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UP: योगी सरकार ने 17 IAS समेत 2 PCS अधिकारियों का किया तबादला, देखेंं पूरी लिस्ट

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए पिछले एक हफ्ते से प्रशासनिक स्तर पर कई बदलाव देखने को मिले हैं। योगी सरकार ने मंगलवार देर रात एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। योगी सरकार ने 17 आईएएस और 2 सीनियर पीसीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया है। श्रीमती अंकुर लाठर को सीडीओ अमेठी बनाया गया है। महोबा डीएम अवधेश तिवारी को हटाते हुए उनकी जगह सतेंद्र कुमार को कलेक्‍टर नियुक्‍त किया गया है। अवधेश तिवारी को विशेष सचिव एपीसी बनाया गया है। महेंद्र कुमार को विशेष सचिव एपीसी ब्रांच, गजल भारद्वाज को सीडीओ रामपुर, अश्वनी पांडे को सीडीओ बलिया, अमित आसरी को सीडीओ चित्रकूट, अतुल वत्स को सीडीओ सुल्तानपुर

इसके अलावा परिवहन निदेशक आईएएस राजशेखर को कानपुर का कमिश्नर बनाया गया है। धीरज साहू को परिवहन निदेशक का अतिरिक्त चार्ज मिला है। लखनऊ कमिश्नर मुकेश मेश्राम को प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति की नई जिम्मेदारी दी गई है। मुकेश मेश्राम के स्थान पर रंजन कुमार को कमिश्नर लखनऊ बनाया गया है। मोहम्‍मद मुस्तफ़ा को श्रम आयुक्त कानपुर बनाया गया है। श्रम आयुक्त व मंडलायुक्त कानपुर सुधीर बोबडे को हटाकर सदस्य न्यायिक राजस्व परिषद भेज दिया गया है।

मनोज कुमार को निदेशक कृषि विपड़न एवं कृषि विदेश व्यापार, श्याम सुंदर शर्मा को सचिव पिछड़ा वर्ग आयोग, घनश्याम मीणा को सीडीओ कुशीनगर, अरविंद कुमार चौहान को विशेष सचिव समाज कल्याण की जिम्मेदारी दी गई है।

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इसके अलावा अलका वर्मा को अपर आयुक्त लखनऊ मंडल, हरीओम शर्मा को अपर आयुक्त गोरखपुर मंडल, नागेंद्र कुमार सिंह को सिटी मजिस्ट्रेट बलिया, आनंद कुमार को विशेष सचिव चिकित्सा शिक्षा, अनूप श्रीवास्तव को विशेष सचिव दिव्यांग जन सशक्तिकरण विभाग, प्रभुनाथ को विशेष सचिव लोक निर्माण विभाग बनाया गया है।

पीसीएस अफसरों में मंजु लता को विशेष सचिव एपीसी ब्रांच, पूनम निगम को अपर आयुक्त झांसी मंडल, विश्राम को अपर जिलाधिकारी न्यायिक कौशांबी, नीता यादव को चीफ रेवेन्यू अफसर, अनिल कुमार सिंह को रजिस्ट्रार, अटल बिहारी बाजपेई चिकित्सा विश्विद्यालय, नरेंद्र सिंह द्वितीय को संयुक्त सचिव होम गार्ड विभाग बनाया गया है।

बदरी नाथ सिंह को विशेष सचिव राज्यपाल, शिवेंद्र कुमार सिंह को अपर निबंधक बैंकिंग के सहकारिता विभाग और रमेश प्रसाद मिश्रा को अपर आयुक्त झांसी की जिम्मेदारी दी गई है इसके साथ ही 12 सितंबर को 8 जिलों से हटाकर प्रतीक्षारत किए गए जिलाधिकारियों को तैनाती दे दी गई है। राजेश पांडेय को विकास प्राधिकरण मेरठ उपाध्यक्ष पद से मऊ का डीएम बनाया गया था। लेकिन वह कार्यभार संभालते उसके पहले उन्हें प्रतीक्षारत कर दिया गया था। उन्हें भी कम महत्व वाले एपीसी शाखा में विशेष सचिव बनाया गया है।

इन दो PCS अधिकारियों के हुए तबादले

एसडीएम महाराजगंज राधेश्याम बहादुर सिंह को एसडीएम बदायूं बनाया गया है। हरदोई के एसडीएम मनोज सागर को रामपुर भेजा गया है।http://www.satyodaya.com

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शोध में हुआ चौंकाने वाला खुलासा, जेएनयू के 87 फीसदी स्कॉलर्स में मानसिक तनाव

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लखनऊ। कोरोना के चलते शिक्षण संस्थान बंद होने से एमफिल और पीएचडी स्कॉलर्स की दिक्कतों पर शोध में हुआ है। जिसमें चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के 87 फीसदी एमफिल और पीएचडी स्कॉलर्स मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। जबकि 64.7 फीसदी स्कॉलर्स की स्कॉलरशिप तक रूक गई हैं।

जेएनयू के इन तीन रिसर्च स्कॉलर्स अलामू आर, सोमाश्री दास और यांगचेन ने कोरोना काल के दौरान छात्रों की स्थिति पर एक ऑनलाइन सर्वे किया है। इसके लिए इन्होंने जेएनयू के ही करीब 530 शोद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। जिसमें से करीब 41.5 फीसदी छात्र और 58.1 फीसदी छात्राएं शामिल हैं। वहीं इस शोध में छात्रों को आ रही परेशानी और उनकी मनोदशा पर सवाल पूछे थे। जिसमें से ज्यादातर ने अपनी मानसिक परिशानियों का हवाला दिया है।

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सर्वे में सामने आया है कि करीब 87 फीसदी छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। शोध कार्य पूरा न होने से स्कॉलरशिप भी रूक गई है। ऐसे में वे अपने खर्चे तक  नहीं निकाल पा रहे हैं। एमफिल और पीएचडी की किताब बहुत महंगी मिलती है। ऐसे में वे उन्हें खरीद तक नहीं सकते हैं। क्योंकि घर में भी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।

शोध में दावा किया गया है कि मार्च में ही अधिकतर स्कॉलर्स अपने गांवों को लौट गए थे। महज 13 से 14 फीसदी छात्र ही कैंपस में है। करीब 75.9 फीसदी स्कॉलर्स का कहना है कि वे डिजिटली अपनी थीसिस और शोधकार्य पूरा नहीं कर सकते हैं। करीब दस फीसदी छात्रों ने कहा कि उनके घर में 4 से 6 घंटे बिजली कट होती है। जबकि 38 फीसदी ने कहा कि वे लगातार बिजली कट से परेशान रहे हैं।http://www.satyodaya.com

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28 साल का इंतजार खत्म, बाबरी विध्वंस मामले में फैसले की घड़ी निकट

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लखनऊ। बाबरी विध्वंस मामले में 28 साल बाद आखिरकार फैसले की घड़ी निकट आ गई है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत 30 सितंबर को इस केस में अपना फैसला सुनाएगी। इस केस में स्पेशल सीबीआई जज एसके यादव हैं। इसे देखते हुए मध्य प्रदेश के दो बड़े नेताओं पर सबकी निगाहें टिक गई हैं। इनमें से एक हैं पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और दूसरे हैं बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया है। ये दोनों भी बाबरी केस में आरोपी बनाए गए थे। लिहाजा 30 सितंबर को आने वाले फैसले में इनके भविष्य का भी फैसला होगा। फैसले को देखते हुए पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया ग्वालियर से लखनऊ के लिए रवाना हो गए हैं, जबकि कोरोना पॉजिटिव होने की वजह से ये माना जा रहा है कि उमा भारती वीसी के ज़रिए कोर्ट की कार्यवाही में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगी।

बता दें 12 जून को बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और मध्य प्रदेश बीजेपी के कद्दावर नेता जयभान सिंह पवैया के अंतिम बयान दर्ज किए गए थे। ग्वालियर से लखनऊ पहुंचे जयभान सिंह पवैया ने सीबीआई कोर्ट में अपने बयान दर्ज कराए थे। 5 घंटे तक चली कार्यवाही के दौरान उनसे कुल 1050 सवाल किए गए थे। इनमें कुछ सवाल प्रश्नावली के तहत पूछे गए। जबकि कुछ सवाल जज की ओर से पूछे गए थे। जयभान सिंह ने इन सभी 1050 सवालों के जवाब दिए थे। सीबीआई की विशेष कोर्ट में बयान दर्ज कराने के बाद जयभान सिंह पवैया ने अपने बयान में कहा था कि अगर राम काज के लिए उन्हें कोई कुर्बानी देनी पड़ी तो वह इसके लिए तैयार हैं।

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क्या है मामला
6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित बाबरी मस्जिद का ढांचा गिरा दिया गया था। इस मामले में बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं को आरोपी बनाया गया था। जिसमें लाल कृष्ण आडवाणी, उमा भारती, मुरली मनोहर जोशी, कल्‍याण सिंह, जयभान सिंह पवैया समेत कई और बड़े नेता शामिल थे। इन सभी ने अदालती कार्रवाई का सामना किया। कई साल से चल रहे इस केस में कुछ आरोपियों की मृत्यु भी हो चुकी है।http://satyodaya.com

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कोरोना काल में CM योगी की कैबिनेट मीटिंग आज, इन प्रस्तावों को मिल सकती है मंजूरी

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लखनऊ। कोरोना महामारी के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार की शाम को 5 बजे कैबिनेट की बैठक बुलाई है। काफी समय से कैबिनेट बाईसुर्कलेशन प्रस्तावों को मंजूरी दी जा रही थी। लेकिन कोरोना महामारी के चलते इसे स्थगित कर दिया गया था। कैबिनेट की बैठक में राजस्व विभाग के उत्तर प्रदेश आबादी सर्वेक्षण और अभिलेख संक्रिया विनियमावली 2020 को मंजूरी के लिए रखा जा सकता है। मुख्यमंत्री आवास पर शाम को होने वाली इस बैठक में उन्हीं मंत्रियों को बुलाया गया है।

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जिन विभागों के प्रस्ताव पास होने हैं। बाकी सभी मंत्री अपने आवास से ऑनलाइन बैठक से जुड़ेंगे। कैबिनेट बैठक में राजस्व, औद्योगिक विकास विभाग, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग समेत कई विभागों के महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी के लिए रखा जा सकता है। बैठक में राजस्व विभाग के उत्तर प्रदेश आबादी सर्वेक्षण और अभिलेख संक्रिया विनियमावली 2020 को मंजूरी के लिए रखा जा सकता है। बरेली में अस्पताल बनाने के लिए औद्योगिक विकास विभाग की जमीन देने संबंधी प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल सकती है।http://www.satyodaya.com

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September 29, 2020, 1:27 pm
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