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आजमगढ़ सीट पर वोटिंग जारी, सपा ने बीजेपी पर लगाया आरोप, कहा….

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फाइल फोटो

लखनऊ । लोकसभा चुनाव 2019 में छठे चरण का चुनाव हो रहा है। जिसको लेकर नेताओं की जुबानी जंग लगातार जारी है। जहां समाजवादी पार्टी ने आजमगढ़ लोकसभा सीट की सगड़ी विधानसभा में बूथ संख्या 51 पर पीठासीन अधिकारी के मनमानी का आरोप लगाया है। उनेहोंने कहा है कि मतदाताओं से जबरदस्ती बीजेपी के पक्ष में वोट करा रहे हैं। साथ ही चुनाव आयोग से अपील की है कि इसका संज्ञान लेकर आरोपी पाठासीन अधिकारी के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित करे।

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आपको बता दें कि आजमगढ़ लोकसभा से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ बीजेपी ने भोजपुरी स्टार दिनेशलाल यादव निरहुआ को मैदान में उतारा है। इस सीट पर कुल 15 उम्मीदवार मैदान में हैं। लोकसभा चुनावों के इस छठवें चरण में उत्तर प्रदेश की 14 सीटें शामिल हैं। इस सीट पर सुबह 9 बजे तक 9.07 फीसदी और दोपहर 1 बजे  34.89 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई। यहां पर 2014 में कुल 56.15 फीसदी वोटिंग हुई थी। जबकि 2009 के चुनाव में इस सीट पर 44.68 फीसद वोट पड़े थे।

बताते चलें कि  2014 में इस सीट से सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव मैदान में उतरे थे। उन्हें रमाकांत यादव ने कड़ी टक्कर दी थी। मुलायम को 3.40 लाख और रमाकांत को 2.77 लाख वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर बीएसपी के गुड्डू जमाली 2.66 लाख वोट पाकर रहे थे। http://www.satyodaya.com

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परिवहन मंत्री अशोक कटारिया ने कैसरबाग बस अड्डे का किया दौरा

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यात्री सेवाओं व कोरोना बचाव को लेकर दिए निर्देश

लखनऊ। लाॅकडाउन-5.0 शुरू होने के साथ ही 1 जून से प्रदेश में रोडवेज बस सेवा को भी बहाल कर दिया गया। सोमवार सुबह परिवहन मंत्री अशोक कटारियों ने कैसरबाग बस अड्डे का दौरा कर वहां की गई तैयारियों का जायजा लिया। मंत्री के साथ परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक डाॅ. राज शेखर भी मौजूद रहे। मंत्री ने बसों में बैठे यात्रियों से सैनिटाइजेशन आदि को लेकर जानकारी हासिल की। साथ सभी को मास्क आदि लगाकर ही यात्रा करने को कहा।

मीडियाकर्मियों से बात करते हुए परिवहन मंत्री ने कहा, करीब दो महीने बाद उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक यातायात फिर से शुरू हो रहा है। प्रदेश में रोडवेज सहित निजी बसों को भी सेवा शुरू करने की अनुमति दी गयी है। छोटी दूरी के लिए टैक्सी सेवा को भी बहाल कर दिया गया है। कोरोना महामारी के लिए बस स्टेशनों पर व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सभी यात्रियों को कहा गया है कि वह मास्क लगाकर और सैनिटाइजर लेकर ही यात्रा करें। थोड़ी-थोड़ी देर पर हाथ को सैनिटाइज करते रहें।

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परिवहन विभाग को भी यात्रियों को सैनिटाइज कराने व मास्क उपलब्ध कराने को कहा गया है। मंत्री ने बताया कि ड्यूटी पर आने वाले बस ड्राइवरों, कंडक्टरों व यात्रियों की थर्मल स्कैनिंग की जा रही है। रोडवेज कर्मचारियों को महामारी के संक्रमण से बचाने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं।http://www.satyodaya.com

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लखनऊ: अर्जुनगंज ओवरब्रिज पर डिवाइडर से टकराई स्कूटी, सचिवालय कर्मी की मौत

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मृतक के सिर पर आई थी गंभीर चोट

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में रविवार देर रात को सड़क हादसे से विधानसभा सुरक्षा कर्मी की मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना लखनऊ-सुल्तानपुर रोड पर स्थित अर्जुनगंज ओवरब्रिज पर हुआ। यहां विधान सभा सुरक्षा कर्मी अपने साथी के साथ स्कूटी पर सवार होकर गोसाईगंज से घर जा रहा था। तभी बेकाबू होकर स्कूटी डिवाइडर से टकरा गई।

हादसे में दोनों युवकों को गंभीर चोट आई है। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके वारदात पर पहुंची और दोनों को ट्रामा सेंटर ले जाया गया। जहां पर इलाज के दौरान सचिवालय कर्मी की मौत हो गई। जबकि पीछे बैठा साथी गंभीर रूप से घायल हो गया। 

जांच अधिकारी अरुण कुमार मिश्रा के मुताबिक घटना कैंट थाना क्षेत्र के अंतर्गत सुल्तानपुर रोड पर अर्जुनगंज ओवरब्रिज पर हुई। इस घटना में विधानसभा सुरक्षा दल में तैनात मैनपुरी निवासी प्रदीप यादव (28) और प्रतापगढ़ निवासी इंद्रजीत यादव (32) बीती रात गोसाईगंज से प्लॉट देखकर स्कूटी से वापस शहर लौट रहे थे। इसी दौरान अर्जुनगंज ओवरब्रिज पर स्कूटी अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। 

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हादसे में दोनों युवकों को गंभीर चोट आई है। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रदीप यादव को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां देर रात प्रदीप की मौत हो गई, जबकि दूसरे चोटिल इंद्रजीत यादव की गम्भीर हालात में ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है। वहीं सब इंस्पेक्टर अरुण मिश्रा के मुताबिक हादसे के समय मृतक ने सिर के ऊपर हेलमेट सिर्फ रखा हुआ था, लॉक नहीं किया गया था। जिसके चलते हादसे के वक्त हेलमेट सिर से निकलकर दूर गिर गया। और पीड़ित का सर डिवाइडर से टकरा गया। http://www.satyodaya.com

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बिजली कर्मचारियों ने हाथ में काली पट्टी बांधकर निजीकरण का किया विरोध

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कहा, गरीबों व किसानों को धोखा देकर बिजली महंगी करने की तैयारी में है सरकार

लखनऊ। केन्द्र की ओर से प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 के विरोध में आज प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों व अभियंताओं ने हाथ में काली बांधकर प्रदर्शन किया। नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्पलॉईस एन्ड इंजीनियर्स (एनसीसीओईई) की अगुवाई देश भर के 15 लाख बिजली कर्मचारियों ने केन्द्र सरकार से बिल को वापस लेने की मांग की। बिजली कर्मचारियों में इस बात को लेकर काफी रोष दिखा कि कोरोना संकट के बीच सरकार बिजली निजीकरण करने में लगी हुई है। सरकार के इस कदम से बिजली कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।

बिजली कर्मचारियों व इंजीनियरों के तमाम संगठनों ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों व सांसदों को पत्र भेजकर बिल को उपभोक्ता व किसान विरोधी बताया है। कर्मचारी संगठनों ने राज्यों व संसद सदस्यों से इस बिल को वापस कराने के लिए सरकार पर दबाव बनाने की अपील की है। उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने कहा, निजीकरण के बाद सरकार उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली देने का वादा कर रही है। लेकिन वास्तव में बिजली निजीकरण किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं के साथ धोखा है। निजीकरण के बाद बिजली की दरों में बेतहाशा वृद्धि होगी। समिति ने कहा कि कोविड-19 के चलते हुए लाॅकडाउन का फायदा उठाकर सरकार का यह प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण है।

नई टैरिफ नीति में सब्सिडी व क्रास सब्सिडी खत्म हो जाएगी

संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारियों शैलेन्द्र दुबे, प्रभात सिंह, जीवी पटेल, जयप्रकाश, गिरीश पांडे, सदरुद्दीन राना, सुहेल आबिद, राजेंद्र घिल्डियाल, विनय शुक्ला, डीके मिश्रा, महेंद्र राय, शशिकांत श्रीवास्तव, एके श्रीवास्तव, सुनील प्रकाश पाल, प्रेमनाथ राय, परशुराम, कुलेन्द्र प्रताप सिंह, पूसे लाल, भगवन मिश्र, वीके सिंह कलहंस और पीएस बाजपेई ने कहा, इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 में कहा गया है कि नई टैरिफ नीति में सब्सिडी और क्रास सब्सिडी समाप्त कर दी जाएगी। यह भी कहा गया है कि किसी को भी लागत से कम मूल्य पर बिजली नहीं दी जाएगी।

किसानों व गरीबों को भी झटका देगा बिजली बिल

पदधिकारियों ने कहा कि अभी किसानों और गरीबी रेखा से नीचे वालों को और 500 यूनिट प्रति माह बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को सब्सिडी मिलती है। जिसके चलते इन उपभोक्ताओं को लागत से कम मूल्य पर बिजली मिल रही है। नई नीति और निजीकरण के बाद सब्सिडी समाप्त होने से स्वाभाविक तौर पर इन उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी हो जाएगी।

8 रुपए प्रति यूनिट से कम पर किसी को नहीं मिलेगी बिजली

समिति के पदाधिकारियों ने आंकड़े देते हुए बताया कि बिजली की लागत का राष्ट्रीय औसत 06.78 रुपए प्रति यूनिट है। लेकिन निजी कंपनी द्वारा एक्ट के अनुसार कम से कम 16 प्रतिशत मुनाफा लेने के बाद 8 रुपए प्रति यूनिट से कम दर पर बिजली किसी को नहीं मिलेगी। इस प्रकार एक किसान को लगभग 6000 रुपए प्रति माह और घरेलू उपभोक्ताओं को 6000 से 8000 रुपए प्रति माह तक बिजली बिल देना होगा।

निजी कंपनियों को फायदा पहंुचाने के लिए लगाए जा रहे प्रीपेड मीटर

समिति ने बताया कि निजी वितरण कंपनियों को कोई घाटा न हो सीलिये सब्सिडी समाप्त कर प्रीपेड मीटर लगाए जाने की योजना लाई जा रही है। अभी सरकारी कंपनी घाटा उठाकर किसानों और उपभोक्ताओं को बिजली देती है। उन्होंने कहा कि सब्सिडी समाप्त होने से किसानों और आम लोगों को भारी नुकसान होगा। जबकि क्रास सब्सीडी समाप्त होने से केवल उद्योगों और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लाभ होगा। संघर्ष समिति ने बताया कि बिजली के मामले में राज्यों को केंद्र के समान बराबर का अधिकार है। लेकिन इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 के जरिये बिजली के मामले में केंद्र एकाधिकार जमाना चाहता है। बिजली की दरें तय करने में गरीब उपभोक्ताओं को सब्सिडी देने के राज्य के अधिकार को छीना जा रहा है।

राज्यों के लिए ठीक नहीं इलेक्ट्रिसिटी कॉन्ट्रैक्ट एनफोर्समेन्ट अथॉरिटी

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार नए बिल के अनुसार इलेक्ट्रिसिटी कॉन्ट्रैक्ट एनफोर्समेन्ट अथॉरिटी का गठन कर रही है। इस अथॉरिटी के पास अधिकार होगा कि यदि निजी उत्पादन कंपनी का भुगतान सुनिश्चित नहीं किया गया है तो राज्य को केंद्रीय क्षेत्र और पावर एक्सचेंज से एक यूनिट बिजली भी न मिल सके। करार का पालन कराने के अधिकार आज भी राज्य के नियामक आयोग के पास हैं किन्तु इस नई अथॉरिटी के बनने के बाद राज्य में बिजली देने (शिड्यूलिंग) का अधिकार अब केंद्र सरकार के पास चला जाएगा। #ElectricityContractEnforcementAuthority

नए बिल में यह प्राविधान किया जा रहा है कि राज्य विद्युत् नियामक आयोग के चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति का अधिकार अब केंद्र सरकार के पास चला जायेगा। राज्य के पास नहीं रहेगा। इनके चयन के लिए अब केंद्र सरकार की चयन समिति होगी जिसमे राज्य का कोई प्रतिनिधि भी नहीं होगा।

फ्रेन्चाइजी का प्रयोग पूरे देश में विफल हो चुका है

समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि इलेक्ट्रीसिटी (अमेण्डमेंट) बिल 2020 में बिजली वितरण का निजीकरण करने के लिए डिस्ट्रीब्यूशन सब लाइसेंसी और फ्रेन्चाइजी के जरिये निजी क्षेत्र को विद्युत् वितरण सौंपने की बात है। जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा है। फ्रेन्चाइजी का प्रयोग पूरे देश में विफल हो चुका है और लगभग सभी फ्रेंचाइजी करार रद्द कर दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश में भी आगरा में टोरेंट पावर कंपनी की लूट चल रही है। कंपनी करार की कई शर्तों का उल्लंघन कर रही है। सीएजी ने भी टोरेंट कंपनी पर घपले के आरोप लगाए हैं। इसके अतिरिक्त इलेक्ट्रीसिटी (अमेण्डमेंट) बिल 2020 में सब्सीडी और क्रास सब्सीडी समाप्त करने की बात लिखी है जिससे आम उपभोक्ता का टैरिफ बढ़ेगा। यह बिल किसी भी प्रकार जनहित में नहीं है अतः इसे तत्काल वापस लिया जाए।http://www.satyodaya.com

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