya.com

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पत्रकार प्रशांत कनौजिया के गिरफ्तारी के मामले में कोर्ट ने यूपी सरकार को लगाई फटकार, तुरंत रिहा करने का दिया आदेश…

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प्रशांत कनौजिया

फाइल फोटो

नई दिल्ली। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ पर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने के मामले में जर्नलिस्ट प्रशांत कनौजिया को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन यह मामला इतना बढ़ गया कि यह कोर्ट तक पहुंच गया। हालांकि सीएम योगी पर आपत्तिजनक पोस्ट लिखने वाले प्रशांत के गिरफ्तारी के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिपण्णी की है। इतना ही नहीं अदालत ने प्रशांत कनौजिया के हिट में फैसला लेते हुए तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है।

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट हुई सुनवाई में अदालत ने कहा है कि एक नागरिक के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता है, उसे बचाए रखना बहुत जरूरी है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा है कि आपत्तिजनक पोस्ट पर विचार अलग-अलग हो सकते हैं लेकिन गिरफ्तारी क्यों ? वहीं सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत कनौजिया की पत्नी को इस मामले को हाईकोर्ट ले जाने को कहा है।

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आपको बता दें सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान आईपीसी की धारा 505 के तहत इस मामले में एफआईआर दर्ज करने पर भी सवाल खड़े किए। अदालत ने यूपी सरकार से भी सवाल पूछे कि किन धाराओं के तहत ये गिरफ्तारी की गई है। ये तो हम भी जानते आपत्तिजनक पोस्ट शेयर करना सही नहीं, लेकिन फिर भी गिरफ्तारी क्यों।

जर्नलिस्ट और एक्टिविस्ट प्रशांत कनौजिया को लगातार आपत्तिजनक ट्वीट और रीट्वीट करने के आरोप में शनिवार सुबह दिल्ली में उत्तर प्रदेश पुलिस ने मंडावली स्थित उनके घर से हिरासत में लिया था। जिसके बाद प्रशांत की पत्नी जिगीषा ने सुप्रीम कोर्ट में हैबियस कॉरपस यानी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। वहीं याचिका में कहा गया है कि प्रशांत की गिरफ्तारी गैरकानूनी है। याचिका के मुताबिक यूपी पुलिस ने इस संबंध में ना तो किसी एफआईआर के बारे में जानकारी दी है ना ही गिरफ्तारी के लिए कोई गाइडलाइन का पालन किया गया है।

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वहीं इससे पहले कनौजिया को सोमवार को मायावती का भी साथ मिला। मायावती ने कहा कि एडीटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया इस मामले में सरकार की आलोचना कर रहा है, लेकिन इससे भाजपा सरकार पर जरा सा फर्क नहीं पड़ेगा।

मायावती ने सोमवार को ट्वीट किया, “यूपी सीएम के खिलाफ अवमानना के संबंध में लखनऊ पुलिस की ओर से खुद ही संज्ञान लेकर पत्रकार प्रशांत कनौजिया सहित तीन अन्य लोगों की दिल्ली में गिरफ्तारी पर एडीटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और अन्य मीडिया ने काफी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है लेकिन क्या इससे भाजपा और उसकी सरकार पर कोई फर्क पड़ेगा।”

सोशल मीडिया पर सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर गिरफ्तारियों का दौर लगातार जारी है। हालांकि इसकी शुरुआत जर्नलिस्ट प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी से हुई। http://www.satyodaya.com

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प्रदेश सरकार महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा के लिए कटिबद्ध- योगी आदित्यनाथ

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एण्टी रोमियो स्क्वाॅड को पूरे जून माह में चलाने के निर्देश

लखनऊ। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिलाओं और बालिकाओं के उत्पीडन से जुड़ी घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिये हैं। अपराध नियंत्रण के लिए प्रभावी अभियोजन को आवश्यक बताते हुए उन्होंने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिये कि प्रत्येक रेंज से नाबालिग बालिकाओं के साथ हुए जघन्य अपराधों के 10-10 मामले चिन्हित कर, फास्ट ट्रैक अदालतों में मुकदमा चलाकर अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलायी जाए। प्रत्येक थाना क्षेत्र में पूर्व में महिलाओं और बालिकाओं के विरुद्ध अपराधों में संलिप्त रहे व्यक्तियों को चिन्हित कर उन्हें पाबन्द किया जाए।

मुख्यमंत्री सोमवार को लोकभवन में महिला सुरक्षा के सम्बन्ध में आहूत एक उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारियों को निर्देश दे रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं एवं बालिकाओं की गरिमा बनाए रखने तथा उन्हें हर प्रकार की सुरक्षा प्रदान करने के लिए कटिबद्ध है। पुलिसिंग, डायल-100 तथा एण्टी रोमियो स्क्वाॅड को और अधिक सक्रिय किये जाने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं और बालिकाओं से छेडखानी करने तथा उन्हें परेशान करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। एण्टी रोमियो स्क्वाॅड की कार्रवाइयों को पूरे जून माह अभियान के रूप में चलाने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि भीड़-भाड़ वाले तथा संवेदनशील स्थानों पर एण्टी रोमियो स्क्वाॅड को निरन्तर सक्रिय रहना चाहिए।

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योगी ने कहा कि पुलिस की मौजूदगी मात्र अपराधों को नियंत्रित करने में सहायक होती है। पेट्रोलिंग व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि पुलिस द्वारा निरन्तर फुट पेट्रोलिंग की जानी चाहिए। डायल-100 की पेट्रोलिंग को और प्रभावी बनाने के निर्देश उन्होंने कहा कि डायल-100 के वाहनों को व्यापारिक क्षेत्रों तथा लूटपाट की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर खड़ा होना चाहिए। सीएम ने कहा कि अपराधों पर नियंत्रण के लिए वाहनों की रैण्डम चेकिंग आवश्यक है। इसके लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि रैण्डम चेकिंग की कार्रवाई निरन्तर चलनी चाहिए। प्रभावी पुलिसिंग और अपराध नियंत्रण के लिए वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा क्षेत्र भ्रमण को आवश्यक बताते हुए उन्होंने कहा कि एडीजी, आईजी एवं डीआईजी जैसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी फील्ड में भ्रमण करें। पुलिस कप्तान प्रतिदिन अलग-अलग थाना क्षेत्रों का भ्रमण करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी जुलाई माह में सभी स्कूलों में महिला कल्याण विभाग और पुलिस विभाग द्वारा मिलकर महिला सुरक्षा सम्बन्धी प्राविधानों के सम्बन्ध में जागरूकता अभियान संचालित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को इसके लिए अभी से कैलेण्डर तैयार करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि महिला सम्बन्धी अपराधों में घरेलू हिंसा की भी भूमिका है। इसके दृष्टिगत, ‘181्य महिला हेल्पलाइन को सुदृढ़ किया जाए और इस हेल्पलाइन के सम्बन्ध में जागरूकता के लिए इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। इस अवसर पर मुख्य सचिव डाॅ. अनूप चन्द्र पाण्डेय, पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह, प्रमुख सचिव गृह अरविन्द कुमार, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एसपी गोयल, प्रमुख सचिव महिला कल्याण मोनिका गर्ग उपस्थित थी।http://www.satyodaya.com

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बिजली कर्मचारियों ने अगले सप्ताह प्रदेश व्यापी आन्दोलन करने की दी चेतावनी

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लखनऊ। बिजली कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उप्र की सोमवार को यहां हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि बिजली कर्मचारियों व अभियन्ताओं की न्यायोचित समस्याओं का द्विपक्षीय वार्ता द्वारा समाधान न किया गया तो सभी ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मचारी व अभियन्ता अगले सप्ताह प्रदेशव्यापी आन्दोलन की घोषणा करने को बाध्य होंगे।
प्रदेश के प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष को पत्र प्रेषित कर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने मांगों का समाधान न होने से कर्मचारियों व अभियन्ताओं में सरकार व प्रबन्धन के प्रति व्याप्त आक्रोश से अवगत कराते हुए कहा कि यदि द्विपक्षीय वार्ता द्वारा समस्याओं का समाधान न किया गया तो न्याय पाने के लिए बिजली कर्मियों के पास आन्दोलन के अलावा और कोई विकल्प नहीं होगा जिसकी सारी जिम्मेदारी सरकार व प्रबन्धन की होगी। संघर्ष समिति ने बताया कि बिजली कर्मचारियों की मुख्य मांगें विद्युत परिषद के विघटन एवं निजीकरण के प्रयोग की पूर्णतया विफलता एवं निरन्तर बढ़ रहे घाटे को देखते हुए प्रदेश में बेहतर उपभोक्ता सेवा हेतु सभी ऊर्जा निगमों का एकीकरण कर उप्र राविप निगम लि. का गठन किया जाये, आगरा फ्रेन्चाइजी, ग्रेटर नोएडा का निजीकरण, पारेषण में किया गया निजीकरण और विद्युत वितरण में राजस्व वसूली, ई सुविधा,मीटर आदि के नाम पर की जा रही निजीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह से निरस्त किया जाये, निजी घरानों से मंहगी बिजली खरीद के विगत में किये गये सभी बिजली क्रय करार रद्द किये जाये और प्राथमिकता पर सरकारी क्षेत्र के बिजली उत्पादन गृहों से बिजली क्रय की जाये और उन्हें बन्द न किया जाये, बिजली कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों का द्विपक्षीय वार्ता द्वारा तत्काल निराकरण किया जाये, प्रबन्धन द्वारा कार्मिकों पर दबाव पूर्ण एवं उत्पीड़नात्मक पद्वति में तत्काल सुधार लाया जाये,वर्ष 2000 के बाद भर्ती हुए सभी कार्मिकों के लिए पुरानी पेन्शन प्रणाली लागू की जाये एवं पुरानी पेन्शन प्रणाली लागू होने तक एन पी एस की तरह सी पी एफ में भी नियोजक का अंशदान 14 प्रतिशत तत्काल किया जाये,सभी श्रेणी के समस्त रिक्त पदों पर नियमित भर्ती की जाये और नियमित प्रकृति के कार्यों में संविदाध्ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर संविदा कर्मियों को तेलंगाना सरकार के आदेश की तरह नियमित किया जाये एवं ई-सुविधा के माध्यम से मेसर्स मेधज कम्पनी लि से अनावश्यक रूप से किया गया करार रद्द किया जाये, कर्मचारियोंध्अभियन्ताओं के उत्पीड़न हेतु जारी की गयी स्थानान्तरण नीति तत्काल वापस ली जाये।

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संघर्ष समिति की आज यहां हुई बैठक में मुख्य रूप से शैलेन्द्र दुबे, राजीव सिंह, गिरीश पाण्डेय, सदरुद्दीन राना,सुहैल आबिद, विपिन प्रकाश वर्मा, राजेन्द्र घिल्डियाल, परशुराम, पीएन राय, पूसे लाल, एके श्रीवास्तव, महेन्द्र राय, शशिकान्त श्रीवास्तव, करतार प्रसाद, के एस रावत, पी एन तिवारी, आर एस वर्मा, डीके मिश्रा, पवन श्रीवास्तव, शम्भू रत्न दीक्षित, कुलेन्द्र प्रताप सिंह, मो इलियास उपस्थित थे। http://www.satyodaya.com

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June 11, 2019, 1:31 pm
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