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इंतजार हुआ खत्म, 27 अप्रैल को जारी होगा यूपी बोर्ड के 10 वीं और 12 वीं का रिजल्ट…

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एग्जाम

फाइल फोटो

लखनऊ। जितनी मेहनत से हम एग्जाम देते हैं उससे कहीं ज्यादा उसके परिणाम आने का इंतजार करते हैं। क्योंकि एग्जाम खत्म होने के बाद बस दिमाग में यही चलता है क्या होगा, पता नहीं कैसा नंबर आएगा, पास भी होंगी या नहीं, इस तरह कई सारे सवालों को मन में लेकर हम रिजल्ट का इंतजार करते हैं। हालांकि अब बहुत जल्द ही आपका ये इंतजार खत्म होने वाला है। क्योंकि उत्तर प्रदेश की माध्यमकि शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाई स्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम 27 अप्रैल को घोषित किया जाएगा। इस बात की जानकारी खुद बोर्ड की सचिव नीना श्रीवास्तव ने गुरुवार को प्रेसकांफ्रेंस कर दिया।

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यूपी बोर्ड के सभी क्षेत्रीय कार्यालयों मेरठ, वाराणसी, बरेली, गोरखपुर और इलाहाबाद के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के परिणाम को तैयार कर लिया गया है। परिणाम को क्रास चेक किया जा रहा है। 2019 की 10वीं और 12वीं की परीक्षा के लिए 5806922 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे।

10 वीं की परीक्षा में इस बार करीब 32 लाख स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन कराया था, वहीं इंटरमीडिएट के लिए लगभग 26 लाख स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन कराया था। यानी करीब 58 लाख स्टूडेंट्स को इस आने वाली डेट का इंतजार है। जानकारी के मुताबिक पिछले साल 29 अप्रैल को नतीजे घोषित किए गए थे। यूपी बोर्ड की इस बार की परीक्षाएं सात फरवरी से शुरू हुई थी।

बता दें इस बार हाईस्कूल की परीक्षा 14 दिन और इंटर की परीक्षा 16 दिन में खत्म हुई थी। ये सारे एग्जाम पहले करीब दो महीने तक चलती थीं।http://www.satyodaya.com

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यूपी: सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील के नाम पर बच्चों को खिलाया जा रहा नमक-रोटी, देखें वीडियो…

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मिड डे मील

फाइल फोटो

लखनऊ। यूपी सरकार जहां शिक्षा और मिड डे मील को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है। वहीं कुछ स्कूलों में उनकी लापरवाही देखने को मिल रही हैं। मिड-डे मील की लापरवाही के बारे में तब पता चला जब मिर्जापुर जिले के एक सरकारी स्कूल में कक्षा 1 से लेकर 8 तक की पढ़ाई करने वाले लगभग 100 छात्रों को केवल नमक रोटी दी जा रही है। मिड-डे मील के नाम पर रोटी और नमक खाते हुए बच्चों का वीडियों सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी के साथ वायरल हो रहा है।   

बता दें सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब परिवार के बच्चों को उचित पोषण और आहर देने के लिए केंद्र सरकार ने मिड-डे मील योजना शुरू की थी। उत्तर प्रदेश मिड-डे मील अथॉरिटी पूरे राज्य में इसकी देखरेख का काम करती है, उसकी वेबसाइट पर इसका मिड-डे मील का मेन्यू दिया गया है। मेन्यू में दाल चावल, रोटी और सब्जी शामिल हैं। मील चार्ट के मुताबिक खास दिनों पर फल और दूध भी दिया जाता है।

हालांकि सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि बच्चे स्कूल के बरामदे में फर्श पर बैठे हैं और वे नमक के साथ रोटियां खा रहे हैं। एक छात्र के परिजन ने स्थानीय पत्रकार को बताया, ‘यहां बहुत बुरे हालात हैं। कई बार वह बच्चों को खाने में नमक और रोटियां देते हैं, कई बार नमक और चावल। यहां कभी-कभार दूध आता है, अधिकतर समय वह बांटा ही नहीं जाता। केले तो कभी-कभार दिए जाते हैं। पिछले एक साल से ऐसा ही है।’

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मिर्जापुर में शीर्ष सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘मैंने जांच करवाई और यह घटना सही पाई गई। शुरुआती तौर पर यह स्कूल के शिक्षक प्रभारी और ग्राम पंचायत के सुपरवाइजर की गलती लग रही है। हालांकि की दोनों को सस्पेंड कर दिया गया है।

वही यूपी सरकार का कहना है कि वह दिसंबर 2018 के आंकड़ों के मुताबिक राज्य भर में 1।5 लाख से अधिक प्राइमरी और मिडल स्कूल में मिड-डे मील मुहैया करवा रही है। इस स्कीम के तहत 1 करोड़ से अधिक बच्चों को योजना का लाभ दिया जाना है। केंद्र सरकार के अनुसार, मिड-डे मील योजना को प्रति बच्चे को प्रति दिन न्यूनतम 450 कैलोरी प्रदान करने के हिसाब से डिजाइन किया गया था, जिसमें रोजाना दिन में कम से कम 12 ग्राम प्रोटीन भी शामिल होना चाहिए। http://www.satyodaya.com

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6 भत्तों को समाप्त किया जाना निराशाजनक फैसला – सुनील यादव

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महासंघ ने सरकार पर नकारात्मक तोहफा देने का लगाया आरोप

लखनऊ। यूपी की योगी सरकार ने राज्य कर्मचारियों को मिलने वाले छह भत्तों को खत्म कर दिया है। इन भत्तों के खत्म होने से सूबे के करीब 15 लाख कर्मचारियों में से 8 लाख कर्मियों को नुकसान होगा। वहीं इस फैसले के बाद राज्य सरकार द्वारा 2 बच्चों की स्वैच्छिक परिवार कल्याण भत्ते सहित कुल 6 भत्तों को समाप्त किये जाने पर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश ने कड़ा विरोध किया है।

बता दें कि महामंत्री अतुल मिश्रा ने कहा कि मुख्य सचिव के साथ परिषद की सम्पन्न हुई बैठक में समयबद्ध सहमति बनी थी कि वेतन विसंगति व भत्तों का मंत्रिपरिषद से तीन माह में अनुमोदन लेकर शासनादेश जारी करेंगे। जिसमें डिप्लोमा फार्मासिस्ट प्रथम पर था। उन सब को दरकिनार कर वित्त विभाग द्वारा नकारात्मक भत्तों की रिपोर्ट मंत्रिपरिषद से अनुमोदन कराया गया। जिसके फलस्वरूप 6 भत्ते समाप्त कर दिए गए। जिसका परिषद प्रबल विरोध करती है।
परिषद के प्रमुख उपाध्यक्ष और राजकीय फार्मेसिस्ट महासंघ के अध्यक्ष सुनील यादव ने कहा कि पुरानी पेंशन, नकदीकरण आदि बन्द करने के बाद अब वेतन विसंगति दूर करने। भत्तों की बढ़ोत्तरी की राह देख रहे राज्य कर्मियों को 6 भत्ते समाप्त कर राज्य सरकार ने ये कैसा नकारात्मक तोहफा दिया जिससे सभी कर्मचारी अत्यंत दुखी हैं।

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सरकार ने द्विभाषी प्रोत्साहन भत्ता, कंप्यूटर संचालन प्रोत्साहन भत्ता, स्नातकोत्तर भत्ता, कैश हैंडलिंग भत्ता, परियोजना भत्ता एवं स्वैच्छिक परिवार कल्याण योजना अंतर्गत विशेष प्रोत्साहन भत्ता को समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया है, जबकि कर्मचारियों के वेतन विसंगति और जिन भत्तों में बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव वेतन समिति ने सरकार को दिया है वह प्रस्ताव डेढ़ वर्षो से अनिर्णीत है। साथ ही बार-बार आश्वासन के बाद भी सकारात्मक निर्णय की जगह ये नकारात्मक निर्णय कर्मचारियों में रोष और निराशा भरने वाला है।http://www.satyodaya.com

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योगी सरकार ने खत्म किए 6 भत्ते, इतने लाख कर्मचारियों का होगा नुकसान

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लखनऊ। यूपी की योगी सरकार ने राज्य कर्मचारियों को मिलने वाले छह भत्तों को ख़त्म कर दिया है। इन भत्तों के खत्म होने से सूबे के करीब 15 लाख कर्मचारियों में से 8 लाख कर्मियों को नुकसान होगा। अपर मुख्य सचिव वित्त संजीव मित्तल ने गुरुवार को इसका शासनादेश जारी कर दिया। उन्होंने बताया कि जिन भत्तों को खत्म किया गया है अब उनकी प्रासंगिकता नहीं थी।

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सरकार ने जिन भत्तों को खत्म किया है उनमे स्नातकोत्तर भत्ता भी शामिल ही जिसमे अधिकतम 4500 रुपए मिलते थे। इसके अलावा द्विभाषी प्रोत्साहन भत्ता भी ख़त्म हो गया है। इसके तहत 100 रुपए से 300 रुपए प्रति माह मिलते थे। अब द्विभाषी टाइपिंग ही अनिवार्य अहर्ता है। कैश हैंडलिंग भत्ता जो कैशियर, एकाउंटेंट, स्टोरकीपर को नगदी भंडारों व मूल्यवान वस्तुओं की रक्षा के एवज में मिलता था उसे भी ख़त्म कर दिया गया है। सिंचाई विभाग में मिलने वाले परियोजना भत्ता भी अब नहीं मिलेगा। इसके तहत कार्यस्थल के पास आवासीय सुविधा न होने की स्थिति में दिया जाता था। स्वैच्छिक परिवार कल्याण प्रोत्साहन भत्ता के तहत सीमित परिवार के प्रति जागरूकता के लिए दिया जाता था। इसके तहत न्यनतम 210 रुपए और अधिकतम 1000 रुपए दिए जाते थे। अब कर्मचारियों को इसका भी लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि सरकार ने दिव्यांग कर्मचारियों का वाहन भत्ता 33.33 फ़ीसदी बढ़ा दिया है। इससे कर्मचारियों को 150 से 250 रुपए प्रति माह तक फायदा होगा।http://www.satyodaya.com

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